Sunday, October 18, 2009

38. लकारादि शब्द

9649 ल (= के लिए) (फूब॰ 8:27.15)
9650 लँगोटी में ही पेसाब करना (रम॰ 14:112.19)
9651 लंगटबोकारी (रम॰ 5:47.7)
9652 लंगटा (काहे ला ई बेटी के जनम देलऽ हमरा अइसन लंगटा हीं ?) (अमा॰23:17:2.1)
9653 लंगटा (जेकरा आझ लंगटा समझऽ ह, कल ओकरे राजा कहबऽ) (अमा॰23:20:1.4)
9654 लंग-धड़ंग (कुछ बूढ़-पुरनिया अउरत-मरद बालू रेत पर बैठ के गलवात कर रहलन हल तऽ कुछ लंग-धड़ंग फन्देला रंग के बाल-बुतरून मिट्टी के घर बना-बना के खेल रहल हल ।) (अल॰44:145.8)
9655 लंगर (जहाँ जहाँ गेलन बाबा लंगर चलाई देलन, छोट-बड़ दुन्नो के मिटौलन अभिमान के) (अमा॰17:15:2.11)
9656 लंगेसरी (धरती के सपूत धरती से अन्न उपजावे वालन मजदूर जे मजदूरी करके, झोपड़ी में का बरसात, का गरमी आउर जाड़ा, वारहो मास लंगेसरी वाना में अप्पन दिन काटऽ हथ, अधपेटे रह के दवा-दारू आउर अन्न-वसतर के लेल मरइत रहऽ हे ।) (अल॰15.44.18)
9657 लंगोटिया (सब लोगन के मुँह से एक ही बात निकलऽ हल कि राजगीर में अलगंठवा और सुमितरी के विआह करे ला गेते गेलइ हे । काहे कि साथ में सुमितरी के माय-बाप आउर अलगंठवा के लंगोटियन इयार दिलदार राम, रजेसर आउर रमेसर भी एही गुने गेते गेलइ हे ।) (अल॰32:103.9)
9658 लंगोटियापन (पटना आवे पर सीधे लल्लू भाय के घर पहुँचल हल । लल्लू आउर अलगंठवा में लंगोटियापन हल ।) (अल॰28:86.18)
9659 लंघी (~ मारना) (दुन्नू जवान एक-दोसर के चित्त नहिएँ कैलक । आखिर में कनेसर का से नञ रहल गेल । ऊ कान्त का के चेला के सहजे लंघी मार देलन । ऊ जवान धायँ से गिर गेल ।) (अमा॰16:12:1.2, 7, 10)
9660 लंठ-अवारा (गो॰ 6:30.27)
9661 लंठगिरी (एन्ने बिन्दा छौंड़न के संगे रहके ~ करे लगल हल) (अमा॰173:13:2.9)
9662 लंद-फंद (टिटिआय के जाय के बाद डिब्बा में बैठल लोग कहे लगलन कि टिटिआय अप्पन धोकड़ी भरे ला लंद-फंद करइत रहऽ हे ।) (अल॰6:15.15)
9663 लइकइया (नसध॰ 8:31.22)
9664 लइकइयाँ (~ के दिन) (अमा॰13:7:1.6, 7)
9665 लइकन-फइकन (अमा॰12:14:1.28; 173:19:1.2; नसध॰ 1:2.10; 39:168.5)
9666 लइकन-बुतरू (= लड़कन-बुतरू) (अल॰34:109.3; 37:117.22)
9667 लइका (मकस॰ 8.8)
9668 लइका (लइकन) (नसध॰ 2:8.4)
9669 लइकाई (अमा॰16:17:1.16; नसध॰ 6:24.23; 8:32.26; 26:116.2; 40:177.9)
9670 लइका-फइका (लइकन-फइकन) (बअछो॰ 5:24.23)
9671 लइकी (मकस॰ 8.8; नसध॰ 5:20.31; 47:204.23)
9672 लउकना (मसक॰ 115:6, 20)
9673 लउकना (ई सब कथा में प्रेम, सामाजिक विषमता, इतिहास के सत्य, नौकरी करे ओला के विवशता, प्रेम के पौरानिक स्वरूप आउ अन्तरजातीय विवाह आदि के चित्रण लउकऽ हे) (अमा॰25:19:1.31)
9674 लउकना (तोहर निखरल-निखरल चेहरा चान जइसन लउक रहली हे ।) (गोर-गोर झुमइत धान के बाल में हम तोहर मस्ती भरल कचगर आउर दूधायल सूरत देख रहली हे ।) (अल॰6:18.28; 11:34.25)
9675 लउकना (पुरनका रंगल कोट पेन्ह के ऊ कइसे जैतन हल ? रंगला पर भी रफ्फू साफे लउकऽ हल..) (मकस॰ 9:21; 66:5)
9676 लउझाड़ (समाज के कुरीत से लड़ना असान नऽ हे, बड़ी ~ हे) (नसध॰ 12:52.11)
9677 लउडीसपिकर, लउडिसपिकर (= लाउड-स्पीकर) (सुमितरी छत पर से नीचे उतरे ल चाह ही रहल हल कि उत्तरवारी टोला से विआह के गीत लउडीसपिकर पर सुनाई पड़ल ।) (अल॰22:70.19; 30:92.6; 34:107.20)
9678 लउलिन (गाँव के जजात आउर घर के अनाज चोरा के अप्पन पाठी के खिलावे में दिन-रात लउलिन रहऽ हल अलगंठवा ।) (अल॰1:2.20)
9679 लकठो (गुड़ या चीनी में पगा आटे का लंबा लच्छा) (टीसन के बाहरे खोमचा वाला हे । ओकरा में दु रुपइया के मिठाई के जगह पर ~ ले हे । ~ में से एगो टुकड़ियो न खाहे ऊ ।; बसिया दीदी बजार से आयल हे, सब लइकन घेर लेलन, सबके कुछ न कुछ निमकी चाहे लकठो मिल रहल हे ।) (अमा॰16:14:2.5, 6; 22:17:1.6)
9680 लकड़सुंघवा (अमा॰172:12:1.3)
9681 लकवा (~ मार देना) (नसध॰ 9:42.7)
9682 लखेरा (मकस॰ 30:10)
9683 लखेरा (हम ओकर बारे में सब कुछ तोहरा से जादे जानऽ हियो । उ गूंडा लखेरा बइमान आउर चंडाल हे ।) (अल॰21:67.22)
9684 लखैरा (गो॰ 6:28.1; मसक॰ 171:13)
9685 लगउनी-बझउनी (सालो से जे एतना ~ हे, ऊ कइसे वसूल होयत) (अमा॰174:8:1.22)
9686 लगन (गो॰ 4:21.18)
9687 लगन (एसो के लगनिया में जोड़े के हइ गेठिया, चहर-जुआन लेखा घर बइठल बेटिया, एसो होतइ न निवाह तऽ का कहतइ जमनमा ।) (अल॰19:63.14)
9688 लगन (बिआह के सुभ लगन टल रहल हल । ऊ घड़ी आरजू-मिन्नत आउ बहस करे के कउनो गुंजाइस न हल ।) (अमा॰28:5:1.7)
9689 लगन (शादी के ~) (मसक॰ 162:16)
9690 लगनपतरी (मसक॰ 99:23)
9691 लगना (बढही हीं ~ आउ सबदल ठोकाइत हल) (नसध॰ 6:28.9)
9692 लगना (हर के ~) (मसक॰ 113:8)
9693 लगबहिये (खदेरन के नाक-मुँह में गरगटाइन धुआँ घुस गेल । ऊ ~ खोखे लगलन ।) (नसध॰ 19:77.14; 29:126.24)
9694 लगल (मुँह ~ बोलना; सेवा में ~ ओहिजे खड़ा हल) (नसध॰ 4:15.30; 29:126.32)
9695 लगल-भिड़ल (गो॰ 3:17.8)
9696 लगवहिये (नसध॰ 39:164.6)
9697 लगवान (घर में लगवान भी हइ । जतरा पर दही भी ।) (अल॰16.47.12)
9698 लगहर (मसक॰ 18:2)
9699 लगहर (~ गाय) (अमा॰10:16:1.11; 163:15:1.22; कब॰ 20:10)
9700 लगाना (फूल लगैबऽ तऽ फूलैतो आउ काँटा रोपवऽ तऽ गड़तो) (नसध॰ 6:25.8)
9701 लगाना-बझाना (लगा-बझा के) (फूब॰ 5:18.4)
9702 लगावल (नसध॰ 29:126.2)
9703 लगी (= के लिए) (मसक॰ 21:4)
9704 लगी (= लागी, ला, के लिए) (रोते कलपते ऊ दुन्नो माय-बेटी टेम्पू पर चढ़ के घरे लगी चल पड़लथिन जब कि ऊ घर में लाते-घूँसा से स्वागत होवे के उम्मीद हल) (अमा॰24:18:1.25)
9705 लगुआ-भगुआ (गो॰ 8:38.20)
9706 लग्गी (ई नाव में ऐसन लग्गी दऽ, बस एक्के दाव उलट जैतो) (अमा॰10:1:1.12)
9707 लचार (मसक॰ 105:21)
9708 लचार (~ अदमी कसूर गछ के माफी माँगऽ हे) (अमा॰1:11:1.26; 18:10:1.29; 169:14:1.17)
9709 लचार (= लाचार) (नसध॰ 40:179.17)
9710 लचारी (अमा॰13:12:2.9; 165:14:1.28, 16:2.16; 170:6:1.6)
9711 लछनमान (कब॰ 2:12)
9712 लछमी (= लक्ष्मी) (अमा॰14:1:1.2, 11:1.18)
9713 लछमी (= लक्ष्मी) (दुरगा-सरसती-लछमी आदि इतिआदी देवी खाली मट्टी के देउता न हथ । बल्कि उ लोग तोहरे जइसन हलन जिनखर नाम-जस-गुन के चरचा आज्झ भी घर-घर में हे । सगर उ लोग के पूजा पाघुर होवऽ हे ।) (अल॰6:19.8)
9714 लजकोट (मसक॰ 71:3)
9715 लजकोटर (~ बालम लाज के मारे भाग न जाय) (अमा॰8:6:2.30)
9716 लजायल (नसध॰ 9:41.24)
9717 लजौनी (~ के डाल) (अमा॰15:18:1.21, 26)
9718 लजौनी (अलगंठवा के बात सुनके सुमितरी लजौनी घास नियर लजाइत अलगंठवा के तन-मन में सिकुड़इत कहलक हल -"धत्, तूँ तऽ तील के तार करके कोय चीज के बखान करऽ हऽ ।") (अल॰13.39.17)
9719 लजौनी (धनेसरा ~ के पौधा जइसन लजा गेल) (अमा॰169:14:1.15)
9720 लटकना (तनि ई लटकलका झोलवा पकड़ऽ तो !) (अमा॰9:11:2.15)
9721 लटकल (नसध॰ 6:23.19)
9722 लटकाना (नसध॰ 35:149.30)
9723 लटपट (~ लगाना) (नसध॰ 9:38.19)
9724 लटपट (में ~ चलना) (नसध॰ 3:13.25)
9725 लट्टियाना (सुमितरी काली मट्टी से अप्पन माथा रगड़-रगड़ के धोवे लगल हल । काहे कि ओकर लमहर-लमहर केस लट्टियाल हल । जेकरा कठौती में पानी लेके साफ कर रहऽ हल । ओकर पीठ येकदम उघारे हल ।) (अल॰5:12.16)
9726 लट्ठा (एही सब सोंचइत सब अउरत पीछे-पीछे सले-सले अपजस करे ला चले लगल हल । करहा में लट्ठा के पानी बह रहल हल खेत पटे ला । करहा भीर आके सभे छप्प-छप्प पानी छूए लगल हल ।) (अल॰18:54.13)
9727 लट्ठा (किसान सिंचाई ला लगल हे लट्ठा में; लट्ठा गिरावे ओला सिपाही के झट् से सौ-पचास के नोट धरा द, पट् से ओवर-लोडिंग कम जायत) (अमा॰26:11:1.8; 164:8:2.1)
9728 लट्ठा चलाना (गो॰ 1:7.20)
9729 लठिआना (बूढ़-पुरनियाँ के सठिआवत-लठिआवत नऽ तऽ वोट कइसे मिलतई ?) (नसध॰ 22:90.1)
9730 लठुआना (भौंरा भी फूल में तब ले लठुआल रहे हे, जब ले ओकरा में रस रहे हे) (अमा॰173:13:2.28)
9731 लठैत (अमा॰4:17:1.22)
9732 लड़का-फड़का (लड़िकन-फड़िकन) (गो॰ 4:21.4; 6:32.22; 8:36.18)
9733 लड़ना (हमनी कउची ला लड़ब ?) (नसध॰ 33:144.5, 11)
9734 लड़वाना-कटवाना (आपस में लड़वा-कटवा के पहिनऽ तूँ कंठीमाला) (अमा॰22:20:1.10)
9735 लड़ाई (नसध॰ 33:144.6, 8)
9736 लड़ाकिन (अमा॰166:14:2.1)
9737 लड़ाय (= लड़ाई) (टोला-टाटी में भी रोज देखइत रहऽ हे माउग-मरद के लड़ाय । झोंटा-झोंटउअल, मार-धार ।) (अल॰42:136.5)
9738 लड़िकन-फड़िकन (का लड़िकन का फड़िकन) (गो॰ 8:38.17-18)
9739 लड़िकलप्पो (मसक॰ 6:17)
9740 लड़िका-फड़िका (मसक॰ 38:28)
9741 लड्डू (नसध॰ 6:26.10)
9742 लढ़ुआ (रम॰ 4:41.9)
9743 लतरी (करमी के ~) (मसक॰ 98:8)
9744 लतियाना, लतिया देना (जब गिर जाही भुइयाँ में, तब ऊपर से लतिया दे हथ) (अमा॰15:20:1.10; 26:8:2.25, 33)
9745 लत्तड़ (आलू के नया लत्तड़ हरियर छटा फैला रहल हे । मकई के मोछ मकरन्द मन के मोर नचा रहल हे ।) (अमा॰22:11:2.27)
9746 लत्तम-जुत्तम (मसक॰ 72:5)
9747 लत्तर (मसक॰ 117:22)
9748 लथरना-पथरना (अगहनी धान टाल-बधार में लथरल-पथरल हल । कारीवांक, रमुनिया आउर सहजीरवा धान के गंध से सउंसे खन्धा धमधमा रहल हल ।) (अल॰7:20.25)
9749 लथार (~ मारना) (निसवद रतिया में टरऽ टरऽ करऽ हइ ददुरवा । रहि-रहि मारऽ हइ लथार, हहार करइ पूरबा ।) (अल॰19:63.3)
9750 लथेरना (नसध॰ 6:25.29)
9751 लदना (~ बैल) (अमा॰173:13:1.10)
9752 लदनी (नसध॰ 30:130.24, 25)
9753 लदनी-खेदनी (मसक॰ 165:23)
9754 लदबद (फरत करइला खीरा शोभे लदबद फूल अलानी में) (अमा॰22:17:2.19)
9755 लद-बूद (रम॰ 11:85.16)
9756 लदल-फदल (अमा॰8:5:1.22-23)
9757 लन्द-फन्द (अमा॰11:20:1.9)
9758 लपकना (गो॰ 10:45.30)
9759 लपकना (लपकल) (नसध॰ 4:15.3; 41:181.17)
9760 लपकल (अमा॰7:15:1.2)
9761 लपकल-धपकल (रम॰ 19:140.15)
9762 लपकल-धपकल (बटेसर भी अप्पन जनाना भीर से उठ के भीड़ दने लपकल-धपकल चल गेल हल ।) (अल॰7:22.25; 18:54.19; 22:71.17; 26:77.17-18; 27:84.25; 29:90.4; 38:123.26; 41:126.22; 43:141.2-3; 44:145.13, 152.2)
9763 लपटायल (नसध॰ 13:56.2)
9764 लपसाना, लपसा जाना (सच पूछल जाय तऽ इस्कूल हमरा काजे आउर कालिख से लिपल-पोतल लउक रहल हे । हम हदिआयल ही, डेरायल ही कि कहीं कालिख आउर काजर हमनी सब नयकन सिच्छक के कपड़ा-लत्ता आउर देह में लपसा न जाय । ... अपने अप्पन काम-धंधा ठप्प करके अइते गेली हे, इ लेल हम अपने सब के परनाम करइत ही, सलाम करइत ही ।) (अल॰30:92.17)
9765 लपाता (= लापता) (हेडमास्टर साहेब सुमितरी से अलगंठवा के बारे में पूछलन हल कि एक सपताह से जादा हो गेल हे । अभी तक ऊ कहाँ लपाता हका ।) (अल॰34:107.28)
9766 लप्पड़-थप्पड़ (अमा॰167:17:1.10)
9767 लफड़ा (अगर तूँ ई लफड़ा में पड़ल न चाहे हें, तब चुपडाप हरेक महीना में आधा पेंसन दे दिहें) (अमा॰164:10:1.11)
9768 लफन्दर (गाँव में एक दूसर से लड़वा के पटिसन करवा देलक । हेडमास्टरवे हमनी के जेल के रस्ता देखला देलक । नाता-पेहानी सगर से मुड़ी गिरवा देलक । हमनी के कहीं के रहे न देलक इ बुरचान्हर-लफन्दर हेडमास्टर ।) (अल॰33:105.2)
9769 लफन्दरइ (गया पींडदान के बारे में लोग हर साल अप्पन कुल पित्तर सब के सरग जाय ला दान करऽ हथ । रूपिया से लगाइत खटिया बिछावन जूता-छाता, छड़ी आउर न जानुँ कउन-कउन रगन के चीज दान करऽ हथ । मरला के बाद कउन जानऽ हे कि सरग इया नरक गेलन । ई सब लफन्दरइ न तऽ का हे भइया ।) (अल॰35:112.17)
9770 लफाना (रम॰ 9:70.7)
9771 लफाना (बड़ी मलार के हाथ लफाथिन) (अमा॰3:19:2.30)
9772 लफाना (सुमितरी जाय ला गोड़ बढ़इवे कइलक हल कि अलगंठवा ओकर बायाँ हाथ लफा के पकड़इत वांस के कोठी पर एगो कौआ अप्पन बचा {बच्चा} के मुंह में चारा बड़ परेम से डाल रहल हल ।) (अल॰13.40.13; 27:82.23; 36:114.13; 42:133.25)
9773 लफार (~ मारना) (नसध॰ 6:25.17, 26.4)
9774 लफार (पूरबा के लफार से दूनो के पसीना से तरबतर देह के तरावट मिल रहल हल ।) (अल॰42:134.8)
9775 लबदब्बर (= झटदब्बर) (मसक॰ 72:3)
9776 लमका (ए भइया ! जहाँगीर पोखर वाला लमका परीया में जे तीनकोनवा दसकठवा हे से नापले न गेल हे ।) (अमा॰30:14:1.23)
9777 लमछड़ (मसक॰ 134:1)
9778 लम-धडंग (मसक॰ 166:10)
9779 लमनी (= लबनी) (खेलामन के कहावत सुन के रघुनाथ मिसतिरी जे एक लमनी ताड़ी लेके अलग बैठ के पी रहलन हल, उ बोल पड़ल) (अल॰8:23.15)
9780 लमनी, लवनी (लवनी - रम॰ 4:38.7, 39.12)
9781 लमपोर (कब॰ 2:7)
9782 लमहर (अमा॰2:5:2.4; 13:11:1.4; 167:10:2.5; 173:3:2.9; गो॰ 11:46.25; मसक॰ 13:3; 90:1; 127:23; रम॰ 4:41.3; 9:70.6; नसध॰ 5:22.14; 26:117.2)
9783 लमहर (सामर वरन, छरहरा बदन, तुका जइसन खड़ा नाक, कमल लेखा आँख, लमहर-लमहर पुस्ट बाँह, सटकल पेट, चाक निअर छाती, बड़गो-बड़गो कान, उच्चगर लिलार, उज्जर सफेद सघन दांत, पातर ओठ से उरेहल हल अलगंठवा ।) (अल॰1:1.21; 5:12.16)
9784 लम्फ (बिजली के लाइनो गुल हो गेल हे । ..... कोठरी के एगो कोना में लम्फ बर रहल हे ।) (अमा॰13:7:2.9, 11, 12, 9:1.11)
9785 लम्बाई (लम्बाई-चौड़ाई) (नसध॰ 26:117.2)
9786 लम्मर (दू ~ के कमाई) (अमा॰2:11:2.2)
9787 लम्मा (गो॰ 5:26.24; कब॰ 2:7)
9788 लम्मा (लम्मा-चौड़ा भासन) (कत्तेक नेता, समाजसेवी आउ विद्वान ओहनी के जीवन-दर्शन पर लम्मा-चौड़ा भासन देलन; डागडर साहेब अप्पन माय के फरमौलन कि हम ऐसन-ओयसन लड़की से बिआह न करम । तूँ ऐसन लड़की खोजऽ जेकर चकचक दूध नियर रंग, आम के फाँक नियर लमहर आँख, टूसा नियर नाक, सुग्गा के ठोर नियर लाल-लाल ओठ, बिजली नियर दाँत आउ करिया और लम्मा-लम्मा घुट्ठी छुअइत बाल होय) (अमा॰2:5:1.11)
9789 लय (सुर ~) (नसध॰ 26:116.13)
9790 लरकोर (अनगिन पापियन के पापवा पखारलऽ, बाँझिन के कयलऽ लरकोर ।) (अमा॰29:9:1.20)
9791 लरछुत (बअछो॰ आमुख:3.20)
9792 लर-जर (अइसे तो विनोबा जी के लर-जर कद्दू के नियन छितरायल हे मगर परिवार में इनकर पत्नी के छोड़ के आउ कउनो न हे) (अमा॰19:13:2.30)
9793 लरमा जाना (चुभसे॰ 3:10.1)
9794 लरमाना, लरमा जाना (नसध॰ 9:40.25)
9795 लरिका (बअछो॰ 11:52.4)
9796 लरी (ओही रात के भतू के बड़की पुतहू बऊआल । ऊ बऊआन में भतू के आत्मा बोलल कि ओकर बनावल ठठरी पर, जेकरा में चारो कोना पर चार गो घंटी आउ जहाँ घुँघरू के लरी लगल हल, हमरा नईं ले जाल गेल ।) (अमा॰17:9:2.22)
9797 लरी-चरी (गो॰ 1:8.8)
9798 ललक (अआवि॰ 107:14)
9799 ललकना (अआवि॰ 108:2)
9800 ललकारना (नसध॰ 33:141.20)
9801 ललकी (~ मट्टी; ~ किरिनियाँ) (अमा॰16:12:2.30; 17:1:1.3)
9802 ललचना (नसध॰ 5:22.5)
9803 ललचाना (नसध॰ 5:19.27)
9804 ललटेन (= लालटेन) (नसध॰ 32:140.30)
9805 ललसा (नसध॰ 5:21.30; 27:119.12)
9806 ललसा (= लालसा) (अमा॰6:8:2.1; 28:11:2.2)
9807 ललोस (मसक॰ 74:11)
9808 लवनी (= लमनी, लबनी) (ताड़ी-दारू के लवनी आउ बोतल से इस्कूल भरल बा आउर जनेउ पेन्हथ बा ।) (अल॰23:72.24)
9809 लवेदा (ई में ~ फँसे के डर न हे) (अमा॰174:6:2.9)
9810 लसगंध (ऊ ~ के बेमारी हे । तू अलग ही तनी बइठऽ । हमनी में सटल का आवइत हऽ ।) (नसध॰ 41:180.8)
9811 लसोढ़ा (नन्हकू ओही ठाँम बइठ के येगो अप्पन धोकड़ी से लसोढ़ा के दतमन निकाल के मुंह धोवे लगल हल ।) (अल॰3:6.15)
9812 लहँगा (अमा॰1:13:2.10)
9813 लहंगा-पटोर (रम॰ 14:108.12)
9814 लहकना  (ओही पइसा से तम्बाकू किन के गाँव के बूढ़वा-बूढ़ियन के बोरसी से इया चुल्हा के लहकल लकड़ी के इंगोरा इया टिकिआ धरा के चिलिम में तम्बाकू बोज के नरिअर पर चढ़ाके पीलावे में तेज अलगंठवा ।) (अल॰1:2.12; 11:34.4, 6)
9815 लहजवान (बड़ा टंगरी तोड़े ओला बनल हे । अबरी ~ निकलने तो ठीक न होतउ ।) (नसध॰ 41:180.25)
9816 लहठी (कब॰ 22:4)
9817 लहना (कहईं न ~) (नसध॰ 4:14.13)
9818 लहना (दू बरिस से उनखा दमा के रोग से परेसान हियो । दवा-विरो कराके थक गेलियो हे । भगत बनिया के पीछे भी कम खरच न कइलियो हे । मुदा कुछ न लहऽ हो ।; एस॰पी॰ आउर डी॰एस॰पी॰ के इहाँ भी जाके विधायक जी पैरवी केलथिन हे, मुदा कुछो न लहलइ, मुँह बना के चल अइलन सब कोय ।) (अल॰6:17.10, 14; 25:75.24)
9819 लहबर (गो॰ 5:25.23)
9820 लहर (एँड़ी के ~ कपार पर चढ़ना; तरवा के ~ कपार पर चढ़ना) (अमा॰9:18:2.11; 13:16:2.4)
9821 लहरना (आग ~, मिजाज ~) (नसध॰ 10:44.7; 17:73.8-9; 27:118.28)
9822 लहरना (सुमितरी सीऽऽऽसीऽऽऽ करइत कहलक हल - "एता जोड़ से नाक अंइठ देलऽ कि लहरे लगल । छोड़ऽ, अब हम जाही ।") (अल॰13.40.27)
9823 लहरा डाक (रम॰ 5:44.12; 17:132.23)
9824 लहरा डाक (= एक देवता, जिनके बारे में मान्यता है कि वे गाँव-घर की निगरानी करते हैं) (शक्ति ला देवी जी, बुद्धि ला सरस्वती जी, गाँव-घर के निगरानी ला गोरइया डिहवार, डाक, फूल डाक, ईशरा डाक, लहरा डाक, त घर के परिवार के रच्छा ला टिपउर, मनुस्देवा, बाबा बकतउर आउ बराहदेव हथ ।) (अमा॰22:13:1.9)
9825 लहराना (आग ~) (नसध॰ 29:129.6)
9826 लहराना, लहरा देना (भूसा ~) (नसध॰ 37:159.14)
9827 लहरी (गरमी के ~) (कहाँ जइबे बूँदा पड़े पर गरमी के लहरिया रे ?) (अमा॰24:1:1.1)
9828 लहलह (गो॰ 6:28.31)
9829 लहलह (जेठ के लहलह दुपहरिया में लूक लगे के भय से लोग ओइसहीं लुकाएल हलन जइसे दिन में उल्लू लुकायल रहऽ हे) (अमा॰20:15:1.1)
9830 लहलह दुपहरिया (मसक॰ 22:21)
9831 लहलहाना (खेतन में लहलहाल सरसों के फूल खिलल) (अमा॰20:6:2.13)
9832 लहलहाना (लहलहाइत ~) (नसध॰ 30:133.17)
9833 लहसना (पेड़ झमटार हल जहिना तहिना, अब तो ठूँठे खड़ा हे अगाड़ी । ई न फूजे, न फुनगे, न लहसे, अब न चूके के भइया सगाड़ी ।) (अमा॰14:1:1.13)
9834 लहसुन (नसध॰ 9:37.2)
9835 लहसुन आउर पेयाज के फोरन देना (गो॰ 8:38.10-11)
9836 लहालोट (गो॰ 1:2.32)
9837 लहालोट (भूखल लहालोट मिजाज) (एही से तो ऊ आम रास्ता पर अप्पन आसन जमौले हथ कि हजार-पान सौ ढेला रोज मिल जात, त चलऽ अप्पन भूखल लहालोट मिजाज एकदम शांत हो जात) (अमा॰22:13:2.10)
9838 लहास (= लाश) (अमा॰24:12:1.18; 168:11:1.8; 169:11:2.21)
9839 लहेंगड़ा (गाँव के दस गो लहेंगड़ा समुच्चे गाँव के इन्सान के पेरले हे । कइसे गाँव के इज्जत रहत ?) (मसक॰ 55:14)
9840 ला (= के लिए) (अआवि॰ 20:31; मसक॰ 22:4)
9841 ला, ल, लागी, लगी (= के लिए) (कब॰ 1:5)
9842 लाइन (बिजली के लाइनो गुल हो गेल हे । "कत्ते गिरावट सब विभाग के काम-काज में आ गेल हे ।" - ऊ खिजला हथ ।) (अमा॰13:7:2.6)
9843 लाई (मिठाई) (गो॰ 3:18.22)
9844 लाई-मिठाई (गो॰ 1:10.30; 3:16.21)
9845 लाग फाँस (~ चलना, ~ लगाना) (नसध॰ 5:21.14; 8:32.10)
