Saturday, May 8, 2010

310. मुख्य पृष्ठ

अद्यतन संशोधन: 13-06-2010 22:48 ; कुल शब्द-संख्या = 11,380
द्वितीय संशोधन:  08-05-2010 14:17 ; कुल शब्द-संख्या =   9,899
प्रथम संशोधन:    21-02-2010 16:05 ; कुल शब्द-संख्या =   8,619

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3.00 अकारादि शब्द

3.00 अकारादि सभी शब्द
3.01 अँ - अं आद्यक्षर वाले शब्द
3.02 अइ-अउ आद्यक्षर वाले शब्द
3.03 अक-अघ आद्यक्षर वाले शब्द
3.04 अच-अझ आद्यक्षर वाले शब्द
3.05 अट-अण आद्यक्षर वाले शब्द
3.06 अत-अन आद्यक्षर वाले शब्द
3.07 अप-अम आद्यक्षर वाले शब्द
3.08 अय-अव आद्यक्षर वाले शब्द
3.09 अश-अह आद्यक्षर वाले शब्द

3.09 अश-अह आद्यक्षर वाले शब्द

543 अष्टावक्र (सबसे मुश्किल तो ई हे कि अगर लड़की पढ़ल हे त अफसरे हे आउ न पढ़ल हे त जाहिले हे । ओकरो पर से घर के काम-काज में निपुन हे कि न, मुँह समेट के रहेवाली हे कि न, बाप के गाँठ पूरा हे कि न । कहे के मतलब हे कि लड़की तो चाही सर्वगुणसम्पन्न । बाकि लड़का ? लड़का के पूछऽ मत । अष्टावक्र सूरत सकल वाला के भी स्वप्न सुन्दरी चाही ।) (अमा॰27:17:2.2)
544 असंका (= आशंका) (नसध॰ 10:46.5)
545 असंका (= आशंका) (असंका ओकर माय के मन में बनल रहऽ हल ।) (अल॰12.36.5)
546 असकुस (फूब॰ मुखबंध:2.5)
547 असथान (= स्थान) (धरती के ऊपर जे असमान  हे ओकरा में दिन में सूरज आउ रात में चान के जउन असथान हे, ओकरा से ढेर जादे ऊँचा असथान मगही साहित्य के असमान  में डॉ॰ राम प्रसाद सिंह के हे) (अमा॰25:7:1.2, 3)
548 असनान (= स्नान) (कतकी पुनिया नेहाय ला अलगंठवा के माय आउ टोला-टाटी के कइ गो अउरत-मरद फतुहा गंगा-असनान करे ला आपस में गौर-गट्ठा करे लगल हल ।) (अल॰6:14.11, 26)
549 असमर्थ (नसध॰ 32:139.6)
550 असमसान (= श्मशान) (औरत के ~ घाट पर जाय के सवाल पर भी कम बवाल न भेल) (अमा॰10:9:1.15)
551 असमान (= आसमान) (धरती के ऊपर जे ~ हे ओकरा में दिन में सूरज आउ रात में चान के जउन असथान हे, ओकरा से ढेर जादे ऊँचा असथान मगही साहित्य के ~ में डॉ॰ राम प्रसाद सिंह के हे) (अमा॰25:7:1.1, 3; 28:18:1.7)
552 असमान (= आसमान, आकाश) (असमान-जमीन के फरक) (मकस॰ 13:3; 20:13)
553 असमान में गुम होना (गो॰ 8:39.16)
554 असमान में ढाही मारना (रम॰ 13:104.6)
555 असरा (अमा॰3:11:1.22; बअछो॰ 5:26.24)
556 असरा (~ में रहना, ~ देखना) (नसध॰ 1:6.14; 5:21.19; 35:152.9; 39:165.3)
557 असराफ (चुभसे॰ 1:2.4; रम॰ 14:112.13)
558 असली (नसध॰ 5:21.21; 33:144.9)
559 असलोक (= श्लोक) (अमा॰167:17:2.8)
560 असहाय (नसध॰ 38:162.26)
561 असाढ़ (अआवि॰ 81:3; नसध॰ 6:23.10; 26:116.7)
562 असाढ़ (= आषाढ़) (अमा॰30:13:1.6)
563 असान (= आसान) (नसध॰ 12:52.11)
564 असान (हमरा सुमितरी के पढ़वे के अउकात हइ बड़ीजनी, पढ़ाना असान बात हे का ? आज हम गछ लिअइ आउ कल हमरा से खरचा-वरचा न जुटतइ तऽ हम का करवइ ।) (अल॰10.31.23)
565 असार (= आसार) (रजधानी से गाँव तक परिवरतन के हवा बहे लगल हे । अब नो छो बड़ी सकेरे होवे के असार दिखाइ पड़ रहल हे ।) (अल॰44:145.23)
566 असिरवादी (अमा॰174:7:1.18)
567 असी (= अस्सी) (नसध॰ 30:133.2)
568 असीरवाद (नसध॰ 5:17.23)
569 असीरवाद (अगे बेटी, चिट्ठिया में हमरो ओर से अलगंठवा के असीरवाद आउर ओकर माय के अकवार गहन भी लिख देहु ।) (अल॰9:29.14)
570 असीर्वाद (नसध॰ 11:48.16, 20; 24:97.29)
571 असुलना (कब॰ 19:8)
572 असूल करना (बअछो॰ 12:57.10; मसक॰ 16:16)
573 अस्तर (केकरो तन पर बस्तर नञ, घरवालियो के फट्टल साड़ी पर ~ नञ, मुदा ताड़ के छिलकोइयो से बत्तर जिनगी) (अमा॰173:16:1.15)
574 अस्त-व्यस्त (नसध॰ 36:153.17)
575 अस्तित्व (अपन ~ के ज्ञान होना) (नसध॰ 32:140.4; 35:150.22)
576 अस्थिर (= स्थिर) (नसध॰ 9:40.29; 22:91.28)
577 अस्पताल (नसध॰ 27:118.15, 119.13)
578 अहंकार (नसध॰ 35:150.16)
579 अहथिर (नसध॰ 32:139.10)
580 अहमियत (अमा॰174:6:1.15)
581 अहर ... पहर (ऊ अहर देखइत, पहर देखइत ओइसहीं खड़ा रहल बाकि ओकर मन के देवता न अयलन) (नसध॰ 44:194.30-31)
582 अहर-पहर (अरे हाँ भाय, तोहनी के अहर-पहर देखके आ रहलियो हे । हम वालमत विगहा के घाट पर पहर भर से बाट जोह रहलियो हल । ... चलऽ, अइते जा ।; इनखा जलदी चल जाय के चाही, काहे कि उ बेचारी अकेले घर में डिंड़िआ रहले होत । ... सुमितरी अहर-पहर देखके भले न बरेठा लगा देलकई होत ।) (अल॰31:97.7; 42:131.29)
583 अहर-पोखरा (नसध॰ 40:174.13)
584 अहरा (मसक॰ 68:6; नसध॰ 9:43.3; 35:149.3; 37:158.2)
585 अहरा (अप्पन अउरत के बात सुनके बटेसर कहलक हल कि पुरवारी अहरा में मछली मरा रहल हल ।) (अल॰5:14.1; 35:112.20)
586 अहरा (विनोबा जी सैकड़न गाँव में हजारो कुइयाँ बिना कमीसन लेले खनवा देलन, सैकड़ो बोरिंग धँसवा देलन आउ काम के बदले अनाज स्कीम के तहत कहुँ रोड पास करवा देलन तो कहुँ अहरा पर भर पोरिस मटियो देवा देलन; अहरे पोखरिये करहे नदिये तलइये नाले, हरि-हरि जलवा मछलिया बगुला सोहाहै रे हरी ।) (अमा॰19:12:1.2; 169:18:2.1)
587 अहरी (बअछो॰ 1:10.26, 11.11; 11:51.14, 52.7; 13:59.13)
588 अहरी (अहरी पोखरी भरल नहाए भईंस  पसर के पानी में) (अमा॰22:17:2.12)
589 अहिंसक (नसध॰ 40:178.11)
590 अहिल-दहिल (कभी-कभी असाढ़ के वादर गरज-बरज के बरस जा हल । जेकरा से खेत में पानी अहिल-दहिल हो रहल हल । मुदा खेत में फरनी न हो रहल हल, चास न लग रहल हल, दोखाड़ल न जा रहल हल ।) (अल॰15.43.21; 19:61.15)
591 अहिवात (जुग-जुग अहिवात रहऽ) (नसध॰ 5:22.2)
592 अहूठ (मसक॰ 135:4)
593 अहे (अलगंठवा के माय के नजर जब सुमितरी के माय पर पड़ल तऽ अलगंठवा के माय तनी हँसइत बोललक हल - "अहे सुमितरी के माय, कपड़ा गार-गुर के इधर भी अइहऽ । तोहर नइहर के कई लोग भी गंगा नेहाय अइलथुन हे ।") (अल॰6:16.16)

3.08 अय-अव आद्यक्षर वाले शब्द

464 अयँ (~, सूरुज चा अभी जीते हथ ?) (नसध॰ 49:211.11)
465 अयँ, आयँ, आईं (बअछो॰ 9:43.1; 11:52.8)
466 अरइ (गो॰ 1:8.18)
467 अरउ (गो॰ 1:8.18)
468 अरउआ (कब॰ 30:16)
469 अरउआ (सुमितरी के माय हाथ में अरउआ लेके बैल आउर भैंसा के हाँक के घर ले आवल हल ।) (अल॰7:21.25)
470 अरग (मसक॰ 87:4, 5; 90:25, 26)
471 अरग (= अर्घ्य) (हम्मर बउआ के दुख हर लेबऽ तो हम एतवार करबुअ आउ तोरा दोहरे सूप से अरग देबुअ) (अमा॰165:10:1.9)
472 अरज (= अर्ज) (तुलातुल समतुल हे, ता पर मेष प्रचण्ड । खड़ा सिंहनी अरज करत हे, कुम्भ छोड़ दे कंत ॥) (अमा॰25:18:1.29)
473 अरजना (अरजल सम्पत्ति) (बअछो॰ 9:44.3)
474 अरतन-बरतन (नसध॰ 44:196.6-7)
475 अरतन-बरतन (मोहन सिंघ आउर जालिम सिंघ के घर के चौखट-केवाड़ी घर के अरतन-बरतन, अनाज से लगाइत खूँटा पर बँधल गाय-बैल आउर भैंस-भैंसा कुरती-जपती होके इसलामपुर थाना चल गेल हल ।) (अल॰28:85.14, 86.7)
476 अरता (ताड़ीपर सैकड़न बीघा में अकवन के पेड़ हे ओकर रुइ बइसाख में उड़िया जा हे ओकरा बटोर के अरता बनावल जा सकऽ हे) (नसध॰ 39:173.7; 41:183.14, 27)
477 अरती (= आरती) (नसध॰ 10:46.8)
478 अरथ (= अर्थ) (बाद में एकर लघु रूप 'पालि' रह गेल आउ एकर अरथ हो गेल बुद्ध वचन) (अमा॰23:9:2.1)
479 अरदा-परदा (रम॰ 4:40.1)
480 अर-बर (~ बकना) (अमा॰165:12:1.16; नसध॰ 9:40.1)
481 अर-बर, अल-बल (कब॰ 32:5)
482 अरबराना, अरबरा जाना (तनी ठंढा से अरबरा गेली हल) (नसध॰ 27:120.32)
483 अरमन्ना (~ के साधन) (अमा॰168:5:1.16)
484 अरमान (सुभाष के अरमान आउ भगत के इन्कलाब) (अमा॰14:14:1.9)
485 अरराना (गो॰ 1:6.25)
486 अरवा (नसध॰ 48:209.13)
487 अरवा (~ चाउर) (सुमितरी आउर हेमन्ती इस्कूल के उतरबारी कोठरी के गाय के गोवर आउर गोरकी मट्टी से लिप-पोत के अमरूद केला बैर-सकरकन्द-गजरा आउर अरवा चाउर के चुना से परसादी बनावे में जुटल हलन ।) (अल॰34:107.25)
488 अरहड़ (कोमल पत्ती साग टमाटर फरवा शोभे डाली के । अरहड़ आम झकाझक फूलल स्वर कोकिल मतवाली के ।) (अमा॰22:17:2.6)
489 अराम (चुभसे॰ 1:6.3; नसध॰ 5:17.12; 28:124.16; 35:149.12; 38:163.10; 48:209.7)
490 अराम (~ से सुतल रहना; सिंचाई विभाग के नोकरी में तो ~ आउ छुट्टिये-छुट्टी रहऽ हे) (अमा॰6:18:1.8; 173:19:1.14)
491 अरार (= अराड़) (अरार पर पीपल, बर आउर ताड़ के पेड़ एक साथ जोट्टा हो के बड़ी दूर में फैलल हल ।; सब लोग जलवार नदी में नेहा के, अरार पर आके कपड़ा बदल रहलन हल) (अल॰21:66.28; 43:141.1)
492 अरार (नदी के ~) (मसक॰ 45:23)
493 अरिआते (ओकरा ~ कसबा तक चललन) (नसध॰ 26:115.18; 39:166.31)
494 अरियातना, अरिआतना (अरियात/अरिआत देना) (नसध॰ 1:4.6; 33:145.7)
495 अरियाते (महतो जी ओहनी के ~ गाँव से तनी दूर ला गेलन) (नसध॰ 10:45.5)
496 अरैत-करैत (उनू-गुनू धातु गुनू, असत-कसत अरिया मन्तर, अरैत-करैत तोसित खंडा, उमू-घुमू धाह बटोरा) (अल॰18:56.27)
497 अर्द्धमागधी (डॉ॰ एच॰ बईस कहलन - 'प्राचीन बौद्ध साहित्य अर्द्धमागधी में लिखल गेल आउ अजुका पालि साहित्य ओकरे अनुवाद हे ।') (अमा॰23:10:1.2)
498 अलंग (रम॰ 9:70.6; रम॰ 18:134.1, 9)
499 अलकतरा (~ करिया बुझाइत हई गे । गोड़वा तो लगऽ हई अलकतरा में डूबल हई ।) (अमा॰167:9:1.3)
500 अलगंठे (हलूमान मंदिल में संझौती भी न परऽ हे । येगो कुम्हार पंडित पूजा-पाठ करऽ हलन तऽ कुम्हार जाति होवे के कारन ओकरा छिछा-लेदर करके येगो पांड़े गरदनिया देके निकाल देलक । अब पूजा-पाघुर के हलूमान जी के चढ़ौना अलगंठे अप्पन घर में सइंतऽ हे ।) (अल॰43:140.19)
501 अलगण्ठ, अलगंठ (= अलग, अकेला, एक ओर, एक छोर पर) (~ फेंक देना, अलगंठे खा जाना) (अमा॰16:12:2.13)
502 अलग-थलग (~ हो जाना) (अमा॰11:8:2.19)
503 अलगल (हमरा चिन्ता काहे ला जब दुलहा हम्मर अकिलगर हे । दुनिया चाहे जे भी कहे, जियरा हम्मर अलगल हे ।) (अमा॰21:10:1.31)
504 अलगही (नसध॰ 13:56.6)
505 अलगे (नसध॰ 6:23.19)
506 अलचार (= लाचार) (बेमार अदमी, बूढ़ा अदमी, ~ के देख के महात्मा बुद्धो डिप्रेशन में आ गेलन हल) (अमा॰169:10:2.18)
507 अलता (= अरउता) (अइहऽ त बंगाल के अलता ले अइहऽ पिया हमरा के; गोड़ के एँड़ी में लाल-लाल अलता के जगह बेआय के दाग गहरायल जा रहल हल) (अमा॰24:15:1.29; 166:8:2.27; 167:14:1.9)
508 अलपजीउ (गो॰ 2:14.8)
509 अलबता (नसध॰ 28:124.19)
510 अलबते (नसध॰ 24:100.13)
511 अलबत्त (= क्या खूब, वाह; बेशक; किन्तु, परन्तु) (चलवे में चरखा ई बुढ़िया अलबत्त हे) (अमा॰28:16:2.25)
512 अलबत्ता (अलबत्ता डंका बजावो हल रजाक मियाँ । डंका बजावे में ऊ अप्पन जोड़ अपने हल सउँसे इलाका में ।) (कुश्ती लड़ेवला के दू दल बन जा हल - एक दल कन्त का के आउ दोसर कनेसर का के । दुन्नू बिचमान बन जा हलन ।) (अमा॰16:11:1.26)
513 अल-बल (हम तो जानऽ हली कि 'अलका मागधी' में कम से कम चार-पाँच गो कहानी जरूर रहऽ होतई । मगर एकरा में खाली अल-बल छाप रहलऽ हे ।; मोबाइल पर एक-दूसरा से घंटो ~ बतिआइत रहऽ हे ।) (अमा॰16:7:2.19; 170:7:1.29)
514 अलमस्त (अआवि॰ 45:29; 107:8)
515 अलमुनिया (= अल्यूमिनियम) (हम ऊ झोला झाड़ली तब ओकरा में से पुरान अचकल-पचकल अलमुनिया के कटोरा आउ एगो फट्टल पुरान मइल कुचइल चद्दर मिलल) (अमा॰22:16:1.11)
516 अलमुनिया (अलगंठवा के घर में माय के जीता-जिन्नगी में पीतल के वरतन में ही भोजन बनऽ हल । मुदा अब अलमुनिया के तसला में भोजन बने लगल हल ।) (अल॰12.37.3; 44:147.15)
517 अलमुनियाँ (कब॰ 45:22; 56:1)
518 अलसाना (चलई बसंती जब अलसवले, धमधम गाँव-गली धमकवले) (अमा॰20:7:1.15)
519 अलसायल (नसध॰ 11:46.28)
520 अलागम (रम॰ 3:29.21, 34.2)
521 अलागम (लावऽ, गांजा हो तऽ मइजऽ हिओ, न तऽ तोहनी रहऽ, हम जा हियो । डेढ़ पहर दिन से कम न वित रहल हे, माथा पर तऽ सूरज आ रहलन हे । गाड़ मारी हम गांजा पीए के । तोहनी अइसन अलागम न न ही ।; ; अइसन वसन्ती रात के सवाद जीमन में पहली बार मिलल हे । अलागम होके हमनि जीअ ।) (अल॰8:24.25; 36:115.18)
522 अलानी (फरत करइला खीरा शोभे लदबद फूल अलानी में) (अमा॰22:17:2.19)
523 अलाव (नसध॰ 10:44.6; 27:118.19)
524 अलाव (जाड़ा में अलाव जोड़ के इया गरमी के दुपहरी में गाछ भिजुन बइठ के लोग-बाग एकता, मिल्लत आउ भाईचारा के परिचय दे हथ; घीसू आउ ओकर बेटा माधव बुतायल अलाव के पास बइठल हथ) (अमा॰13:12:2.26; 27:11:1.3)
525 अलावे (एकरा ~; के ~) (अमा॰12:18:2.26; 18:4:1.12)
526 अलाह (रम॰ 3:25.16)
527 अलाह (धूप-दीप जला के मंदिल से वाहर निकल के पहाड़ पर ही अलाह जोड़ के लिट्टी लगावे के उपाय करे लगलन हल ।) (अल॰16:50.1)
528 अलोप (= लुप्त) (पुरनकन चीज जइसे चकचन्दा-गीत पहिले भादो में गावल जा हल, बाकि अब ई अलोप होल जा रहल हे) (अमा॰163:6:2.18)
529 अलोप (= लुप्त, गायब) (अलगंठवा अप्पन झोला कंधा में लटका के सुमितरी के गाल पर एक चुमा लेइत गली में अलोप हो गेल हल ।) (अल॰42:137.6)
530 अलोपित (चुभसे॰ 3:12.28; गो॰ 10:44.9)
531 अल्ल-बल्ल (गो॰ 1:5.24)
532 अल्हा (= आल्हा) (एकर अलावे दलान में तीन गो चौंकी, ताखा पर रमाइन-महाभारत, अल्हा-उदल, विहुला-विरजेभान के किताब लाल रंग के कपड़ा के बस्ता में बंधल रखल रहऽ हल ।) (अल॰12.37.15)
533 अल्हा-उदल (अल्हे-उदल नियन पहलवान) (नसध॰ 26:113.23)
534 अल्हा-रुदल (= आल्हा-उदल) (दिलदार राम कान में अंगुरी डालइत 'अल्हा-रुदल' के एक कड़ी गावइत बरहमथान दने चले लगल हल) (अल॰33:106.2)
535 अल्हैत (अल्हैतियन) (नसध॰ 26:115.1; 33:141.13)
536 अवतेमातर (= अइते ही, अइतहीं) (नसध॰ 29:126.24)
537 अवरी, अबरी (नसध॰ 1:3.1, 4:11)
538 अवलदार (रम॰ 13:102.22)
539 अवलदार (=तैयार) (येक रोज गाँव के बीच गली में येगो कुत्ता मर गेल हल । ओकरा फेके ला कोय अवलदार न हल ।; अप्पन गाँव में भी लइकी सब के पढ़े खातिर इस्कूल खुल गेलइ हे । जेकरा में मास्टरनी भी पढ़ावऽ हइ । मुदा तोर बाप पढ़वे ला अवलदार होथुन त नऽ ।; किसान सब मजदूर सब के मांग माने ला अवलदार न हो रहलन हल ।; अलगंठवा आउर सुमितरी अमदी के बनवल सादी-विआह के कानून माने लेल अवलदार न हल ।) (अल॰2:5.20; 5:13.22; 15:43.28, 44.7; 16:46.10; 44:157.14)
540 अवाज (अमा॰3:11:1.18; 165:19:1.4; 171:10:1.8; 172:14:2.11; नसध॰ 7:29.17; 47:206.7, 207.9)
541 अवाद (= आबाद) (बटेसर अप्पन गाँव के गोवरधन गोप से हरसज करके खेत अवाद कर रहलन हल ।) (अल॰7:21.5)
542 अव्यवहारिक (नसध॰ 37:161.5)

3.07 अप-अम आद्यक्षर वाले शब्द

387 अपजस (रम॰ 7:58.13)
388 अपजस (~ करना) (एही सब सोंचइत सब अउरत पीछे-पीछे सले-सले अपजस करे ला चले लगल हल । करहा में लट्ठा के पानी बह रहल हल खेत पटे ला । करहा भीर आके सभे छप्प-छप्प पानी छूए लगल हल ।) (अल॰18:54.13)
389 अपन (बअछो॰ 5:27.2, 26; 9:40.1; फूब॰ मुखबंध:1.17, 30; नसध॰ 1:2.6)
390 अपन, अप्पन (अआवि॰ 15:9, 20, 22, 23)
391 अपनइती (= अपनउती) (~, मेल-मिलाप आउ भाईचारा के संबंध) (अमा॰13:13:1.2)
392 अपनउती (ओकरा जाति, धरम आउ सम्प्रदाय से बढ़के ~ के भाव से भरल इयारी दोस्ती देखाय पड़ऽ हे) (अमा॰13:11:2.24)
393 अपनउवल (इधर बी॰एम॰पी॰ के एगो जमान अलगंठवा से अपनउवल नियन बतिआय लगल हल) (अल॰44:148.20)
394 अपनहीं (बअछो॰ 1:11.5, 19; 7:33.8; 15:66.3)
395 अपनहूँ (बअछो॰ 1:10.11; 5:26.3; 9:43.11; नसध॰ 6:25.2)
396 अपनाना (जब तक न अपनावल जायत) (नसध॰ 40:174.1)
397 अपनापन (~ में डर आउ लाज का ?) (नसध॰ 32:139.14)
398 अपने (बअछो॰ 1:12.13)
399 अपने-आप (अआवि॰ 15:29)
400 अपरमपार (= अपरम्पार) (राजगीर के महिमा अपरमपार, सुन मोरे भइया हो) (अमा॰27:20:1.3)
401 अपरेशन (= अपरेसन, ऑपरेशन) (अप्पन मरद के समझा बुझा के अपरेशन करा लिहऽ !) (अमा॰24:18:1.18)
402 अपरेसन (गो॰ 1:2.5; 2:12.4, 5; नसध॰ 25:105.24)
403 अपरेसन (= ऑपरेशन) (अगर समझा के केकरो अपरेसन करावे इया गरभ निरोध के बात बतावल जाहे त झट कह देहे कि ई तो भगवान के देन हे) (अमा॰24:14:2.22, 15:1.3)
404 अपसर (= अफसर) (नसध॰ 25:107.14)
405 अपसोस (= अफसोस) (नसध॰ 24:102.29, 103.5)
406 अपार (~ भीड़) (नसध॰ 36:154.32)
407 अप्पन (बअछो॰ 3:19.9; 8:38.15; गो॰ 5:26.17, 30; कब॰ 1:11)
408 अप्पन हाथ जगन्नाथ (मसक॰ 159:5; 162:18; 163:20)
409 अप्पन-अप्पन (गो॰ 7:33.26)
410 अफजाई (उनखो लोग उपहार देके उनखर हौसला ~ करऽ हथ) (अमा॰174:7:2.2)
411 अफड़-अफड़ के रोना (मसक॰ 100:9)
412 अफरात (अमा॰168:8:2.18, 10:2.2)
413 अफलात (इन्साफ ओहि आदमी के मिलऽ हे जेकरा पास ~ रुपइया हे) (अमा॰15:12:2.28)
414 अफवाह (नसध॰ 38:162.12, 13, 15)
415 अफसर-फसर (नसध॰ 25:107.15)
416 अफसोस (अमा॰12:9:2.10, 15)
417 अबकी (बअछो॰ 8:37.11; 9:41.21; 11:52.22, 23; 15:69.11)
418 अबकी (~ भर, ~ बार) (अमा॰11:13:1.25; 15:5:1.15; 173:19:2.31, 20:1.9)
419 अबकी बारी (बअछो॰ आमुख:7.22)
420 अबकी साल (बअछो॰ 7:34.13)
421 अब-तब (ऊ ~ में हे) (नसध॰ 24:98.20; 30:133.15; 39:164.20)
422 अबर (नसध॰ 1:4.10; 43:191.10)
423 अबर (= अबल, कमजोर) (मसक॰ 94:4, 28)
424 अबरा-निबरा (अबरा-निबरा  के मउगी हे भउजी, भइंस ओकरे जेकर हाथ लाठी । नगरी अन्हेर चउपट हे राजा, मोल एक्के हे हाथी कि पाठी ।) (अमा॰14:1:1.9)
425 अबरी (बअछो॰ 1:13.4; 9:41.9; 10:47.18; फूब॰ 2:8.13; 4:17.23; 7:25.21, 31; गो॰ 1:11.15; 4:23.7; 6:29.6; मसक॰ 67:11; 106:2; 142:16; रम॰ 14:113.6; नसध॰ 3:13.3; 4:14.22; 5:20.15, 17; 8:36.12; 22:88.20; 37:157.28)
426 अबरी (पहिले से तो एगो लइका हइए हल उनका । बाकि अबरियो दुन्नो बेकती भगवान के गोहरावित गेलन हे कि बेटी मत दिहऽ !') (अमा॰23:16:1.15; 166:14:2.22)
427 अबरी भर (फूब॰ मुखबंध:2.4)
428 अबले (= अब तक) (बअछो॰ 6:31.1)
429 अबहिए (सब परसादी तऽ बँटिए जा हे । इ गुने हम अप्पन हिस्सा अबहिए काहे न खा लूँ ।) (अल॰4:11.15; 16:46.29)
430 अबहियो (नसध॰ 1:1.26; 5:16.18, 19.11)
431 अबहियों (अमा॰20:18:2.3; 170:12:1.34; बअछो॰ 12:54.20; 14:60.18; गो॰ 1:2.21; मसक॰ 13:9; 43:5; 112:10)
432 अबहियों (= अभी भी) (चुभसे॰ 3:10.12)
433 अबही (नसध॰ 5:16.28)
434 अबही ले (बअछो॰ 1:12.10)
435 अबहुओ (बअछो॰ 15:67.11)
436 अबादी (= आबादी) (अमा॰16:15:1.20; 174:6:2.6)
437 अबादी (सब काम छोड़ के अबदिये बढ़ावऽ ह) (अमा॰9:5:1.26)
438 अब्बर (अब्बर पर जब्बर के कहाउत) (भोलानाथ तो अब्बर पर जब्बर के कहाउत लागू करथ) (मकस॰ 23:12)
439 अभाव (नसध॰ 35:150.19)
440 अभास (= आभास) (अमा॰169:9:2.10)
441 अभिन्नता (~ के अनुभव) (नसध॰ 32:139.21)
442 अमउरी (गो॰ 3:16.18, 19)
443 अमगूरा (~, अँचार आउ अमावट के घर में कोई कमी नञ रहत) (अमा॰163:14:1.2)
444 अमझोरा (बोखार से तलफइत बेटा के शरीर पर अंजलि अमझोरा के पानी रगड़ के कटोरी रखबे कैलक हल कि विंकटेश बोललक - 'बाबूजी कहिया अयतन माय .... ?') (अमा॰20:15:1.5)
445 अमदनी (= आमदनी) (नसध॰ 12:55.14; 30:132.5; 36:152.29)
446 अमदनी (छोट-मोट ~; उपरवार ~) (अमा॰16:17:1.24, 17:2.2; 171:7:1.22)
447 अमदी (गो॰ 1:1.27, 9.25; मसक॰ 138:15, 16)
448 अमदी (~ जब चाहे बसन्त के अप्पन मन में ला सकऽ हे; जब सब्भे ~ पढ़ जइतो, के देतो चुटकी तोहरा के) (अमा॰8:7:2.2; 14:6:1.12, 12:2.28)
449 अमदी (=अदमी, आदमी) (ई बात सुन के चचा-भाय आउर भोजाय आउर टोला के कई गो अमदी के ठकमुरकी लग गेल हल ।) (अल॰4:11.26, 12.7; 6:19.17)
450 अमदी, अदमी (अमदी - रम॰ 1:17.18; 2:23.22; 3:30.11, 31.7, 32.25; 5:46.24; 6:54.18)
451 अमनिया (लाल टुह टुह सुरज, लगे कुम्हार के आवा से पक के घइला निअर देखाई देलक, लगे जइसे कोय पनिहारिन माथा पर अमनिया घइला लेके पनघट पर सले-सले जा रहल हे ।) (अल॰3:6.4)
452 अमरलता (रम॰ 10:79.20)
453 अमरलत्तर (गो॰ 4:21.2)
454 अमराई (मिथिला के अमराई में भी विद्यापति के चले न वार ।) (अमा॰25:23:2.32)
455 अमला (फूब॰ 1:6.4)
456 अमानत (अमा॰3:13:2.10)
457 अमाना (भइंस अमायल) (अमा॰6:19:1.21)
458 अमावट (अमगूरा, अँचार आउ अमावट के घर में कोई कमी नञ रहत) (अमा॰163:14:1.2)
459 अमावस (नसध॰ 9:36.30)
460 अमिका (= अम्बिका) (बअछो॰ 9:41.1)
461 अमीरचंद (ई सब तुम्माफेरी नयँ करतई सरकार तऽ औफिस के बाबू लोग कइसे बनतन फकीरचंद से अमीरचंद ।) (अमा॰29:12:1.12)
462 अम्बार (धरती के शृंगार धान अम्बार लगल खरिहानी में) (अमा॰22:17:2.22)
463 अम्मो-ढेकार (~ कानना/ कनना) (मसक॰ 71:16)

3.06 अत-अन आद्यक्षर वाले शब्द

264 अतंकवादी (= आतंकवादी) (सादी के बाद मरद अप्पन जनाना पर हर घड़ी सक-सुबहा आउर सन्देह के नजर से देखे के अलावे अउरत पर अतंकवादी के तरह तलवार उसाहले रहऽ हे; बंधूक तानले रहऽ हे ।) (अल॰44:157.24)
265 अतंत (फूब॰ 3:10.5)
266 अतमा (= आत्मा) (नसध॰ 30:133.23)
267 अतरा-पतरा (नसध॰ 6:24.5)
268 अता-पता (कब॰ 55:5)
269 अत्ता-पत्ता (मैट्रिकुलेशन तक हम जादे कुछ न पढ़ली, अप्पन जादे समय क्रिकेट, गुल्ली-डंडा, अत्ता-पत्ता, काडी आउ हू-तू-तू जइसन खेले खेल में बिता देली हल) (अमा॰8:11:1.26)
270 अथोर (कनखी मारित बिचरइ निरदंद हिए हिड़िस अथोर) (अमा॰15:1:1.10)
271 अदउरी (~ पारना) (नसध॰ 48:209.14)
272 अददी (गो॰ 1:9.17, 10.20)
273 अदना (अआवि॰ 60:22; कब॰ 53:18)
274 अदना (बड़का के कौन पूछे, पइसा बटोरे के चसका ~ मामूली परिवार के भी लग गेल हे ।; ~ माहटर) (अमा॰ 29:14:1.7; 174:7:1.12)
275 अद-बद (गो॰ 2:12.26)
276 अदमी (अमा॰1:5:1.3; 13:12:2.24; 173:15:1.10; बअछो॰ 5:26.2, 27.4; चुभसे॰ 3:12.30; गो॰ 2:12.19; मसक॰ 11:11)
277 अदमी (= आदमी) (मकस॰ 54:24)
278 अदमी (= आदमी; दे॰ अमदी) (अलगंठवा अप्पन माय के साथ भीड़ में माय के हाथ पकड़ के अदमी से भरल भीड़ में गंगा दने जाय लगल हल ।) (अल॰6:15.27)
279 अदमी (अपना जानते तऽ ~ खूबे करऽ हे बाकि ओतना होय तब नऽ ?) (नसध॰ 5:18.25; 6:23.25)
280 अदरा (= आर्द्रा नक्षत्र) (अमा॰174:12:1.16; नसध॰ 6:23.10)
281 अदरा (= आर्द्रा नक्षत्र) (लोग अदरा-कथा बाँच रहलन हे, हम तो मिरगा-कथा लिख रहल ही; रोहन अदरा के बदरा मनभावन समय सुहावन के । पिया पलंग आउ रिमझिम वर्षा बात ने बिसरे सावन के ।) (अमा॰14:1:1.11; 22:17:2.15)
282 अदलना-बदलना (अदलते-बदलते) (फूब॰ 2:8.34)
283 अदली बदली (अब कोनो मास्टर एक्के जगह साँप नियन कुंडली मार के बइठल नयँ रहत । सबके ~ होत । बहुते मौज-मस्ती काट लेलन मास्टर लोग ।) (अमा॰29:10:2.27)
284 अदहन (जब घर में चाउर-दाल आ जाय तऽ अलगंठवा के भोजाय गोइठा-अमारी से चूल्हा फूंक-फूंक के सुलगावऽ हलन । बड़ी देर में मेहुदल गोइठा सुलगऽ हल तऽ कहीं जाके अदहन सुनसुना हल ।) (अल॰12.36.30; 16:47.1, 11; 43:139.11)
285 अदावत (मसक॰ 171:16)
286 अदाह (आगु में बढ़का ~ जुटल हल) (नसध॰ 19:77.8; 27:118.29, 120.16)
287 अदी-बदी (जय संकर, दुसमन के तंग कर । जे हमरा देख के जरे, उ गांड़ फट के मरे । जेकरा हमरा से अदी-बदी, उ चल जाय फलगु नदी ॥) (अल॰8:26.7)
288 अद्दी-बद्दी (मुँह संभाल के बोलऽ, अद्दी-बद्दी बकऽ मत, न तो एँड़ी-मुक्का-केहुनी से सरिया देवो ।) (अल॰38:122.26)
289 अध-अध (= आधा-आधा) (~ घंटा पर) (नसध॰ 34:148.21)
290 अधखुलल (~ दरवाजा) (अमा॰15:7:1.6)
291 अधछोछा (गो॰ 1:6.19)
292 अधपेटे (रोज-रोज अलगंठवा के दूरा-दलान पर आवल-गेल पहिले के ही तरह ही खइते-पीते रहऽ हल । चाहे अलगंठवा के परिवार अपने छूछे-रूखे, अधपेटे खा के काहे न रह जाय ।) (अल॰12.37.11; 15:44.19)
293 अधफूटल (नसध॰ 3:10.19)
294 अधबूढ़ा (सोनिया के जवानी मुसकाइत हल आउ देह सोना नियर चमकइत हल । ओकरा देख के गाँव भर के छोकड़न के अलावे जवानी के बिदाई कर चुकल अधबूढ़वन के भी आह निकल जा हल ।) (अमा॰17:14:1.17)
295 अधमरू (फिन दे लाठी, फुलमतिया के पीठ फाड़ देलन । बेचारी अधमरू हो गेल ।) (मकस॰ 25:5)
296 अधरतिया (नसध॰ 5:23.1; 32:140.23)
297 अधवइस (येगो अधवइस मरद दिसा फिर के हाथ में लोटा आउर ओकरे में गोरकी मिट्टी, कान पर जनेऊ धरके हाथ आउर लोटा मट्टी से मटिआ रहल हल ।; येगो अधवइस अउरत जरांठी से अप्पन तरजनी अंगुरी से दाँत रगड़ रहल हल ।) (अल॰3:6.9, 13; 6:15.16)
298 अधवैस (नसध॰ 41:181.18)
299 अधवैस (कत्ते लड़की तिलक-दहेज के चलते अधवैस हो जाहे, कत्ते बूढ़-सूढ़ दोवाहा के साथे बिआहल जाहे) (अमा॰165:6:2.4)
300 अधसूखल (~ डंठा) (नसध॰ 29:129.3)
301 अधसेरी (अआवि॰ 33:10)
302 अधार (अआवि॰ 33:16; मसक॰ 49:19)
303 अधार (= आधार) (अइसन बिना ~ के बात से उरझे से का फैदा ?) (नसध॰ 10:46.11; 35:150.21)
304 अधिअच्छ (= अध्यक्ष) (अल॰37:118.13)
305 अधिकार (नसध॰ 33:143.22, 31; 38:161.24)
306 अधीर (नसध॰ 5:21.10)
307 अधेड़ (नसध॰ 24:97.13)
308 अधो (आधो) (अधो बात ओकरा समझ में न आयल) (नसध॰ 20:81.27)
309 अनंद (=आनंद) (नसध॰ 10:46.16; 37:158.12)
310 अनइ (गो॰ 1:7.14)
311 अनइस (= अनिष्ट, बुरा) (~ बुझाना) (नसध॰ 6:27.5, 6; 22:88.16)
312 अनकट्ठल (= अनकथल, अकथित) (अमा॰5:8:2.10)
313 अनकर (~ जलमल कहूँ अप्पन भेल हे कि हम्मर हो जायत ?; अनकर चुक्का, अनकर घी, पाँड़े के बाप के लगल की) (अमा॰10:11:2.21; 16:9:1.28; 19:12:1.16)
314 अनकर (रघुनाथ बोल पड़ल कि कहनी में का झूठ हे खेलामन भाय - अनकर चूका अनकर घी, पाँड़े के बाप के लगल की ।) (अल॰8:25.4)
315 अनकहल (दुनिया में ढेर ~ बात सचाई के रूप धारण कर लेहे) (नसध॰ 38:162.9-10; 39:163.30)
316 अनका (~ ला ऊँचा-ऊँचा महल बनइली, हमरा ला जंगल के मसान) (अमा॰15:19:1.7, 9, 11, 13)
317 अनखा (अनखा में कनखा) (अनखा में कनखा एगो तोरे तो लइका हवऽ) (मकस॰ 13:18)
318 अनगरे (कभी-कभी खूब ~ ताड़ के पेड़ से ताड़ी चोराके पी ले हल) (अमा॰6:15:1.4)
319 अनगिनती (= अनगिनत) (अमा॰5:4:1.14)
320 अनगुते, अनगुत्ते (दोसर दिन ~ पाकी जाके) (मसक॰ 99:29; 100:7)
321 अनचकाना (अनचकाके) (रम॰ 1:18.6)
322 अनचके (रम॰ 9:70.14; नसध॰ 1:3.23; 2:8.18; 3:13.11; 5:20.19; 34:147.10, 148.14)
323 अनचके (अनचके में देखला पर अपने के पते न चलत कि ई कोई असाधारण बेकति हे) (अमा॰25:9:1.4, 14:1.16)
324 अनचके (इ अनचके के मार से झमाइत आउर चिल्लाइत धम-सन जमीन पर गिर गेल हल ।) (अल॰27:82.25; 29:88.23)
325 अनचक्के (~ में) (नसध॰ 39:166.16)
326 अनछपल (अमा॰170:6:2.12)
327 अनजान (नसध॰ 32:139.31)
328 अनजानल (जानल-अनजानल सभे) (अमा॰2:5:1.16)
329 अनझटके (गो॰ 7:35.25)
330 अनठेल (फूब॰ 4:14.7; मसक॰ 173:16)
331 अनता-मनता (रमेसर भइया के बियाह होला जब पाँच बरिस बीत गेल आउ एक्को लइकन-फइकन न भेल, तब सब लोग चिंता में डूबे लगलन । फिन दू साल तक खूब ~ मानल गेल । बाकि अफसोस...) (अमा॰173:19:1.3)
332 अन-दान (नसध॰ 6:24.8)
333 अन-धन (नसध॰ 1:4.15)
334 अन-धन-जन (हमनी के जमीदारी चल गेल तऽ ओकरे साथे रोब-दाब आउ ~ सब चल गेल) (नसध॰ 7:29.14)
335 अनन्द (कहनी में भी हे कि घर अनन्द तऽ बाहरो आनन्द ।) (अल॰16.47.16)
336 अनपढ़ (नसध॰ 8:32.23)
337 अन-पानी (= अन्न-पानी) (नसध॰ 23:93.7)
338 अनभनाना (चुभसे॰ 3:11.13)
339 अनभल ('अलका मागधी' के भल चाहे ओला नवो ग्रह एक्के साथ हथ, तो एकर अनभल काहे होयत) (अमा॰12:19:1.14)
340 अनमखाना (गो॰ 7:34.16)
341 अनमन (कब॰ 49:5)
342 अनमनाहे (नसध॰ 41:179.24)
343 अनमुनाहे (नसध॰ 34:145.15; 43:188.15)
344 अनरथ (= अनर्थ) (नसध॰ 12:55.5; 30:133.24; 37:160.7)
345 अनरीत (ऊ भूखले रह जायत बाकि ~ नऽ करत) (नसध॰ 27:119.25)
346 अनर्गल (जितावन आउ परिखन दुन्नो मिल के बढ़ावन चचा के अंटसंट आउ अनर्गल बात कह-कह के उनका भड़कावे के योजना बना लेलन) (अमा॰30:14:1.18)
347 अनसन (= अन्नशन) (नसध॰ 22:90.17; 28:122.21, 22)
348 अनहोनी (नसध॰ 29:127.29)
349 अनाथ (नसध॰ 35:150.20)
350 अनादर (नसध॰ 38:163.17)
351 अनाप-सनाप (~ बकना) (नसध॰ 8:34.24)
352 अनिष्ठ (= अनिष्ट) (नसध॰ 38:163.17)
353 अनिस्टर-मनिस्टर (अरे इयार, नेतागिरी के लत तऽ तोरा कौलेजे से लगल हलो । ठीक हो, चुनाव-उनाव लड़के अनिस्टर-मनिस्टर हो जा ।) (अल॰28:86.26)
354 अनुकरन (= अनुकरण) (अमा॰16:6:1.8)
355 अनुनिया (गाँव के लोग नेहा धो के एक ठंइया खाय लगलन हल । मुदा अलगंठवा के माय आज्झ अनुनिया कइले हल । ई गुने उ फलहार के नाम पर परहवा केला जे फतुहा में खूब बिकऽ हे, ओकरे से अप्पन मुंह जुठइलक ।) (अल॰6:16.10)
356 अनुभव (अभिन्नता के ~) (नसध॰ 32:139.21; 37:159.27)
357 अनुभो (गो॰ 2:12.30; 9:42.1)
358 अनुभो (= अनुभव) (नसध॰ 22:89.16)
359 अनेरी मजिस्टर (फूब॰ 1:5.12; 6:21.25)
360 अनेरे (= व्यर्थ में) (अब पाणिनि के भी धँसोड़ के पराकृत के संस्कृत से उत्पन्न बतावे ओला कठहुज्जति लोग से कउन अनेरे माथा फोड़उअल करे ?) (अमा॰30:9:1.21)
361 अनेसा (अप्पन अउरत पर नजर पड़ते ही बटेसर तमतमाइत बोल पड़ल हल - "तूँ गंगा नेहाय गेलऽ हल कि पहुनइ खाय, तोरा कल ही लौटे के हलउ, फिन रात कहाँ बितउलऽ ? हमनी अनेसा में रात भर न सो सकली ।") (अल॰7:21.14)
362 अनोर (गो॰ 5:23.31; रम॰ 4:42.4; 5:44.4; 10:75.1)
363 अनोर (हल्ला-गुदाल सुन के गाँव के कुत्ता भी भुक-भुक के अनोर करे लगल हल ।) (अल॰7:22.27; 41:127.14; 42:130.7)
364 अन्दे (रम॰ 4:40.5)
365 अन्दे (= इन्दे; आइन्दा) (अपने सबसे हमरा निहोरा हे कि आज्झ से अपने लोग उत्तर रूखे हाथ उठाके किरिआ-कसम खाके अन्दे से जात-पात के राजनीति करना छोड़ देथ ।) (अल॰30:94.8)
366 अन्देशा (कन्त का के अन्देशा होल कि ऊ हम्मर भइंस के खल्ली कम देलक हे) (अमा॰16:13:1.19)
367 अन्देसा (= अनेसा, अन्देशा) (सुखदेव के देख के अलगंठवा के मन में कई तरह के अन्देसा होवे लगल हल ।) (अल॰29:90.5)
368 अन्धार (अमा॰166:14:2.25; 174:9:1.1)
369 अन्ह (~ हो जाना) (जब बुधुआ ~ हो गेल तऽ पनघट पऽ फुसफुसाहट सुरुम भेल) (नसध॰ 24:97.7; 41:183.11; 45:201.25)
370 अन्हमे (तब तक रोहन के साथे जमुनी पहुँच गेल आउ तुरते बिजुली नियन ~ गेल) (नसध॰ 16:71.24)
371 अन्हरचटकी (गलत-सलत रेवाज आउ ~ के छोड़ देवे के चाही) (नसध॰ 11:48.21; 47:206.17)
372 अन्हरचटकी (पूछल चाहऽ ही - हमनी के दुनिया के ~ काहे लगल हे, जे पूरब के बजाय पच्छिम जा रहल हे ?) (अमा॰171:13:1.6)
373 अन्हर-टोपनी (तोहनी के ~ लगा के तऽ ओहनी कोल्हू में जोतले रहऽ हथुन ?) (नसध॰ 23:94.1)
374 अन्हरा (~ खातिर आँख ओतना महत्वपूर्ण नञ् हल, जेतना हमरा ले मिसिर जी के ई प्रस्ताव) (अमा॰166:8:1.17)
375 अन्हरिया (रम॰ 10:74.1; 12:94.20)
376 अन्हरिया (कुचकुच ~ रात) (मकस॰ 32:12)
377 अन्हरिया (कुच-कुच ~; ~ रात में) (अमा॰2:9:2.1; 15:19:1.20; 172:12:1.18; 174:13:1.2)
378 अन्हार (अमा॰8:9:1.4; 18:7:1.24, 9:2.25; गो॰ 10:45.11; मसक॰ 36:27; 174:11; रम॰ 12:94.20; नसध॰ 37:159.11; 40:176.9, 18; 42:185.12)
379 अन्हारहीं (बअछो॰ 11:52.18; नसध॰ 11:46.21)
380 अन्हारा (अमा॰11:14:1.29)
381 अन्हारा (रात के ~ में) (नसध॰ 2:8.9; 4:15.23; 30:134.18; 40:179.8; 43:190.30)
382 अन्हारे (नसध॰ 3:11.12; नसध॰ 12:55.10)
383 अन्हारे-पन्हारे (नसध॰ 3:11.9)
384 अन्हारे-पन्हारे (बिहान हो गेल हल । रोज दिन के ~ चाय पीये के आदत रहे के चलते हम सीधे बिछौना पर से उठ के मुँह धोइली आउ जाके भुलेटन के दोकान पर बइठ गेली ।) (अमा॰23:16:1.1)
385 अन्हेर (अबरा-निबरा  के मउगी हे भउजी, भइंस ओकरे जेकर हाथ लाठी । नगरी अन्हेर चउपट हे राजा, मोल एक्के हे हाथी कि पाठी ।) (अमा॰14:1:1.10)
386 अन्हेर (ओकर राज में देर हे बाकि ~ नऽ हे) (नसध॰ 10:43.27; 43:191.6)