9846 लाग-फाँस (गो॰ 7:35.21)
9847 लाग-फांस (इधर अलगंठवा से गाँव के कुछ लोग खुस हल तऽ कुछ नाखुस भी । सुमितरी आउर अलगंठवा के सिकाइत इ लेल होबऽ हल कि दूनो में लाग-फांस हो गेल हल ।) (अल॰44:157.13)
9848 लाग-लपेट ("का भाय ! कहाँ जाय के औडर तोरा देलको सरकार ?" महेसर जी दुखित होते पूछलन । -"शहर जमनिया ।" दरोगी जी बिना कोय लाग-लपेट के बता देलन ।) (अमा॰29:11:2.22-23)
9849 लागी (अआवि॰ 17:26)
9850 लागी (बदला लेवे लागी = बदला लेने के लिए) (बअछो॰ 1:9.6)
9851 लाज-गरान (अमा॰22:20:1.15; 170:11:2.16; गो॰ 1:1.27, 28; 6:27.32)
9852 लाट (~ साहेब) (नसध॰ 20:81.6; 25:107.17)
9853 लाठा (लाठा-कूड़ी) (नसध॰ 9:41.26, 30)
9854 लाठी (नसध॰ 9:42.23)
9855 लाठी भांजना (बअछो॰ 6:29.12, 22, 30.23)
9856 लाठी-डंटा (बअछो॰ 12:54.15)
9857 लाठी-पैना (गो॰ 8:36.17)
9858 लाठी-लठउअल (कब॰ 8:3)
9859 लात-जुत्ता (गो॰ 5:26.5)
9860 लात-जूता (~ खाना) (नसध॰ 33:144.30)
9861 लादना-खेदना (लाद-खेद के) (गो॰ 6:30.23)
9862 लानत-मलामत (गो॰ 3:16.28, 20.3)
9863 लाम (= नाम) (उ का डागडर हथिन बाबूजी ? कउन कउलेज में पढ़लथिन हे । टो-टा के तऽ एक वित्ता में अप्पन लाम लिखऽ हथिन । अप्पन गाँव के कई लोगन के मुरदघट्टी पुवचा देलथिन हे । जहाँ पेड़ न बगान, उहाँ रेड़ परधान ।) (अल॰14.42.20)
9864 लार (मुँह से ~ चूना) (नसध॰ 17:73.15)
9865 लार-पोआर (रम॰ 4:43.19)
9866 लाल (नसध॰ 26:117.6)
9867 लाल झंडी देखा देना (मसक॰ 24:19)
9868 लाल सलाम (अलगंठवा-रमेसर-रजेसर आउर फनु मियाँ वर-पीपर के पेड़ तर ताड़ के चटाई पर बइठइत सब येक दूसर के लाल सलाम करऽ हे ।) (अल॰43:140.25)
9869 लालटेन (नसध॰ 32:141.9)
9870 लाल-पीयर (आँख ~ करना) (अमा॰16:13:1.24)
9871 लाली (जब पेट भरल तऽ मुँह पऽ ~ काहे नऽ चमकत ?) (नसध॰ 12:51.29)
9872 लावल (आज के ~ मछरी) (नसध॰ 36:156.9)
9873 लास (= लाश) (जब अवकाश काल लइकन किहाँ बितावल चाहऽ हथ, त बुढ़ारी के लास उठावे के बूता केकरो न होयल) (अमा॰17:7:1.18)
9874 लास (= लाश) (डागडर के बुलावे के पहिले ही दम टूट गेलइ । लास फतुहा आयल हो । माय के मुँह में आग तोहरे देवे पड़तो । काहे कि छोट बेटा ही आग दे हे ।) (अल॰11.33.20, 34.8, 27)
9875 लाहरी ("न बेटा, उहाँ बड़ी भीड़ रहऽ हइ । तूँ मेला-ठला में भुला जयबऽ, इया कुचला जयबऽ । न, तूँ न जा बेटा, हम तोरा ला फतुहा के परसिध मिठाई मिरजइ लेते अइबो ।" आखिर अलगंठवा माय से लाहरी करके चले ला तइयार होइए गेल ।; सुमितरी भी राजगीर मलमास मेला देखे ला लाहरी ले रहलइ हे ।) (अल॰6:14.16; 31:96.14)
9876 लाही (लाही गिर के सकल फसल तो हो गेलक बरबाद) (अमा॰20:20:2.13)
9877 लिआना (डगदर के लिआवे चल गेल) (नसध॰ 29:126.16)
9878 लिक्खा (फूब॰ मुखबंध:1.22)
9879 लिख (= लीख) (सुमितरी के माय अप्पन माथा से एगो लिख पकड़ के बाँया हाथ के अंगूठा के नाखून पर दहिना हाथ के अंगूठा से पुट-सन मारइत कहलक हल) (अल॰7:22.12)
9880 लिखताहर ('गाँव के दरद' के लिखताहर केशव प्रसाद वर्मा हथ) (अमा॰17:7:1.4)
9881 लिखनय (अमा॰16:16:2.17)
9882 लिखना (नसध॰ 35:151.23)
9883 लिखल (कागज पर ~ हे) (अमा॰1:9:1.27)
9884 लिखल-पढ़ल (= लिखना-पढ़ना) (सुमितरी के लिखल-पढ़ल गारत कर रहलथिन हे बेटा । ओकर फारम भरे के नाम पर आँउ-जाँउ बकऽ हथिन । अनेकन तरह के बखेड़ा खड़ा कर रहलथिन हे ।) (अल॰20:65.20)
9885 लिख-लोढ़ा (चुभसे॰ 1:5.21)
9886 लिखा-पढ़ी (लोग के बोल-चाल में तो मगही के खूबे प्रयोग होवऽ हे, बाकी ~ में एकर प्रयोग नऽ होवे; पहिले पइसा ले जा, बाद में ~ करिहऽ) (अमा॰1:7:2.10; 163:11:2.2)
9887 लिट्टी (~ पऽ टिकिया रखना) (अपन-अपन ~ पऽ सब कोई टिकिया रखऽ हे) (नसध॰ 14:64.21)
9888 लिट्टी (नन्हकू के घरवाली सत्तू भरल लिट्टी आउर आम के अंचार गमछी के एगो खूटा में बाँध देलक हल ।) (अल॰3:6.6)
9889 लिडरइ (= नेतागिरी) (आज तोहर करम-किरिआ करे ला हमनी इहाँ तोहरे आवे के बाट जोह रहलियो हे । आज तोहर कविता-केहानी आउ लिडरइ भूला जइतो ।) (अल॰27:82.16)
9890 लिताहर (अमा॰173:7:1.17, 18)
9891 लिपले पोतले देहरी, पहिरले ओढ़ले मेहरी (गो॰ 3:18.7-8)
9892 लिपाई-पोताई (नसध॰ 41:179.21)
9893 लिबिर-लिबिर (ऊ घोंघा लेखा ~ आँख से हमरा देखलक) (अमा॰173:16:1.22)
9894 लियाना (एक दिन लालती के बाप रामलखन लालती के लियावे गेलन तो बलिन्दर खीस में न लावे के किरिया कसम तक खा लेलन ।) (अमा॰12:10:2.2)
9895 लिलकना (लिलकल के खीर-पूड़ी, तरस के सइयाँ, जल्दी बिहान मत होइहऽ गोसइयाँ ।) (अल॰44:153.29)
9896 लिलकल (मकस॰ 41:5)
9897 लिलगाय (गो॰ 6:33.1)
9898 लिलबिलरा (~ नियन मुँह) (मसक॰ 169:6)
9899 लिलार (नसध॰ 9:42.26)
9900 लीला (जिनगी के ~) (नसध॰ 29:126.12)
9901 लुँज-पुँज (अमा॰11:12:2.11)
9902 लुंगी (अमा॰20:89:2.5; 163:8:1.21)
9903 लुंगी, लूंगी (चरखानी के गमछी आउर लूंगी एगो खादी के झोला में सइंत के कंधा में लटका के जब चले लगल ..) (अल॰38:120.7)
9904 लुआ (नसध॰ 3:11.7; 29:127.7)
9905 लुकपुक (गो॰ 1:5.23)
9906 लुक-लुक (बेर ~ करना) (नसध॰ 26:118.9)
9907 लुकलुकाना (बेर ~) (नसध॰ 30:134.13; 40:178.24)
9908 लुकलुकाना (सुमितरी कहलक हल कि अब संझौती देवे के समय हो गेल हे, जा हियो । अलगंठवा कहलक हल कि हाँ, बेर लुकलुका गेलो हे । सूरज भी डूबे जा रहलो हे ।) (अल॰13.41.18; 37:119.7)
9909 लुकवारी (आग के ~) (अमा॰2:16:1.21, 2.14)
9910 लुकाना, लुकावल जाना (जेकरा छिपावल जाय ऊ न छीपे आउ जेकरा लुकावल जाय ऊ परघट हो जाय) (नसध॰ 38:161.15)
9911 लुगरी (~ गाँथना) (मसक॰ 151:5)
9912 लुगा (मकस॰ 58:4; नसध॰ 3:9.27)
9913 लुगा (न कहियो बेचारी के गड़ी-छोहाड़ा ममोसर, न घीउ । पेन्हे ला साधारण लुगा मिलऽ हल ।; अरे सीधके गइया न सउँसे लुगा चिबा जाहे) (अमा॰17:8:1.21; 18:10:2.9, 11:2.27)
9914 लुगा (सुमितरी के उठा के झरताहर सब लुगा बदलबउलन हल, आउर कहते गेलन हल कि रात भर जग के बिहान करे के चाही । काहे कि सुतल में फिन बिख चढ़े के भय बनल रहऽ हे ।) (अल॰18:59.14)
9915 लुगा, लुग्गा (मसक॰ 38:25; 69:4; 99:12)
9916 लुगा-झुला (दसहरा आउ होली में कुटनी दादी के लुगा-झुला आउ साटन जरूरे मिलत) (अमा॰5:16:1.10)
9917 लुग्गा (गो॰ 1:7.19; 3:18.2; नसध॰ 3:10.16)
9918 लुग्गा-लुग्गी (मसक॰ 75:2)
9919 लुझना (लुझल) (नसध॰ 25:107.24)
9920 लुझाना (उहाँ मीटिंग हे आउ इहाँ गाँव के सब लोग के लुझौले हऽ) (नसध॰ 9:40.15)
9921 लुटेरा (अमा॰173:1:2.6)
9922 लुठिआना (रम॰ 4:41.3)
9923 लुतराना (लुतरा जाना) (रम॰ 3:27.23)
9924 लुतरी (रम॰ 7:59.13)
9925 लुतरी (भइयन संग ननदीन भी ~ हे जोर रहल ।) (अमा॰20:6:2.26)
9926 लुदकुनिये (नसध॰ 3:9.1, 11.9-10)
9927 लुर (हमरा ठेर मत सिखाव, हम ठेर सीखले ही । सहर में तोहनी के एको दिन बास होतो । चले आउ बाले के ~ हो ?) (नसध॰ 41:181.8)
9928 लुरगर (लुरगर-बुधगर) (अमा॰170:14:2.23)
9929 लुर-लुर (गो॰ 10:44.7)
9930 लुसफुसिआना (तोरो मन लुसफुसिआइत हवऽ ?) (नसध॰ 22:89.18)
9931 लुसफुसियाना (मन ~) (नसध॰ 26:117.12)
9932 लूँगेड़ा (रम॰ 16:122.4)
9933 लूक (मसक॰ 112:15; नसध॰ 4:15.8, 16.1; 34:145.10, 146.20)
9934 लूगा-फटा (अलगंठवा के तरफ मुंह फेरइत सुमितरी कहलक हल -"अरे बाप, मत पूछऽ, कल ही न बुलाकी बहु वचा निछड़वइलके हे । संउसे लूगा-फटा खून से बोथ हो गेलइ हल । हँड़िया के हँड़िया खून गिरलइ हल । संउसे टोला हउड़ा कर देलकइ कि कच्चा उहरा हो गेलइ हे । मुदा सच बात छिपऽ हे ?") (अल॰13.40.20)
9935 लूट-पाट (अमा॰29:7:2.1, 8:1.5)
9936 लूर (अमा॰4:13:2.21; 11:12:2.4; 12:6:2.23; बअछो॰ 5:27.27; गो॰ 1:10.20, 21; कब॰ 14:24)
9937 लूर (जो गे नासपीटी, मुँहझौंसी ! न लूर के, न काम के, ससुरार जयबे तो लात जूता खयते दिन जतऊ) (मकस॰ 49:21)
9938 लूर (तोहरा जइसन सुथर-सुभवगर पढ़ाकू लइका तऽ आज्झ तलक हम देखवे न कइली हे । केता लूर से चिट्ठी लिखलऽ हे ।) (अल॰6:20.6)
9939 लूर-अकल (तोही अप्पन लूर-अकल से ई किसान-मजदूर के झगड़ा के निपटारा कर सकऽ हऽ ।) (अल॰17:52.18)
9940 लूर-लच्छन (अमा॰166:14:2.13)
9941 लूल्हा (लूल्हा, लंगड़ा आउ कोढ़िया भी ठेलागाड़ी में बइठ के निरगुन भजन सुना के दुनिया के निस्सारता के घोसना करऽ हे । मगर दू पइसा खातिर लुच्चा लफंगा में भी भगवान के रूप देखऽ हे ।) (अमा॰28:6:1.22)
9942 ले (= के लिए; देवे ले = देने के लिए) (फूब॰ मुखबंध:2.4)
9943 लेंदरा (हमरो हे ~, तोरा दोसाला हे) (अमा॰5:11:1.4; 11:14:1.13, 28)
9944 लेक्सन (= एलेक्सन, चुनाव) (नसध॰ 21:83.30; 27:119.19)
9945 लेखा (बअछो॰ 9:41.25)
9946 लेखा (= जैसा) (हम्मर नजर में तोरा ~ सुन्दर परी कोई न हे; मइया के जीउआ गइया ~ होवऽ हे; ऊ घोंघा ~ लिबिर-लिबिर आँख से हमरा देखलक) (अमा॰9:16:1.24; 17:12:1.4; 173:16:1.22)
9947 लेखा (= समान, जैसा) (कब॰ 1:7)
9948 लेखा (सामर वरन, छरहरा बदन, तुका जइसन खड़ा नाक, कमल लेखा आँख, लमहर-लमहर पुस्ट बाँह, सटकल पेट, चाक निअर छाती, बड़गो-बड़गो कान, उच्चगर लिलार, उज्जर सफेद सघन दांत, पातर ओठ से उरेहल हल अलगंठवा ।) (अल॰1:1.21)
9949 लेखा-जोखा (नसध॰ 7:30.2)
9950 लेटना-पोटना (कादो-पाँको सेलेटल-पोटल कपड़ा) (अमा॰13:6:2.4)
9951 लेटाना, लेटा जाना (= गंदा होना, गंदा हो जाना) (कभी भइंस पेसाब करे तो छींटा पड़े, कभी गाय के पातर गोबर से कपड़ा लेटा जाय) (अमा॰170:8:1.33)
9952 लेटाल-पोटाल (मसक॰ 71:3)
9953 लेताहर (सादी के फल तऽ हेमन्ती के मिल रहलइ हे । बेचारी दोपस्ता होके ससुराल में बैठ के सुबुक रहलन हे । लेताहर गेलइ से आवे न देलकइ ।) (अल॰42:136.3)
9954 लेन-देन (अआवि॰ 109:4-5)
9955 लेबास (मसक॰ 112:16)
9956 लेमचूस (अमा॰173:14:2.7)
9957 लेमो (= लेमू, निम्बू) (अमा॰172:4:1.22)
9958 लेमोचूस (नसध॰ 1:1.7)
9959 लेल (रम॰ 1:19.21)
9960 लेल (= लिए; इ लेल = इसलिए) (अल॰6:19.14)
9961 लेले-देले (गो॰ 8:36.19)
9962 लेसना (= नेसना, जलाना) (तितकी लेस देना) (अमा॰173:11:2.21)
9963 लेसराना, लेसरा जाना (नसध॰ 4:14.17)
9964 लेसारना (हमरा कोई कदई में लेसार दे । हम तइयार ही।) (नसध॰ 6:27.2)
9965 लेहाज (कब॰ 29:2)
9966 लेहाजे (जीरवा के ~ भिखना के चाचा भी खदेरन के जाल से छोड़ावे भिरु नऽ गेलन) (नसध॰ 13:56.10)
9967 लेहुआना (सिमरा के फूल लेहुआय रे बलमुआ) (अमा॰1:17:2.10)
9968 लेहुआलोहान (अमा॰11:12:2.21)
9969 लेहू (~ के टपकइत बून) (नसध॰ 2:7.17, 19; 37:158.15)
9970 लैला-मजनू (नसध॰ 35:151.3)
9971 लोंदा (गो॰ 2:15.21)
9972 लोक-कथा (नसध॰ 35:150.29)
9973 लोककथा (लोकवार्ता के कथावस्तु वर्तमान के न होके परम्परा से आयल रहऽ हे । अइसन अवधारण लोक-विश्वास, अंध-विश्वास, रीति-रेवाज, परदरसन, लोक-नाट्य, धरम-कथा, अवदान परम्परा, लोककथा, धरम, अनुष्ठान, प्रकृति सम्बन्धी धारणा, जादू-टोना, कहउतिया, परतूक आदि हो सकऽ हे ।) (अमा॰25:13:1:16, 17:1:8, 10, 13)
9974 लोकगीत (मगही लोकगीत : भूमिका, संग्रह और भाष्य' लेखक के दूसर बृहद ग्रंथ, लगभग एक हजार पृष्ठ के मुद्रणस्थ हे; सोना में सोहागा ई भेल कि श्रोता के प्रश्न के उत्तर भी देलन आउ फरमाइशी लोकगीत भी सुनयलन) (अमा॰25:17:1:16, 18, 24; 26:15:2.7)
9975 लोक-जीवन (नसध॰ 35:150.29)
9976 लोकतंतर (= लोकतंत्र) (अब सउंसे देस में करमी के लतड़ आउर नकफेनी के काँटा नियन सत्ता में वंसवाद-जातिवाद पनपावे के जाल बुनल जा रहल हे । पता न, लोकतंतर कहाँ जा के अप्पन पनाह पावत ।) (अल॰44:154.16)
9977 लोकना, लोक लेना (ऊ ओकरा ऊपर ही लोक लेलक न तो जमीन पर गिरइत तो हड्डी-गुड्डी टूट जतई हल) (नसध॰ 40:176.12, 177.31)
9978 लोकना, लौकना, लउकना (= दिखना) (नसध॰ 3:13.14; 43:188.27, 29)
9979 लोकनाट्य ('मगही लोकनाट्य : अनुशीलन एवं संचयन' - एकरा में मगह के प्रचलित लोकनाट्य के संग्रह आउ अनुशीलन कैल गेल हे) (अमा॰25:17:1:27, 28, 29)
9980 लोकवार्ता (लोकवार्ता के कथावस्तु वर्तमान के न होके परम्परा से आयल रहऽ हे । ; विश्व लोकवार्ता के विद्वान आउ भोजपुरी लोकसाहित्य-सम्राट डॉ॰ कृष्णदेव उपाध्याय डॉ॰ राम प्रसाद सिंह के भारत के एगो महान लोकवार्ताविद के रूप में प्रस्तुत कैलन हे ।) (अमा॰25:13:1:12, 17:1:1, 10)
9981 लोकवार्ताविद (विश्व लोकवार्ता के विद्वान आउ भोजपुरी लोकसाहित्य-सम्राट डॉ॰ कृष्णदेव उपाध्याय डॉ॰ राम प्रसाद सिंह के भारत के एगो महान लोकवार्ताविद के रूप में प्रस्तुत कैलन हे) (अमा॰25:17:1:3)
9982 लोकाना, लोका जाना (सुगिया रग्घू के गोदी में लोका गेल) (नसध॰ 40:176.13)
9983 लोकोक्ति (एकरा अलावे पहेली, दसकूटक, लोकोक्ति, परतूक, लोकास्था आदि के संग्रह में बड़ी दिक्कत उठावे पड़ल हे जेकर वर्णन हम पुस्तक के भूमिका में कइली हे) (अमा॰25:5:1.31, 17:2.7)
9984 लोखर (बअछो॰ 4:20.5; 9:42.10, 43.25; 11:52.14, 20)
9985 लोग-बाग (गो॰ 6:32.12; 9:39.23; कब॰ 5:12; मसक॰ 159:11)
9986 लोघड़ना, लोघड़ जाना (नसध॰ 42:186.8)
9987 लोघड़नियाँ (~ खाना) (नसध॰ 29:126.10)
9988 लोघड़नियां (फूब॰ 1:3.6)
9989 लोघड़ाना (नसध॰ 3:13.6; 6:24.24)
9990 लोघड़ायल (नसध॰ 6:26.21)
9991 लोछियाना (लोछिया जाना) (रम॰ 13:105.5)
9992 लोट (= नोट) (गो॰ 3:18.20)
9993 लोटना (लोटल चलना, लोटे के मन करना) (नसध॰ 8:32.2, 5)
9994 लोटा (बिना पेंदी के ~) (नसध॰ 39:163.32; 46:202.20)
9995 लोटा-कटोरा (नसध॰ 3:11.15)
9996 लोटा-थरिया (काहे ला एगो अनजान आदमी के ~ दे देलऽ !) (अमा॰22:16:1.19)
9997 लोटा-थरिया-कठौती-बटलोही (उ जेवार में कोय के अइसन घर न हल जेकरा हीं अलगंठवा के घर के लोटा-थरिया-कठौती-बटलोही बंधिक न होत । माय-चच्चा आउर बाबू जी के मर जाय के वाद अलगंठवा के परिवार में घनघोर अंधेरा छा गेल हल ।) (अल॰12.35.22)
9998 लोढ़ना (फूल ~) (अमा॰12:11:2.4)
9999 लोढ़ा-सिलउट लोग (चुभसे॰ 1:4.21)
10000 लोढ़ी-पाटी (सुमितरी के माय मुसकइत येगो पुरान करिखा लगल हांड़ी में मछली धोवे ला उठावइत सुमितरी से कहलक हल - "अगे बेटी, तूँ लहसून-हल्दी-धनिया-सरसो आउर मिचाइ मेहिन करके लोढ़ी-पाटी धो-धो के पीसऽ ।" माय के बात सुन के सुमितरी लोढ़ी-पाटी पर मसाला पीसे लगल हल आउ मछली के लोहरउनी से घर महके लगल हल ।) (अल॰5:14.6, 7)
10001 लोभाना, लोभा जाना (नसध॰ 28:125.20; 36:155.25)
10002 लोर (मसक॰ 36:24)
10003 लोर (~ पोछना, आँख में ~ भर जाना) (नसध॰ 5:17.19, 20)
10004 लोराना (लोरायल) (माटी के चूल्हा में मकई के डंठा झोंकइत खदेरन बहु के आँख लोरायल हल) (नसध॰ 29:129.1)
10005 लोरिकायन (गीत गेल, संगीत गेल, पनिहारिन, बखोआइन गेल,  पूरबी, बिरहा, डोमकच गेल, लोरिकायन, पमरिया गेल) (अमा॰14:12:1.10)
10006 लोरू-करड़ू (= लेरू-कड़रू) (अलगंठवा फिन फोहवा बुतरू जइसन सुमितरी के असतन मुँह में लेके लोट-पोट के गाय-भैंस के लोरू-करड़ू जइसन पेन्होवे लगल हल ।) (अल॰36:116.7)
10007 लोहचुटी (अमा॰3:6:1.3)
10008 लोहमान-अगरबती (अमा॰172:10:1.1)
10009 लोहरइनी (रम॰ 5:44.6; 10:79.9)
10010 लोहरउनी (सुमितरी के माय मुसकइत येगो पुरान करिखा लगल हांड़ी में मछली धोवे ला उठावइत सुमितरी से कहलक हल - "अगे बेटी, तूँ लहसून-हल्दी-धनिया-सरसो आउर मिचाइ मेहिन करके लोढ़ी-पाटी धो-धो के पीसऽ ।" माय के बात सुन के सुमितरी लोढ़ी-पाटी पर मसाला पीसे लगल हल आउ मछली के लोहरउनी से घर महके लगल हल ।) (अल॰5:14.8)
10011 लोहराइन (जमान होइत सुमितरी के अब भान होवे लगल हल कि जमानी केता लोहराइन आउर फोकराइन होबऽ हे ।) (अल॰18:54.12)
10012 लोहार (बअछो॰ 5:24.3, 26.17)
10013 लोहार (चार चोट सोनार के आउ एक चोट लोहार के) (अमा॰25:17:2:19)
10014 लोहिआना (रमेसर ताड़ी पिए ला लोहिआल हका चखना लेके ।) (अल॰35:113.11)
10015 लौंग, लउँग (=मलमास) (लउँग - रम॰ 5:48.17)
10016 लौंड़न-छौड़न (नसध॰ 22:88.15)
10017 लौंडा (लौंडन के भीड़) (नसध॰ 16:71.2; 26:117.8)
10018 लौंडा, लौण्डा (~ के नाच) (मसक॰ 54:20)
10019 लौंड़े-छवड़न (नसध॰ 30:134.8)
10020 लौघड़ाना (नसध॰ 31:135.28)

37. रकारादि शब्द

9378 रंग (~ लाना) (नसध॰ 14:63.1)
9379 रंगदार (मकस॰ 62:12)
9380 रंगदार (~ के धमकी) (अमा॰19:13:2.7)
9381 रंगदारी (अमा॰172:11:1.26; मकस॰ 62:6)
9382 रंगदारी (दुखिया के बेटा हम्मर दुआरी पर आके लगलक दादागिरी करे । अपनहीं कहथिन दरोगा जी ! विधवा बूढ़ी माय मजूरी करे आउ ओकर जवान बेटा रंगदारी करे, ई ठीक बात हे ?) (अमा॰20:8:1.23; 27:6:2.2, 3)
9383 रंगन, रगन (गया पींडदान के बारे में लोग हर साल अप्पन कुल पित्तर सब के सरग जाय ला दान करऽ हथ । रूपिया से लगाइत खटिया बिछावन जूता-छाता, छड़ी आउर न जानुँ कउन-कउन रगन के चीज दान करऽ हथ । मरला के बाद कउन जानऽ हे कि सरग इया नरक गेलन । ई सब लफन्दरइ न तऽ का हे भइया ।; येकर वाद आजाद झोला से करांति के कई रंगन के परचा सब के देइत कहलन हल) (अल॰35:112.16; 38:121.15)
9384 रंगरंजन (अमा॰16:6:1.16, 17)
9385 रंगरेज (= अंगरेज) (नसध॰ 20:81.24)
9386 रंगरेज (= अंगरेज) (मसनद लगा के, मुँह में पान डाल के, जखनी कचहरी लगावऽ हलन तब ~ भी बहरीय खड़ी रहऽ हल । मजाल का कि कोई बिना हुकुम के भीतरे घुस जाय ।) (नसध॰ 7:29.10)
9387 रंगरेजी (= अंग्रेजी) (लावऽ, खतिआन दऽ ! जनसेवक जी से पढ़वा लाऊँ । ओहु तो कैथी हिन्दी जानवे करऽ हथी । हिन्दी के अलावे ऊ रंगरेजीओ फुर्र-फुर्र पढ़ दे हथी ।) (अमा॰30:14:2.24)
9388 रंगल (~ सियार) (नसध॰ 24:97.22)
9389 रंगलेपन (अमा॰16:6:1.16, 17)
9390 रंडी (नसध॰ 42:185.28, 29, 186.4, 187.3)
9391 रंथी (= अरथी) (अलगंठवा रोवइत-कनइत चाचा जी के साथ बस पर चढ़ के फतुहा इमलिया घाट पर पहुँच गेल हल । बड़ भाय के साथ-साथ गाँव के दस-बारह लोग रंथी के साथ अइलन हल । अपन माय के कफन में लपटल देख के अलगंठवा बुमिया के छाती में मुका मार के गरज-गरज के रोबे लगल हल ।) (अल॰11.33.27, 34.6)
9392 रइअत (नसध॰ 5:22.16; 39:173.26; 40:174.14)
9393 रईस (फूटल ~) (नसध॰ 5:19.11)
9394 रउँदाना (लोग कीट-पतंग नियन रउँदाइत जाइत हथ) (नसध॰ 48:208.14)
9395 रउदा (रम॰ 6:57.8; 14:109.5; 16:127.15,17)
9396 रउदा (कहियो तो रउदा करे निज बादरकट्टु रामा, हरि-हरि कहियो निरन्तर झड़िया लगावे रे हरी ।) (अमा॰24:11:1.17; 165:7:1.9; 169:18:1.19)
9397 रउदा (गोइठवा घरवा तऽ एकदमे सेउदल हइ । जेकरा से गोइठवन गुमसाइल हइ । जब तक खुल के रउदा न उगतइ तब तक सिहरावन लगते रहतइ । रउदवा उगे पर ही घरवो बरइतइ ।) (अल॰44:152.22, 23)