3.05 अट-अण आद्यक्षर वाले शब्द

240 अटकन-वटकन (एक प्रकार के खेल) (अआवि॰ 80:22; 82:23)
241 अटकना (नरेटा के खखार नियन नरेटा में अटकल ही, न एन्ने जाइत ही न ओन्ने) (अमा॰12:10:1.7)
242 अटपट (बअछो॰ 4:22.15)
243 अट-पट (फूब॰ 5:18.4)
244 अटपट (~ बकना) (नसध॰ 13:58.8)
245 अटपट (असल में सुरू में एगो अटपट, फेंटुआ, अनेकरूपा, विकृति बहुल भाखा देस में परचलित हल जेकर रूप बराबर बदलइत हल) (अमा॰30:8:2.11)
246 अटर-पटर (अमा॰165:10:1.26, 29)
247 अटान (गाड़ी में चढ़े के अटान न हल ।; अमदी के बैठे के अटान न रहऽ हल चिट्ठी लिखवे आउर पढ़वे ला ।) (अल॰7:21.16; 15:45.1)
248 अटियाना (दे॰ अँटियाना, अंटियाना) (हम तऽ कल्हे ही जा सकऽ ही । मुदा दू कट्ठा में धान के पतौरी लगा देली हे । ओकरा अटियाना जरुरी हे । न तऽ कोय रात-विरात के उठा के ले भागतइ । गोपाली महरा के चार कट्ठा के पतौरी उठा के ले भागलइ । आउ उत्तर भरु खंधवा में ले जा के मैंज लेलकइ ।) (अल॰9:28.1)
249 अट्टी-पट्टी (नसध॰ 32:138.30)
250 अठ (अठ-अठ आना के टिकस खरीद के) (नसध॰ 31:135.9)
251 अठन्नी (कोनिया घर में काठ के पेटी में रखल येकन्नी-दूअन्नी-चरन्नी-अठन्नी चोरा के जैतीपुर में घनसाम हलुआई के दूकान में गाँव के तेतर तिवारी, कंधाई साव, तुलसी भाई के मिठाई खिलावे में दतादानी अलगंठवा ।) (अल॰1:2.9)
252 अठन्नी-चवन्नी (पइसा अइसन टघराँव करके पसारल हल कि रिंग ~ से जादे दने ओला पइसा भिरु टघरबे न करे) (नसध॰ 31:135.23)
253 अठमँगरा (ऊ रात हम्मर बेटी के बिआह होवे वाला हल । पिरीतीभोज के बाद अठमँगरा के रसम चल रहल हल कि हजाम हमरा पास पहुँचल आउ कहलक - 'समधी साहेब कहऽ हथुन कि दहेज में चार सौ रुपइया बाकी रह गेल हे । ऊ बकिअउटा के भुगतान भेले पर वर के दुआरपूजा होयत ।') (अमा॰28:5:1.2)
254 अठमा (गो॰ 3:16.30)
255 अठमी (गो॰ 4:20.16; नसध॰ 2:7.3)
256 अठान (= अटान) (सुनऽ हिअइ कि इ बरिस उहाँ अमदी के ठहरे के अठान न हइ । मलमास मेला नेहाय ला बड़ भीड़ उमड़ल हइ ।) (अल॰31:96.2)
257 अठारह (ई उनके करतब न हवऽ कि अइसन कटकटी  में बाप-बेटा ~ रोपआ कमा के लौलऽ) (नसध॰ 36:155.20)
258 अड़ंगा (अमा॰4:15:1.19)
259 अड़कोसा (= अंडकोष) (अलगंठवा झट अप्पन दहिना गोड़ से बायाँ तरफ कदम करइत झट-सन दहिना हाथ लफा के ओकर तनल लाठी छिनइत बायाँ हाथ से कसल मुक्का ओकर नाक पर जड़इत दहिना गोड़ से ओकर अड़कोसा में कस के मारलक हल ।) (अल॰27:82.25)
260 अड़ोस-पड़ोस (अमा॰169:14:1.1)
261 अड़ोसी-पड़ोसी (अमा॰173:11:1.12)
262 अड्डा (~ जमाना) (नसध॰ 35:150.16)
263 अढ़तिया (अआवि॰ 30:1, 22)

3.04 अच-अझ आद्यक्षर वाले शब्द

187 अचकचाना, अचकचा जाना (नसध॰ 8:34.5; 35:151.22; 36:153.32; 49:210.15)
188 अचकन-चपकन (अआवि॰ 69:9)
189 अचकल-पचकल (हम ऊ झोला झाड़ली तब ओकरा में से पुरान ~ अलमुनिया के कटोरा आउ एगो फट्टल पुरान मइल कुचइल चद्दर मिलल) (अमा॰22:16:1.11)
190 अचके (नसध॰ 6:27.14)
191 अचके (सुख के सेजरिया हम सोबहूँ न पइली, अचके में हो गेल बिहान) (अमा॰15:19:1.16)
192 अचक्के (चुभसे॰ 1:4.25; गो॰ 2:11.18, 14.27)
193 अचम्भो (रम॰ 13:100.21; 16:126.4)
194 अचरज (नसध॰ 15:66.13)
195 अचाना (= अँचाना, आचमन करना) (ई बात सुन के बटेसर थरिए में अचावइत कहलक हल - हम तऽ कल्हे ही जा सकऽ ही ।) (अल॰9:27.31; 43:141.22)
196 अचार (= अँचार) (अलगंठवा के चचा जी आम-नेमु-कटहर के अचार बोजे के आउ रंग-विरंग चिड़िया इयानी मैना-तोता, हारिल-कबूतर आउ किसिम-किसिम के पंछी पाले के बड़ सौखिन हलन ।) (अल॰12.37.6; 43:138.25)
197 अचोक्के (मसक॰ 58:29; 60:18)
198 अच्छत (अमा॰165:12:1.2)
199 अच्छत (~ न छोड़ना) (हबर-दबर चाट जाहें, अच्छतो न छोड़ऽ हें) (अमा॰7:7:1.21)
200 अच्छत-चन्नन (अल॰16:49.29)
201 अच्छर (= अक्षर) (सोनमतिया के भी सिलेट पर ककहरा लिखा के पढ़ाबऽ । तबे न ऊ ससुरार से दू गो अच्छर हमनी के लिखत ।) (अमा॰30:15:1.7, 25)
202 अच्छा (अच्छा-अच्छा) (नसध॰ 29:129.29)
203 अच्छोधार (गो॰ 1:1.17, 2.3)
204 अछइते (मसक॰ 120:13)
205 अछताना-पछताना (आखिर अछता-पछता के गोलघर जाए ओला रास्ता पकड़ के चल देली) (अमा॰22:15:2.13)
206 अछते (गो॰ 3:18.27)
207 अछते (= छइते) (ऊ तीन बेटा के अछते भुखमरी आउ निरादर सहऽ हे; मगही के हर एक विधा में मजगर रचना भेल; सबसे मजगर तो हल विजय जी के गजल - हाल अछते परीत हो गेली ।) (अमा॰6:9:1.15; 26:15:2.29)
208 अछते (हमरा ~ केकरो अनसन करे के जरुरत न हे; दिन अछते; दिनऽछते) (नसध॰ 36:154.17; 39:170.28; 40:175.16; 42:184.29)
209 अछरंग (रम॰ 10:78.7)
210 अछरंग (जितने लोग उतने बात के अछरंग अलगंठवा पर लगऽ हल ।; हमरा तोहर नाम से अछरंग लगा-लगा के परझोवा मार-मार के गली-गुच्ची बुले न दे हे ।) (अल॰2:5.6; 20:64.14; 24:74.18; 32:103.14)
211 अछरसह (फूब॰ 7:24.19)
212 अछार (रम॰ 15:115.16)
213 अछिआ (दू ~ चुल्हा) (जल्दी-जल्दी ईंटा के दू अछिया चुल्हा बनइते जा । ओकरे पर आलूदम आउर चाउर चढ़ा दऽ ।) (अल॰43:138.6)
214 अजगर (भ्रष्टाचार के अजगर फुफुआ रहल हे) (अमा॰22:12:1.10)
215 अजगुत (अमा॰1:15:1.15; 12:19:1.12; 29:6:2.6; अआवि॰ 11:8; 49:20; मसक॰ 78:19; 142:14, 17)
216 अजगुत, अजगूत (कब॰ 6:6; 23:5; नसध॰ 5:17.11; 35:150.9)
217 अजड़-अमर (= अजर-अमर) (इया ढेलमरवा बाबा जी ! एकरा अपने नियन ~ कर देहूँ कि हम्मर बाबू के अंगुरी भी न पिराय) (अमा॰22:14:1.7)
218 अजदूर-मजदूर (हम्मर गाँव में कई गो काँच-कुँआरी अजदूर-मजदूर से गोड़ भारी करवा के ढीढ़ा फुलवा के चमइन से पेट गिरवावऽ हे ।) (अल॰43:139.18)
219 अजनिया-बजनिया (अमा॰167:9:2.1)
220 अजमाना (शहर में काम करे जा आउ अप्पन भाग अजमावऽ) (अमा॰23:5:1.10; 173:10:1.10)
221 अजलती (बाप रे बाप, कुआरी छौंड़ी के मांग में सिनूर घिस देलकइ । अइसन अजलती तऽ कोय न कर सकऽ हे ।) (अल॰1:3.23)
222 अजात (हमरा जात-भाय से खान-पान सब बन्द हो जायत । हमरा लोग अजात कर देतन ।) (अल॰43:143.9)
223 अजाद (= आजाद) (अमा॰1:5:2.9; 172:3:2.15; 173:9:2.10)
224 अजाद (=आजाद) (नसध॰ 14:60.28; 36:156.3)
225 अजादी (नसध॰ 8:36.8; 42:184.16)
226 अजादी (= आजादी) (अमा॰1:5:2.5; 164:9:2.25; 170:5:1.26; 172:5:2.5)
227 अजायबघर (नसध॰ 26:116.21)
228 अजीज (रम॰ 2:23.3; 4:42.6)
229 अजीज (माय-भाय आउर चचा सब अलगंठवा से अजीज । रोज-रोज बदमासी, रोज-रोज सिकाइत, रोज-रोज जूता के मार ।) (अल॰1:2.7)
230 अजुका (डॉ॰ एच॰ बईस कहलन - 'प्राचीन बौद्ध साहित्य अर्द्धमागधी में लिखल गेल आउ अजुका पालि साहित्य ओकरे अनुवाद हे ।') (अमा॰23:10:1.2)
231 अजुरदा (उ लोग दवा विना, अन्न विना आउर कपड़ा-लत्ता विना अजुरदा बनल रहऽ हथ ।; मोहन सिंघ आउर जालिम सिंघ के अइसन दंड देवइ कि ओखनी के कहीं पनाह न मिलतइ । सब कुछ लेल अजुरदा हो जात ।; वरसात गाँव के गरीब-गुरवा से धमार करके धमकुचड़ी करऽ हे । गरीब सबके वेआवरू करके इज्जत उतारऽ हे । उठे-बैठे ला अजुरदा कर दे हे ।) (अल॰19:61.2; 25:76.8; 44:152.17, 26)
232 अजूबा (भारत के धर्म संस्कृति आउ सामाजिक रचना में बिधना, बिसुन आउ महादेव के कर्तव्य आउ सरसती, लक्ष्मी आउ पारवती के शक्ति के बड़ा अजूबा आउ प्रतीक के रूप मे घोल-मेल लोकऽ हे) (अमा॰25:15:2:13)
233 अजोधिया (= अयोध्या) (अल॰43:142.19)
234 अजोध्या (= अयोध्या) (नसध॰ 10:45.16)
235 अज्ञाकारी (= आज्ञाकारी) (नसध॰ 32:141.5)
236 अझुराना (बिहारशरीफ की मगही में 'ओझराना') (बकरी के खूँटा में लुगा अझुरा गेल; ऊ मिसिर के कहना में पड़के नगीना-सुक्खू से काहे ला अझुराय गेल हल) (नसध॰ 3:9.27; 13:56.12; 29:126.10, 128.3)
237 अझुराना (सझुरावे के लाख कोशिश करला पर भी ओकर सोच आउ जादे अझुरायल नियन हो जाहे) (अमा॰12:9:1.3, 4, 8; 18:8:1.2; 30:14:2.9)
238 अझुराना, अझुरा जाना (मकस॰ 58:4)
239 अझुराना, ओझराना (अझुराएल) (मसक॰ 80:13; 97:8)

3.03 अक-अघ आद्यक्षर वाले शब्द

84 अकचकाना (अप्पन मरद के बात सुन के सुमितरी के माय अकचका के बोलल हल -"हाय राम, हमरो कोय बात के इयादे न रहऽ हे, तुरते सुरते से भूला जाही ।") (अल॰9:27.13)
85 अकचकाना, अकचका जाना (अमा॰12:15:1.25)
86 अकठकाठ (गो॰ 5:26.32)
87 अकबकाना (अकबका जाना) (मसक॰ 21:22)
88 अकबकाना, अकबका जाना (अमा॰166:8:1.5; 173:15:1.1; नसध॰ 11:48.9; 25:106.8)
89 अकबार (= अखबार) (नसध॰ 38:161.11)
90 अकलुष (~ संदर्भ आउ गुन कर्म के चिंतन) (नसध॰ 35:151.7)
91 अकवन (नसध॰ 19:76.16; 39:173.6)
92 अकवार (गो॰ 2:14.26)
93 अकवार (भर ~) (सुमितरी भर अकवार अलगंठवा के पकड़ के जउरी-पगहा जइसन हो गेल हल ।) (अल॰36:114.3; 42:134.3)
94 अकवार गहन (अगे बेटी, चिट्ठिया में हमरो ओर से अलगंठवा के असीरवाद आउर ओकर माय के अकवार गहन भी लिख देहु ।) (अल॰9:29.14, 16)
95 अकवारी (नसध॰ 3:9.25)
96 अकसरहाँ (ई सब अकसरहाँ मुँहजबानी (मौखिक रूप से) कहल-सुनल जाहे आउ एक कंठ से दोसर कंठ में चलइत हजारन बरस से जीवित हे) (अमा॰25:13:1:18)
97 अकानना (रम॰ 10:76.7)
98 अकाल (नसध॰ 16:69.10)
99 अकास (~ फट के गिर जाना) (नसध॰ 2:7.14; 38:162.17; 47:207.9)
100 अकास (= आकाश) (अमा॰1:17:1.1; 163:13:2.20)
101 अकास (= आकाश) (चौदस के चान पछिम ओर अकास पर टहटह टहटहा रहल हल ।) (अल॰6:14.19)
102 अकिल (= अक्कल, अक्ल) (नसध॰ 1:4.1; 47:205.10)
103 अकिल दौड़ाना (फूब॰ 6:21.6-7)
104 अकिलगर (तोर मरद बड़ा ~ हउ) (नसध॰ 14:64.28)
105 अकिलगर (हमरा चिन्ता काहे ला जब दुलहा हम्मर अकिलगर हे । दुनिया चाहे जे भी कहे, जियरा हम्मर अलगल हे ।) (अमा॰21:10:1.30)
106 अकीन (= यकीन) (हमरा बारे में बहुत तरह के अफवाह भी सगरो फैलावल जा रहलो हे ओकरा पर अकीन मत करते जइहऽ ।) (अल॰40:125.27)
107 अकुचाना (जी अकुचा हे) (अमा॰3:17:1.1)
108 अकुताना (अकुतायल) (नसध॰ 1:6.15)
109 अकेलुआ (मसक॰ 84:8; 121:2)
110 अकेल्ले (बअछो॰ 5:24.9)
111 अक्किल (बअछो॰ 3:18.11; 14:62.23)
112 अक्किल (= अक्ल) (अमा॰27:11:1.28)
113 अक्खड़ (परिवार के ~ न आना) (मसक॰ 151:12)
114 अक्षते (= अछइते, छइते) (राम के ~ भरत कइसे सासन करतन ?) (नसध॰ 10:45.17)
115 अक्सरहें (ऊ ~ गुरुजी के हाथ जोड़ के कहऽ हलन) (अमा॰29:11:1.23)
116 अखड़ना (चन्दर दुलार-पिआर के चलते मिडिल पास करके ही घर में अखड़ते रहऽ हल ।) (अल॰12.35.29)
117 अखड़ना-बमकना (इ तऽ अउरत-मरद इयानी पति-पतनी के भेद-भाव होबऽ हे, जेकरा हम न मानऽ ही । एही नेम-टेम भेद-भाव के बजह से अउरत जीमन भर भूखल रहऽ हे । आउर पुरूख भरपेट खा के बाघ बन के अगरइते रहल हे, अखड़ते-बमकते रहल हे आउर अउरत के सतइते रहल हे, जीमन भर कुहंकइते रहल हे ।) (अल॰42:133.7)
118 अखतियार (फूब॰ 3:10.16,33)
119 अखनिएँ (मसक॰ 59:7)
120 अखनी (अमा॰4:10:1:16; 7:9:2.16; 174:13:2.17; फूब॰ 4:14.21; गो॰ 1:10.1, 2; 3:18.27; 9:39.31, 41.19; मकस॰ 46:1; मसक॰ 74:7)
121 अखने (फूब॰ 1:4.4; 3:11.14; 5:18.19, 20.26)
122 अखने (की अइंठल चलऽ ह अखने, एक दिन समय भी तोरो अइतो) (अमा॰23:20:1.1)
123 अखनो (फूब॰ 7:24.27)
124 अखबार (अमा॰11:4:2.13)
125 अखरखन (रम॰ 15:118.14)
126 अखरखन (देखऽ बाबा, हेडमास्टर अखरखन कर रहल हे । तूँ घबड़ा न, हम ओकरा से मिल लेवइ आउर सुमितरी के फारम आज्झ से कल तक भरा जइतइ ।) (अल॰20:65.24)
127 अखरना (ओइसहीं मगही पत्रिका में 'सुजाता' आउ 'सरहलोक' के उल्लेख न होना भी अखर जाहे) (अमा॰5:2:1.29)
128 अखरा (गो॰ 10:45.9)
129 अखरी-पिपरी (अखरिन पिपरिन नियन त सब जीअ हे । तूँ जिअ त कोय इतिहास बना के जिअ ॥) (अमा॰29:15:2.3)
130 अखाड़ा (अमा॰16:11:1.9, 2.16)
131 अख्तियार (अआवि॰ 107:14)
132 अग-जग (गो॰ 1:5.2)
133 अगड़वम (बरमा बाबू केतना गिजा खा हथ, पेट ~ बनल रहऽ हइन) (नसध॰ 9:37.26)
134 अगना (= अंगना) (नसध॰ 37:158.14)
135 अगबही (नसध॰ 6:24.11)
136 अगम-अपार (उहें एगो बंगाली नट से मन्तर सिख के अगम-अपार बंगाल के सिध कलकत्ता से गाँव तक चेला-चुटरी के भरमार ।) (अल॰1:1.13)
137 अगमजानी (नसध॰ 5:21.3)
138 अगमान-भगमान (हमरा सब पता हे कि सब रिसी-फिसी अगमान-भगमान असल कोय न हे, सब कमसल हे ।) (अल॰43:143.11)
139 अगरचेत (गो॰ 1:6.6, 9.14; 5:26.1)
140 अगर-दिगर (रम॰ 13:105.2)
141 अगर-दिगर (~ करना) (अल॰44:146.5)
142 अगरबत्ती (नसध॰ 39:173.10; 41:183.15)
143 अगराना (मसक॰ 151:21; रम॰ 10:74.5; 11:86.11)
144 अगराना (जीत उछलइत आउ अगराइत चले हे) (अआवि॰ 42:26)
145 अगराना (बसन्त में धरती अगराइए गेल हे, बाकि बसन्त भी कम बगरल नञ हे) (अमा॰8:7:1.3; 26:1:2.9)
146 अगराना (सुमितरी .... पातर कमर से नीचे लटकइत झुमइत केस के साथ खड़ी होके अगराइत बोलल हल -"का कहऽ हऽ, गाँव में आयल हमरा चार-पांच दिन बीत गेलो, मुदा हमरा ओर तनी झांके न अइलऽ । लगऽ हे कि इद के चान हो गेलऽ हे ।"; खेत-खलिहान फसल से अगरा रहल हे, इतरा रहल हे ।) (अल॰13.39.3; 19:61.10; 34:108.8; 42:133.7)
147 अगलउनी (सुमितरी अप्पन घर जाय से पहिले अलगंठवा के कह देलक हल कि तूँ पटना जाय से पहिले हमरा एगो पाती जरूर भेज दीहऽ। अलगंठवा लापरवाही के साथ कहलक हल कि चिट्ठी आउर डा... अगलउनी होबऽ हे । तूँ घर जाके अप्पन परीच्छा के तइयारी करिहऽ । चिट्ठी तोहर चित के चितचोर बन जइतो, जेकरा से पढ़े-लिखे में मन उचट-उचट जइतो ।) (अल॰14.41.26)
148 अगल-बगल (अमा॰13:5:2.25; 173:13:1.4)
149 अगवन, अगबन (अगवन तो कहलऽ कि देवास में चलइत ही आउ इहाँ आन के पुलिस बोलावे लगलऽ ?; अगबन तनी जान में जान अयलो । देह गरमा गेलो बाकि भीतरे कँपकँपी बनले हो ।) (नसध॰ 11:50.19; 41:182.12)
150 अगवने (नसध॰ 4:14.25; 7:29.20; 39:164.27)
151 अगहन (अआवि॰ 80:31)
152 अगहनिया (सम्मन मांझी अगहनिया अमरूद लाके पेड़ से तोड़ के सबके खिलावे लगल हल ।) (अल॰44:156.18)
153 अगहनी (अगहनी धान टाल-बधार में लथरल-पथरल हल । कारीवांक, रमुनिया आउर सहजीरवा धान के गंध से सउंसे खन्धा धमधमा रहल हल ।; आज वसन्तपुर तरन्ना में अगहनी ताड़ी पीए ला रामखेलामन महतो के जमाइत जुटलन हल ।) (अल॰7:20.25; 8:23.6)
154 अगहनुआ (~ दोकान) (मसक॰ 51:27)
155 अगहुड़ (नसध॰ 26:115.25)
156 अगाड़ी (~ साल; मिसिर आउ खदेरन मांस भात गपकइत हलन आउ अगाड़ी के योजना बनावइत हलन) (नसध॰ 9:41.27; 14:60.4)
157 अगाड़ी (= आगे) (नसध॰ 1:3.17; 34:145.4; 38:162.25)
158 अगाड़ी (जेतना अदमी मिलइत हथ ऊ सब अभिवादन करके, तनी नेवतई देखावइत अगाड़ी बढ़ जा हथ इया पीछे छूट जा हथ) (अमा॰25:9:1.8; 28:5:1.10)
159 अगाड़ी-अगाड़ी (नसध॰ 43:192.11)
160 अगार-पगार (गो॰ 1:5.3)
161 अगारु (मसक॰ 7:5)
162 अगारू (तोरा अगारू हम भीख थोड़हीं माँगइत ही । हम अपने कमा ही ।) (मकस॰ 46:15)
163 अगाह (~ करना) (सचमुच में कुत्ता आगरो जानऽ हथ न ? सूँघ के चोर तो पकड़िये ले हथ, होवे ओली घटना के भी कान फड़का के आउ दुम हिला के अगाह कर दे हथ) (अमा॰11:7:1.15, 18)
164 अगिन (~ जरावन नियन साथे रहना) (नसध॰ 37:160.28)
165 अगिया बैताल (येकर अलावे अगिया बैताल हल अलगंठवा, लड़का-लड़की के साथ लुका-छिपी आउर विआह-विआह खेले में अप्पन माय के किया से सेनूर चोरा के कोय लड़की के माँग में घिस देवे में बदनाम अलगंठवा।; बाप रे बाप, उ छउड़ा अगिया बैताल हइ । कुंआरी लड़की के मांग में सिनूर दे दे हइ ।) (अल॰1:2.2; 2:5.2; 10.30.2)
166 अगियाना, अगिया जाना (नसध॰ 42:186.28)
167 अगुअइ (अगुअइये में) (अमा॰13:5:2.12)
168 अगुअई (मकस॰ 56:25; नसध॰ 5:20.13)
169 अगुआ (नसध॰ 23:96.10)
170 अगुआ (जाके ~ से कह दऽ कि कल्लू शादी न करत) (अमा॰2:14:2.7)
171 अगुआइ (देस के तपल-तपावल नेता भी अगुआइ करे के लेल हुंकारी भर देलन हे ।; पहिले तऽखाली जमाहिर लाल-इन्दिरा गांधी के दोस दे हली । बल्कि ओकरे समापत करे लेल जे॰पी॰ के अगुअइ में इ आन्दोलन हो हल ।) (अल॰38:119.16; 44:154.14)
172 अगुआई (आशा करऽ ही कि देश उनकर ~ में प्रगति के राह पर चलत) (अमा॰23:4:2.1)
173 अगुआई-बरतुआई (अमा॰165:15:2.18)
174 अगुवानी (अआवि॰ 105:16)
175 अगे (अमा॰165:10:2.13; मसक॰ 101:1, 7)
176 अगे (~ माँई) (नसध॰ 5:17.9)
177 अगे (अगे मइया, दीदी आउर नाना आ रहलथुन हे ।) (अल॰3:8.8; 5:12.18)
178 अगे मइनी (रम॰ 1:19.7)
179 अगेरी (रम॰ 11:83.9)
180 अगोरना (रम॰ 10:78.2)
181 अगोरना (अगोरले रहना; दुआरी ~) (नसध॰ 2:8.9; 21:83.27; 23:94.7, 8; 37:157.7; 42:184.29)
182 अगोरना (घूर-घूर के ~; दुआरी ~) (अमा॰11:7:1.23; 20:15:1.28)
183 अगोरले (~ रहना) (हम तो मइया से जादे ओकरे भिर अगोरले रहऽ हली ।) (अमा॰22:16:2.21)
184 अगोरा (रम॰ 10:75.13)
185 अगोरी (~ करना) (अमा॰11:8:2.8)
186 अघोरी (बिन कमैले खाय के अधिकार केकरो न होय के चाहीं । ओइसन अदमी ~ होवऽ हथ) (नसध॰ 27:120.5)

3.02 अइ-अउ आद्यक्षर वाले शब्द

57 अइँगी-भइँगी (गो॰ 10:45.15)
58 अइँठन (बअछो॰ आमुख:3.3; 15:68.29)
59 अइंठन (नसध॰ 12:53.8)
60 अइंठना (विश्वनाथ अइंठ के कहलक) (अमा॰27:6:2.1)
61 अइंठल (की अइंठल चलऽ ह अखने, एक दिन समय भी तोरो अइतो) (अमा॰23:20:1.1)
62 अइगुन (= अवगुण) (नसध॰ 19:78.23)
63 अइटा, अइँटा (गो॰ 4:21.8, 18)
64 अइठकी-बइठकी (एही बीच हाँफे-फाफे, लपकल-धपकल दउड़ल मोहनचक इस्टेसन तरफ से तीरकोनीए आवइत दुरगा मुखिया अलगंठवा सहित सभे के जोर-जोर से बोलइत कहलक हल - अरे बाप, अपने लोग अइठकी बइठकी खतम करके एने-ओने बहरा जा ।) (अल॰44:145.15)
65 अइमानी-बइमानी (रम॰ 10:77.16)
66 अइरवी-पइरवी (अलगंठवा के नाम किसान-मजदूर दूनों के कबूल हो जइतो । काहे कि उ दिन रात समाज के हर तवका के लोग के सेवा करइत रहऽ हे । देखऽ, हम्मर गाँव में ओकरे अइरवी-पइरवी आउर मेहनत से लोअर इस्कूल से हाई इस्कूल तक हो गेल हे ।) (अल॰15.44.29)
67 अइसन (अमा॰1:4:2.14, 7:2.1; अआवि॰ 2:22; बअछो॰ आमुख:3.1, 6.26; 1:11.23, ...; गो॰ 1:2.27, 28, 3.11, 20, 4.29; कब॰ 1:1; मसक॰ 16:1; 19:3; नसध॰ 6:24.22)
68 अइसन-अइसन (गो॰ 6:32.8)
69 अइसन-वइसन (अमा॰173:10:1.21)
70 अइसहीं (अमा॰21:12:1.20; 170:18:1.11; बअछो॰ 7:32.12; गो॰ 11:46.21; नसध॰ 1:2.8)
71 अइसे (~ काहे कहइत हऽ बाबू जी ? हमरा तो पटना से जादे मन इहईं लगऽ हे ।) (नसध॰ 37:158.11)
72 अईंटा (हमनिये नियन अपने भी अईंटा ढेला चलावऽ ही ?) (अमा॰22:14:1.15; 173:1:2.11)
73 अईंठना (रस्सी ओतने अईंठाय के चाही जेतना में ऊ टूटे नऽ । यदि टूट गेल तो अईंठे से का फैदा ?) (नसध॰ 37:160.3, 4)
74 अईठन (जोर जर गेल हे तइयो ~ बाकी हे) (नसध॰ 7:30.18)
75 अउँगारी (अल॰32:104.9)
76 अउकात (हमरा सुमितरी के पढ़वे के अउकात हइ बड़ीजनी, पढ़ाना असान बात हे का ? आज हम गछ लिअइ आउ कल हमरा से खरचा-वरचा न जुटतइ तऽ हम का करवइ ।) (अल॰10.31.23)
77 अउघड़ (~ दानी सोभाव के) (अमा॰13:8:2.4)
78 अउचक्के (दरोगी जी अउचक्के पानी में से निकासल मछली नियन तड़फड़ाय लगलन ।) (अमा॰29:12:2.28)
79 अउरत (नसध॰ 29:129.28, 30)
80 अउरत (अउरतियन सब अप्पन विचार से न डिगल) (अमा॰17:10:1.7)
81 अउरदा (जे साहित्त समाज के, जन-जीवन के आउ कहऽ कि माटी से मिलल रहऽ हे ओकर ~ ओतने लमहर होवऽ हे) (अमा॰13:11:1.4)
82 अउरो (बअछो॰ 1:11.5)
83 अउसन (जइसे खाय-पीये, पेन्हे-ओढ़े ला दे हियो, अउसने में रह । जादे मुँह लगइमें त ई खोरनी से दाग देबउ ।) (अमा॰17:8:2.1)

3.01 अँ - अं आद्यक्षर वाले शब्द

1 अँइठल (~ चलना) (नसध॰ 22:91.29)
2 अँउठी-पँउठी (रम॰ 11:84.12; 16:123.3)
3 अँकटी (रम॰ 18:133.7)
4 अँकवारना (अमा॰173:18:2.31)
5 अँकवारी (भर ~ धर के) (अमा॰12:11:1.29)
6 अँकवारी (भर ~) (कब॰ 46:6; 48:5; 60:12)
7 अँकुरना (अँकुरला पर) (अमा॰172:11:1.19)
8 अँकुरा (दू-तीन दिन के बाद सोनी के आँठी से ~ बाहर हुलक रहल हल) (अमा॰163:13:2.25, 27, 29, 30, 31)
9 अँकुराना (गो॰ 1:10.3)
10 अँकुरी (गो॰ 5:27.9)
11 अँखमुदौल (एक प्रकार के खेल) (नसध॰ 8:35.20)
12 अँखिगर (नसध॰ 23:93.30; 38:161.17)
13 अँगा-धोती (खादी के ~ पहिनले) (अमा॰2:5:2.18)
14 अँगुर, अँगुरी (गो॰ 1:10.17)
15 अँगुरी (अआवि॰ 82:18)
16 अँगेजना (गो॰ 11:48.28)
17 अँचरा (अमा॰18:10:2.16; 24:16:2.24; गो॰ 1:10.8; 6:28.26; कब॰ 1:11)
18 अँचरा डँसाना (गो॰ 2:15.1)
19 अँचरा, अचरा (नसध॰ 2:7.16; 29:130.11)
20 अँचार (भुँजिया आउ ~) (नसध॰ 32:140.33)
21 अँटकना (अँटकल) (अमा॰11:6:1.5; 167:8:1.6)
22 अँटकर लगाना (गो॰ 7:33.18)
23 अँटना, अँट जाना (नसध॰ 10:45.9)
24 अँटाना (खाली माथा में अँटावहीं से काम चले के नऽ हो) (अमा॰165:18:1.17)
25 अँटिआना, अँटियाना (धनमा के काट के परुइया लगैबई । बाल-बच्चे मिल-जुल के आँटी अँटिऐबई ॥) (अमा॰30:11:1.12)
26 अँटियाना (दे॰ अटियाना, अंटियाना) (ओकरा में का हइ, कल्हे सितिया बराय के बाद अँटिया लेवहू अउर का । हम दूनो माय-बेटी ढो लेवो ।; चलते चलऽ, अँटियावल धनमा ढो लऽ ।) (अल॰9:28.5, 7, 8, 29.18)
27 अँड़च के (~ कमाना) (मसक॰ 175:10)
28 अँधार (गो॰ 4:23.4; गो॰ 8:36.14)
29 अँय (नरिअर गुड़गुड़ावइत अकचका के नन्हकू पूछलक - "अँय, एने भी चेचक के सिकायत हइ का ?" -"हाँ, टभका टोय छोट-छोट बुतरूअन के पनसाही देखाय पड़लइ हे ।" बटेसर चौंकी के नीचे बइठत कहलक हल ।) (अल॰3:8.20; 6:17.30)
30 अंक (नारी के ~ में) (नसध॰ 37:160.27)
31 अंगना (नसध॰ 29:128.32)
32 अंगा (मसक॰ 71:7)
33 अंगाड़ी (नसध॰ 9:39.17)
34 अंगुरी (नसध॰ 2:7.17)
35 अंगेरी (केतारी के फुनगी) (मकस॰ 64:3)
36 अंगोछी (नसध॰ 6:24.11)
37 अंचइती-पंचइती (जे मादा के घर पसन्न न होवऽ हे तऽ उ नर मादा के छोड़ के चल जाहे । जेकरा ला अंचइती-पंचइती, केस-मुकदमा न होवऽ हे । हम्मर कहे के मतलब हे कि बिआह के परथा बहुत बेकार हे ।) (अल॰36:115.25)
38 अंच-पंच (~ फैसला करे न आवत) (अमा॰2:19:1.5)
39 अंचरा (बअछो॰ 5:25.11, 20)
40 अंचरा (अलगंठवा के माय गंगा नेहा के कई गो पत्थर के मूरति पर पानी छिट-छिट के अप्पन अंचरा पकड़ के गोड़ लगलक हल ।) (अल॰6:16.8)
41 अंट-संट (~ करना) (नसध॰ 43:191.11)
42 अंटसंट (जितावन आउ परिखन दुन्नो मिल के बढ़ावन चचा के ~ आउ अनर्गल बात कह-कह के उनका भड़कावे के योजना बना लेलन) (अमा॰30:14:1.18)
43 अंटियाना (दे॰ अँटियाना, अटियाना) (ठीके हे, हम कल्हे धान अंटिया लेवो ।) (अल॰9:28.14)
44 अंड-संड (= अंट-संट) (जानऽ हऽ, जउन दिन तूँ देवीथान किसान-मजदूर के हड़ताल समापत करइलहु हल ओकर कल्हे होके इस्कूलवा में अप्पन चुनल-चुनल जाति-भाय के बुला के तोहर विरोध में अंड-संड बकऽ हलो ।) (अल॰20:65.8; 23:71.29; 44:150.28)
45 अंडा (~ नियन दोकान सेना) (नसध॰ 24:101.26)
46 अंडा-पौठिआ (नसध॰ 8:33.6)
47 अंतड़ी (अमा॰17:7:2.9)
48 अंतरी-मंतरी (~ हीं से रोज फोन कलटर हीं आवऽ हे) (नसध॰ 46:203.6)
49 अंदोलन (= आंदोलन) (नसध॰ 33:143.2)
50 अंधड़ (नसध॰ 8:33.6)
51 अंधड़ (अंधड़ बतास बुन सब सहल हे जिनगी) (अमा॰22:18:2.4)
52 अंधविसवास (नसध॰ 38:163.15)
53 अंधार (अमा॰12:14:2.26; फूब॰ 6:21.2)
54 अंधार-धंधार (दिलदार राम, फनु मियाँ आउर अलगंठवा आरी-पगारी पर धीरे-धीरे सहम-सहम के चल रहल हल । फिन भी अलगंठवा आरी से पिछुल ही गेल हल । अंधार-धंधार में कुछ सूझ ही न रहल हल ।) (अल॰42:131.11)
55 अंधारी (फूब॰ 4:13.1)
56 अंधेरिया (मसक॰ 31:10)

Sunday, October 18, 2009

44. मुख्य पृष्ठ

अद्यतन संशोधन: 13-06-2010 22:48 ; कुल शब्द-संख्या = 11,380
 द्वितीय संशोधन: 08-05-2010 14:17 ; कुल शब्द-संख्या =   9,899

 प्रथम संशोधन:   21-02-2010 16:05 ; कुल शब्द-संख्या =   8,619


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कोश में प्रविष्ट शब्द के आद्यक्षर















[नोट: भिन्न-भिन्न पुस्तक आउ पत्रिका में से चुन्नल मगही शब्द के एक जगह संग्रह करके वर्णक्रमानुसार प्रस्तुतीकरण कम्प्यूटर प्रोग्राम से कइल गेले ह । मगही शब्द के संग्रह करे बखत प्रोग्राम में अभी कुछ खास सुविधा के कमी के चलते कुछ शब्द दोबारा आ गेले ह, जेकरा से ई ऑनलाइन मगही कोश में शब्द के ठीक-ठीक संख्या अभी नयँ देल जा सकऽ हइ । लेकिन आशा हइ कि कुछ शब्द के दोहरयला से शब्दावली के संख्या में 10% से जादे वृद्धि नयँ होले होत । भविस में प्रोग्राम में सुधार से ठीक-ठीक शब्द-संख्या मालूम होतइ । ]