9398 रकटुआ (अमा॰4:7:1.30)
9399 रकम (मुआवजा के रूप में मोट रकम के फरमाइश करना) (अमा॰25:21:2.15)
9400 रक्खल (गो॰ 3:18.21, 20.5)
9401 रक्खल (सुरक्षित ~ जाना) (अमा॰1:5:1.26)
9402 रखनी (= रखैल) (नसध॰ 40:175.6, 18)
9403 रखनी ('चमार के घर हम घर-हेवाई होके रहीं ?' -'तब का हम तोर रखनी होके तोरा हीं चलीं ?') (अमा॰25:8:2.6)
9404 रखबारी (नसध॰ 32:140.3)
9405 रखल (नसध॰ 29:126.3)
9406 रग (रग-रग में) (अआवि॰ 80:2)
9407 रगड़ा (उँच-नीच, भेद-भाव, जात-पात के झगड़ा, तनिके में खून के होली, बिना बात रगड़ा ।) (अमा॰19:1:1.3)
9408 रगड़ा-झगड़ा (मसक॰ 23:22)
9409 रगत, रंगत (~ होना, ~ लगना) (नसध॰ 6:25.16, 22; 9:38.24)
9410 रगन-रगन के (नसध॰ 6:24.17; 26:116.20, 117.4; 27:119.26; 30:130.27; 32:139.7; 36:152.27)
9411 रगेदना (अआवि॰ 82:13)
9412 रगेदना (रगेद मारना) (फूब॰ 5:18.19)
9413 रचनात्मक (नसध॰ 35:150.31; 37:160.24)
9414 रछेया (सब दिना से हमनी के बाप-दादा के येहनी ~ कैलन हे; ~ बन्हन) (नसध॰ 12:55.15; 44:196.2, 3)
9415 रछेया, रछेआ (हमनी के मिलके सनातन धरम के ~ करे के चाहीं) (नसध॰ 23:94.33, 95.1; 26:114.14)
9416 रजधानी (= राजधानी) (अमा॰166:7:1.1; नसध॰ 28:123.2)
9417 रजधानी (= राजधानी) (रजधानी से गाँव तक परिवरतन के हवा बहे लगल हे । अब नो छो बड़ी सकेरे होवे के असार दिखाइ पड़ रहल हे ।) (अल॰44:145.22)
9418 रटना (= रहटना, रेहटना) (आज हम गलीय-गलीय रटऽ ही तो दू सेर चाउर मिलऽ हे) (नसध॰ 27:120.8; 33:141.24)
9419 रटना (= रहटना, रेहटना) (मजदूर धरती के जोत-कोड़ के दिन-रात रट-रट के, खून पसीना सुखा के आधा पेट खा के, का जाड़ा, का गरमी आउर का बरसात, हर मौसम में खट के फसल उपजावऽ हथ ।) (अल॰19:60.28)
9420 रटना (रटल बोली) (नसध॰ 7:29.3)
9421 रड (भाई पर लोहा के रड लेके टूट पड़लन । ... रड के चोट से कपार से खून के फव्वारा फूट पड़ल ।) (अमा॰5:17:1.13, 15)
9422 रड़ुआ (नसध॰ 4:14.23)
9423 रण्डी-बेसवा (मसक॰ 171:13)
9424 रतगरे (बार-बार गली दने रमेसर आउर रजेसर के हिआ रहल हल । काहे कि एक घंटा रतगरे उ दूनो के आवे ला कहलक हल ।) (अल॰21:66.15)
9425 रतजगा (~ करना) (नसध॰ 33:141.26)
9426 रतजग्गा (गो॰ 4:20.13; मसक॰ 165:28)
9427 रत-रत भर (~ जागना) (नसध॰ 5:16.8)
9428 रद (~ करना) (नसध॰ 8:31.19)
9429 रद-दस्त (कल्हे न बुधुआ बहू के ~ होल हलई । खैर कह कि बेला उहाँ तुरते पहुँच के पानी चढ़ौलक न तो ऊ मरिय जाइत हल ।) (नसध॰ 34:146.23)
9430 रद्दी (~ कागज) (नसध॰ 39:173.10)
9431 रपट (हमनी अबरी थाना में ~ कर देबो कि रघुआ चोर डकैत के गिरोह बनौले हे) (नसध॰ 34:146.13)
9432 रपेटना (उहईं रपेटलक आउ भिरु जा के बोलल) (नसध॰ 14:62.4)
9433 रब्बी (नसध॰ 9:41.18)
9434 रब्बी (चइत महिनवाँ रब्बी काटे गोरिया पिया इंजोरिया में) (अमा॰22:17:2.9)
9435 रभसना (रभसि रभसि पारे गारी हे) (अमा॰1:14:1.19)
9436 रमकरवा, रमकोरवा (बअछो॰ 12:55.29; 14:61.19)
9437 रमतरोई (~-बइगन) (नसध॰ 11:49.20)
9438 रमता जोगी (नसध॰ 12:52.18)
9439 रमाइन (गो॰ 4:21.21)
9440 रमाइन (रात के रमाइन भी पढ़ऽ हइ । जखनी रमाइन रेघा के पढ़ऽ हइ तखनी सुनताहर के हम्मर घर में भीड़ हो जा हइ ।) (अल॰10.32.3; 12:37.15)
9441 रमायन-उमायन (नसध॰ 8:36.3)
9442 रमुनिया (अगहनी धान टाल-बधार में लथरल-पथरल हल । कारीवांक, रमुनिया आउर सहजीरवा धान के गंध से सउंसे खन्धा धमधमा रहल हल ।) (अल॰7:20.25)
9443 ररइठा, रहइठा, रहेठा,रहरेठा, रहरैठा (ररइठा - रम॰ 3:33.24)
9444 ररैठा (अमा॰3:19:2.23)
9445 रविदास (जात सुधार जमात ~ संघ) (नसध॰ 46:201.30)
9446 रवेदार, रवादार (अआवि॰ 28:12; 49:1; 58:20)
9447 रसगर (मसक॰ 117:13)
9448 रसगर (~ गारी) (अमा॰1:13:1.30)
9449 रसगर (पकल बम्बइया आम सुमितरी के मुँह में सटावइत अलगंठवा कहलक हल -"लऽ, हवक के मारऽ चोभा ।  तोहरे जइसन गुदगर आउर रसगर आउर सवदगर हो ।") (अल॰29:89.5; 36:115.2; 44:153.8)
9450 रसना-बसना (तूँ हम्मर दिल में ही रसबऽ-बसबऽ ।) (अल॰42:135.21)
9451 रसम (बियाह के ~ चालू हो गेल; अठमँगरा के ~) (अमा॰13:6:1.26; 28:5:1.2)
9452 रसरी (प्रेम के रसरी टूट चलल हे, ओकरे जोड़ल चाहऽ ही) (अमा॰18:1:1.3)
9453 रसल-बसल (तइयो मगध के जनपद आउ लोक जीवन में मगही भासा रसल-बसल रहल) (अमा॰25:4:1.10)
9454 रसे-रसे (गो॰ 11:46.23; मकस॰ 47:5)
9455 रसे-रसे (= धीरे-धीरे) (अमा॰166:8:2.25, 9:1.22; 169:12:2.27; 173:13:2.7)
9456 रसोईगिरी (फूब॰ 1:3.5)
9457 रहगीर (= राहगीर) (अमा॰14:16:2.24; मकस॰ 29:4; मकस॰ 62:13; नसध॰ 13:57.25; 41:181.26; 42:185.10)
9458 रहड़ी (इतने में नारायन माली रहड़ी के खेत से बुल-सन निकलइत बोल पड़लन) (अल॰8:25.10; 44:153.6)
9459 रहतब (कहऊँ तोर मुँह से कुछ बकार निकल गेलवऽ तऽ फिन हमनी के टोला पर ~ होयत ?) (नसध॰ 26:114.4)
9460 रहता (कब॰ 58:24)
9461 रहता (~ नापना, ~ देखाना, ~ निकलना, ~ बताना, ~ पर आना) (नसध॰ 3:10.24; 5:16.20, 22.15; 8:32.30; 33:143.25, 144.20; 43:190.3)
9462 रहता (= रास्ता) (मसक॰ 114:26)
9463 रहता (= रास्ता) (जदि जतरा के समय बिलाई राह काट के भाग जाय, तब तुरते रहता पर कटकुट के चिन्ह (X) लगा देवे के चाही) (अमा॰1:9:1.29)
9464 रहता (रहते में) (मकस॰ 8.15)
9465 रहनई (गो॰ 6:32.2)
9466 रहन-सहन (नसध॰ 25:106.28)
9467 रहना-सहना (उ लोगन के भी रहे-सहे के वेवस्था करे ला हल ।) (अल॰31:96.7)
9468 रहनिहार (अआवि॰ 59:22)
9469 रह-रह के (फूब॰ 6:21.2)
9470 रहल (देश भर में हो रहल उथल-पुथल से आँख मूँदल भी न जा सकऽ हे) (अमा॰23:4:1.3)
9471 रहल-सहल (दिन-रात के बोली-ठोली से उनकर मन चूर-चूर हो जाहे । एक तो माय-बाप के चिन्ता से उनकर मन पर बोझ रहे हे, दूसरे आस-पड़ोस के मुँह चमकावे से बेचारी अलग परेशान, तीसरे लड़का वाला के तौर-तरीका से तो रहल-सहल मनोबल भी टूट जाहे ।) (अमा॰27:16:1.20)
9472 रहस (= रहस्य) (नसध॰ 45:199.23)
9473 रहाई (साइत जुर्माना से ~ हो जाय) (नसध॰ 13:59.10; 47:205.24; 48:209.22)
9474 रहेवाला (अआवि॰ 88:12)
9475 राँड़ (नसध॰ 3:13.25)
9476 राँड़-मुड़ली (रम॰ 13:97.8)
9477 राँड़ी (अमा॰166:14:2.5)
9478 राई (नसध॰ 9:37.8; 28:124.11)
9479 राकस (= राक्षस) (तों राकस नै, तों राम हऽ, आय तोहरे युग हो) (अमा॰10:1:1.9)
9480 राख (नसध॰ 7:30.18)
9481 राख-भभूत (सुमितरी के माय बटेसर के आगे केला-मिरजइ आउर मकुनदाना खजुर के पत्ता के विनल बटुरी में देइत कहलक हल -"खाय से पहिले राख-भभूत लिलार में लगा लऽ ।") (अल॰7:22.2)
9482 राच्छस (अमा॰14:12:2.14)
9483 राछस (नसध॰ 12:52.6)
9484 राज (~ ईटा जोड़े लगल) (नसध॰ 27:122.11)
9485 राज (= रहस्य) (एकरा पीछे जरूर कोई राज हे) (नसध॰ 42:185.25)
9486 राज-काज (नसध॰ 30:130.29)
9487 राजनीत (नसध॰ 12:52.10)
9488 राजनीत (सब लोग पटना आउर देस के राजनीत के वारे में पूछे लगल हल । लोगन में जोस-खरोंस भरल हल ।) (अल॰44:151.11)
9489 राजा (कहाँ ... राजा भोज आउ भोजवा तेली) (नसध॰ 30:131.30)
9490 राजाइन (गो॰ 1:5.32)
9491 राजा-रंक (नसध॰ 35:150.28)
9492 राजी (अमा॰13:6:1.22)
9493 राड़ (गो॰ 5:26.13, 14; रम॰ 14:112.13)
9494 राड़ (आउर अब अइसन राड़ अमदी के बकसे ला चाह रहलन हे ।) (अल॰21:68.23)
9495 राड़ (कतिकउर घाम आउ ~ के बोली न सहाय; ~ न माने प्यार के बात) (अमा॰25:17:2:26; 164:20:1.8; 166:13:1.16)
9496 राड़-भूई (हम का ~ ही कि जेकरे-तेकरे साथे भाग जायब ?) (नसध॰ 14:63.27)
9497 राड़िन (हमरा पर नतिया-राड़िन जरी-जिद्दी से पड़ल हे) (अमा॰165:10:1.21, 2.12)
9498 राड़ी (नसध॰ 5:22.8)
9499 रात-बिरात (नसध॰ 26:114.29; 38:163.6)
9500 रात-बिरात (गते-गते एगो देहाती पिस्तौल खरीद लेलन जेकरा से ~ में ढेरे अमदनी होवे लगल) (अमा॰16:17:1.24)
9501 रात-विरात (हम तऽ कल्हे ही जा सकऽ ही । मुदा दू कट्ठा में धान के पतौरी लगा देली हे । ओकरा अटियाना जरुरी हे । न तऽ कोय रात-विरात के उठा के ले भागतइ । गोपाली महरा के चार कट्ठा के पतौरी उठा के ले भागलइ । आउ उत्तर भरु खंधवा में ले जा के मैंज लेलकइ ।; दिन जमाना खराब बित रहल हे । रात-विरात अब चले के समय न हे ।) (अल॰9:28.2; 16:46.26)
9502 राताराती (कब॰ 13:2)
9503 राता-राती (अमा॰170:7:1.21)
9504 राते (नसध॰ 5:16.17; 8:33.6)
9505 राते-दिने (कब॰ 1:4)
9506 राफ-साफ (केस ~ करना) (अमा॰173:6:2.8)
9507 राम भरोसे (~ सब काम छोड़ देना) (नसध॰ 48:208.6)
9508 राम मेरावल जोड़ी (गो॰ 5:23.27-28)
9509 रामजी (= एक) (अआवि॰ 31:19, 20)
9510 रामतोड़ई / रामतरोई के तेल (गो॰ 5:24.32; 7:35.4)
9511 रामन (गो॰ 3:19.30)
9512 रामन (= रावण) (अल॰43:142.18)
9513 राम-राज (गो॰ 7:36.7-8)
9514 राम-राम (~, तोरा ई सब बात कहे में घिन न बरवऽ) (नसध॰ 42:187.27)
9515 राम-सलाम (दिलदार राम, रमेसर, जालिम सिंघ आउर मोहन सिंघ भी आपस में राम-सलाम कर के एक दूसर से अलग होवे लगलन हल ।) (अल॰33:107.14)
9516 राम-सलाम (हमर तऽ रामो-सलाम छूट गेल) (नसध॰ 13:56.13)
9517 राय (नसध॰ 34:146.6; 37:160.1)
9518 राय-छितिर (सउँसे भरमजाल के एक्के झटका में ~ करके मिसिर जी हमरा यथार्थ के ढेलगर केवाल खेत में उठा के पटक देलन) (अमा॰166:8:1.3)
9519 राय-मसवारा (नसध॰ 30:134.12)
9520 राय-मसविरा (बअछो॰ 11:53.8)
9521 रार (बअछो॰ 4:20.22)
9522 रावा (गो॰ 7:35.22; रम॰ 7:58.23)
9523 रावा (~ के सरबत) (अमा॰173:15:1.24)
9524 रास (~ रचाना) (सच-सच बताव, तोर ई रास सुक्खू साथे कब से चलइत हउ ?) (नसध॰ 42:186.20, 21, 187.4, 18)
9525 रासन-काड (= राशन-कार्ड) (अल॰38:123.5)
9526 राहड़, रहड़ी (रम॰ 3:26.9, 33.24; 5:44.4; 9:70.1, 3; 9:70.2; 18:135.11)
9527 राहत (~ के साँस लेना) (नसध॰ 35:149.19)
9528 राही (नसध॰ 49:212.26, 28)
9529 रिकसा (नसध॰ 26:115.19)
9530 रिक्शा (बड़ी मोसकिल से अस्पताल से चलैत-चलैत हम घरे पहुँचली हल । न रस्ता में एक्को गो खाली रिक्शा मिलल न टेम्पू । गोड़ दुखा गेल से अलगे ।) (अमा॰24:16:1.2)
9531 रिजाइन (नौकरी से ~ कर देना) (नसध॰ 36:154.24)
9532 रिन (गो॰ 6:27.21)
9533 रिपोट (फूब॰ 2:7.13; कब॰ 17:5)
9534 रिरिआना (गो॰ 1:3.25)
9535 रिवाज (अआवि॰ 48:16)
9536 रिसतेमंद (फूब॰ 7:24.5)
9537 रिसिआना (देलियो जवाब न, खिसिअइलऽ हे तूँ - रिसिअइलऽ हे तूँ, मुदा तोहरे से हरदम जुड़इलियो हे छाती । बड़ी दिन बाद लिखऽ हियो पाती ।) (अल॰44:155.6)
9538 रिसी-फिसी (हमरा सब पता हे कि सब रिसी-फिसी अगमान-भगमान असल कोय न हे, सब कमसल हे ।) (अल॰43:143.11)
9539 रिस्ता (= रिश्ता) (नसध॰ 38:162.3)
9540 रीखी (= ऋषि) (रीखी-मुनी) (नसध॰ 37:160.26)
9541 रीत (इहे तो दुनिया के रीत हे) (नसध॰ 38:161.14)
9542 रीत-रसम (अमा॰1:9:1.2)
9543 रीत-विध (नसध॰ 15:68.7)
9544 रीति-रेवाज (लोकसाहित्य के विशाल समुन्दर लोकजीवन के लोकमानस में छिपल रहऽ हे जे ~ आउ धरम-क्रिया कलाप के समय करनी इया कथनी में परघट होइत रहऽ हे । ई विज्ञान के युग में भी परम्परा से आवइत ~ लोग के प्रभावित करइत रहऽ हे ।) (अमा॰25:12:2:5, 7, 13:1.14)
9545 रीन (गो॰ 6:30.32)
9546 रीनी (गो॰ 6:30.31)
9547 रुई (= रूई) (नसध॰ 32:138.28)
9548 रुकमिनी-थान (अलगंठवा के कोय वउसाह न चलल हल, उ लोगन के सामने । फिन बस से सब के सिलाव के खाजा खिलइते नालन्दा के खंडर आउर सटले रुकमिनी थान दिखला-दिखला के इ सबके इतिहास बतउलक हल ।) (अल॰31:102.3-4, 4)
9549 रुखी (= रुक्खी, गिलहरी) (मड़वा के दिन एगो ~ के बच्चा मार के सूप से तोप देवे के चाही । ई बात लिखल नऽ हे, बाकि खानदान में पहिलहीं से चलल आवइत हे ।) (अमा॰1:9:2.17, 10:2.5)
9550 रुढ़ (= रूढ़) (नसध॰ 38:163.18)
9551 रुनक-झुनक (नसध॰ 26:117.6)
9552 रुन-झुन (~ संगीत) (अमा॰14:13:2.21)
9553 रुनझुन-रुनझुन (~ बजना) (नसध॰ 26:115.21)
9554 रुपइया (हम रामावतार बाबू से सलाह करके आनन-फानन चार सौ रुपइया जनमासा में जाके वर के बाप के अगाड़ी में पटक देली । जिनगी में पहिला बार हमरा अनुभव भेल - 'बाप बड़ा न भइया, सबसे बड़ा रुपइया' ।) (अमा॰28:5:1.10, 12)
9555 रुपौठी (खखन में ऊ हाथ के बचल, बिआह के बेरा के ~ नारद के दे देलक) (नसध॰ 19:76.29; 39:164.18, 28)
9556 रुसना (रुस जाना) (नसध॰ 2:7.8; 44:194.15, 18, 25)
9557 रुसना (रुसल; हम रुस के अलग बइठल ही) (अमा॰6:19:1.19; 22:17:1.7, 10)
9558 रुसबत (फूब॰ 1:5.22; 3:10.1)
9559 रुसबतखोरी (फूब॰ 3:10.15)
9560 रुह-चुह (~ बगिया) (अमा॰6:19:1.21; 20:7:1.3)
9561 रूआ (= रूई) (नसध॰ 7:28.26; 39:165.16)
9562 रूख (नसध॰ 7:30.17)
9563 रूखर (नसध॰ 3:13.14)
9564 रूखानी (बअछो॰ 12:55.18)
9565 रूखी (= गिलहरी) (अलगंठवा अप्पन खाँड़ के एगो टील्हा पर बइठ के देखइत हल कि रूखी डमकल-डमकल आउर कचगर-कचगर अमरूद के कइसे कुतर-कुतर के, फुदक-फुदक के खा रहल हे ।) (अल॰13.38.20, 39.8, 10, 11)
9566 रूखे (एही बीच दखिन रूखे से कंधा पर लाठी लेले एगो अलाप करइत ...दिलदार राम अलगंठवा के दलान पर जुम गेल हल ।) (अल॰35:113.7)
9567 रूमानी (राघोबाबू के कहियो अप्पन गाम लउटे के मन करऽ हे । मगर ई हे सिरिफ एगो रूमानी विचार ।) (अमा॰13:10:1.2)
9568 रूस जाना (चुभसे॰ 2:7.17)
9569 रूसना (किसान-मजदूर आउर दरती माय के आपस में अटूट रिस्ता हे । इ तीनों के बेगराय से समाज आउर देस के भलाइ न हो सकऽ हे । जदि धरती माय रूस जाय, किसान आउर मजदूर आपस में मन मोटाव कर ले तऽ दुनिया न चल सकऽ हे ।) (अल॰19:60.24)
9570 रूसना (रूसल नीन) (नसध॰ 32:140.8; 44:194.17)
9571 रूसना, रूस जाना (अमा॰2:10:2.4; 5:11:2.18)
9572 रूसनी (झलही के बिदा करूँ, रूसनिया के बिदा करूँ । छिनरिया के बिदा करूँ, सतभतरी के बिदा करूँ ।) (अमा॰1:12:1.22)
9573 रूसवत (फूब॰ 1:6.4)
9574 रूसाना (हेडमास्टर के कोठरी से निकले के बाद हेमन्ती मुसकइत सले से सुमितरी से पूछलक हल -'राजगीर में उनखा रूसा तऽ न देलहु हल ?') (अल॰34:108.7)
9575 रूह-चुह (कब॰ 30:1)
9576 रें रें (बुतरू ढेर रहला पर कोय रें रें कर रहल हे, तो कोय टें टें । कोय खाय ला कन रहल हे, त कोय दूध पीये लागी ।) (अमा॰24:15:1.6)
9577 रेकड (~ के साथ पास करना) (अमा॰10:15:2.17; 164:9:2.15)
9578 रेकाड (गो॰ 1:10.12)
9579 रेघ (दूरा पर खड़ा होके घर से आवइत गीत के ~ सुने लगल) (नसध॰ 20:80.10)
9580 रेघ फोड़ना (मसक॰ 100:8)
9581 रेघा (बात तब के हे जब उनका दुन्नू के अभी मोंछ के रेघे आल हल) (अमा॰16:12:2.28)
9582 रेघा (सबसे पहले कारू चौधरी मन्तर उठबऽ हथ । फिन एके साथ राग में रेघा के झोर लगऽ हथ ।) (अल॰18:56.18)
9583 रेघाना (जखनी रमाइन रेघा के पढ़ऽ हइ तखनी सुनताहर के हम्मर घर में भीड़ हो जा हइ ।) (अल॰10.32.3)
9584 रेघी (पपनी सभन पर अँसुअन के रेघी छलछलायल हल) (मकस॰ 13:6)
9585 रेड़ (नसध॰ 6:25.8)
9586 रेड़ (उ का डागडर हथिन बाबूजी ? कउन कउलेज में पढ़लथिन हे । टो-टा के तऽ एक वित्ता में अप्पन लाम लिखऽ हथिन । अप्पन गाँव के कई लोगन के मुरदघट्टी पुवचा देलथिन हे । जहाँ पेड़ न बगान, उहाँ रेड़ परधान ।) (अल॰14.42.21)
9587 रेडिओ (नसध॰ 38:161.11)
9588 रेढ़ (रम॰ 3:31.1)
9589 रेढ़ (~ करना) (हाँ बेटा, तोहरे कहे पर सुमितरी के पढ़ावे के बीड़ा उठइली हल । तोहरे मदद से ही इ पढ़-लिख भी रहल हे । मुदा हेडमास्टर मुदेखली कर रहलथिन हे । अप्पन जात-भाय के लइका-लइकी सब के कबे फारम भरा के पुंगा देलथिन आउर हमनी सबके साथ रेढ़ कर रहलथिन हे ।) (अल॰20:65.30)
9590 रेढ़ (~ बढ़ाना) (नसध॰ 13:57.16)
9591 रेयान (बअछो॰ 7:34.2; 8:37.18; 9:40.14; 10:47.17; 13:58.3; 14:61.11)
9592 रेल-पेल (~ के रोकना) (नसध॰ 36:153.15)
9593 रेलम-पेल (मसक॰ 168:10)
9594 रेवाज (बअछो॰ 6:30.20; नसध॰ 11:48.21; 20:81.16, 19)
9595 रेवाज (= रिवाज) (अमा॰18:7:1.5; 24:13:1.7; 173:8:2.9; 174:7:1.5)
9596 रेसम (नसध॰ 7:29.16)
9597 रेह (गो॰ 3:18.3)
9598 रेहट (नसध॰ 9:41.26)
9599 रेहन (अमा॰14:16:2.7; मसक॰ 6:2; 98:14; 100:26)
9600 रेहाए (फूब॰ 2:7.30)
9601 रोआँसी (फिर ~ होके कहऽ हल - 'अब काबू थक गेल बउआ । मेला का जायम ? ..') (अमा॰22:16:2.2)
9602 रोआई (अमा॰12:13:2.2; नसध॰ 5:22.12; 42:186.27)
9603 रोकड़िया (अआवि॰ 31:26)
9604 रोकड़िया-मुंशी (अआवि॰ 30:2)
9605 रोकसदी (अमा॰12:10:2.22)
9606 रोकसद्दी (गो॰ 3:19.16; 6:32.25)
9607 रोकावट (नसध॰ 8:35.22)
9608 रोख (~बिगड़ना, ~ बदलना, ठकुरबारी पुरुब ~ के हल) (नसध॰ 3:10.2; 6:26.19; 31:137.20; 39:172.2; 42:184.27)
9609 रोग-बेमारी (देह जे कमजोर होल तो सौ गो रोग-बेमारी के घर) (अमा॰13:8:1.25; 165:20:2.3)
9610 रोगियाही (misprinted as रोगीयाही; दे॰ बेमरियाही) (अमा॰12:13:2.15)
9611 रोगी (नसध॰ 38:163.6, 21)
9612 रोज (रोज-रोज) (नसध॰ 37:157.11)
9613 रोजगार (नसध॰ 34:146.7)
9614 रोजगार (~ के साधन जुटाना) (नसध॰ 37:157.4)
9615 रोजी (नसध॰ 3:11.3)
9616 रोजी-रोजगार (अमा॰16:5:2.7)
9617 रोजी-रोटी (अमा॰29:5:2.32)
9618 रोना-कलपना (रो-कलप के) (नसध॰ 5:20.25)
9619 रोना-कानना (गो॰ 5:24.15)
9620 रोना-धोना (रो-धो के) (नसध॰ 5:18.23)
9621 रोपना (साग-सबजी) रोपल) (नसध॰ 25:108.9)
9622 रोपनी (नसध॰ 24:100.23)
9623 रोपनी (चट-चट रोपऽ हइ नयकी रोपनिया, कि झूमऽ हइ हो के बिभोर; मोरी उखाड़े वालन से लेके जोते, चउकियावे, गोहटा काटे वालन आउ रोपनियाँ सब खुश; ~ लेतइ झुल्ला साड़ी, आउ कमियाँ नचतै-गइतै) (अमा॰2:9:2.15; 5:12:2.1; 168:8:2.16; 169:1:1.14)
9624 रोपनी-डोभनी (बअछो॰ 4:20.1)
9625 रोपया, रोपेया, रोपेआ (नसध॰ 3:11.15, 13.5; 8:33.11)
9626 रोपल (उनकर ~ मगही बिरुआ अब फरे-फुलाय लगल हे) (अमा॰169:17:2.21)
9627 रोपा (अमा॰169:1:1.2)
9628 रोपाना, रोपा जाना (मंदिर में बियाह होवे ला दिन रोपा गेल) (अमा॰13:6:1.10)
9629 रोपायल (दूनो में जिद्द ~ हल) (नसध॰ 10:45.13, 16)
9630 रोब (~ जमना, ~ देखाना) (नसध॰ 40:174.1; 41:181.12)
9631 रोब-दाब (नसध॰ 7:29.14)
9632 रोबाई (अमा॰2:17:1.6)
9633 रोलाना-धोलाना (गो॰ 5:24.2)
9634 रोवाँ (ई सोच के सुगिया के ~ कलप जाय) (नसध॰ 44:193.10)
9635 रोवाँ (हमरा तो एको ~ न कहे बाकि का करीं ?) (नसध॰ 26:115.15)
9636 रोवाई (अमा॰10:12:1.18; 16:14:1.6; 22:16:1.15, 2:18; गो॰ 2:12.6; कब॰ 59:21; नसध॰ 41:181.11)
9637 रोवाना (गाड़ी खुले पर फिन अलगंठवा के दिमाग में माय के इयाद रोवावे लगल हल ।) (अल॰11.35.5)
9638 रोसकदी (दे॰ रोकसदी) (अमा॰13:6:1.28)
9639 रोसकदी, रोसकद्दी, रोसगदी (रम॰ 10:79.10; 13:95.5)
9640 रोसगदी (= रुखसत, गौना) (नसध॰ 23:93.6)
9641 रोहन (= रोहिणी नक्षत्र) (नसध॰ 6:23.9; 35:149.14)
9642 रोहन (रोहन अदरा के बदरा मनभावन समय सुहावन के । पिया पलंग आउ रिमझिम वर्षा बात ने बिसरे सावन के ।) (अमा॰22:17:2.15)
9643 रोहन-फोहन (नसध॰ 16:71.27)
9644 रोहनिया, रोहनियाँ (~ मोरी) (अमा॰169:1:1.1)
9645 रोहनियाँ (~ मोरी) (नसध॰ 35:149.16)
9646 रोहा-पिटी (मसक॰ 152:26; 154:3)
9647 रोहा-पीटन (कब॰ 34:3)
9648 रोहा-रोहट (केकरो मरला पर तो ~ होयबे करत) (अमा॰16:4:1.30)

36. यकारादि शब्द

9373 यथार्थ (नसध॰ 37:161.6)
9374 यादव (बअछो॰ 2:14.2; 5:24.7)
9375 येकन्नी (कोनिया घर में काठ के पेटी में रखल येकन्नी-दूअन्नी-चरन्नी-अठन्नी चोरा के जैतीपुर में घनसाम हलुआई के दूकान में गाँव के तेतर तिवारी, कंधाई साव, तुलसी भाई के मिठाई खिलावे में दतादानी अलगंठवा ।) (अल॰1:2.8)
9376 येकर (= एक्कर, इसके) (येकर अलावे अगिया बैताल हल अलगंठवा, लड़का-लड़की के साथ लुका-छिपी आउर विआह-विआह खेले में अप्पन माय के किया से सेनूर चोरा के कोय लड़की के माँग में घिस देवे में बदनाम अलगंठवा।) (अल॰1:2.2, 14)
9377 येही (नसध॰ 3:9.18)

35. मकारादि शब्द

8689 मँगिया-जरउनी (गो॰ 1:6.18)
8690 मंगजरउनी (हम्मर बउआ तनिक्को ठीक रहऽ हे, त मंगजरउनी दीदा बिदोर-बिदोर के देखे लगऽ हे) (अमा॰165:10:1.23)
8691 मंगड़ा (= मंगरा) (अमा॰6:17:1.1)
8692 मंगनी (~ में = मुफ्त में) (अमा॰174:7:1.19)
8693 मंगनी (सोहराय गांजा के विआ चुनइत कहलक -"मंगनी के चनन रगड़बऽ लाला, त लाबऽ न, भर निनार । ओही बात हे इनखर । अइसन हदिआयल जइसन दम मारऽ हका कि एक दम में सब गांजा भसम हो जा हे ।") (अल॰8:25.7)
8694 मंगाई (तोहनी तो अब जान गेलें कि हम देहात से ~ छोड़ देली) (नसध॰ 41:184.4)
8695 मंगिया (ननदी के ~ पर बोरसी, सांझे-बिहने उलटऽ हे) (अमा॰166:14:2.6)
8696 मंगिया-धोवउनी (अमा॰165:10:2.4)
8697 मंजधार (ले डूबऽ हे एक पापी नाव के ~ में) (अमा॰174:6:2.35)
8698 मंजल (= मंजा हुआ) (~ देबसिया) (नसध॰ 32:138.3)
8699 मंजिल (मसक॰ 11:29)
8700 मंझली (~ बहिन) (अमा॰5:15:1.3; 169:17:2.6)
8701 मंतर (मसक॰ 26:21)
8702 मंतर (~ फूँकना; ~ पढ़ाना) (नसध॰ 14:60.15, 61.19)
8703 मंतरी (= मान्त्रिक) (फिन सब मंतरियन अप्पन घर बाँधऽ हथन मंतर से, जेकर अवाज सुनइ पड़ रहल हल ।; मंतरियन सब झारइत-झारइत थक गेते गेलन हल ।) (अल॰18:55.21, 56.1; 26:78.18)
8704 मंत्र-मुग्ध (नसध॰ 46:204.21)
8705 मंत्री (नसध॰ 28:124.18)
8706 मंदिल ( = मंदिर) (मंदिल में करिया कोयला अइसन महादे जी के लिंग इयानी सिउलिंग गड़ल हे ।) (अल॰16:48.23, 49.26)
8707 मंसूरी (= एक प्रकार के धान) (बाँध के बोझवा हम लायम खलिहनमा । सीता मंसुरिया आउ टैचुन नगीनमा ॥) (अमा॰30:11:1.16)
8708 मइँजना (गो॰ 1:7.19)
8709 मइंजना (रम॰ 10:81.24)
8710 मइंजना (= मैंजना, रगड़ना) (हेमन्ती इनार पर एड़ी से रगड़-रगड़ के कड़ाही आउ कठौती मइंज रहल हल ।) (अल॰44:152.1)
8711 मइगर (रम॰ 11:85.3)
8712 मइजना (= मैंजना) (लावऽ, गांजा हो तऽ मइजऽ हिओ, न तऽ तोहनी रहऽ, हम जा हियो ।) (अल॰8:24.22)
8713 मइटरिक (= मैट्रिक) (अल॰30:94.24)
8714 मइदान, मैदान (रम॰ 10:82.22)
8715 मइन (रम॰ 5:49.22)
8716 मइया (अमा॰12:5:1.25; 13:16:2.2; गो॰ 6:28.24, 29.30, 30.30; मसक॰ 34:12; नसध॰ 4:14.26)
8717 मइया गे ! (मसक॰ 33:1)
8718 मइया-दइया (घर भर मइया-दइया बाप-चचा दरजन, खँचिया भर भइया-बहिन से तोपल हे दुआर ।) (अमा॰22:6:2.21, 25)
8719 मइया-बप्पा (न करतई बिआह कउनो, त ~ का अँचार लगयतई एकरा ? आजतक कउनो बेटी कुँआर रहल हे ?) (अमा॰167:10:1.30)
8720 मइया-बेटिया (तीनो ~ गाँव में मटरगस्ती करऽ हइन) (नसध॰ 16:69.20)
8721 मइल, मैल (= मैला) (नसध॰ 3:9.1)
8722 मइल-कुचइल (हम ऊ झोला झाड़ली तब ओकरा में से पुरान अचकल-पचकल अलमुनिया के कटोरा आउ एगो फट्टल पुरान मइल कुचइल चद्दर मिलल) (अमा॰19:12:2.32; 22:16:1.12; 173:16:1.19)
8723 मइसना (मसक॰ 53:27, 28)
8724 मइसना (थारी-लोटा मइस के, बानी-उनी काढ़ के, पानी-कांजी भर के, चुल्ला-चक्की नीप के) (अमा॰7:6:2.4)
8725 मइसना (बरतन ~) (नसध॰ 1:5.13)
8726 मइसा जाना (मसक॰ 50:8)
8727 मउअत (जलम आउ ~) (अमा॰5:15:2.14; 15:20:1.17; 173:16:2.29)
8728 मउअत (जिनगी-मउअत के कउन ठिकाना) (नसध॰ 11:48.12; 42:184.18)
8729 मउअत, मउगत (मसक॰ 27:19; 31:12; 119:19; 120:13; 121:17, 19)
8730 मउगी (अमा॰5:9:1.20; 14:1:1.9; 163:18:1.11)
8731 मउगी, माउग (रम॰ 8:69.17; 10:82.12; 12:91.11; 17:131.6)
8732 मउनी (कब॰ 9:16; रम॰ 11:85.18)
8733 मउराना (सबके आँखो मउराय लगल हल) (नसध॰ 5:23.1; 8:35.25; 44:195.1)
8734 मउरी (रम॰ 19:143.1)
8735 मकई (~ के मोछ) (आलू के नया लत्तड़ हरियर छटा फैला रहल हे । मकई के मोछ मकरन्द मन के मोर नचा रहल हे ।) (अमा॰22:11:2.29)
8736 मकय (= मकई) (अमा॰6:15:1.8)
8737 मकरजाला (अमा॰14:8:2.17)
8738 मकुनदाना (सुमितरी के माय बटेसर के आगे केला-मिरजइ आउर मकुनदाना खजुर के पत्ता के विनल बटुरी में देइत कहलक हल -"खाय से पहिले राख-भभूत लिलार में लगा लऽ ।") (अल॰7:22.1)
8739 मकुनी (रम॰ 4:40.15)
8740 मक्खन (ओही हमरा ला मक्खन मिश्री हल आउ हल हम्मर जशोदा मइया !) (अमा॰22:17:1.12)
8741 मक्खी निगलना (नसध॰ 6:24.20)
8742 मखना (तेसर अमदी बोलल कि जे बड़ तेज रहऽ हे उ तीन जगह मखऽ हे ।) (अल॰4:12.8; 7:22.17)
8743 मखाना (जनता के खून बेच-बेच के, ताल मखाना खाइत हे । सीधा जनता पहचाने नऽ, जन-नेता कहलाइत हे ॥) (अमा॰26:8:1.22)
8744 मगज (नसध॰ 26:117.21)
8745 मगज (आर॰सी॰चिल्डर्स उँचगर मगज के परिचय देलन) (अमा॰23:9:2.12)
8746 मगन (ऊ ~ हल कि भौजी जंतर पेन्ह लेलक अब हमरा बिना ओकरा चैन कहाँ परत ?) (नसध॰ 14:62.15)
8747 मगन (सब अप्पन-अप्न काम करे में मगन हलन) (अमा॰28:17:1.2)
8748 मगह (बअछो॰ 15:66.12; गो॰ 1:6.22)
8749 मगह (= मगध) (~ के सपूत) (अमा॰2:4:2.19, 15:1.5; 166:7:1.1)
8750 मगहिया (= मगहीभाषी) (मगहियन के मानसिकता में; ~ भाई /बहिन; ठेठ ~) (सपरते रह गेली कि उनका से सिफारिश करवा के मगही में एम॰ए॰ के पढ़ाई शुरू करवावल जाय, लेकिन के जानित हल कि ऊ हमनी मगहियन के साथ होके अनाथ कर जयतन) (अमा॰1:2:1.16, 20, 4:2.16, 17:1.30; 12:4:2.6; 28:4:1.1, 6, 15, 25; 30:5:2.9, 6:1.29)
8751 मगही (गो॰ 3:17.2)
8752 मगही (~ भासा में लिखे बोले के परम्परा के पुनः स्थापना 'अलका मागधी' के एकमात्र उद्देश्य रहत; 29 अक्टूबर के हर साल अप्पन बाबूजी के इयाद में देव, औरंगाबाद में देश भर के नामी-गिरामी कवियन के जमावड़ा में भी कवि सम्मेलन के शुरुआत हम्मर ~ गीत से होवऽ हल; सपरते रह गेली कि उनका से सिफारिश करवा के ~ में एम॰ए॰ के पढ़ाई शुरू करवावल जाय, लेकिन के जानित हल कि ऊ हमनी मगहियन के साथ होके अनाथ कर जयतन) (अमा॰1:1:1.4, 2:1.21, 29, 32, 4:2.14; 12:4:2.7, 12, 17; 30:6:1.21, 29)
8753 मचमचउवा (~ जूता पेन्हले) (नसध॰ 40:174.9)
8754 मचमचाना (जुता ~) (नसध॰ 37:156.14)
8755 मचलना (मचल उठना) (नसध॰ 26:117.23)
8756 मचिकाना (गो॰ 6:28.18)
8757 मचिया (गो॰ 4:22.14; नसध॰ 1:2.21; 5:17.1)
8758 मचोड़ना (= मचोरना) (हाथ ~) (अमा॰16:13:1.25)
8759 मच्छड़ (अमा॰12:6:2.10; 170:8:1.31; नसध॰ 5:16.8; 37:159.13)
8760 मच्छड़दानी (अमा॰170:8:1.31)
8761 मच्छी (सउँसे गाँव ~ निगलले हे । कोई ओकाइत हे ?; कुत्ता के पेट में घीव आउ अदमी के पेट में जीते मच्छी पचऽ हे ? ऊ उगिलवे करत ।; नाक पर ~ बइठे देना) (नसध॰ 14:60.30, 61.2, 16)
8762 मछरी (नसध॰ 6:25.26; 30:132.15)
8763 मछलोका (अरे भाय, तेतर तिवारी तऽ मछलोका हका । कादो पितम्बरपुर में सरपंच साहब इयानी इनरदेव सिंहा के एगो खेत में पिछान्त बूट बुनइलइ  हल । उ तेतर तिवारी के जजमान भी हथिन न । भर पांजा उखाड़ के ले अइलन अउर का । चलऽ, अब देर मत करऽ ।) (अल॰29:89.28)
8764 मछियाना, मछिया जाना (साँझ के बैलन मछिया गेल हे) (नसध॰ 37:158.5)
8765 मजकिया (नसध॰ 9:42.11; 36:152.21)
8766 मजगर (नसध॰ 27:118.22)
8767 मजगर (मगही के हर एक विधा में मजगर रचना भेल; सबसे मजगर तो हल विजय जी के गजल - हाल अछते परीत हो गेली ।) (अमा॰25:22:1.4; 26:15:2.28)
8768 मजगुत (= मजबूत) (मजदूर सब एक होके अप्पन-अप्पन किसान के काम-धाम छोड़-छाड़ के पटना-कलकत्ता जाइला बउआ रहलन हल । किसान भी दूसर-दूसर गाँव के मजदूर से खेती करावे ला आपस में बइठकी पर बइठकी कर रहलन हल । मुदा मजदूर के संगठन बड़ मजगुत हल ।) (अल॰15.43.15)
8769 मजगूत (रोझन के जूता बड़ा ~ हो हल) (नसध॰ 10:43.29; 17:72.19; 22:87.29)
8770 मजगूती (नसध॰ 22:87.29)
8771 मजमा (अमा॰174:11:1.12)
8772 मजमा (दुन्नू में उठा-पटक होवे लगल । मजमा जुट गेल । मल्ल-युद्ध करते-करते दुन्नू के कुर्ता-धोती चिथनी-चिथनी भे गेलन आउ दुन्नू भाय हो गेलन एकदम नंगा ।) (अमा॰16:13:1.25)
8773 मजमा (दुन्नो थाना में चलऽ । थाना में पूछ-ताछ होयत । हियाँ मजमा बटोरे के जरूरत न हे ।) (मकस॰ 27:11)
8774 मजाक ( ~ सूझना) (नसध॰ 3:13.15; 36:152.22)
8775 मजाल (नसध॰ 7:30.13; 8:36.11; 34:145.11; 38:163.21)
8776 मजिस्टेट (= मजिस्ट्रेट) (अल॰44:148.9)
8777 मजुर (रम॰ 8:63.20, 21)
8778 मजूर (अमा॰13:12:2.17, 19; 163:5:1.26; 165:22:1.27; बअछो॰ 8:39.1; 9:40.5; गो॰ 1:8.15; मसक॰ 138:1; नसध॰ 33:143.29; 39:172.8; 49:210.5)
8779 मजूरनी (खेतमजूरनी) (अमा॰5:8:1.24)
8780 मजूरा (= मजदूर) (नसध॰ 18:74.17)
8781 मजूरिन (मसक॰ 138:2)
8782 मजूरिन (= मजूरनी) (गरीब मजूरिन सो रुपइया कहाँ से लावत सरकार !) (अमा॰21:11:2.30)
8783 मजूरी (अमा॰3:13:1.19; 15:12:1.13; बअछो॰ 3:18.18; 4:22.29; 8:39.3; गो॰ 3:18.26; मसक॰ 18:10; 35:26; नसध॰ 33:144.10; 37:157.1; 40:174.15)
8784 मटका के कुरता (कब॰ 7:3; 21:2-3)
8785 मटकाना (आँख मटका-मटका के) (नसध॰ 26:117.11)
8786 मटकी (नसध॰ 3:12.7)
8787 मटकी (~ मारना) (अमा॰17:19:2.20)
8788 मटकुइयाँ (मुद्रिका सिंह के कहानी में जे घटना उजागर भेल हे, ऊ बलुआही ~ के पानी नियन हे । अगरचे ओकरा छान के पियल जाय, त ठंढा भी लगत आउ मिट्ठा भी) (अमा॰172:12:2.15)
8789 मटकोर (मटकोर के विधि में घर आउ बाहर के नेवतल औरत गीत गा-गा के गाँव से बाहर खेत में मट्टी कोड़े जा हथ) (अमा॰1:12:1.25)
8790 मटखान (उहाँ के गोरकी माटी से देवाल खूब बढ़िया लिपा हल आउ गोर चमके लगऽ हल । से आजकल बाला पर जने-तने ढेर मानी ~ खना जा हल ।) (नसध॰ 41:180.1, 2, 181.11, 13; 42:185.8; 43:190.13)
8791 मटमटाना (नसध॰ 39:165.13)
8792 मटरगस्ती (तीनो मइया-बेटिया गाँव में ~ करऽ हइन) (नसध॰ 16:69.20)
8793 मटाघिसी (पइस, परतिभा आउ बाकी हाव-भाव से जमुना जी के मटाघिसी चल रहल हल) (अमा॰16:15:1.17)
8794 मटिआना (रम॰ 15:116.23)
8795 मटिआना (येगो अधवइस मरद दिसा फिर के हाथ में लोटा आउर ओकरे में गोरकी मिट्टी, कान पर जनेऊ धरके हाथ आउर लोटा मट्टी से मटिआ रहल हल ।) (अल॰3:6.11)
8796 मटियाना (मसक॰ 114:24)
8797 मट्टी (अआवि॰ 109:5)
8798 मट्टी (मटकोर के विधि में घर आउ बाहर के नेवतल औरत गीत गा-गा के गाँव से बाहर खेत में ~ कोड़े जा हथ; ~ के माधो महादेव तब बनऽ हे; हम्मर सब सपना मट्टी में मिलाके रख देलक) (अमा॰1:12:1.27, 29; 2:8:1.15; 16:8:2.32)
8799 मट्टी (येगो अधवइस मरद दिसा फिर के हाथ में लोटा आउर ओकरे में गोरकी मिट्टी, कान पर जनेऊ धरके हाथ आउर लोटा मट्टी से मटिआ रहल हल ।) (अल॰3:6.11)
8800 मट्ठा (गोवार ही कि ठट्ठा, मड़ुआ के रोटी आउ कोहा भर मट्ठा; पढ़े लिखे से कउन काम, भैंस चराम तऽ मट्ठा खाम ।) (अल॰43:139.24, 144.7)
8801 मडर (= मर्डर) (कब॰ 12:15; 58:14)
8802 मड़वा (~ के दिन एगो रुखी के बच्चा मार के सूप से तोप देवे के चाही । ई बात लिखल नऽ हे, बाकि खानदान में पहिलहीं से चलल आवइत हे ।) (अमा॰1:9:2.17; 3:13:2.29)
8803 मड़वा (चट मड़वा पट बिआह) (अमा॰171:5:1.29; 172:5:2.20)
8804 मड़वा-भतवान (अआवि॰ 80:7)
8805 मड़सटका (नऽ वइठे ला खटिया तोरा, खाहऽ तूँ मड़सटका, जे अपने खुद बासी खाके, दिन भर काम डँटइतो ।) (अमा॰23:20:1.16)
8806 मड़ोड़ना (मसक॰ 160:5)
8807 मड़ोरनई (नसध॰ 5:17.14)
8808 मढ़ाना (चानी सींग मढ़ैबो) (नसध॰ 26:115.26)
8809 मताना (सुमितरी अप्पन देह के ढीला छोड़ देलक हल जइसे डागडर रोगी के मता के ऑपरेशन करे लगऽ हे । सुमितरी ओइसने मात गेल हल ।) (अल॰36:116.9)
8810 मतारी (बअछो॰ 3:18.13)
8811 मतारी (कहत मोरा लाज लगे, सुनत परे गारी । सास के पुतोह लगे, ससुर के मतारी ॥) (अमा॰25:18:1.27)
8812 मतारी (मतारी दू पइसा ला दिनभर झूठ-सच करइत रहऽ हई आउ बेटा बाघ हो गेलई हे) (नसध॰ 12:55.6)
8813 मति (~ मार देना) (नसध॰ 24:97.3)
8814 मति-गति (~ सब तोरो मर गेल, बिन निसा के सनक गेलऽ) (अमा॰174:13:2.5)
8815 मथझक्की (~ सड़िया) (मसक॰ 100:5)
8816 मथना (नसध॰ 35:151.9)
8817 मथपच्ची (मसक॰ 97:2)
8818 मथबत्थी (चुभसे॰ 3:11.8)
8819 मध (जब तक छत्ता में ~ रहऽ हे तबे तक मधुमक्खी छत्ता में रहऽ हे) (अमा॰173:8:1.8)
8820 मधेस (~ अदमी) (नसध॰ 36:153.31; 49:210.18)
8821 मधेसा (तब हम टेनी के बाबूजी के सभापति बनावइत ही । ओही हमनी में मधेसा हथ ।) (नसध॰ 33:143.7)
8822 मन (ओकर मन के साथे गोड़ भी मन-मन भर भारी उठ रहल हल; ~ टोना) (नसध॰ 35:152.16; 40:175.27)
8823 मन (मन-दू-मन मजदूरी लेके, चललइ सीना तान के) (अमा॰18:11:1.20)
8824 मन ओझराना (मसक॰ 60:17-18)
8825 मन मारे आउ पेट सुखावे, तब टका के भेंट करावे (गो॰ 3:18.23-24)
8826 मनकमना, मनकामना (नसध॰ 5:21.12; 8:33.17)
8827 मनगर (सिधेसर तिवारी जलवार नदी में डूबकी लगा के आलूदम भात-दही आउर अचार मनगर चट करे लगलन हल ।) (अल॰43:143.15)
8828 मनझान (रम॰ 3:35.9; 15:116.25; 17:129.10)
8829 मनझान (जब अलगंठवा होस्टल आयल तऽ देखलक कि अलगंठवा के चचा मुँह मनझान कर के कुरसी पर बइठल हथ ।) (अल॰11.33.15; 12:37.23; 15:44.12)
8830 मनता-दनता (एगो हम्मर बाबू के दोस्त हथ । लड़का के आस में उनका लगातार सात गो लड़की हो गेल । दुन्नो औरत मरद बेहाल हो गेलन । बहुत मनता-दनता से अठवाँ में एगो बेटा भेल ।) (अमा॰27:16:1.24)
8831 मन-परान (उनकर ~ बेला के सौ-सौ आसीर्वाद दे रहल हे) (नसध॰ 39:166.12)
8832 मनबढ़ुआ (गो॰ 3:16.25)
8833 मनबढ़ू (गो॰ 6:32.14,)
8834 मनबढ़ू (~ जवान) (नसध॰ 31:136.1; 43:191.10)
8835 मनभोग (नसध॰ 7:29.18)
8836 मनमन्ता (गो॰ 7:35.17)
8837 मनमोटाव (नसध॰ 42:185.25)
8838 मन-मोटाव (= मन-मुटाव) (किसान-मजदूर आउर दरती माय के आपस में अटूट रिस्ता हे । इ तीनों के बेगराय से समाज आउर देस के भलाइ न हो सकऽ हे । जदि धरती माय रूस जाय, किसान आउर मजदूर आपस में मन मोटाव कर ले तऽ दुनिया न चल सकऽ हे ।) (अल॰19:60.24)
8839 मनरा (= मंजीरा) (कुछ लोग कमर में मनरा बांध के ताल दे रहलन हल ।) (अल॰44:145.6, 146.14)
8840 मनवाना (अप्पन बात जबरदस्ती ~) (अमा॰11:4:2.12)
8841 मनसा (मसक॰ 49:11)
8842 मनसूबा (~ बाँधना) (अमा॰10:15:2.3)
8843 मनसूबा (~ बान्हना) (नसध॰ 12:55.29)
8844 मनसोखी (मसक॰ 128:20)
8845 मनि (तनि-मनि)  (बुझा हे कि ~ निसा में ही) (अमा॰4:11:2.22)
8846 मनिता (~ मानना) (अमा॰167:14:2.18)
8847 मनिस्टर (गो॰ 11:48.13)
8848 मनी (जरी ~) (उनखर रोग में साधु जी के देल जड़िया-बुटिया बहुत फायदा कर रहलइ हे । खाली भोरवे के जरी मनी खाँसऽ हथिन ।) (अल॰18:53.17)
8849 मनी (ढेर मनी) (अमा॰1:9:2.13, 27; 3:5:1.12; 5:19:2.15; 6:13:1.24)
8850 मनी, मानी (बड़ी ~, तनि ~, ढेर ~) (मसक॰ 80:13; 127:1, 5; 142:15; 146:17, 22; 160:7)
8851 मनीता (= मनिता, मन्नत) (अमा॰13:5:2.21)
8852 मनीता (= मन्नत) (नसध॰ 6:26.24; 44:192.25)
8853 मनीता-उनीता (नसध॰ 9:40.12)
8854 मनी-बटइया (मसक॰ 114:6; नसध॰ 9:39.7; 35:149.9)
8855 मनुआना (पहर भर दिन उठ गेल हे, सूरज अप्पन रथ पर चढ़ के अकास नाप रहलन हे, मुदा तोहर कमल लेखा तन मन अभी कुम्हलाल आउर मनुआयल काहे हे ।) (अल॰20:64.11)
8856 मनुस्देवा (= एक देवता, जिनके बारे में मान्यता है कि वे घर के परिवार की रक्षा करते हैं) (शक्ति ला देवी जी, बुद्धि ला सरस्वती जी, गाँव-घर के निगरानी ला गोरइया डिहवार, डाक, फूल डाक, ईशरा डाक, लहरा डाक, त घर के परिवार के रच्छा ला टिपउर, मनुस्देवा, बाबा बकतउर आउ बराहदेव हथ ।) (अमा॰22:13:1.10)
8857 मनुहार (मसक॰ 89:14)
8858 मने (दस ~ बिगहा चाउर) (नसध॰ 6:23.28)
8859 मनेजर, मनीजर (कब॰ 14:5)
8860 मने-मने (अमा॰18:10:1.2; 167:17:2.11; नसध॰ 5:21.12, 17; 29:127.25)
8861 मनेर (चलऽ सखी चलऽ देखे मगह मनेरवा से जहाँ बसे बुद्ध भगवान गे बहिनियाँ) (अमा॰17:15:1.23)
8862 मनोरोग (नसध॰ 49:212.11)
8863 मनौती (एकर बरोबर न समुन्दर में मोती, एकरा ला हम्मर जिनगी के मनौती ।) (अमा॰26:1:2.15)
8864 मनौती-पुजौती (अआवि॰ 28:27)
8865 मन्तर (= मन्त्र) (चितरलेखा, उस्सा के बात सुन के मन्तर के जरए दुआरका में सुतल अनिरुध के खटिया सहित उपाह के, उड़ा के उस्सा के राजमहल में ला देलक हल ।; उ लोग साँप-विच्छा-कुत्ता आउर सियार के काटे पर मन्तर से झारऽ हथ ।) (अल॰16:50.22; 18:54.28)
8866 मन्दिर (अमा॰18:1:1.1)
8867 मन्दिल (कब॰ 3:3)
8868 मन्नित (गो॰ 2:14.4)
8869 मन्नी (नसध॰ 12:53.28)
8870 मन्नी (~ देना) (नसध॰ 6:23.23)
8871 ममहर (अआवि॰ 59:20; कब॰ 32:8; मसक॰ 73:20)
8872 ममुहर (मसक॰ 48:16)
8873 ममोरना (नसध॰ 2:8.20; 5:16.18; 30:131.23, 24)
8874 ममोरना (ममोर के फेंक देना; मूड़ी ममोर देना) (अमा॰10:7:2.9; 173:11:1.26, 12:1.21, 22)
8875 ममोसर (= मयस्सर) (न कहियो बेचारी के गड़ी-छोहाड़ा ममोसर, न घीउ) (अमा॰17:8:1.20)
8876 ममोसर (= मयस्सर) (बड़ी महीना के बाद अइसन सवदगर खिचड़ी ममोसर हो रहल हे ।) (अल॰42:133.11)
8877 मया (= माया) (महतो के ई कनकनी  में खाली गोड़ जाइत देख के उनका ~ लगल) (नसध॰ 10:45.7)
8878 मयूख (गो॰ 6:28.32)
8879 मर धँस के (~ आन्दोलन करऽ तूँ, सभा करऽ तूँ, किताब लिखऽ तूँ आउ उद्घाटन-भाषण-विमोचन करके महान विभूति के पद ऊ लेथुन) (अमा॰18:13:2.8)