43. हकारादि शब्द

10985 हँ (हँ में हँ मिलाना) (सुगिया के ननद, देवर भी अप्पन बाप के हँ में हँ मिलैलन) (अमा॰29:13:2.29)
10986 हँऽ (हँऽ में हँऽ मिलाना) (नसध॰ 1:3.16; 6:25.17)
10987 हँउकना, हौंकना (सुमितरी हाथ में तार के पंखा लेके हँउके लगल हल) (अल॰42:132.29)
10988 हँकड़ना (कब॰ 44:1)
10989 हँकाना (= हाँकना) (हँकौले; नगीना बैल हँकावइत घरे दने चललन (नसध॰ 4:14.12; 37:159.10)
10990 हँकाना (सास-ससुर होथिन चाहे बड़ गोतनी; बहुरिया के हँकएतन त कनिया चाहे कनेवा कहतन) (मकस॰ 43:2)
10991 हँठुआ (चुभसे॰ 3:7.30)
10992 हँड़पेटहा, हँड़पेटाहा (उ हंड़पेटाहा पांड़े बहुत टिपोरी भी हो, उ पहिले अपने जेमे ला मांगतो ।) (अल॰43:141.9)
10993 हँड़िया (अप्पन-अप्पन ~ अलगे कर लेना) (कब॰ 8:6)
10994 हँथिया, हथिया (नक्षत्र के नाम) (गो॰ 6:29.31)
10995 हँफनी (धीरे-धीरे ~ कमल जा रहल हे) (अमा॰13:8:1.11)
10996 हँसी के दही जमाना (गो॰ 9:41.19)
10997 हँसुआ (बअछो॰ 12:56.11)
10998 हँसुआ (~ के बिआह में खुरपी के गीत) (अमा॰18:11:1.11; 165:17:1.17)
10999 हँसुली (अआवि॰ 80:31; नसध॰ 19:76.19)
11000 हँसुली-रुपौठी (नसध॰ 19:78.7)
11001 हंडिया, हँड़िया (बअछो॰ 12:55.19, 27)
11002 हंथबत्ती (फूब॰ 4:13.3)
11003 हंसीली पसली (जब नन्हकू आम के पेड़ तर बैठ के खैनी लगा रहल हल तऽ कपसल जइसन होके सुमितरी नाना से कहे लगल हल - "नाना, नानी तऽ बढ़नी से मारते-मारते सउंसे देह में बाम उखाड़ देवे कइलक हे, मुदा घर पर सेनूर वाला बात सुन के मइया आउ बाबू मारते-मारते हंसीली पसली एक कर देतन ।") (अल॰3:7.25)
11004 हउँकना (पंखा ~) (नसध॰ 29:126.15)
11005 हउआना (रम॰ 4:43.5)
11006 हउड़ा (= हौरा, हौड़ा, कोलाहल, सुनगुन, अफवाह) (कुंआरी सुमितरी के मांग में सेनुर देवे के हउड़ा सगर मचल हल) (अल॰1:3.18; 32:103.11, 104.13; 44:151.27)
11007 हउड़ा, हउरा (रम॰ 10:79.19)
11008 हउल (धम-धम-धड़ाम के अवाज से इलाका सिहर रहल हल । सबके कलेजा हउल-हउल कर रहल हल ।) (अल॰15.44.3)
11009 हउ-हउ (रम॰ 10:82.20)
11010 हक-बक (थाना के सामने सूबेदार सिंह के हक-बक न चलतइन) (अमा॰18:12:1.28)
11011 हक-बक न चलना (रम॰ 18:136.12)
11012 हक-हिस्सा (नसध॰ 30:134.2)
11013 हकासल (भूख के गाँव सगरो बसल हे, देहे-देहे पियासल नदी हे । ऊ हकासल, तरासल, पियासल आउ तँवसल सदी-दर-सदी हे) (अमा॰14:1:1.4)
11014 हकासल-पिआसल (चुभसे॰ 3:12.5-6)
11015 हकासल-पिआसल, हकासल-पियासल (नसध॰ 3:9.25; 18:75.9; 29:127.23; 34:148.18)
11016 हकासल-पियासल (गो॰ 6:31.21-22)
11017 हकीकत (अफवाह ~ में बदलना) (नसध॰ 38:162.15)
11018 हगना (हगइत एगो अधवइस अउरत सुमितरी के ओर मुंह करइत, सले से सरकइत कहलक हल, "अहे सुमितरी, तोहरा आउर अलगंठवा के बारे में सुनऽ हियो कि तोहनी दूनो बड़ावर में जाके खूबे चकलस कइलऽ हे ।") (अल॰18:53.28; 25:76.27)
11019 हगना, हग देना (मकस॰ 11:2)
11020 हगुआना (नसध॰ 3:12.22)
11021 हगुआना (काका के बात सुन के रंगुआ माथा हगुआवे लगल) (अमा॰13:5:2.6)
11022 हजमटोली (अमा॰2:16:2.7)
11023 हजाम (बअछो॰ 2:14.2; 5:24.6)
11024 हजाम (ऊ रात हम्मर बेटी के बिआह होवे वाला हल । पिरीतीभोज के बाद अठमँगरा के रसम चल रहल हल कि हजाम हमरा पास पहुँचल आउ कहलक - 'समधी साहेब कहऽ हथुन कि दहेज में चार सौ रुपइया बाकी रह गेल हे । ऊ बकिअउटा के भुगतान भेले पर वर के दुआरपूजा होयत ।') (अमा॰28:5:1.3)
11025 हजामत (थानू हजाम से हजामत बनवा के गंगा में अस्नान करके आउर उतरी पहन के माय के मुँह में आग देवे से पहिले घाट के डोम से हुजत होल हल ।) (अल॰11.34.1)
11026 हजार-बजार (गो॰ 5:25.2)
11027 हटवे (अआवि॰ 31:5, 15; 32:20)
11028 हठरा (देखऽ ही कि ऊ खेत में मचान पर बइठ के ~ नियर बाल पर बाल पर बइठल सुग्गा-मैना के उड़ावे में हाल... होल... हाल... होल... करके टीना पीट रहल हे) (अमा॰173:16:2.1)
11029 हठुआ मनी (मसक॰ 75:2)
11030 हठुआखन (देखऽ सुमितरी, जिन्नगी में आनन्द आउर खुसी के छन बहुत कम होबऽ हे । जिन्नगी में हठुआखन उलझन होबऽ हे । अमदी के उलझन के सुलझावे में ही जीमन कट जाहे । ई गुने जे छन मिले ओकरे इ छन्न मान के जिए के चाही ।) (अल॰36:114.22)
11031 हड़कना (गो॰ 11:48.19)
11032 हड़कम्प (नसध॰ 5:20.6)
11033 हड़ताल (नसध॰ 23:95.12)
11034 हड़प-नराइन (रम॰ 10:77.17)
11035 हड़पना (सब हड़पते हथ तऽ तू हूँ नऽ काहे एगो झोपड़ी ओहिजे डाल दऽ) (नसध॰ 14:64.5)
11036 हड़बड़ाना (नसध॰ 5:16.28; 28:123.14; 42:185.12-13)
11037 हड़बड़ाना (काहे फुदेना सिंह ! हड़बड़ायल काहे लउट गेलऽ ?; ओजा से हड़बड़ाल पहुँचलन हेडसर के औफिस में आउ हाथ जोड़ के पूछलन - 'हमरा ला कउन आदेश हे सिरीमान ?') (अमा॰21:15:2.9, 11; 29:10:2.2)
11038 हड़बड़ी (नसध॰ 5:16.26)
11039 हड़होड़ (~ मचाना) (अमा॰3:6:1.4)
11040 हड्डी (नसध॰ 29:126.21, 22)
11041 हड्डी-गुड्डी (ऊ ओकरा ऊपर ही लोक लेलक न तो जमीन पर गिरइत तो ~ टूट जतई हल) (नसध॰ 40:176.13)
11042 हड्डी-गुड्डी (हड्डी-गुड्डी चिबा-चिबा के बोलऽ मुँह में दाँत न हे) (अमा॰22:20:1.14)
11043 हड्डीतोड़ (~ मेहनत) (नसध॰ 12:51.11)
11044 हत्या (दाल-भात घरइता खाय, ~ लेले पहुना जाय) (नसध॰ 37:156.23)
11045 हथकंडा (चुनाव के ~ सिखाना) (नसध॰ 22:91.18)
11046 हथिआना (अप्पन खरीदल आउ हथिआवल सबहे जमीन दान कर देलन) (अमा॰19:11:1.14)
11047 हथिया (= हस्त नक्षत्र) (नसध॰ 9:36.27)
11048 हथिया (= हस्त नक्षत्र) (दूसर अदमी बोल उठल - बाबा के बात,  इ पूरवा नछतर थोड़े हे । हथिया चढ़लइ हे । अभी दू दिन तऽ चढ़ला होवे कइले हे ।) (अल॰32:104.2; 44:152.12)
11049 हथिया बुले गामे-गाम, जेकर हथिया ओकरे नाम (मसक॰ 57:8)
11050 हथौड़ा (= हथौना) (तरबन्ना में एक हथौड़ा ताड़ी लेके रामखेलामन जी विना चखना के पी रहलन हे ।) (अल॰8:23.10; 26.17)
11051 हथौड़ी (नसध॰ 1:2.11)
11052 हद (जब बरदास्त के हद हो गेल, तब कहलो हम्मर जाइज हे) (अमा॰15:20:1.2)
11053 हदफदाना (ओकरा तनी डर लगल बाकि ऊ हदफदायल नऽ बलुक धीरजा से काम लेलक) (नसध॰ 42:185.1)
11054 हदफुदाना (हदफुदायल) (नसध॰ 40:175.28)
11055 हदबदाना (गो॰ 10:44.13; 11:47.16)
11056 हदर-बदर (गाड़ी खुले के सिटी सुन के हदर-बदर गाड़ी में घुसे लगलन हल ।) (अल॰6:14.26)
11057 हदसना (अलगंठवा हदसल जइसन चिल्लाइत कहलक हल - अरे विच्छा डंक मार देलको गोड़वा में बेटा ।) (अल॰26:77.19)
11058 हद-हद करना (गो॰ 1:10.23)
11059 हदहदाना (कल से बरखा हदहदा जायत, हदहदा के बरखा गिरल) (नसध॰ 6:23.16; 8:31.27; 35:149.15)
11060 हदाका (एक ~ चू जाय तऽ बिहन-बाल हो जाय) (नसध॰ 6:25.18)
11061 हदिआना (हदिआल) (हदिआल दरोगी जी हुनखे से पूछलन - 'पइसा खरचम तो हिएँ जमल रह जाम ?') (अमा॰29:12:1.26)
11062 हदिआना, हदियाना (सोहराय गांजा के विआ चुनइत कहलक -"मंगनी के चनन रगड़बऽ लाला, त लाबऽ न, भर निनार । ओही बात हे इनखर । अइसन हदिआयल जइसन दम मारऽ हका कि एक दम में सब गांजा भसम हो जा हे ।"; एकरा लेल तूँ काहे ला हदिया रहलऽ हे इयार ।) (अल॰8:25.7; 25:76.6)
11063 हदिया देना (अलगंठवा अप्पन घर के अइसन धच्चर देख के कभी-कभी एकान्त में रो जा हल । माय-बाबू आउ चचा जी के इयाद रोबा दे हल, हदिया दे हल ।) (अल॰12.37.5)
11064 हदियाना (न बेटी, तूँ हदिया मत, तनिको मत डरऽ । उ सब बात कहे के बात हइ । हम इतना बुढ़बक ही, अप्पन इज्जत अपने उघारम ?) (अल॰3:7.26)
11065 हनना-धुनना (गो॰ 1:6.26; गो॰ 5:24.14)
11066 हन-हन करना (हन-हन करे तेज तरुआर) (नसध॰ 40:177.21)
11067 हनहनाना (गैस-बत्ती हनहनाय लगल हल) (नसध॰ 9:39.21)
11068 हनहनाना (मीरा हनहनाइत गली में निकलल आउ गरज के भीड़ तर जाके बोललन) (अमा॰17:8:2.23)
11069 हपसल-धपसल (मसक॰ 73:4)
11070 हप्ता (अबरी ~ से, ~ भर में) (नसध॰ 28:123.26; 36:154.22)
11071 हबक (रम॰ 7:60.8)
11072 हबकना (कब॰ 18:8)
11073 हबकुरिए (कब॰ 23:15; 24:15)
11074 हबकुरिये (~ गिर-गिर के सपना चूर-चूर होवऽ हे) (अमा॰1:19:1.7)
11075 हबर-दबर (आज के ताजा खबर, पढ़िये ~) (अमा॰171:10:1.6)
11076 हमजोली (अमा॰18:11:2.9)
11077 हमजोली (तीनो हमजोलिये हलन) (अमा॰18:8:1.28)
11078 हमनिये (बअछो॰ 4:22.10)
11079 हमनियों (बअछो॰ 7:34.10, 11, 16; 15:66.3)
11080 हमनी (अआवि॰ 101:17; बअछो॰ आमुख:8.11, 13; 1:11.12, 12.28; 8:39.3; नसध॰ 1:1.2)
11081 हमनी (= हमन्हीं) (अमा॰12:12:2.7; 15:5:1.1, 9:2.31; 25:22:2.3)
11082 हमनीं (अआवि॰ 39:6)
11083 हमनीयो (नसध॰ 7:30.7)
11084 हमन्नी, हमन्हीं (चुभसे॰ 3:13.11; 4:15.19)
11085 हमन्हि (गो॰ 1:10.27; 5:25.4, 26.4)
11086 हमर (बअछो॰ आमुख:3.1; फूब॰ मुखबंध:1.3, 9, 16; 1:5.9; नसध॰ 1:3.3)
11087 हमरा (अआवि॰ 37:28; बअछो॰ 1:10.4; 4:21.17; 5:28.1; 8:38.27; फूब॰ मुखबंध:1.15, 17, 18; 1:4.8, 5.10; कब॰ 1:27; नसध॰ 1:1.28)
11088 हमरे (फूब॰ 1:5.9)
11089 हमरो (बअछो॰ 4:22.3; फूब॰ 8:26.10)
11090 हमहूँ (बअछो॰ 10:49.9; 12:55.22; गो॰ 2:14.20, 24)
11091 हमहूं (फूब॰ 4:17.8)
11092 हम्मर (अमा॰1:10:1.5; अआवि॰ 17:5; 29:31; बअछो॰ 8:38.2; गो॰ 1:4.26; 5:27.4; कब॰ 1:26)
11093 हम्मर (हम्मर कामना हे कि 'रजकण' जी के जस ई उपन्यास के जरिये मगही भासा आउ साहित्य के क्षेत्र में करमी के लत्तर जइसन फैले) (अमा॰1:15:2.17)
11094 हम्हड़-हम्हड़ के रोना (रम॰ 18:137.22)
11095 हय-चमन्ना (देस के आजादी के लेल जे लोगन जान देलन हल, बलिदान होलन हल, उ सब के विसार के एक जमात बना के हय-चमन्ना कर रहल हे ।) (अल॰40:124.15)
11096 हर (= हल) (अआवि॰ 38:32; बअछो॰ 12:55.19; 14:67.16; मसक॰ 113:2; नसध॰ 6:27.31)
11097 हर हमेशा (= हरमेशे, हरमेसे) (हम तो तोरे कहला पर चलऽ ही । हर हमेशा कहइत रहऽ ह कि जउन दिन घर में खाय ला अनाज मौजूद हे, तउन दिन कमाये के जरूरते का हे ?) (अमा॰27:9:1.5)
11098 हर-कुदारी (नसध॰ 9:39.10; 37:156.19)
11099 हरखना (दरसक हरख के परफुल्लित हो गेलन) (अमा॰16:12:1.25)
11100 हरगिज (फूब॰ 8:26.3)
11101 हरगिज (आगे से अइसन हरगिज न होवे के चाही) (अमा॰30:19:2.25)
11102 हरगोजे गुंजा कोई बुझले (एक प्रकार के खेल) (अआवि॰ 80:22; 83:27, 28)
11103 हरगोबिन (= हरगोविन्द) (एगो गाँव में ~ नाम के चमार रहऽ हल) (अमा॰27:5:1.1, 4)
11104 हर-घर (उ न हर के होवऽ हे न घर के) (गो॰ 1:10.5-6)
11105 हरजा (नसध॰ 1:4.26; 8:34.8; 24:99.5; 37:159.23)
11106 हरजोतवा (चार गो लदना बैल हल आउ चार गो ~) (अमा॰173:13:1.11)
11107 हरतालिका (बअछो॰ 5:26.19)
11108 हरदम्मे (~ डाँटिये के बात करऽ हलन) (अमा॰16:15:1.10)
11109 हरदी (अमा॰7:15:2.24; बअछो॰ 5:26.7)
11110 हर-पालो (चलऽ, तूँ बैलवा-भैंसवा हाँकले चलऽ । हम हर-पालो लेके आवइत हियो । अब कल एगो चास आउर करके गेहुँ बुन के चौकिया देवइ ।) (अल॰7:21.23, 26)
11111 हर-फार (गाँव में भी एतवार के ~ न चले से छुट्टी मिल जाहे) (नसध॰ 37:158.21)
11112 हरमेशे (= हरमेसे, हमेशा) (राजतंत्र में तो अइसन समय हरमेशे आवऽ हल) (अमा॰27:4:1.1)
11113 हरमेसा, हरमेसे (मसक॰ 62:4; 68:11; 114:11)
11114 हरमेसे (अमा॰16:18:2.8; नसध॰ 5:20.24, 22.26; 34:148.15)
11115 हरल-भरल (अआवि॰ 60:28; 63:21; 64:1)
11116 हरवाहा (अमा॰169:1:1.9; बअछो॰ 3:18.7; 8:37.5; 14:62.29)
11117 हरवाही (बअछो॰ 3:18.2, 19.4; 12:55.17; 15:66.15; गो॰ 5:25.14)
11118 हरसज (बटेसर अप्पन गाँव के गोवरधन गोप से हरसज करके खेत अवाद कर रहलन हल ।) (अल॰7:21.5)
11119 हरसट्ठे (अमा॰164:9:1.6)
11120 हरसठे (मलकिनी भी ~ बेमारे रहऽ हथ । खाय-पानी बनावे के दिक्कत हे । उनकर कहनाम हे कि लइकी बेस रहत तो पइसा के महत्व न देम ।) (अमा॰172:15:2.1)
11121 हरसना (हरसल) (मसक॰ 58:1)
11122 हर-हमेसे (सबके तहे दिल से समरथन देवे ला ई हर-हमेसे तइयार रहऽ हथ) (अमा॰19:14:1.16)
11123 हरहर (~ पखाना होना) (निरंग पानी नियन ~ पखाना हो रहलई हल) (नसध॰ 34:148.9)
11124 हर-हर (लइकाइये से खेलकूद में ~, पढ़े-लिखे में फरहर) (अमा॰169:17:1.9)
11125 हरहराना (गो॰ 11:48.4)
11126 हरहराना, हरहराय लगना (हरहरा के गिरना) (नसध॰ 30:131.14; 37:159.2)
11127 हरहोर (गो॰ 6:33.3)
11128 हरहोर (ई बात सुन के घर के आंगन में भरल-पूरल परिवार हरहोर करे लगऽ हलन ।) (अल॰12.37.30)
11129 हरामखोरी (नसध॰ 33:143.26)
11130 हरास (= ह्रास, कमी) (आज दुनिया के जनसंख्या अबाध गति से बढ़इत जाइत हे । एकर परिणाम ई होइत हे कि केतना किसिम के समाजिक कुरीति जलम लेवइत हे आउ नैतिक मूल्य में हरास होइत हे ।) (अमा॰29:5:1.4)
11131 हरिअर (अआवि॰ 62:22; 91:11; गो॰ 1:11.8)
11132 हरिअर (~ कचूर) (गाँव के चारों ओर हर तरह के पेड़-बगान हे । ई गुने वारहो मास हरिअर कचूर लउकइत रहऽ हे ।; धरती के सिंगार हरिअर कचूर मोरी दुलार विना टुअर जइसन टउआ रहल हल ।) (अल॰8:22.30; 15:44.13; 22:69.12)
11133 हरिअर (तुलसी के पत्ता के गह-गह पीयर बाकि कचनार नियर ~ रंग के एगो तेल निकलऽ हे जेकरा से हवा सुध होवऽ हे) (अमा॰12:6:2.2; 22:17:2.4)
11134 हरिअरी (अआवि॰ 11:5)
11135 हरिजन (नसध॰ 22:87.20, 32; 27:121.4; 28:124.25, 125.23; 33:144.16)
11136 हरिजन (पारो एगो ~ लड़का से बियाह करके जात-पात के भेद-भाव मेटा देहे; ~ माने भुइयाँ-चमार, डोम-दुसाध होवऽ हे, समझले ? माने कि नीच जात ।) (अमा॰13:11:2.14; 16:8:2.21; 165:7:2.2)
11137 हरिन (= हिरनी) (अमा॰27:5:2.13)
11138 हरियर (= हरा) (हरियर, पीयर, उज्जर दुभ्भी) (अमा॰2:10:1.17; 22:11:2.13; 167:1:1.10)
11139 हरियरका (अमा॰26:1:2.5)
11140 हरियरी (मसक॰ 115:11)
11141 हरियरी (खेत ~ से लहलहाना) (नसध॰ 39:172.8)
11142 हलका-फुलका (अमा॰16:16:1.28)
11143 हलकारा (जीरवा नानी के कह देत आउ उहाँ से भोमा नियन सउँसे गाँव में ~ मच जायत) (नसध॰ 14:61.27)
11144 हलफना (नन्हकू के देख के हलफइत सुमितरी कहलक हल - "अरे नाना आ गेलथिन ।") (अल॰44:152.30)
11145 हलफा (मसक॰ 45:10)
11146 हलफा (हलफा के पानी से सुमितरी आउर अलगंठवा के कमर के नीचे के कपड़ा तीत गेल हल ।) (अल॰31:98.8)
11147 हलफा (हलफा छुअल दुन्बो कोर हे गंगा मइया, हलफा छुअल दुन्नो कोर) (अमा॰29:9:1.17)
11148 हलाक (गोली मार के ~ कर देलन) (अमा॰173:18:1.2)
11149 हलाकि (= हालाँकि) (अमा॰3:9:2.24; 173:8:2.11)
11150 हलावत (गो॰ 10:44.22; 11:48.10)
11151 हलुआ (नसध॰ 29:130.1)
11152 हलुआइन (नसध॰ 3:9.1)
11153 हलुक (नसध॰ 5:21.19, 26, 27; 36:153.29)
11154 हलुक (ओन्ने टीबी से दबल लइका के देखूँ कि बेटी के भार हलुक करूँ) (अमा॰23:17:2.3, 18:1.5)
11155 हलुमान, हलूमान (= हनुमान) (हलुमान गढ़ी जलवार नदी के कछार पर येक छोट-मोट तीरथ धाम के महिमा से जानल जाय लगल हे । मुदा मर-मोकदमा से पीड़ित हे हलूमान गढ़ी ।) (अल॰43:140.12, 14, 16)
11156 हलोराना, हलोरा जाना (सब खेलाड़ी चारो खाने चित्त हो गेलन । सब के पइसा हलोरा गेल ।) (अमा॰7:18:1.14)
11157 हल्ला (नसध॰ 6:24.16)
11158 हल्ला उड़ा देना (नसध॰ 5:16.25)
11159 हल्ला-गुल्ला (नसध॰ 16:70.25)
11160 हल्ली-मोहल्ली (बी॰डी॰ओ॰ साहेब अपन ~ के साथे महतो जी के सामने गिड़गिड़ाइत हलन) (नसध॰ 28:123.11)
11161 हल्लुक (चुभसे॰ 1:3.15; 3:11.19, 25; गो॰ 1:1.19, 3.22)
11162 हल्लो-हरान (गो॰ 8:38.14)
11163 हवकना (पकल बम्बइया आम सुमितरी के मुँह में सटावइत अलगंठवा कहलक हल -"लऽ, हवक के मारऽ चोभा । तोहरे जइसन गुदगर आउर रसगर आउर सवदगर हो ।") (अल॰29:89.5)
11164 हवका (~ मारना) (सुमितरी हवक के अलगंठवा के गाल में चूमा के हवका मारइत कहलक हल) (अल॰36:116.4)
11165 हवर-दवर (रम॰ 7:59.12)
11166 हवर-दवर (सुमितरी नरियर के तेल हवर-दवर माथा में चपोत रहल हल ।) (अल॰16.47.21)
11167 हवर-धवर (= हवर-दवर) (डगर पर अलगंठवा के देखते ही हवर-धवर बरतन मइंज के लपकल-धपकल ऊर दने सोझिया गेल हल ।) (अल॰44:152.1)
11168 हवर-हवर (रम॰ 13:96.19)
11169 हवा पानी लेना (बअछो॰ 9:40.17)
11170 हवास गुम होना (ओहनी के हवासे गुम हो गेल) (नसध॰ 1:3.1)
11171 हसद (फूब॰ 1:5.7)
11172 हसबखाह (फूब॰ 7:24.8)
11173 हसबरवाह (बअछो॰ 2:16.20)
11174 हसोतना (हसोत-हसोत के) (इहे बेविचार फैलावऽ हे । गाँव ओलन खखुआयल रहऽ हथ हसोत-हसोत के ले जा हथ ।) (नसध॰ 25:107.32)
11175 हस्ती (हिन्दी साहित्य में भारत देश के महान हस्ती ... महाकवि आरसी प्रसाद सिंह) (अमा॰18:4:2.9)
11176 हहरना (कब॰ 43:20; रम॰ 15:115.17)
11177 हहरना (जलवार नदी के दूनों कोर उपलल जा हल । उपलल नदी के देख के सुमितरी आउर ओकर माय-बाप आउ नाना के दिल हहर गेल हल ।) (अल॰31:96.20; 38:119.28)
11178 हहाना (छप्पर पर भद्-भद् के अवाज होवे लगल हल । हहा के बरसा बरसे लगल हल ।) (अल॰42:133.30)
11179 हहाना (हवा चउबाहा बहे गछिया-बिरिछिया रामा, हरि-हरि डाँढ़े-पाते झुकऽ है हहाहै रे हरी ।) (अमा॰169:18:1.33)
11180 हहार (~ करना) (निसवद रतिया में टरऽ टरऽ करऽ हइ ददुरवा । रहि-रहि मारऽ हइ लथार, हहार करइ पूरबा ।) (अल॰19:63.3)
11181 हहासल (नसध॰ 5:16.12)
11182 हहियाना (हवा में गरमी लग रहल हल । ओकरा में भी पछिया हवा हहिया रहल हल ।) (अल॰3:7.16)
11183 हहुआना (मसक॰ 107:8)
11184 हाँड़ी (हँड़िया ढुनढुनाना) (अमा॰11:8:1.21; 14:1:1.5)
11185 हाँफना (जीभ निकाल के हाँफइत कुत्ता) (नसध॰ 6:27.29)
11186 हाँफे-फाँफे (गो॰ 8:37.4)