8880 मरखंडा (हो जतवऽ परुआ मरखंडा कहावल) (अमा॰3:16:1.24)
8881 मरखाह (रम॰ 5:49.23)
8882 मरजाद (बराती एक दिन आवऽ हल, दुसरका दिन रुकऽ हल, फिर तिसरका दिन बिदाई होवऽ हल । बीच वला दिन के ~ कहल जा हल । ~ के रात में धरम-संस्कृति आउ शादी के विधान हल ।) (अमा॰171:5:1.20)
8883 मरजी (अमा॰12:14:1.23; 24:5:2.15)
8884 मरद (नसध॰ 1:2.16; 1:5.7)
8885 मरदई (= मरदानगी) (देश के खड्ड में जाय से रोकऽ, मरदई एही में मानऽ तूँ ॥) (अमा॰26:8:1.8)
8886 मरद-मानुस (घर के ~ सब अप्पन-अप्पन काम पर शहर च गेलन हल) (अमा॰12:13:1.7)
8887 मरदाना (मरदनवाँ) (नसध॰ 1:5.1, 6.8)
8888 मरदूद (फूब॰ 4:17.2; फूब॰ 6:22.18)
8889 मरदे (छुच्छे-सुक्खल रोटी कइसे खाई रे मरदे ?) (अमा॰165:8:1.11)
8890 मरना-मुरझाना (मरइत-मुरझइत) (गो॰ 7:35.6-7)
8891 मरना-हरना (कुच्छो रहथ, हलखिन बेचारा गरीब ले भगमाने । शादी-बियाह, मरला-हरला में सबके सहायता कर दे हलथिन ।) (अमा॰6:15:1.17)
8892 मरनी (अमा॰163:15:1.13)
8893 मरनी-जीनी (नसध॰ 11:49.4)
8894 मरनी-सराध (शास्त्री जी जात-पाँत, तिलक-दहेज, ~ के भोज के खिलाफ हलन) (अमा॰170:6:1.26)
8895 मरनी-हरनी (अमा॰166:11:1.7; बअछो॰ 4:22.8; कब॰ 53:8)
8896 मरनी-हरनी (अपने लोग के भी मजदूर सबके अप्पन समांग समझे के चाही । खेत-खलिहान, सादी-विआह, मरनी-हरनी आदि में मजदूर लोग लगल रहऽ हथन ।) (अल॰19:61.20)
8897 मरबे करतई (बअछो॰ 15:67.20)
8898 मर-मजूरी (मसक॰ 138:20)
8899 मरमराना (मरमरा जाना) (नसध॰ 1:1.28)
8900 मर-मसाला (मसक॰ 49:12)
8901 मर-मुझ के रहना (गो॰ 6:32.33)
8902 मर-मैदान (मसक॰ 101:15)
8903 मर-मोकदमा (गो॰ 4:21.5; कब॰ 47:24; रम॰ 5:46.22)
8904 मर-मोकदमा (हलुमान गढ़ी जलवार नदी के कछार पर येक छोट-मोट तीरथ धाम के महिमा से जानल जाय लगल हे । मुदा मर-मोकदमा से पीड़ित हे हलूमान गढ़ी ।) (अल॰43:140.13)
8905 मरल (गो॰ 1:1.23; नसध॰ 3:9.7)
8906 मरलकन (~ लइकन) (नसध॰ 1:6.17)
8907 मरलका (~ लइका) (अमा॰173:16:2.26)
8908 मरवाना (राजा साहेब शेर के मरवावे के जल्दी उपाय करथ) (अमा॰23:7:2.23)
8909 मरहम-पट्टी (नसध॰ 41:182.13)
8910 मर-हेरा जाना (अमा॰165:7:2.8)
8911 मराना (अप्पन अउरत के बात सुनके बटेसर कहलक हल कि पुरवारी अहरा में मछली मरा रहल हल ।) (अल॰5:14.1)
8912 मरी (अमा॰163:15:1.12; रम॰ 13:99.15)
8913 मरी (कल से महतो के ~ फेकना बंद कर दे) (नसध॰ 23:96.16)
8914 मरी (मरे पशु का शव) (बअछो॰ 1:10.19, 21; 11:51.11, 13, 52.5; 13:59.13; 14:67.20, 26, 27, 28)
8915 मरुआना (मरुआल चेहरा लेले जब दरोगी जी घरे पहुँचलन त साँझ-बत्ती के टैम हो रहल हल ।) (अमा॰29:12:2.3)
8916 मरुसी (आज वसन्तपुर तरन्ना में अगहनी ताड़ी पीए ला रामखेलामन महतो के जमाइत जुटलन हल । रामखेलामन महतो बड़गो पिआंक हथ । अप्पन मरुसी अट्ठारह विघा खेत ताड़ी-दारु-गांजा-भांग में ताप गेलन हे ।) (अल॰8:23.8)
8917 मरोड़ना (मूड़ी मरोड़ के दहेज लेना कोई इन्सानियत हे ?) (अमा॰29:14:1.13)
8918 मलकना (एक-ब-एक मलका मलके लगल) (नसध॰ 6:27.13)
8919 मलकना (चमके बिजुलिया मलके चम-चम चम-चम, हरि-हरि ठनका ठनके झपसी लगावे रे हरी ।) (अमा॰169:18:1.30)
8920 मलकना (मलका ~) (हहा के बरसा बरसे लगल हल । रह-रह के मलका मलक रहल हल जेकर इंजोर अंगना से पछिआरी घर तक झलका दे हल ।) (अल॰42:134.1)
8921 मलका (~ मलकना) (हहा के बरसा बरसे लगल हल । रह-रह के मलका मलक रहल हल जेकर इंजोर अंगना से पछिआरी घर तक झलका दे हल ।) (अल॰42:134.1)
8922 मलका (एक-ब-एक ~ मलके लगल) (नसध॰ 6:27.13)
8923 मलकिनी (गो॰ 3:20.3; मसक॰ 63:21; 148:21; नसध॰ 39:171.2)
8924 मलकीनी, मलकिनी (अमा॰3:11:1.22; 163:10:1.5, 18, 20; 172:15:2.1)
8925 मलटरी (= मैट्रिक) (सुमितरी के नानी के टोला-टाटी के अउरत-मरद इ परचार करे में लगल हल कि जब से छउड़ी मलटरी पास कइलकइ तब से ओकर पैर जमीन पर न रहऽ हलइ, धइल न थमा हलइ । रोज-रोज धमधमिया साबुन से नेहा हलइ । काजर-विजर आउर टिकूली साट के गुरोगन के तेल माथा में पोर के, चपोर के, जूरा बाँध के छीट के साड़ी पहिन के चमकाबऽ हलइ, झमकाबऽ हलइ ।) (अल॰32:103.17)
8926 मलट्री (= मैट्रिक) ("अलगंठवा भी पढ़ऽ हो न भउजी ?" "हाँ, पढ़ऽ हो, इ बरिस मैट्रीक पास करतो ।" चेहायत सुमितरी के माय कहलक हल - "आँय, बबुआ मलट्री में पढ़ऽ हो ? बाह, इ लइका बड़ होनहार होतो भउजी । एही सबसे छोटका न हथुन ?") (अल॰6:17.22; 10.30.2, 24, 31.19)
8927 मलपुआ (नसध॰ 33:143.32)
8928 मलपेटी (अआवि॰ 30:24; 31:3)
8929 मलमली (अइसन ~ आउ कनकन सोरा हावा हमरा इयाद से न बहल हल) (नसध॰ 27:118.17, 120.22)
8930 मलमास (~ मेला) (राजगीर में मलमास मेला लगल हल । मलमास मेला तीन वरिस पर लगऽ हे । जहाँ गरम कुंड में असनान के पुन्न होवऽ हे ।) (अल॰31:95.16, 17, 18, 19)
8931 मललदवा (अआवि॰ 30:15)
8932 मलवा (मसक॰ 72:8)
8933 मलसिकार (रम॰ 13:97.12)
8934 मलहोरी (अमा॰1:14:1.10)
8935 मलारना (बड़ी मलार के हाथ लफाथिन) (अमा॰3:19:2.30)
8936 मलारना (सत्तू खाके इतमिनान से बइठ के खैनी चुनियाबइत सुमितरी के मलारइत बटेसर कहलक हल) (अल॰14.42.30)
8937 मलिकाना व्योहार (बअछो॰ 10:48.5)
8938 मलिकार (बड़ी दिना ओहनी ~ खैलन हे, अब हमनी करब) (नसध॰ 32:138.14)
8939 मलिकारा (केतनो हथिन तो मलिकारे घराना के न हथिन हो) (नसध॰ 37:156.15)
8940 मलिया (= मलवा) (~ में तेल लेके) (हुनखर बिगड़ल दशा देख के भूपती घबरा गेल आउ मलिया में तेल लेके हुनखर शरीर में उनउँसे लगल ।) (अमा॰9:13:2.32; 29:12:2.18)
8941 मलेटरी (अमा॰171:7:1.24; बअछो॰ 2:16.2, 28)
8942 मसकना (मसकल) (अमा॰6:19:1.20)
8943 मसकाना (दुअरे पर बइठ बुढ़िया मटकी मार रहल हे । कोनमा में जमनकी भुंजा मसका रहल हे ।।) (अमा॰17:19:2.21)
8944 मसगुल (= मशगूल) (येकर अलावे बकरी चरावे के सौख, दिन-रात रो-कन के चचा से येगो चितकबरी पाठी किना के पतिया-लछमिनिया, गौरी, रधिया, बुधनी, सुमिरखी, तेतर तिवारी, कंधाई साव, तुलसी भाई के साथ टाल-बधार में बकरी चरावे में मसगुल हल अलगंठवा ।) (अल॰1:2.17)
8945 मसला (जउन जमीन पर सूरज बाबू मकान बनयलन हे, ऊ गरमजरुआ हे आउ मालगुजारी के रसीद जाली हे । कउनो तरह ऊ ले-दे के मसला हल करऽ हथ ।) (अमा॰172:11:2.2)
8946 मसवारा (= मशविरा) (राय ~ करना) (नसध॰ 38:162.21)
8947 मसान (तेलिया ~ के हड्डी; ~ नियन सांति छा जाना) (नसध॰ 19:76.17; 35:149.4; 36:153.23)
8948 मसानी (~ सांति) (नसध॰ 47:206.3)
8949 मसाला-उसाला (बअछो॰ 5:24.14)
8950 मसीन (= मशीन) (नसध॰ 29:126.7)
8951 मसुरिया (~ मुसकान) (अलगंठवा कहलक हल -"गाँव में जे हम्मर-तोहर नाम के उड़ौती उड़ रहल हे ओकरा सुन के तोहर मन कइसन-कइसन करऽ हो ?"  सुमितरी इ बात सुन के भीतर से हुलसइत आउर मसुरिया मुसकान मुसकइत अलगंठवा के नाक आउर गाल के अँइठइत इ कह के चमक देलक हल कि - बड़ अछा । बतासा जइसन मिट्ठा ।) (अल॰24:74.27)
8952 मसुरी (बअछो॰ 5:24.13; 16:70.1)
8953 मसुरी (~ चाले वला चलनी दे द) (अमा॰7:10:1.28)
8954 मसुरी (नेवारी के पुंज  दू-दू, तीन-तीन गो, सामने खलिहान के ऊपरे ऊँचाई पर पुआल के गाँज अलग । खेसाड़ी आउ ~ के गाँज पहाड़ नियन ।) (अमा॰5:9:2.15; 168:8:2.3)
8955 मसोमात (मसक॰ 99:5)
8956 मसोमात (= विधवा) (अपने सब से अरज हे कि अइसन भ्रष्ट सरकार के लेल हमनि सब के बेवा-राँड़, मसोमात मत बनावऽ ।) (अल॰40:125.5)
8957 मसोसना (मन मसोस के रहना) (अआवि॰ 41:13)
8958 मस्जिद (अमा॰18:1:1.1)
8959 मस्ती (नसध॰ 26:116.1)
8960 महजिद (एक्के बगइचा में जइसे किसिम-किसिम के फूल हे । कहूँ मंदिर, कहूँ महजिद, गीता आउ कुरान हे ।।) (अमा॰14:7:1.19)
8961 महटरनी (मसक॰ 35:20)
8962 महत (= महत्त्व) (नसध॰ 22:89.27)
8963 महत (= महत्त्व) (आउ हम पइसा के महत कहिना देली ?) (मकस॰ 11:17)
8964 महत (= महत्त्व) (एकरा में कउची हे जे खानदान ला बड़ा जरूरी हे आउ ~ रखऽ हे ?) (अमा॰1:8:1.22)
8965 महतमाइन (एगो नदी के नाम) (गो॰ 1:6.23)
8966 महतवाइन (बअछो॰ 5:25.22, 26.5; नसध॰ 7:30.30; 8:32.24)
8967 महतवाई (अमा॰168:8:2.20)
8968 महतवाड़ा (रम॰ 13:96.16)
8969 महतो जी के न दोसर गदहा आउर न मँगरा-मँगरी के दोसर धोबी (गो॰ 3:17.19-20)
8970 महतो-महतवाइन (अमा॰168:8:1.2)
8971 महत्त (= महत्त्व) (अलका मागधी के ~) (अमा॰18:20:2.2)
8972 महना (मट्ठा) (बअछो॰ 2:17.10)
8973 महनी (रम॰ 11:83.11, 12)
8974 महपोथा (डॉ॰ राम प्रसाद सिंह मगही लोक-साहित्य के समुन्दर के थाह लगावे के जतन कैलन हे आउ लोक-साहित्य के लगभग सब विधा में महपोथा तइयार कैले हथ) (अमा॰25:4:1.18)
8975 महबरा, महवरा (= मुहावरा) (पाठक के जान के अचरह होयत कि डॉ॰ सिंह मगही महबरा के भी लोकोक्ति साहित्य में ही रख देलन हे । इनकर कहनाम हे कि महबरा भी लोकजीवन में कहे के एगो उक्तिए हे ।) (अमा॰25:18:2.6, 7, 9, 11, 14, 16, 18, 24)
8976 मह-मह (~ महकना) (नसध॰ 15:68.12)
8977 महमूली (= मामूली) (औरतानी महमूली बात सुरसा के मुँह नियन फैलते जा रहल हल आउ ओके रोके के कोई नुस्खा न सूझ रहल हल) (मकस॰ 17:5)
8978 महरानी (अमा॰173:20:1.20)
8979 महरानी (= महारानी) (मकस॰ 14:4)
8980 महातम (= माहात्म्य) (समाज में बेटा के ही महातम मानल जाहे ।) (अल॰34:110.4)
8981 महात्मा (नसध॰ 33:143.29)
8982 महादे (नसध॰ 9:36.24)
8983 महादे (= महादेव) (अमा॰11:8:1.23)
8984 महादेथान (बिहारशरीफ के मगही में 'महादेथन') (अमा॰165:8:1.21)
8985 महान (नसध॰ 36:153.20)
8986 महामंतर (ई प्रकार महात्मा गाँधी के 'अँग्रेजो भारत छोड़ो' आउ 'करो या मरो' के महामंतर से अजाद हो गेल मगह जनपद आउ सुन्दर भारत देश) (अमा॰26:6:2.29)
8987 महामारी (नसध॰ 34:145.9)
8988 महारत (दुन्नो अप्पन-अप्पन काम में ~ हथिन) (अमा॰16:18:2.9)
8989 महाल (फूब॰ 3:9.12)
8990 महाल (सोनमाँ महाल हे, बिगहा-बारी न !) (मसक॰ 95:13)
8991 महासे (= महाशय) (नसध॰ 28:123.29)
8992 महासे (= महाशय) (जुवती पूछलक - 'महासे, ई का कर रहलऽ हे ?') (अमा॰25:14:1:21)
8993 महिन्ना (चुभसे॰ 4:15.25; गो॰ 4:22.1)
8994 महिन्ना (= मासिक वेतन) (एक समय हल कि रामधनी भइया के औरत दूसर के खेत में ~ करऽ हलन । जहिना न तो अपना खेत हलइन, न पुलिस के जादे महिन्ने मिल्लऽ हलइ ।) (अमा॰171:7:2.1)
8995 महिन्ना (महिन्नो) (मसक॰ 158:8)
8996 महिन्नो (जुआनी के ढलान पर राघोबाबू हलन कि उनखा ई रोग धयलक हल । कातिक-अगहन में कहियो उपटलो । दु-चारे दिन में विदो ले लेलको । मगर अब तो महिन्नो लटका देहे ।) (अमा॰13:8:1.24)
8997 महीनवारी (हमनि गाँव-जेवार से चन्दा बिहरी करके महीनवारी देवइ । जब सरकार इ इस्कूल के सरकारीकरन कर लेतय तऽ सरकारी तनखाह मिलतइ आउर इ दूनों सरकारी सिच्छक हो जइतन ।) (अल॰37:118.19, 27)
8998 महीन्ना (अआवि॰ 82:31)
8999 महुआ (अमा॰12:5:1.16; नसध॰ 26:116.5)
9000 महुसना (गो॰ 6:29.1)
9001 महूरत (साब ! सगुन अगुन देख के उदघाटन के ~ न का रखली हल ?) (अमा॰11:7:1.6)
9002 महौल (= माहौल) (नसध॰ 27:120.19)
9003 महौल (= माहौल) (अलगंठवा चरखा समिति के गरमा-गरम महौल देख के गते से निकल के केदार भाय के डेरा में जाके पेटकुनीए पटा गेल हल ।) (अल॰44:150.29)
9004 माँई (नसध॰ 5:17.9)
9005 माँग (नसध॰ 36:153.5)
9006 माँग (येकर अलावे अगिया बैताल हल अलगंठवा, लड़का-लड़की के साथ लुका-छिपी आउर विआह-विआह खेले में अप्पन माय के किया से सेनूर चोरा के कोय लड़की के माँग में घिस देवे में बदनाम अलगंठवा।) (अल॰1:2.4)
9007 माँगल (मुँह ~ मिलना) (नसध॰ 13:59.27)
9008 माँहे (खिड़की ~ बाहर असमान में फैल रहल हल) (मकस॰ 13:3)
9009 मांजना-खंघारना (मांज-खंघार के) (अमा॰3:11:1.15-16)
9010 माई (काली ~) (नसध॰ 5:18.16)
9011 माउग (अमा॰11:14:1.16; 15:14:1.14; 163:12:1.2)
9012 माउग (~-बेटी, ~-मरद) (मसक॰ 136:17; 163:5)
9013 माउग (मरद-माउग) (नसध॰ 37:157.2)
9014 माउग (माउग-भतार) (मकस॰ 29:19)
9015 माउग-भतार (अमा॰11:14:2.4)
9016 माउग-मरद (~ आउ एगो बेटी के छोटहन परिवार रहे से तीनो अप्पन गरीबी में भी खुश रहऽ हलन; गामे के लोग दुन्नो ~ के किरिया करम कयलन) (अमा॰24:7:1.5; 29:12:2.34)
9017 माकना (माकल निनिया बहकल चैन, उमकल बिन्दिया चसकल सैन) (अमा॰6:19:1.23)
9018 माको-धीकी (बात साफ-साफ रहला से ठीक होवऽ हे । नयँ तो आगे चल के गुहा-गिंजरी, ~ बढ़ियाँ नञ होवे ।) (अमा॰165:6:1.19)
9019 माख (हम तोहरा कुछ खर्रा-खोटा कहलियो हे ओकरा माख मत मानिहऽ । जा तूँ परीच्छा के तइयारी करऽ गन ।) (अल॰20:66.4)
9020 मागधी (ढेर लोग के मन में मागधी भाषा आउ पालि भाषा के लेके कइएक सवाल उठऽ हे । मागधी आउ पालि में का संबंध हे ?; बाद में तो बौद्ध धरम आउ पटना-चम्पा (भागलपुर) के बेपारी लोग के सम्पर्क भाखा के रूप में मागधी लंका, बरमा, जावा-सुमात्रा से लेके चीन, जापान, यूनान, फूनान तक दूर-दूर तक फैल गेल) (अमा॰23:9:1.1, 2, ...; 30:10:2.5)
9021 माघ (अआवि॰ 80:32; नसध॰ 26:115.20)
9022 माघ-फागुन (गो॰ 6:33.5)
9023 माट साब (= माड़साव, माड़सा, मास्टर साहब) (जी माट साब !) (अमा॰22:8:1.9, 15, 28; 30:16:1.7)
9024 माट साब (= मास्टर साहब) (मसक॰ 81:7; 82:4)
9025 माटी (~ पार लगना/ लगाना) (नसध॰ 5:19.7, 9)
9026 माटी (~ भारी होना; ~ पलीद करना; ~ उठ जाना) (नसध॰ 9:42.14; 13:57.10; 27:118.22-23)
9027 माटी (= मट्टी, मिट्टी) (अमा॰25:23:3.5)
9028 माड़ (केसो अलगंठवा के पाछे से कंधा पर हाथ धरइत कहलन हल -"अरे भय, हम्मर दरवाजा पर माड़ गिरल हई जे मुँह फेर के  जा रहते गेलऽ हे । चलऽ, लउटऽ, दुपहरिया गमा के ऊपरकी बेला राजगीर जइते जइहऽ ।") (अल॰31:99.8)
9029 मातना (= मतना) (सुमितरी अप्पन देह के ढीला छोड़ देलक हल जइसे डागडर रोगी के मता के ऑपरेशन करे लगऽ हे । सुमितरी ओइसने मात गेल हल ।) (अल॰36:116.9; 42:137.8)
9030 मातर (= मात्र) (देखते ~ अपन बेटा के लेके घर में घुस जाय, एक ~ बेटा) (नसध॰ 5:22.9; 8:31.17; 35:151.24)
9031 मातरा (= मात्रा) (फूब॰ 1:3.14)
9032 मातल (गो॰ 1:1.14)
9033 मातल (खीस से ~) (नसध॰ 1:2.25)
9034 मातवर (सुरुज महतो जब से बेमार पर गेलन हे, लगइत हे कि गाँव के कोई मातवरे नऽ हे) (नसध॰ 23:92.12, 95.8; 34:147.10)
9035 मात्रा (नसध॰ 35:151.13)
9036 माथा (अआवि॰ 110:8; बअछो॰ 2:16.10; 7:32.11)
9037 माथा (~ ठनकना) (नसध॰ 1:1.3; 7:30.14; 47:206.10)
9038 माथा (~फोड़ना; ई बात सुनलन, त उनकर तो मथे चकरा गेल) (अमा॰18:1:1.12; 173:7:1.6)
9039 माथा पर चढ़के बोलना (मसक॰ 30:25; 145:1)
9040 माथा-चोटी (~ करना) (अमा॰173:1:2.9)
9041 माथा-फोड़उअल (अब पाणिनि के भी धँसोड़ के पराकृत के संस्कृत से उत्पन्न बतावे ओला कठहुज्जति लोग से कउन अनेरे माथा फोड़उअल करे ?) (अमा॰30:9:1.21)
9042 मान (रम॰ 16:126.7)
9043 मान (ढोलक के थाप आउ अल्हा के ~ से रात के सन्नाटा भी सन् हो गेल हल) (नसध॰ 27:121.2)
9044 मानता (= मान्यता) (अपने लोग के एक नजर भी रहे के चाही जेकरा से इ इस्कूल के सरकारी मानता मिल जाय ।) (अल॰37:118.16)
9045 मानना (नसध॰ 6:25.4)
9046 मान-मनौती (ऊ हुनखर घर-दुआर तो सम्हारवे कैलक, बाल-बच्चा नयँ होवे के बादो कभी कोय मान-मनौती  इया फरियाद केकरो से नयँ कयलक) (अमा॰29:11:2.7)
9047 मान-मरजाद (अमा॰173:1:2.3)
9048 मानवी (= मानवीय) (~ भाखा) (अमा॰30:10:1.15)
9049 मानवीय (नसध॰ 35:150.27)
9050 मानिंद (नसध॰ 22:89.31)
9051 मानी (= मनी) (ढेर ~) (अमा॰25:16:2:21)
9052 मानी (ढेर ~, केतना ~) (नसध॰ 3:12.14; 8:33.6)
9053 मानुख (नसध॰ 7:30.20)
9054 मानुसखोर (गिधियो से गेल गुजरल देसवा वो दुनियाँ में, मानुस भेलै मानुसखोर) (अमा॰14:7:1.4)
9055 माफिक (दोकाने दोकान खोज के मन माफिक कपड़ा कीनऽ हे) (अमा॰12:16:2.6)
9056 मामला (~ सलटाना) (दुन्नो भाई पंचइती में ~ सलटावे पर राजी हो गेलन) (अमा॰173:5:2.31)
9057 मामला सलटाना (बअछो॰ 10:49.14)
9058 मामू (बअछो॰ 12:56.25)
9059 मामू (इनकर मामू सरदारी जी आउ प्रहलाद जी हम्मर गाँव झिंगुरी में हम्मर पूज्य पिता स्व॰ सूर्यमणि पाठक से हरमेसे भेंट करे आवऽ हलन; चान मामू) (अमा॰25:7:2.4; 28:16:2.24)
9060 मामू के गगरिया काहे फोड़ले रे चुट्टा (एक प्रकार के खेल) (मसक॰ 42:2)
9061 मामू के गगरिया काहे फोड़ले रे चुट्टा (खेल के नाम) (कब॰ 49:16-17)
9062 मामूली (बड़का के कौन पूछे, पइसा बटोरे के चसका अदना मामूली परिवार के भी लग गेल हे ।) (अमा॰29:14:1.7)
9063 माय (अमा॰171:7:1.1; अआवि॰ 3:1; गो॰ 6:28.7, 16; 7:33.21; कब॰ 1:29; मसक॰ 29:26; 30:9, 10; 31:12; 32:4, 21; 36:27)
9064 माय (अलगंठवा के बाबू इयानी कलकतिया बाबू, जे बारह बरिस के उमर में बूढ़ा बाप, चार बरिस के माय के टुअर भाय आउर अप्पन अउरत के नैहर में छोड़ के कलकत्ता चल गेलन हल ।) (अल॰1:1.9)
9065 माय (माय-माय) (नसध॰ 2:8.9)
9066 माय-चच्चा (उ जेवार में कोय के अइसन घर न हल जेकरा हीं अलगंठवा के घर के लोटा-थरिया-कठौती-बटलोही बंधिक न होत । माय-चच्चा आउर बाबू जी के मर जाय के वाद अलगंठवा के परिवार में घनघोर अंधेरा छा गेल हल ।) (अल॰12.35.23)
9067 माय-बाप (अमा॰12:10:2.16, 34; 13:16:2.16; गो॰ 1:2.25; 2:14.11; 5:24.1, 25.28, 26.3; 7:33.26; मसक॰ 48:27; 161:28; 162:14)
9068 माय-बाप (गंगा-गजाधर सेवे के बाद दो भाई में अप्पन माय-बाप के सबसे छोट बेटा हल अलगंठवा ।) (अल॰1:1.19; 2:4.29)
9069 माय-बेटी (अमा॰17:14:1.13, 2.20; 24:18:1.24)
9070 माय-बेटी (सुमितरी माय-बेटी घर से चौखट पर आके एने-ओने ताके लगल हल ।; ओकरा में का हइ, कल्हे सितिया बराय के बाद अँटिया लेवहू अउर का । हम दूनो माय-बेटी ढो लेवो ।; बटेसर के बात सुन के माय-बेटी हाथ में नेवारी के जउरी लेके खेत दने सोझिया गेल हल ।) (अल॰7:22.25; 9:28.6, 19)
9071 मायो (चुभसे॰ 1:3.24)
9072 मारकिन (मसक॰ 99:11)
9073 मार-गारी (कब॰ 43:26)
9074 मार-गारी (विचित्र जिनगी हई दुन्नो के । करजा खाइत जाइत हे, मार-गारी भी खाइत हे, बाकि चिन्ता फिकिर के बान न हे ।) (अमा॰28:9:1.17)
9075 मारना (रात ~) (दू घड़ी ~ मार के पूरब भर से अलसायल चान मुँह उघारलक) (नसध॰ 35:149.20)
9076 मारफत (झूठ-मूठ पतरा के ~) (अमा॰11:12:2.17)
9077 मारल (~ चलना) (नसध॰ 42:187.25)
9078 मारल चलना (अमा॰170:12:1.18-19)
9079 मारल-फिरल चलना (अमा॰6:15:1.2)
9080 मारा-पिटी (नसध॰ 8:35.23; 20:82.12)
9081 मारा-मारी (अमा॰10:20:1.17)
9082 मारे (के ~) (नसध॰ 29:129.4)
9083 माल (~ मारना, ~ पीटना) (नसध॰ 6:24.16; 30:131.2)
9084 मालकियत (बअछो॰ 8:39.4)
9085 माल-जाल (मकस॰ 64:2)
9086 माल-मुसहर (हम जनेउ पकड़ के उत्तर रुखे मुँह कर के कसम खाही कि हम अइसन एकवाघट भोजन न करम । हम बराहमन धरम के चौपट न करम । हम भूखले परान तेआग देम मुदा माल-मुसहर आउर मुसलमान के छुअल पकल न खाम ।) (अल॰43:142.6)
9087 माला (नसध॰ 26:116.23)
9088 मालिक (जब नेकलाइट के राज हे तो गरीब के राज हे, मजूर के राज हे । अब खेती ओलन, मील ओलन के मजूरी करे परत आउ हमनी खेत मील के ~ बनब) (नसध॰ 32:138.13)
9089 मालिक-मोख्तार (नसध॰ 25:107.5)
9090 मालिस (=मालिश) (सुमितरी नेहा-धो के घर आयल हल तऽ ओकर माय गड़ी के तेल से मालिस कर देलक हल । आउर कंघी से माथा झार के जुरा बाँध देलक हल । कजरौटी से काजल भी लगा देलक हल ।) (अल॰5:13.11)
9091 मास (= मांस) (बअछो॰ 1:10.27)
9092 मासूक (फूब॰ मुखबंध:1.22)
9093 मास्टरनी (नसध॰ 40:179.2)
9094 मास्टरी (मोसकिल से साल भर आउ बचल होत मास्टरी ।; सउँसे जिनगी तो हुनखर गामे के इसकूल में मास्टरी करते बीत गेल ।) (अमा॰29:10:1.13, 18, 11:2.3)
9095 माहटर (अमा॰1:8:1.5; 5:19:1.20; 174:7:1.12; मकस॰ 30:1; मसक॰ 35:20; 102:23; 103:14, 15)
9096 माहटर-महटरनी (मसक॰ 35:20)
9097 माहटरी (मसक॰ 98:15, 17; 99:17)
9098 माहिर (अआवि॰ 105:13; नसध॰ 3:12.25)
9099 माहिर (~ एकांकीकार) (अमा॰4:5:2.22; 6:11:1.8)
9100 माहुर (= विष, जहर) (घरे से एक सेर माहुर लाके देलक आउ पंडित जी से बोललक - 'एकरा आटा में मिला के लिट्टी-रोटी बनाके खयबऽ तो बड़ी बढ़िया लगतवऽ ।') (अमा॰23:7:1.14, 18)
9101 माहे (खिड़की ~ रसरी बहरी फेंकना) (मसक॰ 52:17)
9102 माहे (दक्खिन ~) (मसक॰ 50:10)
9103 माहे (बहरी पाहुन बइठल हथिन । चलनी ले के पिछुत्ती ~ चल जायम ।) (अमा॰7:10:1.31; 15:16:1.32)
9104 माहौल (अब समय के मोताबिक बदलल माहौल में सब काम होयत) (अमा॰1:10:2.3)
9105 मिंझना (दबयला पर भी अजादी के आग न मिंझल) (अमा॰2:6:2.10; 18:10:1.16)
9106 मिंझना, मिझना (रम॰ 17:132.25)
9107 मिंझराना (नसध॰ 33:145.5)
9108 मिंझराना (मुखिया जी आउ सरपंच साहेब अमीन साहेब के लेके हमनी के सामने साफ-साफ हिगरयले हलन, कहीं कुछ मिंझरावल न हे) (अमा॰30:14:1.29)
9109 मिंझाना (दीया मिंझाय से पहिले भभके हे) (अमा॰166:9:2.34)
9110 मिचाइ (= मिरचाई) (सुमितरी के माय मुसकइत येगो पुरान करिखा लगल हांड़ी में मछली धोवे ला उठावइत सुमितरी से कहलक हल - "अगे बेटी, तूँ लहसून-हल्दी-धनिया-सरसो आउर मिचाइ मेहिन करके लोढ़ी-पाटी धो-धो के पीसऽ ।" माय के बात सुन के सुमितरी लोढ़ी-पाटी पर मसाला पीसे लगल हल आउ मछली के लोहरउनी से घर महके लगल हल ।) (अल॰5:14.6)
9111 मिचाई (अमा॰172:13:1.13; नसध॰ 9:39.30; 39:163.31)
9112 मिजाज (~ खुस हो जाना) (नसध॰ 9:43.22)
9113 मिजाज (एही से तो ऊ आम रास्ता पर अप्पन आसन जमौले हथ कि हजार-पान सौ ढेला रोज मिल जात, त चलऽ अप्पन भूखल लहालोट मिजाज एकदम शांत हो जात; खँचिये भर धान के गरमी से, ऐसन मिजाज बगद जाहो) (अमा॰22:13:2.10;174:13:2.3)
9114 मिझाना, मिझ जाना (लम्फ के बत्ती सच्चो मिझाय-मिझाय पर हल) (अमा॰13:9:1.11)
9115 मिट्ठा (गो॰ 3:17.16)
9116 मिट्ठा (~ बोलना) (अमा॰173:21:2.21)
9117 मिट्ठा (= मीठा) (देखइते ही बटेसर कहलक हल -"अरे बेटा, पहिले मुँह मिट्ठा करऽ । चलऽ, पेड़ा-गुलजामुन भरपेट खा । काहे कि सुमितरी सेकन्ड डिविजन से मलट्री पास कर गेलो हे ।") (अल॰28:87.9)
9118 मिट्ठा-गोहुम (गो॰ 3:18.12)
9119 मिठगर (~ भासा) (अमा॰171:13:1.22)
9120 मिठाय (= मिठाई) (मिठाय खाय के बाद नन्हकू अलगंठवा के माय से पूछलक हल -"मेहमान तोहरे से मिले ला अइलथुन हे । कादो बड़ावर में कोय साधु हथिन जे जड़ी-बूटी के दवा करऽ हथिन । मेहमान के दमा के रोग हो गेलइ हे । तूँ कादो कोय साधु जी के  वारे में जानऽ हु ?") (अल॰10.31.1)
9121 मितलाना (मन ~) (हुनखर मन मितला हे - सरकारी अन्हरे नियन टोले चलऽ हे पढ़ाय में सुधार के उपाय । कोठरी में खखरी धान सुखा के का होयत ?) (अमा॰29:10:1.9)
9122 मित्र (सुभचिंतक ~) (नसध॰ 35:151.7)
9123 मिनती (फूब॰ 1:3.27)
9124 मिनती (= विनती) (नसध॰ 21:86.28)
9125 मिनती (= विनती) (दिलदार राम आउर मोहन सिंघ किसान-मजदूर से मिनती करइत अलगंठवा के फैसला मान लेवे के एलान कइलन हल ।) (अल॰19:62.19; 34:110.1)
9126 मिनती (= विनती) (हम मिनती कइली कि तूँ बाँसघाट से आवइत ह, कंठ सुखइत हवऽ, चाय पी लऽ ।) (अमा॰28:16:2.6)
9127 मिनमेख (~ गिनना) (नसध॰ 6:26.6-7)
9128 मियाँ (~ के जूती ~ के सर चलाना) (अमा॰11:9:1.23, 24)
9129 मिरगा (= मृगशिरा नक्षत्र) (लोग अदरा-कथा बाँच रहलन हे, हम तो मिरगा-कथा लिख रहल ही) (अमा॰14:1:1.11)
9130 मिरचाई (बअछो॰ 5:26.7)
9131 मिरचाई (सुमितरी अभी दू कोर खइवे कइलक हल कि ओकर मुंह में आधा मिरचाई जे लिट्टी में सानल हल चल गेल हल । जेकरा से सुमितरी सी-सी करइत लिट्टी छोड़ देलक हल ।) (अल॰3:6.24)
9132 मिरजइ (न बेटा, उहाँ बड़ी भीड़ रहऽ हइ । तूँ मेला-ठला में भुला जयबऽ, इया कुचला जयबऽ । न, तूँ न जा बेटा, हम तोरा ला फतुहा के परसिध मिठाई मिरजइ लेते अइबो ।) (अल॰6:14.16, 16.12; 7:21.30, 22.9)
9133 मिरतु (चुभसे॰ 3:9.9; मसक॰ 44:20)
9134 मिरतु (= मृत्यु) (छोटका भाय इयानी चचेरा भाय जेकरा लोग अलगंठवा के अप्पन सहोदर भाय ही जानऽ हलन । काहे कि चचेरा भाय चन्दर जब छो महीना के हल तवहिए चाची के मिरतु हो गेल हल ।) (अल॰12.35.27)
9135 मिरिकड़ाह (= मृगशिरा नक्षत्र) (नसध॰ 6:23.9)
9136 मिरितलोक (= मृत्युलोक) (अमा॰28:16:2.2)
9137 मिरियासी (मसक॰ 162:24)
9138 मिलकियत (बअछो॰ 15:67.9)
9139 मिलन (नसध॰ 24:102.21)
9140 मिलना (तीसी मिलल करुआ तेल) (नसध॰ 3:9.12)
9141 मिलल-जुलल (नसध॰ 8:32.26)
9142 मिलौनावला (~ रोटी) (अमा॰173:1:1.5)
9143 मिल्लत (नेह, ममता, सिनेह-परेम आउ मिल्लत) (अमा॰13:13:2.7)
9144 मिश्री (ओही हमरा ला मक्खन मिश्री हल आउ हल हम्मर जशोदा मइया !) (अमा॰22:17:1.12)
9145 मिसतिरी (= मिस्त्री) (खेलामन के कहावत सुन के रघुनाथ मिसतिरी जे एक लमनी ताड़ी लेके अलग बैठ के पी रहलन हल, उ बोल पड़ल) (अल॰8:23.15)
9146 मिसतिरी (बिजुली के ~) (नसध॰ 41:180.28)
9147 मिसरी (नसध॰ 8:33.12)
9148 मिसिन (= मशीन) (अमा॰13:8:1.10)
9149 मिसिल (फूब॰ 3:12.17)
9150 मिसी (नन्हे के पीरितिया, आधी मिसी रतिया मचावऽ होतइ सोर । बरऽ होतइ गुगुदिया कि फड़कऽ होतइ सुगना आउ सुगनी के ठोर ॥) (अल॰10.32.24)
9151 मिस्तीरी (= मिस्त्री) (नसध॰ 29:126.5)
9152 मीटिंग-तिटिंग (बअछो॰ 11:53.13)
9153 मीटिंग-सिटिंग (अमा॰174:11:1.1)
9154 मीटिंग-सीटिंग (गाँव-देहात में ~ तनी कमे होहे) (नसध॰ 9:39.18)
9155 मीठ (अमा॰17:15:1.11)
9156 मीठ ... तीत (तूँ ई सब जे बोलइत ह, एकरा चलते बेमतलब के जेकरा से मीठ ह, ओकरो से तीत हो जयबऽ) (अमा॰165:10:2.9-10)
9157 मीठगर (हेमन्ती भी सज-धज के परसादी बना रहल हल आउर आपस में मीठगर गलवात कर रहल हल ।) (अल॰34:108.26)
9158 मीठबोलिया (~ जहर आउ कठबोलिया अमरीत) (नसध॰ 27:119.30)
9159 मीरा (कुछ हम्मर इंसाफ करऽ अब, मिरवा तो सुनबे न करई अब) (अमा॰18:12:2.4)
9160 मील (= mill) (नसध॰ 29:126.1)
9161 मील-उल (~ गड़ाना) (नसध॰ 25:108.10)
9162 मुँह (~ के बात छिनना) (नसध॰ 43:191.1)
9163 मुँह (~ लटकाना) (अमा॰12:10:2.23)
9164 मुँह तोड़ना (मसक॰ 22:30, 23:4)
9165 मुँह पितराइन कर लेना (मसक॰ 92:13)
9166 मुँह लटकाना (मसक॰ 101:16)
9167 मुँहछपे (= मुँहझपे) (अब एक पहर रात से जादा न हो । हमरा मुँहछपे निकल जाय के भी चाही ।) (अल॰42:135.9)
9168 मुँहजबानी (ई सब अकसरहाँ मुँहजबानी (मौखिक रूप से) कहल-सुनल जाहे आउ एक कंठ से दोसर कंठ में चलइत हजारन बरस से जीवित हे) (अमा॰25:13:1:18)
9169 मुँहजरा (नसध॰ 4:14.27)
9170 मुँहझपे (रम॰ 2:22.2, 4)
9171 मुँहझौंसा (मसक॰ 148:5)
9172 मुँहझौंसी (जो गे नासपीटी, मुँहझौंसी ! न लूर के, न काम के, ससुरार जयबे तो लात जूता खयते दिन जतऊ) (मकस॰ 49:21)
9173 मुँह-देखाई (~ के रस्म निभाना) (अमा॰15:8:1.8)
9174 मुँहफट (अमा॰164:20:1.8)
9175 मुँह-फुलौअल (अआवि॰ 108:30-31)
9176 मुँहमुँदा (अआवि॰ 64:3)
9177 मुँहलगुआ (गो॰ 1:2.18)
9178 मुँहलग्गो (नसध॰ 5:18.17)
9179 मुँहलुकाने (मसक॰ 143:12)
9180 मुँहें (पछिम ~) (नसध॰ 48:207.23)
9181 मुंह जमानी (= मुँहजबानी) (अलगंठवा से किताब के कविता-केहानी आउर हिसाब मुंह जमानी पूछल गेल ।) (अल॰4:10.3)
9182 मुआवजा (अमा॰25:21:2.3, 14)
9183 मुकद्दर के सिकंदर (मसक॰ 62:24)
9184 मुकाबला (मुकाबला तगड़ा हो गेल) (अमा॰4:18:1.14-15)
9185 मुक्का-मुक्की (अमा॰13:19:2.12)
9186 मुख (= मुख्य) (अआवि॰ 57:5; बअछो॰ 12:54.1)
9187 मुखचूमन (अमा॰172:9:1.33)
9188 मुखर (कल के मूक सुगिया आज मुखर में गेल हल) (नसध॰ 40:179.16)
9189 मुखवीर (दारा मुखवीर बनके सब कुछ बता देलक हल ।) (अल॰28:85.10)
9190 मुखिया (नसध॰ 8:31.17)
9191 मुखियागिरी (नसध॰ 12:53.5; 14:61.5)
9192 मुचुकना (गोड़ ~) (अमा॰9:13:2.6)
9193 मुझौंसा (नसध॰ 4:14.22; 42:186.16; 45:200.16)
9194 मुट्ठी (दू ~ पोरा) (नसध॰ 27:118.29)
9195 मुठरी (सत्तु के ~) (मसक॰ 113:7)
9196 मुठान (गो॰ 11:47.32; रम॰ 2:23.17; 5:45.11; 6:53.16)
9197 मुठान (चिट्ठी पढ़ के अलगंठवा के मुठान ओकर आंख में नाच रहल हल ।) (अल॰9:28.16; 14:42.11)
9198 मुड़कटवा (नसध॰ 39:170.17)
9199 मुड़नमा (मुड़नमों) (मसक॰ 78:28)
9200 मुड़ना (मसक॰ 73:6; 75:10)
9201 मुड़ना (जिनगी में जेतना संस्कार होहे जेकरा में जनम, छठी, मुड़ना, जनेऊ, बियाह, मरन, सराध आउ परब-तेवहार, पूजा-पाठ सब समय के रीत-रेवाज के बारे में लिखल हो; बेटा-बेटी के जलम दिन, सतइसा, मुड़ना, सादी-बिआह, परब-तेओहार जइसन अनेको मौका पाके उपहार जुटावे के जोगाड़ में लोग लग जा हथ) (अमा॰1:8:2.24; 174:8:1.18)
9202 मुड़ना-बिआह (अमा॰166:11:2.1)
9203 मुड़वा मूसन (अमा॰4:5:2.13)
9204 मुड़वाना (ओही दिन ऊ दाढ़ी आउ बाल मुड़वा लेलन) (अमा॰19:14:2.13)
9205 मुड़ाना (कपार मुड़ा के चूना के टीका कर के गदहा पऽ चढ़ा के नऽ बिदा कर देलिअई तऽ हमर नाम नारद नऽ, बिलार, कुत्ता इया सियार) (नसध॰ 14:62.13)
9206 मुड़िया जाना (गो॰ 4:20.16)
9207 मुड़ी (~ धुन-धुन के; केकरा दूगो ~ हे ?) (नसध॰ 9:39.31; 14:60.27; 45:200.9)
9208 मुड़ी (= सिर) (जालिम सिंह आउर मोहन सिंह एक बीता के लकड़ी से धरती पर डिंडार पारइत मुड़ी गाड़ले हलन ।) (अल॰33:106.16)
9209 मुड़ी गोतना (मसक॰ 71:7)
9210 मुड़ी झुकाना (मसक॰ 101:18; 146:19)
9211 मुदई (फूब॰ 5:19.4)
9212 मुदा (अमा॰10:9:1.26, 2.8; 173:13:1.26; मकस॰ 13:1; 14:2)
9213 मुदा (= लेकिन) (पहिले तऽ गाँव के लोग ठुल करऽ हल, मुदा अलगंठवा के समझावे पर बूढ़ पुरनियन के बात समझ में आवे लगऽ हल ।; अप्पन गाँव में भी लइकी सब के पढ़े खातिर इस्कूल खुल गेलइ हे । जेकरा में मास्टरनी भी पढ़ावऽ हइ । मुदा तोर बाप पढ़वे ला अवलदार होथुन त नऽ ।) (अल॰2:5.15; 5:13.21)
9214 मुदालेह (फूब॰ 5:19.4)
9215 मुदेखली (= मुँह देखली) (हाँ बेटा, तोहरे कहे पर सुमितरी के पढ़ावे के बीड़ा उठइली हल । तोहरे मदद से ही इ पढ़-लिख भी रहल हे । मुदा हेडमास्टर मुदेखली कर रहलथिन हे । अप्पन जात-भाय के लइका-लइकी सब के कबे फारम भरा के पुंगा देलथिन आउर हमनी सबके साथ रेढ़ कर रहलथिन हे ।) (अल॰20:65.28)
9216 मुद्दा (अमा॰12:10:1.29)
9217 मुन (गो॰ 6:31.20)
9218 मुनाना (गो॰ 4:20.17)
9219 मुनेटर (रम॰ 3:28.15)
9220 मुन्दल (गो॰ 1:3.13)
9221 मुरई (= मूली) (नसध॰ 26:114.21)
9222 मुरकना (गो॰ 1:8.24)
9223 मुरगा (~ नऽ बोलत तऽ बिहान नऽ होयत ?) (नसध॰ 14:61.30; 24:97.10)
9224 मुरगी (नसध॰ 26:116.22)
9225 मुरचंड (मसक॰ 169:7)
9226 मुरछैनी (मंतरियन सब झारइत-झारइत थक गेते गेलन हल । मुदा अलगंठवा के चढ़ल विख वीस से उन्नीस न हो रहल हल । सब लोगन के चेहरा पर मुरछैनी छा गेल हल ।) (अल॰26:78.19)
9227 मुरझइनी (ओकर परिवार के चेहरा पर कभी मुरझइनी आउ उदासी कोय कभी न देखलक ।) (अल॰12.37.9)
9228 मुरझल, मुरझाल (गो॰ 1:1.23)
9229 मुरदघटिया (नसध॰ 35:149.5)
9230 मुरदघट्टी (उ का डागडर हथिन बाबूजी ? कउन कउलेज में पढ़लथिन हे । टो-टा के तऽ एक वित्ता में अप्पन लाम लिखऽ हथिन । अप्पन गाँव के कई लोगन के मुरदघट्टी पुवचा देलथिन हे । जहाँ पेड़ न बगान, उहाँ रेड़ परधान ।) (अल॰14.42.20-21)
9231 मुरदा (~ पऽ नौ मन ओइसने सौ मन भारी) (नसध॰ 13:57.14)
9232 मुरदासिंघी (अमा॰16:6:2.3, 6, 7)
9233 मुरी (= मूड़ी) (~ गोंतना) (तोहरे अँखिया के सामने द्रौपदी के नाँगट कर देलै भरल सभा में आर तों मुरी गोंत के चुपचाप बैठल टुकुर-टुकुर देखैत हला) (अमा॰21:11:1.23)
9234 मुरीस, मुरिस (फूब॰ 1:6.19)
9235 मुरुख (मसक॰ 23:23)
9236 मुरुख-चपाट (मसक॰ 153:22)
9237 मुर्गा (ई सब देवतन के अलग-अलग तरह के भोजन हे । माँ काली ला भईंसा, देवी जी ला पठिया, सरस्वती ला फल-फूल आउ मिष्टान्न, गोरइया आउ डाक ला खस्सी-भेंड़ा, सूअर, मुर्गा, कबूतर, टिपउर ला खस्सी-भेंड़ा आउ डाक गोरइया के तो खूनो पीए से जब तरास न जाय त अलगे से तपावन (दारू) देल जाहे, तब जाके उनकर पियास बुझऽ हे ।) (अमा॰22:13:1.14)
9238 मुलमुलाना (आँख ~) (नसध॰ 35:149.27)
9239 मुलुक (= मुल्क) (अमा॰30:7:1.9)
9240 मुलुर-मुलुर (~ ताकना) (नसध॰ 7:28.23)
9241 मुसकी (कब॰ 1:20)
9242 मुसकी (= मुसकान) (अपने के होठ पर तनि सा ~ भर आ जाय खाली) (अमा॰9:4:2.12)
9243 मुसलमान (नया ~ बनल हल तब जादे प्याज खयबे करत; जेतने जल्दी लोग ~ बनऽ हे ओतने जल्दी हिन्दू बने ला छटपटाय लगऽ हे; ओहनी बराबर रग्घू के पीठ ठोकल करथ आउ रग्घू नया मुसलमान बनके जादे पेयाज खाय लगल; हिन्दुओ ... मुसलमानो) (नसध॰ 11:50.24; 13:58.19; 22:92.3; 34:145.30)
9244 मुसहर (बअछो॰ 1:9.10)
9245 मुसहरा (सरकारी अदमी हें त का बइठ के ~ लेबें ?) (नसध॰ 34:147.28)
9246 मुसहरा, मोसहरा (ई महीना में मुसहरा मिलते ऊ कोट जरूर बना लेतन; मोसहरा मिलला पर मकान मालिक के करजा देके घर खरचा ला भी तो पूरा नऽ बचल) (मकस॰ 8.13; 9:1)
9247 मुसहरी (बअछो॰ 13:58.3; 14:60.9, 23, 61.11; कब॰ 53:26)
9248 मुसहरी (= मुसहर टोली) (अजाद मुसहरी से ही अप्पन गाँव हैदरचक चल गेल हल । अलगंठवा, सुमितरी आउर दिलदार राम झोला-झोली होइत वसन्तपुर पहुँच गेते गेलन हल ।) (अल॰44:157.1)
9249 मुसाहरा (फूब॰ 3:10.15)
9250 मुसुकना, मुसुक जाना (नसध॰ 11:48.14)
9251 मुस्की (~ मारना) (मसक॰ 171:8)
9252 मुस्टंड (ई कुलछनी सब के जादे खिलावे पिलावे से शरीर आउ मुस्टंड हो जायत) (मकस॰ 50:8)
9253 मुहलुकाने (अमा॰166:15:1.4)
9254 मुहिआना (इ तरह से झारते-झारते तीनडंड़िया माथा पर आ गेल हल । आउर सतमी के चान उगे ला मुहिआय लगल हल । तब कहीं सुमितरी के पलक खुलल हल ।) (अल॰18:59.9; 42:130.3)
9255 मुहे (= तरफ) (पश्चिम मुहे चलते-चलते इधर-उधर नजरो दउड़ावइत हली) (अमा॰22:15:2.14)
9256 मुहे (बिहारशरीफ के मगही में "मुहें") (चान पछिम ~ ढलना) (नसध॰ 35:151.19)
9257 मूँगा (मूँगा-कौड़ी) (नसध॰ 26:116.23)
9258 मूँदल (देश भर में हो रहल उथल-पुथल से आँख मूँदल भी न जा सकऽ हे) (अमा॰23:4:1.3)
9259 मूक (नसध॰ 40:179.16)
9260 मूड़ी (बअछो॰ आमुख:6.14; गो॰ 10:45.26; कब॰ 19:1)
9261 मूड़ी (मूड़ी गोतना; मूड़ी कतर देना; मूड़ी मरोड़ के दहेज लेना कोई इन्सानियत हे ?; सुनते अप्पन मूड़ी ओही टेबुल पर पटक देलन आउ रोवे लगलन; माला के मूड़ी अप्पन गोदी में उठाके हम सिरहाना में बइठ गेलूँ) (अमा॰7:17:2.7; 12:14:1.19; 18:9:2.5, 15:1.13; 29:14:1.13; 165:10:1.3; 166:9:2.22, 10:1.7; 173:11:1.26)
9262 मूनना (आँख ~) (कब॰ 7:13)
9263 मूनना (आँख ~) (एकर पढ़ाई में आँख मून के लग जा) (अमा॰165:18:1.18)
9264 मूनना (आँख मून के) (नसध॰ 5:17.27, 20.5; 47:206.2)
9265 मूर (फूब॰ 1:3.9; गो॰ 3:17.10, 12; मसक॰ 10:7)
9266 मूरत (नसध॰ 36:155.5)
9267 मूरति (नसध॰ 43:188.5)
9268 मूरुख (नसध॰ 5:18.14)
9269 मूरुख (= मूर्ख) (अमा॰14:6:1.2)
9270 मूलर-मूलर (रग्घू पेड़ के ऊपरे चढ़के ~ में बइठ गेल आउ मूलर-मूलर कसबा से आवे ओलन सब लोग के देखइत हल) (नसध॰ 40:178.20)
9271 मूसर (बीच में, दाल-भात में ~ बन गेलें । जो खेल गल ।) (नसध॰ 36:156.6)
9272 मेंकर, मेकर (हाथ मेंकर तमाकू ओकर मुँह पऽ फचाक् दे मार देलक; उनकर मसनद मेकर रूई फाट के बाहर हुलक रहल हल; गली मेकर सड़ल कदई; लोटा मेकर पानी; नानीये के बंस में कर न हथिन) (नसध॰ 4:14.19; 7:28.24; 8:31.24; 11:47.1; 21:83.8; 27:119.22; 29:126.17; 41:181.13; 49:210.21)
9273 मेंहठा (नसध॰ 3:13.29)
9274 मेटाना (नसध॰ 38:163.14)
9275 मेटाना (= मिटना) (गो॰ 3:16.2)
9276 मेटाना (= मिटाना) (गो॰ 3:16.4)
9277 मेटाना, मेटा जाना (भरम भटका जे हल से मेटा जाहे) (अमा॰17:6:2.4)
9278 मेटाना, मेटा देना (पारो एगो हरिजन लड़का से बियाह करके जात-पात के भेद-भाव मेटा देहे) (अमा॰13:11:2.15; 17:12:1.16)
9279 मेठ (हम अप्पन साथी में हली सबसे ~) (अमा॰2:10:1.20)
9280 मेड़राना (एक दने रग्घू सुगिया पर मेड़राइत हल जे रग्घू बहू के कपार पर ओड़िया उठा रहल हल) (नसध॰ 43:190.18)
9281 मेमिन (गो॰ 4:23.4)
9282 मेराना (कब॰ 31:5)
9283 मेराना (अदहन खदक रहलो हे । खाली चाउर-दाल मेराना बाकी हो ।) (अल॰16.47.11; 43:139.11)
9284 मेराना (चाउर ~) (नसध॰ 29:128.32)
9285 मेरिआना (अलगंठवा दूनों के परनाम-पाती कर के चौकी पर बइठे ला मुसकाइत कहलक हल -"का बात हे भइया, आज दूनो नेता मेरिआ के, गौर-गट्ठा कर के कने अइते गेलऽ हे ।" मोहन सिंघ आउर दिलदार राम दूनों हँसइत कहलन हल -"तोहरे गिरफदार करे अइते गेलियो हे ।") (अल॰17:52.6)
9286 मेला (हमरा हीं से पच्छिमे दू किलोमीटर पर 'मेन' गाँव में बूढ़वा महादे हथ । उनका भिर हर साल फागुन तिरोस्ती के बिहानी होके एगो स्थानीय मेला लगऽ हे जेकर नाम हे कोचामहादे इया कोचामठ के मेला ।) (अमा॰22:13:2.21, 22, 26)
9287 मेलाघुमनी (गो॰ 9:42.26)
9288 मेला-ठला (न बेटा, उहाँ बड़ी भीड़ रहऽ हइ । तूँ मेला-ठला में भुला जयबऽ, इया कुचला जयबऽ । न, तूँ न जा बेटा, हम तोरा ला फतुहा के परसिध मिठाई मिरजइ लेते अइबो ।) (अल॰6:14.14)