11187 हाँफे-फाफे, हाँफे-फाँफे (सुखदेव खंड दने जा ही रहल हल कि अलगंठवा भट्ठा तर से लपकल-धपकल, हाँफे-फाफे दूरा दने आ रहल हल ।; पेड़ तर के जमाइत दखिन रूखे हाँफे-फाँफे गिरते-पड़ते भाग गेल हल ।; एही बीच हाँफे-फाफे, लपकल-धपकल दउड़ल मोहनचक इस्टेसन तरफ से तीरकोनीए आवइत दुरगा मुखिया अलगंठवा सहित सभे के जोर-जोर से बोलइत कहलक हल) (अल॰26:77.18; 27:82.28; 44:145.13)
11188 हाइल-काइल (कब॰ 38:11)
11189 हाईकोट (= हाइकोर्ट) (नसध॰ 49:212.16)
11190 हाई-कोट (= हाई-कोर्ट) (फूब॰ 3:10.2)
11191 हाकिम-हुकमरान (अआवि॰ 66:15)
11192 हाकिमो (= हाकिम भी) (फूब॰ 1:6.5)
11193 हाजती (~ केदी) (नसध॰ 49:209.18)
11194 हाड़ काँपना (रम॰ 14:112.18-19)
11195 हाड़ तोड़ के मेहनत करना (गो॰ 3:17.3-4)
11196 हाड़ में छेद करना (रम॰ 14:112.9-10)
11197 हाड़-माँस (नसध॰ 27:119.8)
11198 हाड़ी (नसध॰ 29:128.31)
11199 हाथ जोड़ना (रम॰ 14:111.7)
11200 हाथ-गोड़ (अमा॰7:17:2.21; 12:10:2.34; गो॰ 6:27.25; मसक॰ 9:22; नसध॰ 29:126.11)
11201 हाथ-गोर (= हाथ-गोड़) (बाहर से ठंढ में हाथ-गोर सिकोड़ले दरोगी जी के घर में घुसते देख के हुनखर बेकत भूपती बोरसी जराके हुनखा तर रखते पूछलक - "आज तोर तबियत ठीक नयँ हो का ? हँस-बोल नयँ रहला हे ।"; दरोगी जी के हिचकी आवे लगल आउ ऊ अप्पन हाथ-गोर खींचे लगलन ।) (अमा॰29:12:2.10, 23)
11202 हाथ-जाँगर (नाथ, हम्मर बाबूजी गरीब आदमी हथ । ऊ कहाँ से देतन । अप्पन ~ के भरोसा चाही । पइसा तो हाथ के मइल हे ।) (मकस॰ 23:2)
11203 हाथा-पाहीं (नसध॰ 20:82.12)
11204 हाथा-बाँही (भिखना के चाचा जीरवा से ~ करइत हलन) (नसध॰ 13:58.21)
11205 हाथा-बाही (एही सब बतकही में बात बढ़ गेल । मामला ~ पर आ गेल ।) (अमा॰9:10:1.24-25)
11206 हाथी (नसध॰ 28:125.19)
11207 हाथे (नारद बिना पइसा के खदेरन के ~ बिक गेलन) (नसध॰ 14:61.21)
11208 हाय-हाय (नसध॰ 42:187.20)
11209 हार (= माला) (नसध॰ 30:132.22)
11210 हार-जीत (~ के खेल) (नसध॰ 26:117.16)
11211 हार-दाव (गिरहथ ~ देख के परहे नियन निसु हो गेलन) (नसध॰ 9:36.25; 9:43.15; 31:135.16; 42:185.18; 43:192.10)
11212 हारना-हूरना (अलगंठवा तनी मुसकइत सुमितरी से कहलक हल -"जा, तूँ अप्पन परीच्छा के तइयारी करऽ गन । उत्तरवारी टोला जे कर रहल हे, करे देहु । उड़उती उड़ाना कमजोर लोगन के निसानी हे । कहाउत हे न कि हारे न हुरे तऽ दूनो गाल थूरे ।") (अल॰24:74.22)
11213 हार-पार के (कब॰ 6:11; 32:7; 45:7; 56:22)
11214 हार-पार के (अपने सब माय-बाप-बहिन-भाई मिलके सुगिया के जइसन उदवास देली कि बेचारी के हार-पार के इहाँ आवे पड़ गेल ।) (अमा॰29:14:2.12)
11215 हारल-हहरल (गो॰ 1:1.8)
11216 हाल (= जमीन की नमी जिसमें हल आदि चले) (जोतल बिड़रिया के उखड़इ न हाल पिया) (अल॰19:63.6)
11217 हाल (= जमीन की नमी जिसमें हल आदि चले) (मगही के हर एक विधा में मजगर रचना भेल; सबसे मजगर तो हल विजय जी के गजल - हाल अछते परीत हो गेली ।) (अमा॰26:15:2.29)
11218 हाल (एक ~ पानी परना) (नसध॰ 6:26.23)
11219 हाल... होल (देखऽ ही कि ऊ खेत में मचान पर बइठ के ~ नियर बाल पर बाल पर बइठल सुग्गा-मैना के उड़ावे में हाल... होल... हाल... होल... करके टीना पीट रहल हे) (अमा॰173:16:2.2-3)
11220 हालत (अपन मरद के ~ देख के तनी घबरा गेल) (नसध॰ 29:127.24; 35:152.3)
11221 हाला-हाली (धन हे ऊ भूतहा बसवारी जहाँ रात तो रात दिनो में ~ लोग जाय के हिम्मत न करे) (नसध॰ 8:36.9; 13:58.3; 42:186.11)
11222 हाली (नसध॰ 19:76.6; 37:158.30; 45:196.20)
11223 हाली (नौकरी तो हाली मिले न । एही से उलार जाके मन्दिर में प्रार्थना करल जाय ।) (अमा॰27:6:1.26)
11224 हाली-हाली (अमा॰18:8:1.5-6; 166:17:1.17; अआवि॰ 81:9; चुभसे॰ 1:1.15; मसक॰ 60:23; 100:10; नसध॰ 2:8.1, 2; 5:16.21, 20.1; 27:122.14; 39:169.15; 42:186.10)
11225 हावा (~ के एगो झोंका; गाँव के ~ सहर के दावा से जादे फैदा करऽ हे) (नसध॰ 5:16.12; 6:26.20; 8:33.5; 27:118.17; 37:158.17)
11226 हावा-पानी (नसध॰ 24:102.26, 28)
11227 हाह (अदमी के तो हाहे न भरे । जेकरा पास जेतने जादे हो हे ऊ ओतने हाय-तोबा मचयले रहऽ हे ।) (मकस॰ 39:12)
11228 हाह (पेट में ~ ढुक्कल रहना) (मसक॰ 151:7)
11229 हाहे-फाहे (मसक॰ 99:24)
11230 हिंछा (= इच्छा) (तोहर चिट्ठी सुन के हम्मर बाबू जी आउर माय के भी हमरा पढ़वे के हिंछा हो गेलो हे) (अल॰1:3.4; 9:29.4; 16:47.19; 28:85.20)
11231 हिंछा, हिंच्छा (रम॰ 5:46.2; 18:137.18; 19:142.8)
11232 हिंजो-हिंजो (गो॰ 1:8.21)
11233 हिंसकी (मसक॰ 101:6)
11234 हिआँ (अमा॰13:7:1.19; 165:19:1.18; 171:18:1.5)
11235 हिआँ-हुआँ (अमा॰164:5:1.32)
11236 हिआना (अलगंठवा खड़ा होके होके टुकुर-टुकुर ऊ झूंड में अप्पन चितकबरी पाठी के हिआवऽ हल / निहारऽ हल ।; भगमान के देखे खातिर अप्पन आँख से चारो ओर हिआवे लगल कि कहीं से भगमान जी जरुरे देखाय देतन ।) (अल॰1:3.2; 4:11.11)
11237 हिकारत (अआवि॰ 10:5)
11238 हिकारत (~ के नजर से देखना) (जमुना जी अप्पन गरूर के रंग में जमील के एकदम्मे हिकारत के नजर से देखऽ हलन बाकि जमील हिम्मत हारे वला अदमी हल नञ) (अमा॰16:15:2.3)
11239 हिगराना (= बेगराना, अलग-अलग करना) (मुखिया जी आउ सरपंच साहेब अमीन साहेब के लेके हमनी के सामने साफ-साफ हिगरयले हलन, कहीं कुछ मिंझरावल न हे) (अमा॰30:14:1.29)
11240 हिगराना (हिगरावल) (मसक॰ 4:20; 97:2)
11241 हिगरे-हिगरे (हम ऊँच-नीच बड़-छोट मिलके रहऽ ही इया हिगरे-हिगरे - एकर झलक में समाजिक सम्बन्ध देखल जाहे) (अमा॰13:12:2.13)
11242 हिचकिचाना (नसध॰ 9:40.10)
11243 हिचकी (नसध॰ 42:186.28)
11244 हिचकोला (नसध॰ 26:115.21)
11245 हिच्छा (नसध॰ 8:33.8; 15:67.17; 44:194.2)
11246 हिच्छा (बाबूजी के अवाज आउ धीम हो गेल हल, बाकि कहे के उनकर ~ जबरदस्त हल । से ऊ कहे लगलन ; इहे गाम में पैदा होलन, कमयलन-खयलन आउ हिएँ मरे के ~ हल हुनखर) (अमा॰1:8:2.18; 16:18:1.19; 29:10:1.20)
11247 हिजरी (अमा॰174:6:1.17)
11248 हिजरीस्तान (अमा॰174:6:1.18)
11249 हिजे ("नया चिलिम, येकरंगा नया साफी नरिअर के गुल लइलियो हे ।" जमुना राम तलहथी पर बालूचर गांजा लट्टिअइते कहलक हल -"बस गुल जलावऽ, साफी भिंजावऽ, अब हिजे करे के जरूरत न हो ।..") (अल॰43:138.13)
11250 हिज्जे (खाली बिगड़ल हिज्जे के सुधार कर देवे के जरूरत हे । अइसहीं अंगरेज लोग केतना शहर के हिज्जे बिगाड़ले हलन, जिनका सुधारल गेल हे । आरा, मुंगेर, हजारीबाग के नाम के सुधार पहिले भी करल गेल हे, जेकरा में किनको आपत्ति न भेल ।) (अमा॰22:4:1.18, 20)
11251 हिड़ना (अजाद नालन्दा जिला के गाँव-गाँव में करांति के विगुल बजा के जगउलक हल । जइसे पैन-खाता के मछली मारे लेल लोग हिंड़ दे हथ । सच्चिदानन्द ओइसहीं गाँव-गाँव टोला-मुहल्ला घर-घर के हिंड़ देलक हल ।) (अल॰44:150.11, 12)
11252 हिड़िस (कनखी मारित बिचरइ निरदंद हिए हिड़िस अथोर) (अमा॰15:1:1.10)
11253 हित-कुटुम (अमा॰3:11:2.10; 174:8:2.17)
11254 हित-कुटुम्ब (अमा॰171:7:1.4)
11255 हित-नाता (अमा॰167:9:2.1; कब॰ 47:5; 55:6)
11256 हिदायत (~ करना) (सब के माय-बाप अपन बाल-बच्चा के हिदायत कर देलक हल कि अलगंठवा के साथ कोई भी म खेले-कूदे काहे कि उ लइका बेअवारा हे, न उ अपने पढ़त आउर न केकरो पढ़े देतइ ।) (अल॰2:4.30; 4:11.1)
11257 हिनखर (= इनकर) (अमा॰26:10:2.19)
11258 हिनतई (= हीनता) (अउरत के गिआन से दूर रखल गेल ई सब हिनतई के बात हे ।) (अल॰34:109.30)
11259 हिन्दू (जेतने जल्दी लोग मुसलमान बनऽ हे ओतने जल्दी ~ बने ला छटपटाय लगऽ हे; हिन्दुओ ... मुसलमानो) (नसध॰ 13:58.19; 34:145.30)
11260 हिन्ने (मसक॰ 73:9)
11261 हिफाजत (नसध॰ 33:143.26, 28)
11262 हिफाजत (ई टूटल पेटी के रतन जवाहिर के तरह ~ से रखिहें) (अमा॰1:9:2.24)
11263 हिम्मत (अमा॰4:16:1.23)
11264 हिम्मत (~बान्हना) (नसध॰ 25:107.1; 32:140.20)
11265 हिम्मतपस्त (नसध॰ 15:65.20)
11266 हिया गरान (गो॰ 1:4.26)
11267 हियाँ (अमा॰4:8:1.18; 164:6:2.18, 19; 165:19:2.5; मसक॰ 21:19; 23:17)
11268 हिरदय (अमा॰16:14:1.7, 2.19)
11269 हिरदा (अआवि॰ 95:7; 97:5; 99:8; नसध॰ 5:17.23; 38:163.18)
11270 हिरनी (हिरनी, खिक्खिर, चमगुदरी के आज हे जमघट लगल उहाँ ।) (अमा॰25:23:1.25)
11271 हिरिस (अआवि॰ 79:7)
11272 हिलकोरा (ठहरे नहर में बेंग-बगुला देखाइ पड़ रहल हल । कभी-कभी मछली चभ-सन करऽ हल । जेकरा से पानी में हिलकोरा होवे लगऽ हल ।) (अल॰25:75.9)
11273 हिसकी (देखा ~) (जे सिकरेट नहियो पीअ हलन ओहू देखा ~ सिकरेट सुलगा लेलन) (नसध॰ 20:81.31)
11274 हिसबिया (= गणितज्ञ) (महान हिसबिया आर्यभट के जन्मभूमि हे पाटलिपुत्र) (अमा॰16:10:1.1)
11275 हिसाब-किताब (सच बात छप्पर पर चढ़ के गुदाल करऽ हे । इ बात खाली बुलाकी वाली के साथ ही न हे, बल्कि सौ में अस्सी अउरत-मरद के एही हिसाब-किताब हे ।) (अल॰13.40.26)
11276 हिस्सा (नसध॰ 30:132.8)
11277 हीं (= के यहाँ) (गो॰ 3:19.21; मसक॰ 9:4; 25:8; 28:3, 5, 27; 90:13; 114:14)
11278 -हीं (भोरहीं, पहिलहीं, रातहीं, ...) (मसक॰ 11:21; 12:5, 6, 7)
11279 हींआ (गो॰ 6:27.22)
11280 हींग (नसध॰ 9:37.9)
11281 हींच-खींच (अआवि॰ 82:6)
11282 हीआँ (अआवि॰ 50:31)
11283 हीआँ (हीओं) (मकस॰ 13:12)
11284 हीआं (=के यहाँ) (फूब॰ 5:18.27)
11285 हीर-राँझा (नसध॰ 35:151.4)
11286 -हु (सेहु) (मसक॰ 11:25)
11287 -हुँ, हूँ (दुन्हूँ) (मसक॰ 21:3; 91:3)
11288 हुँकारी (नसध॰ 9:37.24)
11289 हुँकारी (कुछ देर लागी तो मइया के हुँकारिये बन्द हे गेल हल) (अमा॰168:9:2.26)
11290 हुँचकी (अमा॰1:9:2.13, 10:1.1)
11291 हुँनखर (अमा॰173:16:1.6)
11292 हुंठा (अमा॰167:17:1.6)
11293 हुआँ (मसक॰ 20:28; 59:11; 73:14)
11294 हुआँ (= वहाँ) ("बस नामे के हो शहर जमनिया । ऊ तो पूरा इन्टीरियर इलाका हो ।" अप्पन गिआन बखानते कहलन भुनेसर जी - "पनियो-बिजली के समस्या हो हुआँ ।") (अमा॰29:12:1.4)
11295 हुआँ-हुआँ (तइयो सरवा रात भर खेत में ~ करइत रहलो) (अमा॰173:16:2.9)
11296 हुकन (~ समाना) (नसध॰ 25:108.25)
11297 हुकनी (~ के रोग) (नसध॰ 30:133.31)
11298 हुकहना, हुकना (ई सब कुनेत देख के हुकहत-हुकइत बेमार पर गेलन हे) (नसध॰ 30:133.31)
11299 हुक-हुक करना (रम॰ 6:52.1; 16:127.19)
11300 हुकुम (= हुक्म) (नसध॰ 19:76.13)
11301 हुजत (= हुज्जत) (थानू हजाम से हजामत बनवा के गंगा में अस्नान करके आउर उतरी पहन के माय के मुँह में आग देवे से पहिले घाट के डोम से हुजत होल हल ।) (अल॰11.34.2)
11302 हुजुर (फूब॰ 2:8.7)
11303 हुज्जत (अमा॰163:1:1.7)
11304 हुड़की (~ देखाना) (मसक॰ 157:5)
11305 हुनकर (मकस॰ 16:5)
11306 हुनका (मकस॰ 16:18, 21)
11307 हुनखर (अमा॰168:11:1.35; 173:16:1.16)
11308 हुनखा (अमा॰168:11:1.16)
11309 हुनरगर (मसक॰ 64:28)
11310 हुबा (ऊ दिना से जे ई बेमार पड़लन हे से उठे के ~ न हइन) (नसध॰ 27:119.20; 28:123.20; 36:153.18)
11311 हुमँचना (मसक॰ 72:4)
11312 हुमचना (मकस॰ 66:21; रम॰ 5:45.5)
11313 हुमाद (= हुमाध, समिधा)(शुद्ध घीउ से सनायल ~ के गंध; पति के अरथी के साथ हाथ में ~ के ढकनी लेले सावित्री के चलइत देख लोग दंग रह गेलन) (अमा॰9:9:2.24; 10:9:1.1, 9, 14; 17:9:2.1)
11314 हुमाद (बिहारशरीफ के मगही में "हुमाध") (होम करइत हाथ जर जा हे त का ~ देना बन्द कर दे हे ?) (नसध॰ 34:146.2, 3)
11315 हुमाद, हुमाध (रम॰ 12:91.20)
11316 हुरकुचना (अप्पन हाथ से हुरकुचइत अलगंठवा से पूछलक हल -'तोहरा ?' अलगंठवा कहलक हल -'जे तोहरा से हमरा ।') (अल॰36:115.8)
11317 हुरपेटना (नसध॰ 5:19.30)
11318 हुराँड़ (= हुँड़ार) (अमा॰5:13:2.9)
11319 हुराड़ (कब॰ 44:18)
11320 हुरिआना (रम॰ 16:121.15)
11321 हुलकना (मसक॰ 63:3; 125:1; रम॰ 4:42.22)
11322 हुलकना (अलगंठवा सबके इसलामपुर जाय के बस पर बैठा के अपने पटना जायवाला वस पर सवार होके विदा लेते गेलन हल । पहिले सुमितरी के बस खुल गेल हल । सुमितरी हुलक-हुलक के खड़ा अलगंठवा के उदास मन से देखे लगल हल ।) (अल॰31:102.27)
11323 हुलकना (उनकर मसनद मेकर रूई फाट के बाहर हुलक रहल हल) (नसध॰ 7:28.24; 34:147.6)
11324 हुलकना (दू-तीन दिन के बाद सोनी के आँठी से अँकुरा बाहर हुलक रहल हल) (अमा॰163:13:2.25)
11325 हुलकना (दूरा के केवाँड़ी थपथपावे लगलन त पिंकी ओने से हुलकल) (मकस॰ 11:27)
11326 हुलकी (रम॰ 14:110.7)
11327 हुलकी (~ मारना) (खाली चुनाव के समय नेता आबऽ हे, आउर जात-पात कर-करा के, आपस में लड़ा के बोट लेके नेता बन जा हे, फिन पटना-डिल्ली विराजते रहऽ हे पाँच बरिस तक । ओकर पहिले कोय थोड़े हुलकी मारऽ हे भला ।; बेटीचोद अप्पन समांग कहवे वालन गोतिया-नइया, जात-भाय, एक दिन भी जेल में हुलकी भी मारे न गेल ।) (अल॰15.45.20; 33:107.6)
11328 हुलकी (~ मारना) (जीतला के बाद आझ तक महल्ला में कोई हुलकिओ मारे न अयलन) (अमा॰163:9:1.25)
11329 हुलचुली, हुलचुल्ली, हुलजुली (रम॰ 11:85.9)
11330 हुलसना (जरा सा प्यार दुलार पाके हुलसवे कैल कि दूसर क्षण अत्याचार से संग्रस्त हो गेल) (अमा॰29:8:1.18)
11331 हुलिया (अआवि॰ 110:16)
11332 हुवा (अब हमरा बोले के हुवा नऽ हो) (अमा॰1:9:2.21)
11333 हुहुआना (बाहर से ठंढ में हाथ-गोर सिकोड़ले दरोगी जी के घर में घुसते देख के हुनखर बेकत भूपती बोरसी जराके हुनखा तर रखते पूछलक - "आज तोर तबियत ठीक नयँ हो का ? हँस-बोल नयँ रहला हे ।" मगर दरोगी जी ओकर एक्को बात के जवाब नयँ देलन आउ चउकी पर बिछल बिछौना में घुस के हुहुआय लगलन ।) (अमा॰29:12:2.16)
11334 हूँ (= भी) (गो॰ 2:14.21)
11335 हूँकना (नसध॰ 25:108.25, 26)
11336 हूँकारी (~ भरना) (नसध॰ 37:157.13)
11337 हूर (आज तो जहाँ देखऽ ही, जेकरा देखऽ ही, सबके सब हूर के परी खोजऽ हथ । पर हाँ, खाली हूर के परि होवे से काम न चलत । साथे कुबेर के खजाना भी चाही ।) (अमा॰27:15:2.1, 2)
11338 हूरना (अआवि॰ 41:1)
11339 हूर-हार करना (मसक॰ 131:1)
11340 हूर्रा (अआवि॰ 41:2)
11341 हूर्रा (दू ~ में बुधिया ठीक हो जतई हल) (नसध॰ 12:55.11)
11342 हेंकड़ी (भूल जयबऽ फिर अप्पन हेंकड़ी, तब डाँटो तोरा भयतो । की अइंठल चलऽ ह अखने, एक दिन समय भी तोरो अइतो ॥) (अमा॰23:20:1.21)
11343 हेंकरी (कब॰ 4:19)
11344 हेंगा (~ आउ सिकड़) (नसध॰ 37:159.10)
11345 हेंठ (नसध॰ 7:29.16; 35:149.15)
11346 हेंस-नेंस (मसक॰ 71:19)
11347 हेठ (गरमी ~ होना) (नसध॰ 8:31.21)
11348 हेदि-दोदी (रम॰ 16:122.24)
11349 हेमान (मसक॰ 168:11)
11350 हेराना (रम॰ 15:116.17)
11351 हेराना, हेरा जाना (अमा॰173:9:1.4)
11352 हेराना, हेरा जाना (लड़की ... जइसे जइसे ~ होवऽ हे, माय-बाप के नींद हेरा जाहे) (अमा॰7:13:2.10)
11353 हेरी-बेरी (एक रोज पोल खुल जयतो हात में ~ लग जयतो) (नसध॰ 31:137.19; 49:211.2)
11354 हेलना (गो॰ 10:45.33; मसक॰ 156:2; मसक॰ 166:1; रम॰ 13:96.12; 16:123.21)
11355 हेलना (= घुसना) (अलगंठवा अप्पन माय के हाथ पकड़ के गाड़ी के डिब्बा में हेल गेल हल ।; लास जब पूरा जर गेल तऽ थोड़ा-सा कलेजा करकरा रहल हल तऽ ओकरा कपड़ा में बांध के कमर भर पानी में हेल के लोग परवह कर देलन हल ।) (अल॰6:14.28; 11:34.28; 16:48.26, 28; 20:64.17)
11356 हेलना, हेल जाना (नसध॰ 39:171.24; 41:180.3)
11357 हेलना, हेल जाना (बाबूजी हमनी के घर में हेले देतथुन तब नऽ ?) (अमा॰17:12:1.9; 166:9:1.16)
11358 हेलाना (तीन चार अदमी आउ ओहिजा अपन ठोर लेले असरा में हलन कि कदई में हेलावे के कखने मोका मिले) (नसध॰ 34:148.3, 4; 37:157.1; 39:168.31)
11359 हेस-नेस (तोहर नाना जी से बराबर तोहर हेस-नेस पूछइत रहली हे ।; अभी तक उनखा आबे के कोई हेस-नेस न आयल हे । मुदा देर-सकेर उ अइथिन जरूर ।) (अल॰6:18.30; 34:108.5; 38:121.7)
11360 हेस-नेस (हे भगवान ! कुछ ~ न हो गेल होय ।) (अमा॰24:16:1.24)
11361 हैं तू हूँ (सीधे नऽ, घूमा के ओकर असर ~ अइसने बात बोलऽ हऽ) (नसध॰ 43:189.14)
11362 हैजा (नसध॰ 14:62.22; 28:125.9; 38:161.24)
11363 हैजा-मतवाही (~ में तो मुफत मेम इलाज होयत ओकरा में अदमी पिल्लू-पताई नियन मर जा हे) (नसध॰ 27:121.21)
11364 हो (सुक्खू भईया, दौड़िहँऽ हो) (नसध॰ 49:212.8)
11365 होटल-फोटल (इहाँ ~ भी न हे कि खायल-पीयल जाय) (नसध॰ 28:124.9)
11366 होम (होम करइत हाथ जर जा हे त का हुमाद देना बन्द कर दे हे ?) (नसध॰ 34:146.1)
11367 होय के बाद (= होवे के बाद) (बअछो॰ आमुख:7.12)
11368 होय से (= होवे से) (बअछो॰ आमुख:7.14)
11369 होरहा (बूँटवा के ~ बनाएम) (अमा॰171:17:1.17)
11370 होरहा (हमनी तीनो आ रहलियो हल । मुदा नइकी वगीचवा में तेतर तिवारी मिल गेलक । कने से तऽ एक पांजा गदरल बूँट के झंगरी ले के होरहा बना रहलथुन हे । ओही लोग तोहरा बुलावे ला हमरा कहलथुन हे।) (अल॰29:89.23, 27)
11371 होरी-चइता (कब॰ 54:13)
11372 होल (जादू-जुगा ~ करना) (नसध॰ 30:130.28)
11373 होलइया (उत्तरवारी टोला में लोग तोहर आउर हम्मर नाम सान के होलइया गा रहलो हे । अछरंग लगा-लगा के छिया-छिया के कवित्त पढ़ रहलो हे ।) (अल॰24:74.18)
11374 होलइया, होलैया (होलइया - रम॰ 3:30.13)
11375 होली (नसध॰ 12:51.29)
11376 होवइया (गो॰ 9:41.2)
11377 होशियार (अमा॰14:9:1.13; 15:10:2.6)
11378 होस-हवास (नसध॰ 29:128.5)
11379 हौंसना (= औंसना) (मसक॰ 72:8)
11380 हौंसला (नसध॰ 14:65.4; 26:117.21)