9289 मेहटा (खलिहान के एगो मेहटा (बाँस) में मोटका रस्सी से बान्ध देलन) (अमा॰23:8:1.27)
9290 मेहठा (१९५५ से एगो पत्रिका 'मगही' के प्रकाशन शुरू भेल । ठाकुर रामबालक सिंह एकर ~ हलन ।) (अमा॰3:5:2.21)
9291 मेहठा (अनंद संतोख के ~ हे) (नसध॰ 10:46.16)
9292 मेहनत (देह से ~ करना) (नसध॰ 9:42.3)
9293 मेहनत मजूरी (बअछो॰ 9:41.8)
9294 मेहनतकस (मेहनतकस के उचित मजूरी कहाँ मिलऽ हे ? ; मेहनतकस मजदूर) (अमा॰28:6:1.5; 164:3:1.12)
9295 मेहनत-मसक्कत (~ करे में ऊ दिन-रात लगल रहलन, तब जाके दिन बदलल) (अमा॰29:11:2.1)
9296 मेहमान (नसध॰ 28:123.33)
9297 मेहर-छेहर (नसध॰ 6:24.2)
9298 मेहराना (गो॰ 11:48.16)
9299 मेहरारू (अमा॰2:4:1.14; नसध॰ 1:2.24)
9300 मेहरी (अआवि॰ 17:13)
9301 मेहरी (पुतोह के सवाद लेके मइया पछता रहल हे । मेहरी के संग छौंड़ा इतरा रहल हे ।।) (अमा॰17:19:2.17)
9302 मेहिन (= महीन) (मेहिन-मेहिन चमचम दाँत, सुगिया जइसन नाक, पुस्ट-पुस्ट दूनो बाँह - ई सब के बढ़इत आकार सबके मन मोह ले हल ।) (अल॰5:13.14, 14.6)
9303 मेहियाना (अब ओकरा तोड़े के पड़तो, कोड़े के पड़तो । चसिया-चसिया के, मेहिया-मेहिया के चौकियावे के पड़तो ।) (अल॰44:155.17)
9304 मेहुदना (चुल्हा-चाकी सेउदल हकइ, मेहुदल हइ सब गोइठा) (अमा॰3:19:1.28)
9305 मेहुदना, मेहुदा जाना (जब घर में चाउर-दाल आ जाय तऽ अलगंठवा के भोजाय गोइठा-अमारी से चूल्हा फूंक-फूंक के सुलगावऽ हलन । बड़ी देर में मेहुदल गोइठा सुलगऽ हल तऽ कहीं जाके अदहन सुनसुना हल ।; अलगंठवा हलका-फुलका भींज रहल हल । पेन्हल कपड़ा मेहुदा गेल हल ।; सब के चाय देइत हेमन्ती आउर सुमितरी कहलक हल कि चुल्हवो सेउदल हलइ आउ गोइठवो मेहुदायल हइ ।.... गोइठवा घरवा तऽ एकदमे सेउदल हइ ।) (अल॰12.36.29; 41:126.26; 44:152.19)
9306 मेहुदल (चुल्हा-चाकी सेउदल हकइ, मेहुदल हइ सब गोइठा) (अमा॰3:19:1.28)
9307 मेहुदाना (रम॰ 13:96.12)
9308 मैंजना (इसलामपुर से सटले बूढ़ा नगर पड़ऽ हल जहाँ एगो इनार पर जमान-जोग अउरत वरतन गोइठा के बानी से रगड़-रगड़ के मैंज रहल हल । रगड़-रगड़ के वरतन मैंजे से उ अउरत के सँउसे देह हिल-डोल रहल हल ।) (अल॰3:6.8, 9)
9309 मैंजना (काट-कूट के पूँज लगावई, मैंज-ओसा के घर पहुँचावई) (अमा॰18:11:1.19)
9310 मैंजना (हम तऽ कल्हे ही जा सकऽ ही । मुदा दू कट्ठा में धान के पतौरी लगा देली हे । ओकरा अटियाना जरुरी हे । न तऽ कोय रात-विरात के उठा के ले भागतइ । गोपाली महरा के चार कट्ठा के पतौरी उठा के ले भागलइ । आउ उत्तर भरु खंधवा में ले जा के मैंज लेलकइ ।) (अल॰9:28.3)
9311 मैदान (~ जाना) (हम्मर बेटा आज बिहने अंधेरे में मैदान गेलक हल । चार गो लठइत ओकरा खेते में मार के बिछा देलथिन ।) (अमा॰21:11:2.13)
9312 मैदान (खुलल ~ में) (नसध॰ 26:117.8)
9313 मैना-मैनी (जेहो दू-चार मन के असरा हे, उहो ससुरी ~ खाइए जइतो) (अमा॰173:16:2.14)
9314 मैया-दैया (अआवि॰ 4:11)
9315 मोंछ (अमा॰16:6:2.15; 165:7:1.4)
9316 मोअजीज (फूब॰ 6:23.6)
9317 मोअस्सर (गो॰ 3:18.16)
9318 मोकदमा (अमा॰173:12:1.34; अआवि॰ 109:3; बअछो॰ 7:32.21)
9319 मोकदमा (~ दायर करना) (नसध॰ 13:59.15; 46:203.1; 49:209.30)
9320 मोकदमा-उकदमा (नसध॰ 14:63.21)
9321 मोका (तीन चार अदमी आउ ओहिजा अपन ठोर लेले असरा में हलन कि कदई में हेलावे के कखने ~ मिले) (नसध॰ 34:148.3)
9322 मोकाबला (बअछो॰ 13:58.6)
9323 मोगली (~ डंटा देना) (नसध॰ 34:145.25)
9324 मोछ (~रह जाना; मकई के ~) (अमा॰1:13:1.16; 11:7:2.7; 22:11:2.29; 173:17:2.18)
9325 मोछकबरा (हमरा ऊ ~ धान जइसन कूटइत हलक, तब हम जान बचा के भागल आवित ही) (अमा॰21:14:1.31)
9326 मोटका (नसध॰ 7:29.29)
9327 मोटगर (मसक॰ 136:10; नसध॰ 4:14.2; 40:178.23)
9328 मोटगर (~ किताब; ~ रूप से) (अमा॰16:15:2.27, 16:1.32; 25:20:1.13)
9329 मोटगर (जब पतौरी ढोवा गेलहल तऽ बटेसर नेहा-धो के खेसाढ़ी के साग आउ आलू के भात-भरता खा के कंधा पर येगो सूती के मोटगर चादर लेके वसन्तपुर जाय ला घर से निकले लगल) (अल॰9:29.22; 30:94.30)
9330 मोट-झोंट (गो॰ 3:18.6)
9331 मोटरगाड़ी (नसध॰ 26:115.19)
9332 मोटरी (मसक॰ 91:12; नसध॰ 6:25.22; 49:212.29)
9333 मोटरी (जइसहीं पंडितजी के नीन्द आयल वैसहीं जंगल के राह से तीस गो चोर आ गेलन । जतरा बनल देख के ऊ सब पंडित के मोटरी खोल के देखलन ।) (अमा॰23:7:2.3; 173:1:1.20, 16:1.20)
9334 मोटरी-गेठरी (इधर अलगंठवा-सुमितरी आउर बटेसर भी मोटरी-गेठरी सरिया के बावा सिधनाथ के परनाम करइत पहाड़ से उतर रहलन हल ।) (अल॰16:51.25)
9335 मोटहन (गो॰ 6:27.23)
9336 मोतफरकाती काम (गो॰ 4:21.20)
9337 मोताबिक (अमा॰1:10:2.2; 172:12:2.5; 174:3:2.24)
9338 मोताबिक (मंत्री जी के कहे के मोताबिक) (नसध॰ 28:124.18)
9339 मोतियाबिन (गो॰ 1:9.3)
9340 मोत्तफनी (फूब॰ 5:19.24)
9341 मोथा (कोय-कोय खेत में सरसो जलम के विता भर के हो गेल हल जहाँ कुछ अउरत-मरद मोथा निकाल रहलन हल। कोय-कोय घना सरसों के साग के लेल बाछ रहलन हल ।) (अल॰7:21.1)
9342 मोदियाइन (बअछो॰ 5:25.11, 12, 14)
9343 मोदीआईन (अआवि॰ 32:16)
9344 मोमबत्ती (नसध॰ 28:123.11)
9345 मोर (एगो नाँचइत ~ भी अपन पाँख फैलैले हल) (नसध॰ 31:135.6)
9346 मोर बाजा (गो॰ 4:21.17)
9347 मोरना (खेत में पानी मोर के आयल हल) (नसध॰ 32:139.25)
9348 मोरहर (एगो नदी के नाम) (गो॰ 4:20.21)
9349 मोराना (मोरायल) (खेत में पानी मोर के आयल हल । दोसर खेत में मोरायल कि नऽ ?) (नसध॰ 32:139.25)
9350 मोरी (बअछो॰ 3:18.7; गो॰ 3:17.9)
9351 मोरी (= हम्मर, मेरी) (सइयाँ परदेसवा मोरी सूनी सेजरिया रामा) (अमा॰169:18:2.5)
9352 मोरी (एक-ब-इक ~ मोरी होवे लगल) (नसध॰ 6:27.31)
9353 मोरी (खेत में धान के मोरी बढ़ के एकक हाथ के हो गेल हल ।) (अल॰15.44.12, 13)
9354 मोरी (बासमति के मोरी गमके लग गेल लोग किसानी में; रोहनियाँ ~) (अमा॰22:17:2.14; 169:1:1.1)
9355 मोलाना (दाम मोलयलक) (मसक॰ 147:18)
9356 मोलायम (अमा॰4:16:2.23; मसक॰ 22:15)
9357 मोसकिल (अमा॰1:8:1.17; 24:16:1.1; गो॰ 1:1.15; नसध॰ 8:32.19; 47:205.9)
9358 मोसमात (बअछो॰ 5:24.8, 10, 13; चुभसे॰ 1:2.4; 4:14.5, 24; कब॰ 34:5)
9359 मोसमात (मोसमतिया के) (अमा॰1:17:1.8; 168:10:2.9; 172:14:1.15)
9360 मोसहरा (=मुसहरा) (मकस॰ 9:1)
9361 मोसहरा (बिना ~ देले ऊ केकरो से काम ले हे ?) (नसध॰ 21:83.25; 39:167.5; 40:174.3)
9362 मोहरमाला (~ बनौले रखना) (नसध॰ 5:21.24)
9363 मोहाने (एगो नदी के नाम) (गो॰ 1:6.23)
9364 मोहाल (गो॰ 2:12.8)
9365 मोहाल (जीना ~ हो जाना) (अगर 'जल परदूसन' आउ 'वायु परदूसन' के न रोकल गेल तब अदमी के तो जीना ~ हो जायत) (अमा॰168:3:2.19)
9366 मोहाल होना (मसक॰ 58:5)
9367 मोहाल(ई जुग में बाल-बुतरू ला एकाध तौली करुआ तेल आउ भर सितुआ सुधगर दूधो मोहाल हे) (मसक॰ 99:11)
9368 मौका (अमा॰25:19:1.5)
9369 मौगी (नयकी तेसरकी मौगी) (अमा॰6:15:1.7)
9370 मौज (नसध॰ 36:155.14)
9371 मौज-मस्ती (~ से जीवन बिताना) (अमा॰12:10:1.3; 29:8:1.4)
9372 मौनी (खेसारी के दाल टूटल ~ में आन के) (नसध॰ 7:29.29; 16:69.18)

34. भकारादि शब्द

8374 भँजाना (नोट आदि) (गो॰ 6:29.13)
8375 भँड़ुअइ (फूब॰ 7:25.11)
8376 भँड़ुआ (अमा॰1:13:1.18)
8377 भँभोरना (कब॰ 26:4)
8378 भंग (तपस्या ~ करना) (नसध॰ 37:160.27)
8379 भंगी (ई आन्दोलन में न सिरीफ छात्र आउ बुद्धजीविए हलन, बलुक मजूर, किसान, कुली आउ भंगी सब कूद गेलन) (अमा॰26:6:1.8)
8380 भंजाना (मसक॰ 100:2)
8381 भंजाना (कोय कह रहलन हल "जउन सरकार गद्दी पर बइठल हे ऊ सबसे पहिले शिक्षा के भंजावे में लग जाहे, कोय अइसे तो कोय ओइसे ।") (अमा॰29:12:1.6)
8382 भंजौठी (~ भाँजना) (नसध॰ 21:87.2)
8383 भंटा (नसध॰ 26:114.21)
8384 भंडार कोना (अब डेरा कूच करे के चाही । काहे कि वेर भी लुकलुका रहलो हे आउर भंडार कोना में घटा भी छा गेलो हे ।) (अल॰43:144.22)
8385 भंड़ुआ (फूब॰ 4:16.13)
8386 भइया (अमा॰14:8:1.6)
8387 भइया-भउजी (अमा॰171:1:1.8)
8388 भइस (= भैंस) (जेकर लाठी ओकर ~) (नसध॰ 4:14.9, 12; 27:122.1)
8389 भइसासुर (नसध॰ 4:14.10)
8390 भईंस (~ गारना) (भईंस हम गारऽ हली, बाकि दूध हम नऽ खा हली; अहरी पोखरी भरल नहाए भईंस  पसर के पानी में) (अमा॰22:7:1.6; 17:2.12)
8391 भईंसा (ई सब देवतन के अलग-अलग तरह के भोजन हे । माँ काली ला भईंसा, देवी जी ला पठिया, सरस्वती ला फल-फूल आउ मिष्टान्न, गोरइया आउ डाक ला खस्सी-भेंड़ा, सूअर, मुर्गा, कबूतर, टिपउर ला खस्सी-भेंड़ा आउ डाक गोरइया के तो खूनो पीए से जब तरास न जाय त अलगे से तपावन (दारू) देल जाहे, तब जाके उनकर पियास बुझऽ हे ।) (अमा॰22:13:1.12)
8392 भउकी (~ देना) (हो सकऽ हो कि चनेसर महतो के केतरिया में इया पइनिया में बदमास लोग कर छिपइले होतो आउर भउकी देके हमनी के घात करे ला बुलावइत हो ।) (अल॰33:105.29; 41:129.9)
8393 भउजाई (अमा॰27:6:1.12; नसध॰ 9:43.9)
8394 भउजी (अमा॰14:8:1.5)
8395 भउजी (सुमितरी के माय के नजर जब अलगंठवा के माय पर पड़ल हल तऽ हँसइत आउ पुलकइत पाऊँ लगी भउजी कहलक हल ।) (अल॰6:16.20)
8396 भक (~ होना) (ललिता जी अप्पन गला के धागा हाथ में बाँध के सभे चूड़ी फोड़ देलन । सभे महिला ~ होके उनका देखते रह गेलन ।) (अमा॰172:5:2.32)
8397 भकचोंधर (होतई भकचोंधर आउ का ? ~ भर तिलक भी लेतन आउ इन्नर के परी दुल्हन भी ?) (अमा॰167:9:1.5)
8398 भकचोन्हर (~ कहीं के !) (अमा॰165:8:1.32)
8399 भकभक (~ उज्जर) (अमा॰167:12:2.4, 17)
8400 भक-भक गोर (मसक॰ 63:4)
8401 भकभकाना (भगजोगनी भी भक-भका रहल हल ।; फनु मियाँ चार सेल के टउँच पेड़ पर भकभका देलक, तऽ देखलक कि दू गो गोहमन साँप फन फैला के फाँय-फाँय कर रहल हे ।) (अल॰42:130.8, 131.8)
8402 भकलोल, बकलोल (मसक॰ 164:15)
8403 भकसन (रम॰ 14:108.12)
8404 भक-सन (अस्टेशन मास्टर सरदा जैन हाथ में ललटेन लेके दो चार गो पसिंजर के उतरते देखके टिकट जब मांगे लगल तऽ अलगंठवा टिकट देइत सरदा जैन के तरहथी में भकसन चुट्टी काट देलक हल ।) (अल॰41:126.16)
8405 भकोसना (दुइये घड़ी दिन उठते तीन बेर भकोसऽ हे । आउ खाय आउ खाय तिले-तिले घोसऽ हे ।। सब मिल कटोरे-कटोरे बाले बच्चे घटोरऽ हे ।) (अमा॰7:7:1.9)
8406 भक् दे (धुआँइत आग ~ लहर उठल) (नसध॰ 19:77.14; 44:195.27)
8407 भक्खा (मसक॰ 98:20)
8408 भक्तिन (नसध॰ 5:17.8)
8409 भक्-भक् (गली-गुची ~ इंजोर हो गेल) (नसध॰ 35:149.30)
8410 भक्सन (= भक सन) (करीब दू कोस रस्ता तय करे के बाद सुरज महराज पूरब में भक्सन लाल दिखलाई पड़लन हल ।) (अल॰3:6.2)
8411 भगजोगनी (तूँ भगजोगनी बन के का करबऽ । पुनियाँ के चान नियन चमचमा के जिअ ॥) (अमा॰29:15:2.7)
8412 भगजोगनी (भगजोगनी भी भक-भका रहल हल ।) (अल॰42:130.7)
8413 भगत (नसध॰ 14:60.12)
8414 भगत-गुनी (नसध॰ 13:56.25)
8415 भगत-बनिया (रम॰ 13:101.1)
8416 भगत-बनिया (दू बरिस से उनखा दमा के रोग से परेसान हियो । दवा-विरो कराके थक गेलियो हे । भगत बनिया के पीछे भी कम खरच न कइलियो हे । मुदा कुछ न लहऽ हो ।) (अल॰6:17.10)
8417 भगमान (गो॰ 1:4.20, 9.6, 7; मसक॰ 152:8; 154:6; 167:1)
8418 भगमान (= भगवान) (अमा॰6:15:1.16; 169:9:1.28, 11:2.36)
8419 भगमान (= भगवान) (घर में सतनाराइन भगमान के कथा भी होयल हल । अइसे तऽ परतेक पुनिया के भगमान के कथा होवऽ हल ।; भगमान के देखे खातिर अप्पन आँख से चारो ओर हिआवे लगल कि कहीं से भगमान जी जरुरे देखाय देतन ।) (अल॰4:10.28, 11.10, 11)
8420 भगमान साले-साल पैदा देथ, कइसहुँ मरतय-धरतय दिन जयबे करत (गो॰ 3:17.24-25)
8421 भगलपुरिया (~ गांजा) (ए जजमान, हमरा हीं गांजा एकदमे ओरिया गेलो हे । सुनलियो हे कि तोहरा हीं भगलपुरिया गांजा हो । लावऽ न, येक चिलिम हो जाय ।) (अल॰8:24.27, 30)
8422 भगवान (~ बुद्ध के मूरति बन जाना) (नसध॰ 38:163.24)
8423 भगाना (एकरा हिआँ से जल्दी भगाव) (नसध॰ 29:127.8; 41:181.5)
8424 भगाना, भगा देना (नसध॰ 33:142.9)
8425 भटकना (भटकल) (अमा॰13:1:1.14)
8426 भटजुग, भठजुग, भठयुग (नसध॰ 8:34.22, 23; 16:69.9; 30:133.21)
8427 भट-भटी (रम॰ 14:111.8)
8428 भट्ठा (कब॰ 5:4)
8429 भट्ठा (सब पइसा फुँकाइत हे भट्ठा में) (अमा॰26:11:1.4)
8430 भट्ठी (कब॰ 5:11)
8431 भठजुग (मसक॰ 128:11)
8432 भठयुग (अमा॰13:5:1.14)
8433 भठिआरा (रम॰ 8:68.24)
8434 भठियारा (भइया गुस्सा में अलगंठवा के दू तमाचा जड़इत कहलक हल - "ले रे भठियारा, सब परसादी तोंही खा जो । बाप रे बाप, सब एकबाघट कर देलकइ, बेहूदा-हरमजादा ।") (अल॰4:11.28)
8435 भडँती (?) (नसध॰ 26:117.9)
8436 भड़काना (नसध॰ 37:156.25)
8437 भड़भड़ भड़भड़ (बअछो॰ 5:27.13)
8438 भड़भड़ाना (नसध॰ 3:13.9)
8439 भड़भड़िया (~ नानी आज बड़ा गम्भीर हल) (नसध॰ 15:67.8)
8440 भड़सार (चूल्हा ~ में जाना) (नसध॰ 23:96.12)
8441 भड़ास (अमा॰17:5:1.16)
8442 भड़ुवा (नसध॰ 42:186.16)
8443 भतखही (= भतखई) (गोतिया के देबई भात भतखहिया, गोतनी के हलुआ घँटाई ।) (अमा॰1:12:1.12)
8444 भतरछोड़नी (नसध॰ 1:2.10)
8445 भतवान (बअछो॰ 16:71.12, 72.5)
8446 भतार (कब॰ 1:18; मसक॰ 101:10; नसध॰ 1:2.1)
8447 भतार (मट्टी कोड़े गेलऽ छिनरो तूहूँ गंगा पार हे । गजनौटा में चोरयले अयलऽ सोलह गो भतार हे ।; तब ऊ झंझुआ के बोलतन - 'अजी अपने एकलौती बेटिया के पढ़ावऽ ! ओकरे नौकरी लगावऽ ! ओकर भतार खोजे में पता चलतो कि बेटी के पढ़यला पर दमाद कइसन खोजे पड़े हे । ...') (अमा॰1:12:1.30; 24:15:1.17)
8448 भतार (माउग-भतार) (मकस॰ 29:19)
8449 भतिया (पोसली भतिया भेल भतार) (अमा॰25:17:2:19)
8450 भदई (पानी के कोई रंगत न हे, धान-भदई तऽ गेबे कयल, रबीओ चल जायत) (नसध॰ 9:38.24)
8451 भदई-खरीफ (नसध॰ 9:41.18)
8452 भद्दे (= भद दे) (अकास से ~ जमीन पर गिरना) (नसध॰ 44:195.26)
8453 भद्-भद् (छप्पर पर भद्-भद् के अवाज होवे लगल हल । हहा के बरसा बरसे लगल हल ।) (अल॰42:133.30)
8454 भनक (~ परना, ~ मिलना) (नसध॰ 7:30.5; 14:63.10; 30:131.27)
8455 भभकना, भभक जाना (नानी सुन लेलक आउ भभक गेल; आग भभक गेल) (नसध॰ 1:2.17; 27:119.2; 27:120.6; 49:210.29)
8456 भभकाना (तोहनी से आग न लहरतो, लाव हम दू फूँक में भभका दे हियो) (नसध॰ 27:118.28)
8457 भभिस, भभीस (= भविष्य) (नसध॰ 14:60.1)
8458 भभु (भैसुर जोते हर, भभु के लगल घाम) (अल॰26:78.10)
8459 भभू (मसक॰ 99:5)
8460 भभूत (अमा॰11:14:1.14; नसध॰ 9:42.29)
8461 भमाह (जाड़ा के दिन में गुड़ के भेली सोंप-जीरा आउर न जानी कउन-कउन मसाला मिला के चचा जी कोलसार में भेली बना के घर के कंटर में रख दे हलन । आवल-गेल आउ टोला-टाटी के भी खिलाबऽ हलथिन । मुदा आज्झ कोठी-कोहा-कंटर खाली भमाह रह गेल ।) (अल॰12.36.27)
8462 भमोरना (सुमितरी भी करहा से पानी छूके गोड़ चले ला बढ़इवे कइलक हल कि एगो साँप पर कच-सन सुमितरी के पैर पड़ गेल हल । सुमितरी बाप रे बाप, मइगा गे मइया करइत गुदाल करे लगल हल कि हमरा साँप भमोर देलक रे बाप ।) (अल॰18:54.17)
8463 भयामन (गो॰ 5:24.1, 17)
8464 भर (= 1 तोला या 10 ग्राम) (आम तौर से उहाँ के महिला सोना के सिकड़ी अवश्य पहिनऽ हथ । कम से कम दू भर से पाँच भर तक के सिकड़ी पहनऽ हथ ।) (अमा॰163:8:1.26)
8465 भर (आज ~) (नसध॰ 3:12.21)
8466 भर जी (गरान से हमनी के दम घूट रहल हे । घर में बेटा-पुतोह आउर जनाना तक भर जी न बोलऽ हे ।) (अल॰33:106.26)
8467 भर थरिया (बअछो॰ 3:18.13)
8468 भर दुफरिया (गो॰ 4:20.11)
8469 भरता (नागा अलगंठवा के मुताबिक खिचड़ी आउ भरता बनवा के सब के सुध घी के साथ पापड़ भी परस के खिलइलक हल ।) (अल॰31:102.11)
8470 भरनठ (नसध॰ 6:25.4; 23:94.17, 18; 27:122.3)
8471 भरनठ (हमर धरम ~ हो गेल) (अमा॰165:7:2.7, 8:2.7)
8472 भरनष्ट (नसध॰ 42:187.23)
8473 भरना (खानल गड़हा में गिर गेल जेकरा में पानी भरल हल) (नसध॰ 31:136.13)
8474 भरभराना (चंचला भरभराइत अवाज में पूछलक; एक्को महल बने के उम्मीद न हे । बने के पहिलहीं सब के सब भरभरा के गिर पड़ऽ हे ।) (अमा॰12:9:1.19; 21:18:2.3)
8475 भरभराना (पछियारी आउर दखिनवारी घर के दीवार भी दरक गेल हल आउर उत्तरवारी घर तऽ सहन ही हो गेल हल । गाँव में कइ लोगन के घर भरभरा के सहन हो गेल हल ।) (अल॰44:152.14)
8476 भरभराना (भरभरा के खड़ा हो जाना; मिसिर, बरमा के छोड़ के भरभरा के सब हाथ उठ गेल) (नसध॰ 1:1.2; 9:42.5; 45:199.16)
8477 भरम (= भ्रम) (अमा॰4:4:1.9; 14:12:1.17; नसध॰ 11:49.5; 35:150.24; 38:163.13)
8478 भरम भटका (भरम भटका जे हल से मेटा जाहे) (अमा॰17:6:2.4)
8479 भरमाना (अमा॰13:1:1.8; नसध॰ 12:51.15)
8480 भरमार (नसध॰ 35:150.30)
8481 भरल (नसध॰ 29:126.4)
8482 भरल-पूरल (अमा॰13:9:2.15; 17:15:1.7; अआवि॰ 72:4; 106:5; नसध॰ 35:150.29)
8483 भरस्ट (= भ्रष्ट) (अमा॰17:5:1.25)
8484 भल ('अलका मागधी' के भल चाहे ओला नवो ग्रह एक्के साथ हथ, तो एकर अनभल काहे होयत) (अमा॰12:19:1.13)
8485 भला (नसध॰ 22:88.15; 38:162.12)
8486 भलाई (नसध॰ 34:145.27; 35:151.31)
8487 भला-बुरा (नसध॰ 38:163.23)
8488 भलुक (गो॰ 1:6.11)
8489 भवता (मसक॰ 5:14)
8490 भवह (~ नऽ हलऽ, छुआ गेलऽ कि नऽ ?) (नसध॰ 21:86.21)
8491 भविस (अमा॰3:4:1.16, 13:1.3; 173:4:1.20; कब॰ 1:23; मसक॰ 26:22)
8492 भविस (= भविष्य) (नसध॰ 37:160.29)
8493 भविसबानी (अमा॰169:5:2.2)
8494 भविस्स (= भविष्य) (ओकरा लगऽ हल कि अब अलगंठवा के पढ़ाय-लिखाय बंद हो जात, आउर एकर वाद न जानी अलगंठवा के भविस्स का होयत ।) (अल॰13.38.14)
8495 भसकना (भसकल देवाल) (अमा॰166:7:2.30)
8496 भसम (= भस्म) (सोहराय गांजा के विआ चुनइत कहलक -"मंगनी के चनन रगड़बऽ लाला, त लाबऽ न, भर निनार । ओही बात हे इनखर । अइसन हदिआयल जइसन दम मारऽ हका कि एक दम में सब गांजा भसम हो जा हे ।") (अल॰8:25.9)
8497 भसान (बअछो॰ 6:29.9, 18, 31.18)
8498 भहराना (फिन अबकी बेटा होवे के आशा के पुल लोग के दिल में बनल, बाकि बेटी होवे से भहरा गेल) (अमा॰173:20:1.26)
8499 भाँग (त एकर मतलब ई होयल कि अपने भाँग खाके इसकूल आवऽ ही ?; बेटी माँग के का करत  - खाक ! घर में भूँजी भाँग रहे तब न !) (अमा॰23:14:1.8, 16:1.25)
8500 भाँड़ के रखना (गो॰ 7:36.10)
8501 भाँय-भाँय (अब तक गरीब-गुरबा के बेटा-बेटी रहतो हल तऽ सउँसे गाँव में ~ हो जइतो हल) (नसध॰ 14:60.26; 16:69.1)
8502 भांड़ी (फूब॰ मुखबंध:1.15)
8503 भाई-बंधु (नसध॰ 37:157.22)
8504 भाओ (गो॰ 10:44.22; 11:47.11)