42. सकारादि शब्द

10126 सँउसे (रम॰ 9:70.17, 75.1; 12:87.19)
10127 सँउसे (= सउँसे) (इसलामपुर से सटले बूढ़ा नगर पड़ऽ हल जहाँ एगो इनार पर जमान-जोग अउरत वरतन गोइठा के बानी से रगड़-रगड़ के मैंज रहल हल । रगड़-रगड़ के वरतन मैंजे से उ अउरत के सँउसे देह हिल-डोल रहल हल ।) (अल॰3:6.9)
10128 सँउसे, सउँसे, सऊँसे, सौंसे (गो॰ 1:7.10; 2:12.9; 4:21.15; 5:24.16, 21; 5:27.12; 7:33.16; 7:34.8, 13; 11:46.24)
10129 सँझलउका (चुभसे॰ 4:13.27)
10130 सँझौती (~ देखाना) (नसध॰ 28:123.7)
10131 सँभारना (सब काम तो उनखे सँभारे पड़ऽ हे) (अमा॰13:7:2.26)
10132 संकेत (भावी ~) (नसध॰ 38:161.20)
10133 संगरना, संगरे लगना (अकास में बादल संगरे लगल) (अमा॰163:13:2.21)
10134 संगेरना (संगेर के रखे जुकुर लेख) (अमा॰166:4:1.6)
10135 संघ (= संग) (जे हमरा से बिआह करत, हम ओकरे संघे रहम) (अमा॰168:10:2.29)
10136 संघ (= संग) (तोहर संघे गाँव में लुका-छिपी आउर अनेकन खेल खेले के इयाद हम न भूलली हे ।) (गोर-गोर झुमइत धान के बाल में हम तोहर मस्ती भरल कचगर आउर दूधायल सूरत देख रहली हे ।) (अल॰6:18.29)
10137 संघत (= संगत; संगी-साथी) (दरोगी जी से कहते नयँ बनल । बस सुनते रहलन संघतियन लोग के बात-विचार ।) (अमा॰29:12:1.6)
10138 संघतिआ (= संगतिया, संगी-साथी) (कबड्डी-चिक्का-लाठी, डोलपत्ता, आउर कत्ती खेले में, पेड़-बगान चढ़े में, गाँव में नदी-नाहर से गबड़ा में मछली मारे में आउर अप्पन जोड़ापारी के संघतिअन में तेज तरार हल अलगंठवा ।) (अल॰1:1.25, 3.8; 43:140.10)
10139 संघतिया (मसक॰ 54:4; 55:24)
10140 संघाती (साथी-संघाती) (कब॰ 40:7)
10141 संघार (नसध॰ 10:44.16)
10142 संघी-साथी (गो॰ 9:41.2)
10143 संजम (= संयम) (~ खोना) (नसध॰ 36:153.15)
10144 संजोग (= संयोग) (अमा॰25:22:2.3)
10145 संझकी (~ बेरिया) (अकास में बादल संगरे लगल । एक दिन तो संझकी बेरिया झमक गेल।) (अमा॰163:13:2.21)
10146 संझा (गो॰ 5:23.24)
10147 संझिया (बिहनिया से संझिया तक) (अमा॰3:4:1.5)
10148 संझिला (गो॰ 5:24.12)
10149 संझौती (सुमितरी कहलक हल कि अब संझौती देवे के समय हो गेल हे, जा हियो । अलगंठवा कहलक हल कि हाँ, बेर लुकलुका गेलो हे । सूरज भी डूबे जा रहलो हे ।) (अल॰13.41.17; 43:140.16)
10150 संडक (= सड़क) (नसध॰ 28:124.19)
10151 संत (नसध॰ 34:145.29)
10152 संतान (नसध॰ 35:151.1)
10153 संतोख (अमा॰16:11:2.8; कब॰ 1:23; नसध॰ 2:8.12)
10154 संदर्भ (अकलुष ~ आउ गुन कर्म के चिंतन) (नसध॰ 35:151.7)
10155 संधाल (गो॰ 4:23.15)
10156 संयोग (नसध॰ 35:151.1)
10157 संस-बरक्कत (अमा॰165:11:1.26)
10158 संस्कारी (~ मन) (नसध॰ 26:116.2)
10159 संस्कारी (गाँव के ~ मन) (नसध॰ 20:81.14)
10160 सइंतना (सब के येगो झोला में सइंत के चले लगल तऽ अलगंठवा के मन में इयाद पड़ल कि ..; देखल जाय, दखिनबारी कोठरी के ताला खोलवाबल जाय कि ओकरा में का-का सइंतल हे ।) (अल॰4:11.6; 23:72.15; 38:120.8)
10161 सइंताना, सइंता जाना (अँय, हरिअर बूट अभी तक खेत में लगले हई, बूट गेहूँ तऽ कट-कूट के खलिहान में देउनी-देमाही हो के कोठी में सइंता गेल होत, फिन होरहा लाइक बूट कने से तिवारी लइलका ?) (अल॰29:89.27)
10162 सउँसे (अमा॰1:17:1.1; 164:9:1:27; 167:3:1.24, 9:2.1; 172:3:1.9, 2.27; चुभसे॰ 3:10.8, 31; कब॰ 3:26; मसक॰ 33:28; 34:10; 35:20; रम॰ 10:75.1; 12:87.19; 13:100.15, 104.3)
10163 सउंसे, सउँसे (कारीवांक, रमुनिया आउर सहजीरवा धान के गंध से सउंसे खन्धा धमधमा रहल हल ।; ओकर सउंसे देह पर वसन्त लहालोट हो रहल हल ।) (अल॰7:20.26; 34:108.22)
10164 सउख (कब॰ 1:6)
10165 सउतिन (= सइतिन) (अमा॰12:8:2.27)
10166 सउर (जउन पुतोह के कहियो ठीक से मुँहो न देखली ओकर उघड़ल शरीर देखम ? अइसन समय में ओकरा अप्पन देहो के सउर होतई ?) (अमा॰27:11:1.31)
10167 सउरी (~ लिपना) (अमा॰167:14:1.10)
10168 सउरी (डर कउन बात के ? जेकर सउरी होहे ओकर सारा भी होयत ।) (अमा॰2:6:2.5)
10169 सउरी (सउरिये में) (कब॰ 1:2)
10170 सउसे, सउँसे (नसध॰ 2:7.13; 3:11.9; 8:35.26)
10171 सऊँसे (बअछो॰ आमुख:7.9; 4:20.23, 22.10; 6:29.9; 8:38.19)
10172 सऊर (मसक॰ 69:15)
10173 सक (= शक) (फूब॰ मुखबंध:1.11; नसध॰ 30:132.3)
10174 सक (= शक) (तोरा केकरो पर सक्को हउ ?) (अमा॰21:12:1.10)
10175 सकड़पंच (~ में पड़ना) (उपहार के ई घिनौना रूप सामने आवे से उपहार देवे ओलन ~ में पड़ जा हथ) (अमा॰174:8:1.27)
10176 सकता (सब सकता में आ गेलन) (नसध॰ 48:208.30)
10177 सकती (= शक्ति) (उठे-बइठे के बात तो छोड़ऽ, करवटो बदले के सकती नञ रहऽ हे) (अमा॰13:7:2.4)
10178 सकदम (मसक॰ 172:26)
10179 सकदम (जमुनी के पहिले-पहिले सहर में ~ लगे) (नसध॰ 20:82.19)
10180 सकदम (नन्हकू ई बात सुन के सकदम हो गेल हल ।; साम में सुमितरी के नानी जब सुमितरी आउर अलगंठवा के बदनाम करेवाली बात कहलक तऽ ओकर जनाना सकदम में पड़ गेल हल ।) (अल॰3:7.25; 32:104.16)
10181 सकपकाना, सकपका जाना (नसध॰ 34:148.19)
10182 सकरकन (= शकरकंद) (नसध॰ 33:143.19; 36:155.22, 156.5)
10183 सकरकन्दर (= शकरकन्द) (हेडमास्टर के बात सुन के सकरकन्दर के पीरदायँ से काटइत सुमितरी भी एही बात कहलक हल) (अल॰34:108.2)
10184 सकरात-मकरात (अआवि॰ 80:32)
10185 सकलगर (मलमल के कुर्ता-धोती सीट कर के आउ आँख में सुरमा लगा के सुन्नर-सकलगर बन गेलन) (अमा॰16:13:1.2)
10186 सकसकाना (माय दमा से सकसकायत हल) (नसध॰ 25:106.1)
10187 सक-सुबहा (सादी के बाद मरद अप्पन जनाना पर हर घड़ी सक-सुबहा आउर सन्देह के नजर से देखे के अलावे अउरत पर अतंकवादी के तरह तलवार उसाहले रहऽ हे; बंधूक तानले रहऽ हे ।) (अल॰44:157.23)
10188 सक-सुवा (सतमासु बुतरू अधिकतर विसतउरिए में मुआ जा हे । ओहि हाल बनेवाली इ नयकी सरकार के भी होयत । एकरा में हमरा तनिको सक-सुवा न हे ।) (अल॰44:154.23)
10189 सकारना (एकरा से साफ परगट हो जाहे कि खुद्दे पाणिनि भी पराकृत के अधिक पराचीन नऽ, त कम-से-कम संस्कृत के साथे-साथ ओकरो आद्य उत्पत्ति तो जरूरे सकारलका हे) (अमा॰30:9:1.19)
10190 सकुँचाना (सकुँचल) (गो॰ 1:3.32)
10191 सकुचाना (अमा॰3:17:1.2)
10192 सकेत (= संकीर्ण) (मंदिल में घुसे के आउ निकले के रस्ता बड़ सकेत हे । लोग के हेले-निकले में बड़ दिक्कत होबऽ हे ।) (अल॰16:48.26)
10193 सकेरे (रम॰ 1:18.19; 3.29.22; 14:109.3, 110.15)
10194 सकेरे (= सबेरे) (बाप रे, केता सकेरे चललू हल कि भोरहरिए जुम गेलहु ।; जा, सकेरे चूल्हा-चौकी, चौका पानी करऽ गन ।) (अल॰16.46.25; 44:145.23, 153.5)
10195 सखी-सलेहर (अमा॰25:14:2:25; गो॰ 10:45.34; नसध॰ 42:185.8)
10196 सगर (कुंआरी सुमितरी के मांग में सेनुर देवे के हउड़ा सगर मचल हल ।; अलगंठवा के तीसरा पास के सरटिफिकेट मिले के खबर सगर फैल गेल हल ।; सगर उ लोग के पूजा पाघुर होवऽ हे ।) (अल॰1:3.18; 4:10.25; 6:19.10)
10197 सगरे (कब॰ 18:1, 18; 19:21)
10198 सगरे, सगरो (सगरे - रम॰ 1:17.11; सगरो - रम॰ 5:44.1; 13:98.18; 16:126.7)
10199 सगरो (अमा॰8:16:1.12; 14:8:1.4; अआवि॰ 11:12; 28:32; 92:16; 105:28; बअछो॰ 2:16.12; 2:22.12; 5:27.11; 7:36.14; फूब॰ 4:14.23, 15.14; 5:18.8; गो॰ 2:14.3; 6:32.11; कब॰ 3:8; 23:23; मसक॰ 69:3; 70:7; 127:3; 146:28; नसध॰ 6:26.20; 8:34.17)
10200 सगरो (हेडमास्टर जाति-पाती से लेके बड़गो-बड़गो कुकरम करऽ हे । जेकर चरचा सगरो फैल हल ।) (अल॰20:64.19)
10201 सगाड़ी (पेड़ झमटार हल जहिना तहिना, अब तो ठूँठे खड़ा हे अगाड़ी । ई न फूजे, न फुनगे, न लहसे, अब न चूके के भइया सगाड़ी ।) (अमा॰14:1:1.13)
10202 सगुन (~ करना, ~ कराना) (नसध॰ 6:26.5; 8:33.9)
10203 सगुन अगुन (साब ! ~ देख के उदघाटन के महूरत न का रखली हल ?) (अमा॰11:7:1.5)
10204 सगुन-तगुन (नसध॰ 6:27.7)
10205 सचकोलवा (ऊ कभी आदर्श के राह देखावऽ हथ तो कभी यथार्थ के ~ फोटू खींच के लोग सबके सामने रख दे हथ) (अमा॰13:11:1.10)
10206 सचमुच (नसध॰ 38:163.3, 24)
10207 सचाई (नसध॰ 38:162.5; 39:163.30)
10208 सचो (एक समय अइसन भी हल कि ओकर घर में सचो के दूध-दही के नदी बहऽ हल । एगो भैंस इया गाय विसखा जा हल तऽ एगो विआ जा हल ।) (अल॰12.36.16; 15:45.29)
10209 सच्चे-मुच्चे (गो॰ 1:1.3)
10210 सच्चो (=सच्ची ) (भारत में सरकार जनता द्वारा बनावल जाहे जरूर, बाकि ~ के ऊ जनता के सरकार बनऽ हे कि न एकरा पर अक्सर सवाल उठइत रहऽ हे; रात भिंजइत-भिंजइत राघोबाबू पर दम्मा के लच्छन ~ परगट होवे लगल । उनखर दम फुले लगल ।) (अमा॰10:4:1.8; 13:7:1.27)
10211 सच्चो, सच्चे (= सच में ही) (मसक॰ 22:4; 59:9, 21; 67:11; 169:5)
10212 सछात (= साक्षात्) (~ सरस्वती के धवल रूप) (अमा॰166:7:2.26)
10213 सजना (नसध॰ 26:117.5)
10214 सजाना-सुजाना (बिआह से पहिले लड़की देखे के रिवाज हे । कुछ लोग तो लड़की के बिना बतयले कहीं बजारे में ओकरा देख ले हथ । मगर जादे रिवाज हे कि लड़की के गुड़िया नियर सजा-सुजा के लड़का वाला के सामने लावल जाहे ।) (अमा॰27:15:2.15)
10215 सजाय (अमा॰4:18:1.11; 9:18:1.15; 170:7:1.19; 171:10:1.23)
10216 सजावट (नसध॰ 26:116.21)
10217 सझुराना (सझुरावे के लाख कोशिश करला पर भी ओकर सोच आउ जादे अझुरायल नियन हो जाहे) (अमा॰12:9:1.3)
10218 सट के कमाना हे, डँट के खाना हे (गो॰ 3:18.31-32)
10219 सटक सीताराम (नसध॰ 1:5.5)
10220 सटकना (सामर वरन, छरहरा बदन, तुका जइसन खड़ा नाक, कमल लेखा आँख, लमहर-लमहर पुस्ट बाँह, सटकल पेट, चाक निअर छाती, बड़गो-बड़गो कान, उच्चगर लिलार, उज्जर सफेद सघन दांत, पातर ओठ से उरेहल हल अलगंठवा ।) (अल॰1:1.21)
10221 सटकल (गो॰ 8:36.29, 37.1)
10222 सटक-सीताराम (रम॰ 12:88.1)
10223 सटका (मसक॰ 106:12)
10224 सटक्का (पानो सुनरी के तीन-चार ~ पीठ पर  देइत बोलल -'भुजफट्टी, आज के बाद जहाँ कुच्छो बोले कि देह के खाले खींच लेबउ') (अमा॰163:12:2.16)
10225 सटबट (नेहाली तान के दोनो सटबट के पड़ गेल हल ।) (अल॰36:114.12)
10226 सटल (नसध॰ 41:181.25)
10227 सटले (बअछो॰ 18:75.2)
10228 सटले (अलगंठवा के कोय वउसाह न चलल हल, उ लोगन के सामने । फिन बस से सब के सिलाव के खाजा खिलइते नालन्दा के खंडर आउर सटले रुकमिनी थान दिखला-दिखला के इ सबके इतिहास बतउलक हल ।) (अल॰31:102.3)
10229 सटले (ठकुरबारी के ~ ओहनी के फूस के मकान देखबे कयलऽ हे) (नसध॰ 16:69.32)
10230 सटाना (छाती से सटौले हे) (नसध॰ 26:115.14; 29:126.3)
10231 सट्टल (अमा॰18:10:2.20)
10232 सट्ठा (~ तऽ पट्ठा) (नसध॰ 7:31.12)
10233 सट्-सट् (~ मारना)  (एक दिन थाना प्रभारी के सामने एगो स्थानीय नेता के छो-फीटा केतारी से सट्-सट् मार के कह रहलन हल) (अमा॰19:14:1.30)
10234 सठियाना, सठिया जाना (नसध॰ 22:88.12)
10235 सड़ना (सड़इत अनाज) (नसध॰ 22:87.24)
10236 सड़ल (~ गरमी) (नसध॰ 6:26.20)
10237 सड़ल (~ मछली) (अमा॰8:14:1.1)
10238 सड़ल-गलल (ई कसइनी, हत्यारिन हमरा सड़ल-गलल खाना दे देवऽ हल) (अमा॰11:12:2.10; 163:15:2.31)
10239 सड़ाइन (गाँव के गरमी ~ लगे) (नसध॰ 8:31.20)
10240 सतइसा (बेटा-बेटी के जलम दिन, सतइसा, मुड़ना, सादी-बिआह, परब-तेओहार जइसन अनेको मौका पाके उपहार जुटावे के जोगाड़ में लोग लग जा हथ) (अमा॰174:8:1.18)
10241 सत-गत (~ करना) (बेचारी सुगिया के कउन दोस ? तों पहिले जाके बुतरू के ~ करऽ, तब तलुक हम ओकरा लागी खिचड़ी बनाके ले आयम ।) (अमा॰173:16:2.21)
10242 सतगोटिया (~ खेलना) (नसध॰ 30:132.26)
10243 सतजुग (नसध॰ 41:182.1)
10244 सतनाराइन (= सत्यनारायण) (घर में सतनाराइन भगमान के कथा भी होयल हल ।) (अल॰4:10.27, 30)
10245 सतभइवा (रम॰ 15:120.17)
10246 सतभतरी (गो॰ 8:37.21; नसध॰ 5:18.4, 6)
10247 सतभतरी (झलही के बिदा करूँ, रूसनिया के बिदा करूँ । छिनरिया के बिदा करूँ, सतभतरी के बिदा करूँ ।) (अमा॰1:12:1.23)
10248 सतमा असमान पर चढ़ना (मसक॰ 71:11)
10249 सतमासु (अपने सब ही भाग्य-विधाता ही सरकार बनावे आउर ओकरा मिटावे के तरह के सरकार के कच्चा डहरा हो जा हे । सतमासु बुतरू अधिकतर विसतउरिए में मुआ जा हे । ओहि हाल बनेवाली इ नयकी सरकार के भी होयत ।) (अल॰44:154.21)
10250 सतमी (नसध॰ 9:41.10)
10251 सतवंती, सतवती (नसध॰ 4:14.26; 5:18.4)
10252 सतवादी (गाँधीजी दुनिया के बड़गो सतवादी हलन) (अमा॰28:19:1.14)
10253 सतु (= सत्तू) (नसध॰ 4:16.3)
10254 सतुआ (एतने में एगो आदमी आयल आउ सतुआ खाय ला थरिया लोटा माँगलक) (अमा॰22:15:2.23)
10255 सतुआनी-विसुआ (अआवि॰ 81:1)
10256 सत्तू (नन्हकू के घरवाली सत्तू भरल लिट्टी आउर आम के अंचार गमछी के एगो खूटा में बाँध देलक हल ।) (अल॰3:6.5)
10257 सधारन (गो॰ 2:12.22)
10258 सधारन (= साधारण) (अमा॰20:6:2:5; 169:6:1.14; 172:5:1.8)
10259 सधुआना, सधुआ जाना (धनेसरा सधुआ गेल । ऊ अप्पन आधा सम्पत्ति गाँव के ठकुरबाड़ी में लिख देलक ।) (अमा॰169:14:1.21)
10260 सधुक्कड़ी (~ भासा) (अमा॰6:4:2.4)
10261 सन (गो॰ 3:17.10)
10262 सन (ढेर सन नेता लोग जगत जी के घरे मातम-पुरसी खातिर पहुँच गेलन हल) (अमा॰168:12:2.11)
10263 सन, सुन (सुन - रम॰ 2:23.12; सन - रम॰ 4:40.23, 24; 10:80.23; 12:88.14)
10264 सनई (~ के पीयर फूल) (अमा॰22:11:2.17)
10265 सनकना (मति-गति सब तोरो मर गेल, बिन निसा के सनक गेलऽ) (अमा॰174:13:2.5)
10266 सनकना (सनकल हो हवा इहाँ, जमकल आउ कनकन हो पानी ।) (अल॰44:155.9)
10267 सनल (इधर अलगंठवा आउर आजाद खाड़ में जाके फड़ही के भुंजा घी गोलकी से सनल खाइत आगे के जोजना बनावे लगल हल ।) (अल॰41:129.26)
10268 सनसनाना (अमा॰2:15:2.16; नसध॰ 27:122.5)
10269 सनहा (मकस॰ 25:9; मसक॰ 169:4; 172:29; रम॰ 19:141.15, 142.15)
10270 सनाठी (रम॰ 14:111.11)
10271 सनाना (शुद्ध घीउ से सनायल हुमाद के गंध) (अमा॰9:9:2.23)
10272 सनि (= सन, से) (चट सनि) (चट सनि सेठ जी के नाम धर देले) (अमा॰21:12:1.24)