8505 भाखन (= भाषण) (नसध॰ 9:41.17)
8506 भाखल (जान ~ होना) (भूतहा मील में कोई आटा पिसावे न जाय, न तोरी तीसी कोई पेरावे, जेकर जान ~ होय ओही जाय) (नसध॰ 32:138.7)
8507 भाखा (= भाषा) (बाद में तो बौद्ध धरम आउ पटना-चम्पा (भागलपुर) के बेपारी लोग के सम्पर्क भाखा के रूप में मागधी लंका, बरमा, जावा-सुमात्रा से लेके चीन, जापान, यूनान, फूनान तक दूर-दूर तक फैल गेल) (अमा॰30:8:1.2; 10:2.5)
8508 भाग (= भाग्य) (गो॰ 3:19.24, 25; 5:25.23, 28)
8509 भाग (= भाग्य) (जेकरा ~ में जे रहऽ हे ओही हो हे) (नसध॰ 5:18.24; 6:24.15)
8510 भाग (= भाग्य) (शहर में काम करे जा आउ अप्पन भाग अजमावऽ; हाय रे ~ !) (अमा॰23:5:1.10; 166:9:1.31; 173:20:1.6)
8511 भाग के साँढ़ (रम॰ 13:104.24-25)
8512 भागना, भाग जाना (नसध॰ 28:125.25)
8513 भागसाली (= भाग्यशाली) (नसध॰ 25:107.6)
8514 भाग्ग (= भाग्य) (हम्मर मतिए मारल गेलो हल । भाग्ग में जे बद्दल रहऽ हे उ होके रहऽ हे भाय ।) (अल॰8:23.21)
8515 भात ('भात' प्रेम कुमार मणि के बड़ी चर्चित मगही कहानी हे । अकाल आउ उत्पीड़न के मारल हे सोमारी ! अकाल के मारल ऊ अप्पन मरद के कारज में भाई के भातो न देलक । ... एगो नऽ, तीन गो भात ।) (अमा॰17:6:1.15, 16)
8516 भात (हमर जत गेल आउ भातो न मिलल) (नसध॰ 23:95.27; 29:129.31)
8517 भादो (अआवि॰ 80:27)
8518 भादो (भरला ~ सुखला जेठ) (नसध॰ 6:24.30)
8519 भाय (= भाई) (अमा॰13:10:1.26; 16:11:1.10, 12; 170:5:1.29; 172:11:1.13; मसक॰ 97:1)
8520 भाय (= भाई) (अलगंठवा के बाबू इयानी कलकतिया बाबू, जे बारह बरिस के उमर में बूढ़ा बाप, चार बरिस के माय के टुअर भाय आउर अप्पन अउरत के नैहर में छोड़ के कलकत्ता चल गेलन हल ।; ई बात सुन के चचा-भाय आउर भोजाय आउर टोला के कई गो अमदी के ठकमुरकी लग गेल हल ।) (अल॰1:1.9; 4:11.26; 8:23.21)
8521 भाय-भोजाय (अमा॰13:9:2.13)
8522 भार (~ परना) (नसध॰ 27:120.30)
8523 भारथ (= भारत) (भारथ गाँव के देस हे ।) (अल॰44:154.19)
8524 भारी (~ गलती कर देना) (नसध॰ 38:163.26)
8525 भाव (अहंकार के ~) (नसध॰ 35:150.16)
8526 भाव-बट्टा (अआवि॰ 30:16, 23)
8527 भावी (~ संकेत) (नसध॰ 38:161.20)
8528 भासन (बअछो॰ 2:15.20; 9:40.8)
8529 भासन-वासन (बअछो॰ 2:15.21)
8530 भासा (अगर कोई भासा के आदर, सम्मान, ओकर उचित स्थान ओकरा बोलेवाला बेकती न देत, तब का दोसर भासा-भासी देतन ?; भारत के अन्य भासाभासी के मुकाबला में मगहियन लोग सबसे जादे अप्पन भासा के हीन समझऽ हथ आउ ओकरा उपेक्षा के नजर से देखऽ हथ ।) (अमा॰1:5:1.9, 11, 6:2.4, 10:1.15; 16:5:1.5)
8531 भासा (भाषा) (फूब॰ मुखबंध:2.27, 32)
8532 भासा-भासी (अगर कोई भासा के आदर, सम्मान, ओकर उचित स्थान ओकरा बोलेवाला बेकती न देत, तब का दोसर भासा-भासी देतन ?; भारत के अन्य भासाभासी के मुकाबला में मगहियन लोग सबसे जादे अप्पन भासा के हीन समझऽ हथ आउ ओकरा उपेक्षा के नजर से देखऽ हथ ।) (अमा॰1:5:1.11, 6:2.3, 10:1.17)
8533 भिंजना (भिंजल भूसा) (नसध॰ 6:27.22; 37:159.14)
8534 भिखमंगा, भीखमंगा (नसध॰ 6:24.11; 8:34.30)
8535 भिजुन (अमा॰13:12:2.27; 165:10:2.22; गो॰ 8:36.27; 11:47.16, 19; कब॰ 16:13; मसक॰ 160:13; नसध॰ 5:19.19; 37:159.14; 44:192.21)
8536 भिड़काना, भीड़काना (नाना-नानी के खिला-पिला के तेल-कुड़ कर के आउ टोला-टाटी निसबद हो जइतो तऽ अइवो । मुदा तूँ घर के अगिला डेउढ़ी पर ही अप्पन बिछौना लगइहऽ । केवाड़ी खाली भीड़का दीहऽ ।; बरेठा लगल दरवाजा धीरे-धीरे उसका के फिन भिड़का के बाहरी से सिटकीली चढ़ा के अप्पन घर से बाहर निकल के जमीन पर सले-सले गोड़ रोपइत अलगंठवा दने सोझिआ गेल हल ...।) (अल॰34:110.17; 36:113.25)
8537 भितरहीं-भितरे (गो॰ 10:43.26)
8538 भितरौली (~ दाँव मारना) (अमा॰16:12:2.10)
8539 भिनकना (मन ~) (हमरा तोरा से मन भिनक गेल) (अमा॰165:23:1.5, 6)
8540 भिनभिनाना (विनोबा जी के पत्नी अप्पन पति के जरूर मानऽ हथ मगर भीतर से भिनभिनायल रहऽ हथ) (अमा॰19:14:1.6)
8541 भिनसरवे (अमा॰166:6:2.15)
8542 भिनसरे (अल॰41:127.22; मसक॰ 123:18)
8543 भिनसार (भिनसरवे से) (नसध॰ 3:10.18)
8544 भिनुसरवे (पाँच बजे ~ ओकर बाप ओकरा जगा दे हथ) (अमा॰13:7:2.17)
8545 भिमिर (लाल ~) (कतकी पुनिया के चांद पूरब ओर लाल टह-टह होके आग के इंगोरा नियन इया कुम्हार के आवा से पक के लाल भिमिर हो के बड़गो घइला नियन उग रहल हल ।) (अल॰6:18.11)
8546 भिर (बअछो॰ 9:41.14; 10:47.11; 16:72.11; कब॰ 6:19; मसक॰ 13:3; 14:3; 18:26; 19:3; 29:3; नसध॰ 5:16.22)
8547 भिर (= पास) (हमरा हीं से पच्छिमे दू किलोमीटर पर 'मेन' गाँव में बूढ़वा महादे हथ । उनका भिर हर साल फागुन तिरोस्ती के बिहानी होके एगो स्थानीय मेला लगऽ हे जेकर नाम हे कोचामहादे इया कोचामठ के मेला ।; हम तो मइया से जादे ओकरे भिर अगोरले रहऽ हली ।) (अमा॰22:13:2.20, 16:2.21)
8548 भिर, भीर (भीर - रम॰ 3:34.18)
8549 भिरना (= भिड़ना) (अमा॰16:12:1.29, 30)
8550 भिरी (अब तो घर रंग-बिरंगा बिजली के बउल से सजावल जाहे । जादे से जादे तुलसी चौरा पर एगो दीया बरत आउ एगो गणेश-लछमी जी भिरी ।) (अमा॰13:7:1.12)
8551 भिरी, भीरी (चुभसे॰ 1:2.14; 3:9.25, 11.3, 12.12; गो॰ 1:6.24; 2:11.29; 2:12:26, 27; 11:48.2)
8552 भिरु (= भिर, पास) (अमा॰20:18:1.14)
8553 भिरु, भिरू (नसध॰ 1:3.9; 3:9.1)
8554 भिरूआ (ओहनी के ~ गेला पर मिसिर जी पूछलन) (नसध॰ 43:190.22)
8555 भी (= भिर, भिरु) (ऊ ताव में मिसिर जी भी पहुँचल आउ उनका गरिआवइत सीधे चमटोली पहुँच गेल) (नसध॰ 14:63.30)
8556 भींजाना (नसध॰ 1:3.2; 3:9.21)
8557 भीख (~ माँगना) (नसध॰ 37:157.7)
8558 भीड़ (नसध॰ 36:153.15)
8559 भीड़-भाड़ (दशहरा के ~ आउ ओकरो पर आज दुर्गापूजा के आखरी दिन हल) (अमा॰24:16:1.5)
8560 भीतर (=  भित्तर; कोठरी) (अलगंठवा अप्पन घर के दखिनवारी भीतर में जमीन पर तार के चटई विछा के सुतल हल ।) (अल॰29:88.20)
8561 भीतरी (नसध॰ 29:128.19)
8562 भीतरे भीतर (फूब॰ 1:4.2)
8563 भीतरे-भीतरे पकना (बअछो॰ 14:62.22; 15:68.7)
8564 भीती (गेठरी से जूतन के खोल के ~ में गाड़ल कांटी में टांगे लगलन) (नसध॰ 10:43.24)
8565 भीर (= भीड़) (नसध॰ 6:28.1)
8566 भीर (=पास) (बटेसर भी अप्पन जनाना भीर से उठ के भीड़ दने लपकल-धपकल चल गेल हल ।; जब न तब घुरिया-घुरिया के ओकरे भीर जा हऽ । ओकरा अप्पन गाड़ धोवे के अकले न हइ आउ डगडरिए करऽ हे ।; करहा भीर आके सभे छप्प-छप्प पानी छूए लगल हल ।) (अल॰7:22.24; 14.42.26; 18:54.14)
8567 भीरी (फूब॰ मुखबंध:1.5; 1:4.16; 5:19.31)
8568 भीरी (रंगुआ सोचलक कि ~ गेला पर भंडा फूट जायत) (अमा॰13:6:1.7)
8569 भीरू (= भिर) (कब॰ 40:6)
8570 भीरे (= पास, नजदीक) (अमा॰21:11:2.23, 25; 27:11:1.23, 27)
8571 भुँजड़ी-भुँजड़ी (गो॰ 1:5.3)
8572 भुँजना (मछरी ~) (नसध॰ 29:129.32; 36:156.10)
8573 भुँजिया (~ आउ अँचार) (नसध॰ 32:140.33)
8574 भुंजना (भुंजल बूँट) (अमा॰173:21:2.25)
8575 भुंजा (कब॰ 25:23)
8576 भुंजा (= भूंजा) (इधर अलगंठवा आउर आजाद खाड़ में जाके फड़ही के भुंजा घी गोलकी से सनल खाइत आगे के जोजना बनावे लगल हल ।) (अल॰41:129.26; 42:134.29, 30)
8577 भुंजा (दुअरे पर बइठ बुढ़िया मटकी मार रहल हे । कोनमा में जमनकी भुंजा मसका रहल हे ।।) (अमा॰17:19:2.21)
8578 भुंजा-फुटहा (मसक॰ 72:8)
8579 भुआ ('भुआ' डा॰ स्वर्णकिरण के कहानी हे । ई कहानी में मिसरी लाल के कयल-धयल बुढ़ारी में बेटा से जे उम्मेद हल ऊ भुआ बन के उड़ गेल ।) (अमा॰17:7:1.10, 12)
8580 भुइयाँ (अआवि॰ 82:17; गो॰ 1:8.6; 2:13.30; 6:30.20, 31.8; 7:34.20; नसध॰ 32:138.28)
8581 भुइयाँ (= भूमि, जमीन) (खटिया पर बइठहूँ न दे हल, भुइयाँ में बइठावऽ हल; हम्मर घर के औरत तो भुइयाँ में बैठे हे, हमरा अफसर नऽ, घर गृहस्थी लायक बहू चाही ।) (अमा॰22:7:1.22; 27:17:1.23)
8582 भुइयाँ (=एक जाति का नाम ) (जात-परजात, भुइयाँ-चमार के भेद-भाव भुला के ई सेवा में लगल रहऽ हथ; हरिजन माने भुइयाँ-चमार, डोम-दुसाध होवऽ हे, समझले ? माने कि नीच जात ।) (अमा॰19:13:2.27; 165:7:2.2)
8583 भुइयाँ देख के चलना (गो॰ 7:34.20)
8584 भुइयाँ-चमार (जात-परजात, भुइयाँ-चमार के भेद-भाव भुला के ई सेवा में लगल रहऽ हथ; हरिजन माने भुइयाँ-चमार, डोम-दुसाध होवऽ हे, समझले ? माने कि नीच जात ।) (अमा॰19:13:2.27; 165:7:2.2)
8585 भुक (धुआँइत आग तनी ~ से लहरल) (नसध॰ 27:118.20)
8586 भुक-भाक (बिजली के) (गो॰ 1:1.7)
8587 भुकभुकाना (नसध॰ 28:123.7)
8588 भुक्खड़ (ई सब नेतवन तो हमनियो से बड़का ~ हथ) (अमा॰163:14:2.19)
8589 भुक्खल (अआवि॰ 109:18)
8590 भुक्खल-पियासल (गो॰ 5:24.23-24)
8591 भुक्खे-पियासे (अमा॰167:9:2.12)
8592 भुखले-पियासले (गो॰ 1:8.30)
8593 भुच्च (~ देहात) (अमा॰167:8:2.1)
8594 भुजफटउना (पंडित जी जब आखिरी भिक्षा माँगे गेलन, तब एगो बुढ़िया विचारलक कि ई ~ रोज भीख माँगे आवऽ हे) (अमा॰23:7:1.12)
8595 भुजफट्टी (पानो सुनरी के तीन-चार सटक्का पीठ पर  देइत बोलल -'भुजफट्टी, आज के बाद जहाँ कुच्छो बोले कि देह के खाले खींच लेबउ') (अमा॰163:12:2.16)
8596 भुतही (गो॰ 1:6.31)
8597 भुनभुनाना (नसध॰ 3:10.14)
8598 भुनभुनाना (येक रोज अलगंठवा जइतीपुर बजार से दू घंटा रात विते पर अकेले लउट रहल हल कि गोरइया थान डगर पर झमेठगर इमली आम आउर तार के पेड़ तर भुनभुनाय के आउर धवर-धवर के अवाज सुनाई पड़ल ।) (अल॰27:82.9)
8599 भुनुर-भुनुर (रम॰ 5:45.14)
8600 भुनुर-भुनुर (उ लोग आपस में भुनुर-भुनुर बतिया रहल हल । बस फिन का हल, नाराइन भगत परझो मार-मार के गरियावे लगल, छिया-छिया के घिनौना गारी पारइत कहे लगल कि इ जगह डायन आवल हो ।) (अल॰18:57.30; 23:73.17; 44:152.3)
8601 भुभुक्का (लाल ~) (मसक॰ 135:21)
8602 भुरकुस (गो॰ 1:7.3)
8603 भुरकुसनी (मारके ~ कर देना) (नसध॰ 1:5.9; 45:199.19-20)
8604 भुरभुर (गो॰ 1:5.23)
8605 भुरुकवा (मसक॰ 71:4)
8606 भुला जाना (नसध॰ 5:21.26; 37:157.20)
8607 भुलायल (नसध॰ 27:120.12; 41:184.8, 9)
8608 भुसघार (मसक॰ 79:19)
8609 भुसड़ी (गो॰ 1:8.29)
8610 भुसड़ी (नहर पर बेर लुकलुकाय लगल हल । ~ एतना उड़-उड़ के लोग के देह पर गद-गद बइठ रहल हल कि उहाँ अब ठहरना मोसकिल हो रहल हल ।) (नसध॰ 30:134.13)
8611 भुसड़ी (पहिला पानी से ~ आउ दीआँ निकल के सगरो छत पर उड़इत हलन) (नसध॰ 35:149.24, 25)
8612 भुहाना, भुहा जाना (अबरी रग्घू के सब तरक भुहा गेल आउ जमुना के कुहरले नियन बोलल) (नसध॰ 37:157.28)
8613 भूँजना (सपना मत देख ! आगू में जे भूँजल आलू हउ से खो !; घर के भीतर ऊ प्रसव-पीड़ा से छटपटाइत हे आउ ई दुन्नो परमेसर महतो के खेत में से आलू चोरा के लयलन आउ भूँज के खाइत हथ ।) (अमा॰27:14:2.5; 28:7:1.6)
8614 भूँजा (अमा॰168:8:2.9)
8615 भूँजी (बेटी माँग के का करत  - खाक ! घर में भूँजी भाँग रहे तब न !) (अमा॰23:16:1.25)
8616 भूंजा (= भुंजा) (फिन दिलदार राम-रमेसर-रजेसर चौकी पर बइठ के भूंजा गुड़ खा के घर जाय ला अलगंठवा से अंगिया मांगे लगल) (अल॰26:80.17; 42:135.1)
8617 भूअर ( ~ देह) (नसध॰ 3:12.22)
8618 भूअर (छोटे-छोटे ~ आख ओली) (नसध॰ 16:69.5)
8619 भूइयाँ (नसध॰ 35:151.25)
8620 भूख-पिआस, भूख-पियास (नसध॰ 28:122.25; 32:140.1)
8621 भूखल (भूखल लहालोट मिजाज; भूखल-छछनइत आउ पित-पिताल हालत) (एही से तो ऊ आम रास्ता पर अप्पन आसन जमौले हथ कि हजार-पान सौ ढेला रोज मिल जात, त चलऽ अप्पन भूखल लहालोट मिजाज एकदम शांत हो जात; पहुँचल सन्त महात्मा सोना-चानी के मट्टी के ढेला जरूर समझऽ हथ, मगर औसत आदमी पइसा के भूखल रहऽ हे) (अमा॰22:13:2.10, 12; 28:6:2.24)
8622 भूखा (भूखे मरना) (नसध॰ 37:157.9)
8623 भूत (~ नियन रहना) (नसध॰ 5:22.5)
8624 भूत (बड़-बड़ भूत कदम तर नाँचे, बेंगवा माँगे पूजा) (रम॰ 15:119.12)
8625 भूतनी (नसध॰ 9:40.5; नसध॰ 11:48.31)
8626 भूत-परेत (नसध॰ 26:114.25)
8627 भूतभउना (रम॰ 12:89.23)
8628 भूत-मूंगा (कोय कहे कि रात-रात भर बगीचवा में डोलपत्ता खेलऽ हइ । ओकरा तनिको भूत-मूंगा से डर-भय न लगऽ हइ ।) (अल॰2:5.4)
8629 भूतहा (नसध॰ 3:12.16; 8:36.10; 32:138.3)
8630 भूतही (रस्ता में भूतही नदी पड़ल हल ।) (अल॰16.48.9)
8631 भूताहा (अरार पर पीपल, बर आउर ताड़ के पेड़ एक साथ जोट्टा हो के बड़ी दूर में फैलल हल । जेकरा लोग भूताहा पेड़ कहऽ हथ ।) (अल॰21:66.30)
8632 भू-भड़क (फूब॰ 2:8.28)
8633 भूमिहार (बअछो॰ 6:29.4)
8634 भूम्हरी (~ में सुताना) (हमर जमीदारी हल तो अइसन लोग के मोगली डंटा देके ~ में सुता के चुतर पर पैना से सोटवा दे हली) (नसध॰ 34:145.25)
8635 भूर (मकस॰ 10:20)
8636 भूर (=भूड़ ) (हमरा लगल कि टूटल पेटी के ~ से लोकइत सूप से तोपल रुखी के बच्चा किलकारी मारइत गली के झमठगर पेड़ के फुतुंगी पर चढ़ गेल जहाँ से फिनो ओकरा पकड़ के सूप से तोपना सहज नऽ हे; चद्दर में चौतरफा ~ हो गेलो; भूरे-भूर करेजा; हम सब के गरदन पर छुरी चलाके तोहर ~ न भरबउ) (अमा॰1:10:2.4; 5:8:1.22; 19:8:1.25; 173:11:2.18)
8637 भूर (ओकर कपड़ा फाट के भूरे-भूरे भेल हल आउ ~ से बरफ नियन हवा समा के ओकर हिरदा कँपा दे रहल हल; नानी कहऊँ बिगड़ गेल तऽ कमासुत दल में ~ हो जायत लमहर) (नसध॰ 7:28.25, 26; 10:44.27; 13:56.19; 18:75.25)
8638 भूरकुंड (रम॰ 13:101.9)
8639 भूरकुंडा (= भुरकुंडा) (तूँ घर में माय के सत्तू के भूरकुंडा बनावे ला कह दे । रोटी तऽ बनले हइए होतइ ।) (अल॰3:8.29)
8640 भूरा (गो॰ 3:19.7)
8641 भूसा (नसध॰ 6:26.12; 37:159.14)
8642 भेंकुराना (बने-बने गाछे-गाछे आमे कटहरवे तूँते, हरि-हरि फरे-फूले बरखा भेंकुरावे रे हरी ।) (अमा॰169:18:1.9)
8643 भेंट न घाँट आउ हमहीं फुलनमा बहू (गो॰ 1:10.1)
8644 भेंट-घाँट (भेंट न घाँट) (गो॰ 1:10.1; 9:41.1)
8645 भेंड़ा (ई सब देवतन के अलग-अलग तरह के भोजन हे । माँ काली ला भईंसा, देवी जी ला पठिया, सरस्वती ला फल-फूल आउ मिष्टान्न, गोरइया आउ डाक ला खस्सी-भेंड़ा, सूअर, मुर्गा, कबूतर, टिपउर ला खस्सी-भेंड़ा आउ डाक गोरइया के तो खूनो पीए से जब तरास न जाय त अलगे से तपावन (दारू) देल जाहे, तब जाके उनकर पियास बुझऽ हे ।) (अमा॰22:13:1.14)
8646 भेजना (अभी भिखना के भेजलियो हे) (नसध॰ 29:127.13)
8647 भेजल (फूब॰ मुखबंध:1.25)
8648 भेड़ारी (नसध॰ 3:9.8)
8649 भेयंकर (= भयंकर) (नसध॰ 38:162.13, 14)
8650 भेली (जाड़ा के दिन में गुड़ के भेली सोंप-जीरा आउर न जानी कउन-कउन मसाला मिला के चचा जी कोलसार में भेली बना के घर के कंटर में रख दे हलन ।) (अल॰12.36.24, 25)
8651 भेली (भेलिया) (नसध॰ 3:10.18, 19, 21 )
8652 भेष (अमा॰26:11:2.7)
8653 भेस (= वेष) (नसध॰ 27:119.28)
8654 भैंसुर (अमा॰1:12:2.14, 15, 16, 17, 18; 166:14:2.7)
8655 भैलू (= value) (ऊ अब बुढ़ारी में सिपाही जी के कोई ~ न देवऽ हलन) (अमा॰171:7:2.15)
8656 भैसुर (भैसुर जोते हर, भभु के लगल घाम) (अल॰26:78.10)
8657 भोंकइया (गो॰ 6:30.24)
8658 भोंकना (सूई ~) (नसध॰ 29:126.24)
8659 भोंकरना (गो॰ 8:37.2)
8660 भोंकार (~ पाड़ के रोना, ~ पार के रोना/ कानना) (ऊ दू दिन ले ~ पार के रोवइत रहल; माय के मरला पर भुनेसर के पूरा परिवार ~ पाड़ के रोवे लगलन) (अमा॰21:17:2.21; 171:8:2.14, 9:1.3; 173:8:1.27)
8661 भोंकार पार के रोना (कब॰ 39:11)
8662 भोंड़ (गो॰ 1:9.14)
8663 भोकार (~ पार के रोना) (अलगंठवा चाचा जी में लपट के भोकार पार के रोवे लगल हल ।; झारते-झारते झरताहर सब पसीने-पसीने हो गेलन हल । मुदा सुमितरी के ठीक होवे के आसा पर पानी फिर रहल हल । सुमितरी के नानी आउर नाना भोकार पार-पार के रोबे लगलन हल ।) (अल॰11.33.23; 18:57.27; 26:78.23; 27:84.20)
8664 भोकार पार के रोना (मसक॰ 51:6)
8665 भोकुंदर (गो॰ 4:22.18)
8666 भोगिया (ओकरा अइसन सबक सिखाबे ला चाह रहली हे कि जिन्दा रह के जीमन भर अप्पन कूकरम के भोगिया भोगते रहे ।) (अल॰21:68.26)
8667 भोज (कहाँ ... राजा भोज आउ भोजवा तेली) (नसध॰ 30:131.30)
8668 भोजय (= भोजाय, भौजाई) (सुबह होते ही अलगंठवा पटना जाय ला कपड़ा-लत्ता सरिआवे लगल हल । अइसन करते देख के भोजय पूछलक हल -"कहीं बाहर जइबहु का ?") (अल॰28:86.13)
8669 भोजाय (= भौजाई) (ई बात सुन के चचा-भाय आउर भोजाय आउर टोला के कई गो अमदी के ठकमुरकी लग गेल हल ।) (अल॰4:11.26)
8670 भोट (बअछो॰ 9:41.10, 13, 14; 15:68.11; 17:74.11)
8671 भोट (= वोट) (~ लगाना; ~ देना) (अमा॰14:9:1.17; 166:18:2.11)
8672 भोमा (जीरवा नानी के कह देत आउ उहाँ से ~ नियन सउँसे गाँव में हलकारा मच जायत) (नसध॰ 14:61.27)
8673 भोरइया (दे॰ भोरउआ) (अल॰21:67.14)
8674 भोरउआ (जब पिछुआनी में फन्नू मियाँ के पलानी में मुरगा बांक दे हल आउर जयतीपुर मसजिद में भोरउआ नमाज पढ़े के अजान के अवाज सुनते ही अलगंठवा के चचा उठ के गाय-बैल के सानी देवे लगऽ हलन आउर अलगंठवा के जगा के लालटेन जला के पढ़े ला बैठा दे हलन ।) (अल॰2:4.24)
8675 भोरउआ (बड़की भोरउआ के उत्तर आउर पूरब रूखे गली में कुत्ता भूँके लगल हल ।) (अल॰21:66.16)
8676 भोरगरे (मसक॰ 119:26)
8677 भोरहरिआ (रम॰ 1:18.19)
8678 भोरहरिए (बाप रे, केता सकेरे चललू हल कि भोरहरिए जुम गेलहु ।) (अल॰16.46.25)
8679 भोरहरिया (माघ के ~ में) (नसध॰ 26:115.20)
8680 भोरहीं (अमा॰16:16:2.24; बअछो॰ 5:26.25)
8681 भोरहीं-भोरहीं (मसक॰ 168:15)
8682 भोराना (गो॰ 4:20.31)
8683 भोराना (= भ्रमित करना, झूठी तसल्ली देना) (राते रात भर अलगंठवा के तनिको आँख न लगल हल । कई वेर पेसाब करे ला उठल हल । अकास में तरगन आउर बसबेड़ी में चिड़ँई-चुरगुन के अवाज से अपने आपके भोरा रहल हल ।; अलगंठवा के बात सुन के उ सबके लगल हल कि इ हमनी के खाली भोरा रहल हे । भला निके-सुखे कइसे पार होयब ।; विस्वनाथ तिवारी पर ओकरा विस्वास हो गेल कि उ धोखा कभी न देत । रस्ता में अलगंठवा अप्पन सुभाव से रिझा लेलक हल, भोरा लेलक हल ।) (अल॰21:66.14; 31:97.1; 44:149.16)
8684 भोरे (बअछो॰ 5:26.23; फूब॰ 5:18.20; 8:26.2; मसक॰ 59:13)
8685 भोरे (मुखिया जी ~ की समझा रहलखुन हल ?) (अमा॰18:8:2.29; 173:1:1.10)
8686 भौंरी (अमा॰5:12:2.28)
8687 भौकी (दे॰ भउकी) (पुलिस भान पर जमान सब अलगंठवा से कविता केहानी के सुनइत आउर गलवात करइत जा रहलन हल । मुदा अलगंठवा के मन असान्त हल । ओकरा लग रहल हल कि भौकी देके कहीं कुछ रस्ता में कर देत ।) (अल॰44:149.14)
8688 भौजी (नसध॰ 27:120.32)