10273 सनिअल (मसक॰ 169:6)
10274 सनिचरा (आज सनिचर के दिन हल, गुरुजी के सनिचरा देवे ला माय आधा सेर गेहूँ दे देलक हल ।) (अल॰4:8.35, 9.13)
10275 सनिचरा (लगऽ हे इनसाल गाँव पर ~ के गरह हे) (नसध॰ 34:147.29)
10276 सनिचरा ग्रह (मसक॰ 18:17; 19:6, 21; 20:8, 17, 19)
10277 सनी (बहुत ~) (मसक॰ 160:16)
10278 सनीच्चर (बअछो॰ 7:32.3)
10279 सनीमा (= सिनेमा) (सनीमा के रील जइसन बालेश्वर जी के बात, काम, बेओहार आँख के आगू नाचइत रहल) (अमा॰28:15:1.3)
10280 सनुख, सन्नुख (रम॰ 16:121.7)
10281 सनेमा (चुभसे॰ 1:6.9)
10282 सनेस (अमा॰174:7:1.18; मकस॰ 39:7; मसक॰ 91:11)
10283 सनेसा (चुभसे॰ 1:6.11; 2:6.15; 3:9.15; गो॰ 11:46.33)
10284 सनेसा (= सन्देश) (अमा॰2:5:2.23)
10285 सनेह (नसध॰ 35:151.13)
10286 सन् (ढोलक के थाप आउ अल्हा के मान से रात के सन्नाटा भी ~ हो गेल हल) (नसध॰ 27:121.3)
10287 सन्न (करेजा सन्न से हो जाना) (अमा॰12:15:1.11)
10288 सन्नल (रम॰ 13:97.9)
10289 सन्नाटा (ढोलक के थाप आउ अल्हा के मान से रात के ~ भी सन् हो गेल हल) (नसध॰ 27:121.3)
10290 सन्नाटा, सन्नाट्टा (नसध॰ 33:145.5)
10291 सन्यास (~ लेना) (नसध॰ 37:160.8, 17)
10292 सन्यासी (= संन्यासी) (नसध॰ 23:95.26)
10293 सपनाना (राते तूँ का का सपनयलऽ ?) (अमा॰18:15:2.24, 17:1.25.)
10294 सपरना (= काम करने की योजना बनाना, मंसूबा बाँधना, किसी विषय पर विचार करना, तैयार होना) (सपरते रह गेली कि उनका से सिफारिश करवा के मगही में एम॰ए॰ के पढ़ाई शुरू करवावल जाय, लेकिन के जानित हल कि ऊ हमनी मगहियन के साथ होके अनाथ कर जयतन) (अमा॰30:6:1.29)
10295 सपरना (सुमितरी के माय खुस होयत कहलक हल - "हम सपर के तोहरा आउर अलगंठवा के लेके अइवो ।"; तूँ अभी सपरिए रहलऽ हे एक बरिस से । तोहरा सपरते-सपरते तोहरे पर घात कर देतो । तोहरा मालूम हो कि न, उ तोहरा जान से मरावे ला चंदा-बिहरी आपस में कर रहलो हे ।) (अल॰6:20.17; 21:68.4; 40:126.4)
10296 सप-सप (हवा) (गो॰ 1:1.9)
10297 सपेरा (नसध॰ 32:140.2)
10298 सपोट (= support) (~ करना) (नसध॰ 6:25.1, 27.7; 39:172.1, 3)
10299 सपोरना (= सपोड़ना) (बूँटवा के सतुआ तूँ दिन भर सपोरऽ हें) (अमा॰7:7:1.15)
10300 सफल (नसध॰ 36:153.22)
10301 सफाचट (अमा॰174:11:1.8; नसध॰ 26:115.4)
10302 सफाय (फूब॰ 4:16.28)
10303 सफाय (= सफाई) (अप्पन सफाय पेश कयलन हेडसर ।) (अमा॰29:11:1.12)
10304 सफेदी (नसध॰ 29:128.15)
10305 सब (नसध॰ 36:155.13, 14)
10306 सबक (~ सिखाना) (नसध॰ 15:66.7)
10307 सबद (= शब्द) (नानी के दू ~ कहे ला निहोरा कैल गेल) (नसध॰ 15:67.14)
10308 सबद (= शब्द) (साइत सबसे पहिले 'पालि' सबद के इस्तेमाल कइलन आचार्य बुद्ध घोष; 'अट्ट कथा' से त्रिपिटक के दीगर जतावे ला भी 'पालि' सबद के बेवहार करल गेल हे) (अमा॰23:9:1.9, 21, 24)
10309 सबदल (बढही हीं लगना आउ ~ ठोकाइत हल) (नसध॰ 6:28.9)
10310 सबरहीं (= सबेरगरहीं) (सबरहीं से लड़का हम्मर 'लेख' लिखे ला ठनगन कयले हलक त का करीं ?) (अमा॰30:18:1.12)
10311 सबहे (= सभी) (अमा॰19:11:1.14, 12:2.9)
10312 सबाद सकना (रम॰ 10:77.23)
10313 सबाधू (रम॰ 5:49.22)
10314 सबुर (= सब्र) (जब तोरा मालूम हवऽ कि कल्हे से कुच्छो न खइली हे, तइयो तूँ हमरा सबुर करे ला कहइत ह ?) (अमा॰27:12:2.28; 172:20:1.15; 173:7:2.11)
10315 सबुर (= सब्र) (मुँहमा से लार चुये लगलउ का ? जरा सबुर करे न ।) (अल॰43:140.8)
10316 सबुरी (= सब्र) (न कहियो बेचारी के गड़ी-छोहाड़ा ममोसर, न घीउ । पेन्हे ला साधारण लुगा मिलऽ हल । तइयो बेचारी सबुरी करऽ हल ।) (अमा॰17:8:1.22)
10317 सबुरी (मुसिवत झेले के हिम्मत भी अलगंठवा के परिवार में कुट-कुट के भरल हल । सबुरी-सन्तोस के जिन्नगी परिवार सब काट रहलन हल ।) (अल॰12.38.2)
10318 सबूत (नसध॰ 49:209.23)
10319 सबूर, सबुरी, सबूरी (सबूरी - रम॰ 1:19.22; सबुरी - रम॰ 2:24.5; 3:27.25; 13:107.16)
10320 सबेरगरहीं (=भोरहीं) (आज सोहराय के दिन हे । लड़कन सब सबेरगरहीं से छुरछुरी, पटाका छोड़ रहलन हे ।) (अमा॰13:7:1.1)
10321 सबेरगरे (बअछो॰ 14:63.9)
10322 सबेरगरे (= जल्दी) (रात में उनके इयाद करइत बिना खयले-पीले सबेरगरे सुत गेली) (अमा॰28:15:1.24)
10323 सबेरही (नसध॰ 4:15.8)
10324 सबेरहीं (बअछो॰ 14:62.9)
10325 सब्दकोस (= शब्दकोश) (मगही में  भी एगो 'सब्दकोस' चाहीं - छोटहीं सही) (अमा॰18:5:1.7)
10326 सब्भे (बअछो॰ 16:71.11)
10327 सभा (नसध॰ 33:143.6)
10328 सभापति (नसध॰ 33:143.6)
10329 सभिता (= सभ्यता) (सभिता-संस्कृति; विदाई के वेला में खोंइछा में अच्छत आउर दरब देल जाहे । मुदा तूँ लोग बहिन सब के खोईछा पर गोली बरसा रहलऽ हे । ई सब कहाँ के सभिता आउर संस्कृति हे भइया ।) (अल॰30:93.9; 40:124.26)
10330 सभे (फूब॰ 1:3.12)
10331 समजीरवा (~ में से सेर भर चाउर आउ रहर के दाल लेले आव) (नसध॰ 7:29.25)
10332 समझना (नसध॰ 36:155.29; 37:160.5)
10333 समझाना (जब नर्स ओकरा समझौलक तो लगल कि ई ओकर बेटी हे ...) (नसध॰ 29:127.24)
10334 समटायल (नसध॰ 47:206.10)
10335 समता (नसध॰ 35:150.27)
10336 समदना (समद के) (मसक॰ 72:14)
10337 समधिआरो (बरमा जी के नऽ देखइत ही, ~ के करत ?) (नसध॰ 15:66.16)
10338 समधियाना (गो॰ 5:27.8)
10339 समधी (नसध॰ 15:68.4)
10340 समधी (ऊ रात हम्मर बेटी के बिआह होवे वाला हल । पिरीतीभोज के बाद अठमँगरा के रसम चल रहल हल कि हजाम हमरा पास पहुँचल आउ कहलक - 'समधी साहेब कहऽ हथुन कि दहेज में चार सौ रुपइया बाकी रह गेल हे । ऊ बकिअउटा के भुगतान भेले पर वर के दुआरपूजा होयत ।') (अमा॰1:13:1.15; 28:5:1.3; 171:5:1.26)
10341 समधीआरी (नसध॰ 49:211.25)
10342 समय (तोरा अभी खेले-खाय के समय हो बेटी) (नसध॰ 29:127.20)
10343 समयाना (= शामियाना) (नसध॰ 15:67.13)
10344 समरपन (= समर्पण) (नसध॰ 35:150.25; 37:160.24)
10345 समरिआइन (गो॰ 1:5.31)
10346 समसेआ (= समस्या) (चुभसे॰ 1:4.10, 5.19)
10347 समाँग (गो॰ 3:18.27)
10348 समांग (रम॰ 3:34.4)
10349 समांग (अपने लोग के भी मजदूर सबके अप्पन समांग समझे के चाही । खेत-खलिहान, सादी-विआह, मरनी-हरनी आदि में मजदूर लोग लगल रहऽ हथन ।) (अल॰19:61.20)
10350 समाजिक (~  कुरीति; ~ जीवन) (अमा॰11:12:2.22; 12:7:1.1; 13:11:1.2)
10351 समाजिकता (अमा॰16:5:1.4)
10352 समाठ (रम॰ 3:36.14)
10353 समाद (गो॰ 3:17.5; 8:37.19)
10354 समाधि (जब जोगी के समाधि लग जा हे तो उनकर देह पर ~ ढूह बना दे हे तइयो उनका कुछो पता न चले) (नसध॰ 32:139.27, 28, 29; 45:198.22)
10355 समान (= सामान) (अमा॰165:11:2.33; नसध॰ 3:9.5; 19:76.20, 21)
10356 समान (= सामान) (हिदायत कर देल गेल हल कि परसादी के समान लेके पेसाव-पैखाना न करे के आउर न जुठखुटार होवे के चाही । बड़ी नियम-धरम से परसादी इयानी गड़ी-छोहाड़ा-किसमिस-केला-अमरुद-नारंगी परसादी लइहऽ ।) (अल॰4:11.1; 6:15.20)
10357 समान-उमान (नसध॰ 19:76.23)
10358 समाना, समा जाना (नसध॰ 4:15.15; 29:129.3)
10359 समियाना (बअछो॰ 10:46.3, 6, 19)
10360 समियाना (= शामियाना) (नसध॰ 15:67.4)
10361 समुंदर (नसध॰ 9:36.17)
10362 समुंदर, समुन्दर (अमा॰2:12:1.26; 14:7:1:28)
10363 समुच्चे (= समूचा ही) (अमा॰169:18:1.25)
10364 समुझदार (गो॰ 9:39.21)
10365 समुझना (गो॰ 6:31.23)
10366 समुन्दर (अआवि॰ 58:14; 107:11)
10367 समुल्लह (दुर्गा सप्तशती के ~ परायन) (अमा॰169:19:1.30)
10368 समे (= समय) (नसध॰ 6:23.20)
10369 समेआना (= शामियाना) (नसध॰ 15:68.13)
10370 सम्पुट (गो॰ 5:25.11)
10371 सम्बन्ध (नसध॰ 38:162.8)
10372 सम्मन (बअछो॰ 7:33.28)
10373 सम्हरना (गो॰ 2:14.26)
10374 सम्हरना (सम्हर के) (नसध॰ 2:7.11; 22:90.3)
10375 सम्हरना, सम्हर जाना (अमा॰174:13:1.2)
10376 सम्हार खाना (मसक॰ 74:18)
10377 सम्हारना (अमा॰11:14:2.2; 173:16:1.5; मसक॰ 9:11; 98:16)
10378 सरकार (नसध॰ 35:152.6)
10379 सरकार-फरकार (बअछो॰ 4:23.5)
10380 सरग (गो॰ 5:23.32; 7:35.11)
10381 सरग (~ सिधारना, ~ बनाना) (नसध॰ 5:18.23; 38:163.25; 39:173.16; 49:210.24, 25)
10382 सरगनई (जीरवा के ~ में सब मेहरारुन आउ सुसमा के साथे सब बेटी पुतोह इस्कूल पे चल अयलन) (नसध॰ 24:99.13; 27:122.9; 33:144.27; 39:173.19, 20; 47:204.23; 49:209.25)
10383 सरगनई (रात में भोजन के बाद राम सिंहासन सिंह विद्यार्थी के ~ में कवि सम्मेलन भेल) (अमा॰11:2:2.13)
10384 सरगना (नसध॰ 33:145.1)
10385 सरत (= शर्त) (नसध॰ 28:122.30, 123.18)
10386 सरधा (= श्रद्धा) (हम जरुर चाहऽ ही कि सुमितरी पढ़-लिख के समाज के लेल कुछ करे । हमरा ओकरा पर सरधा जरुर हे ।) (अल॰10.32.20)
10387 सरधा (= श्रद्धा; इच्छा, ललक) (~ से सिर झुकाना; ठीके बात कहलको चन्दर । तोरा नइहर से हमरो कोई ~ नयँ मिटल ।) (अमा॰2:4:2.15; 5:12:2.9; 15:17:2.22; 29:13:2.8; 30:15:2.20)
10388 सरधांजली (= श्रद्धांजली) (अमा॰18:4:2.23)
10389 सरबती आँख (गो॰ 6:28.31)
10390 सरबेटा (कब॰ 33:6)
10391 सरमदान (= श्रमदान) (अमा॰19:13:1.5-6)
10392 सरयुग (= सरयू) (सरयुग के पानी ले दउड़ऽ, ई लहकइत आग बुझावऽ राम !) (अमा॰22:8:2.26)
10393 सरवा (= साला) (अमा॰173:16:2.9)
10394 सरसती (= सरस्वती) (दुरगा-सरसती-लछमी आदि इतिआदी देवी खाली मट्टी के देउता न हथ । बल्कि उ लोग तोहरे जइसन हलन जिनखर नाम-जस-गुन के चरचा आज्झ भी घर-घर में हे । सगर उ लोग के पूजा पाघुर होवऽ हे ।) (अल॰6:19.8)
10395 सर-सनई (गो॰ 1:9.28)
10396 सर-समाचार (अमा॰166:15:1.9)
10397 सर-समान (गो॰ 10:43.25; नसध॰ 30:132.11)
10398 सर-समान (ऊ बराती के खातिर में तनिक्को कमी न कयलन हल । अप्पन औकात से जादे सरो-समान देलन हल ।) (अमा॰12:14:2.2; 165:11:2.28; 166:8:1.15)
10399 सर-सामान (अआवि॰ 51:11)
10400 सरस्वती(शक्ति ला देवी जी, बुद्धि ला सरस्वती जी, गाँव-घर के निगरानी ला गोरइया डिहवार, डाक, फूल डाक, ईशरा डाक, लहरा डाक, त घर के परिवार के रच्छा ला टिपउर, मनुस्देवा, बाबा बकतउर आउ बराहदेव हथ ।) (अमा॰22:13:1.7, 12)
10401 सरहज (अमा॰1:13:2.23, 14:1.6; अआवि॰ 62:4; गो॰ 4:22.16)
10402 सराती (रामायण के प्रसंग पर लोग वाद-विवाद करऽ हल, जेकरा से बराती आउ सराती पाटी के शिक्षा के स्तर के पता चलऽ हल) (अमा॰171:5:1.22, 27)
10403 सराध (जिनगी में जेतना संस्कार होहे जेकरा में जनम, छठी, मुड़ना, जनेऊ, बियाह, मरन, ~ आउ परब-तेवहार, पूजा-पाठ सब समय के रीत-रेवाज के बारे में लिखल हो) (अमा॰1:8:2.24; 27:13:1.26; 171:7:1.1)
10404 सराप (= शाप) (अमा॰22:18:1.4)
10405 सरासर (~ अन्याय, ~ बेईमानी) (अमा॰4:16:2.27; 16:12:1.16)
10406 सराहना (सराहे जुकुर) (नसध॰ 47:206.4)
10407 सरिआती (रम॰ 13:100.14)
10408 सरिआना (रम॰ 15:119.11, 13, 14; नसध॰ 3:9.5; 14:63.21)
10409 सरिआना (इंस्पेक्टर के देखइत ही गुरुजी हप्पन बही-खाता सरिआवे लगलन हल ।) (अल॰4:9.17; 6:15.20; 12:37.21; 16:51.25)
10410 सरियती (= कृतज्ञता) (नसध॰ 7:29.31)
10411 सरियाना (गो॰ 3:18.20, 21; नसध॰ 4:15.18; 24:98.6)
10412 सरियाना (भादो भयावन करिया-करिया बदरिया रामा, हरि-हरि एक पर एक सरियावे रे हरी ।) (अमा॰169:18:1.29)
10413 सरियाना, सरिया देना (मुँह संभाल के बोलऽ, अद्दी-बद्दी बकऽ मत, न तो एँड़ी-मुक्का-केहुनी से सरिया देवो ।) (अल॰38:123.1)
10414 सरीफ (= शरीफ) (फूब॰ 1:3.2)
10415 सरेक (= सरेख) (हमरा ई बतलावल जाय कि हम अप्पन लड़िकवन के अच्छर गेयान दिलावल चाहइत ही, से कइसे होयत ? ऊ सब सरेक हथ । अब तो इसकूलो में पढ़े लायक न रहलन ।) (अमा॰30:15:1.26)
10416 सरेख (मसक॰ 34:21)
10417 सरेख (लड़की ... जइसे जइसे ~ होवऽ हे, माय-बाप के नींद हेरा जाहे) (अमा॰7:13:2.10)
10418 सरेजाम (मसक॰ 99:28)
10419 सरेस्टता (= श्रेष्ठता) (अमा॰30:10:1.14)
10420 सरोकार (अमा॰171:5:2.6, 20)
10421 सरोता (= श्रोता) (ई रस में आश्रय जादेतर पढ़ताहर इया सरोता होवऽ हे; केकरो से बतकुच्चन करे घड़ी समझदार सरोता अनजान आदमी से कहऽ हथ - 'भाई ! इनका से बहस मत करऽ । ई काँके रिटरन हथ ।'; पिछला चुनाव में एगो नेता के बिहार बिहार दौरा में दस करोड़ रुपइया खरच के अनुमान हे, काहे कि उनका ला सौ में से नबे सरोता किराया पर लावे पड़ऽ हल) (अमा॰1:11:1.21; 19:11:2.12; 28:6:2.18)
10422 सलटाना (काम-काज ~) (मसक॰ 120:2)
10423 सलटाना (मामला ~) (दुन्नो भाई पंचइती में ~ सलटावे पर राजी हो गेलन) (अमा॰173:5:2.31)
10424 सलटाना (रोझन बात सलटौलन) (नसध॰ 6:27.9)
10425 सलतनत (बअछो॰ 4:21.4)
10426 सलमा-सितारा (बीचे-बीच सलमा-सितारा के झुनकी, आँचल में चंदा छिपाय दीहऽ, पिया हमरा के) (अमा॰24:15:1.25)
10427 सल-सल भर (= साल-साल भर) (मसक॰ 58:5)
10428 सलाइ (रघुनाथ अप्पन जेभी से दू गो वीड़ी निकाल के फक-सन्न सलाइ जला के वीड़ी सुलगा के एगो वीड़ी रामखेलामन के ओर बढ़ावइत आउर एगो बीड़ी अप्पन मुंह में दवाबइत कहलक हल) (अल॰8:23.23)
10429 सलाई (अमा॰165:12:1.2; अआवि॰ 63:24; मसक॰ 165:1; रम॰ 10:76.14)
10430 सलाई (= माचिस) (नसध॰ 25:107.21)
10431 सलाना (= सालना का प्रयो॰ रूप) (होत परात फह फाटइत बढ़ही बुलायब हो राम । जड़ से कटायब जीमिरिया कि पलंग सलायब हो राम ॥ ताहि पर परभु क सुलायब धीरे-धीरे बेनिया डोलायब हो राम । सास मोर सुतलन अंगनमा ननद घर भीतर हो राम ॥) (अल॰11.34.13)
10432 सले, सले-सले (सले-सले - रम॰ 1:19.6; 12:91.21; सले से - रम॰ 3:28.2; 4:42.1; 12:92.9; 15:118.25; 19:140.1)
10433 सले-सले (अमा॰2:6:1.18; चुभसे॰ 3:10.21; गो॰ 1:6.10; 7:35.13; 8:39.10)
10434 सले-सले (लाल टुह टुह सुरज, लगे कुम्हार के आवा से पक के घइला निअर देखाई देलक, लगे जइसे कोय पनिहारिन माथा पर अमनिया घइला लेके पनघट पर सले-सले जा रहल हे ।) (अल॰3:6.5; 13:38.22, 26)
10435 सलेहर (चुभसे॰ 4:15.9)
10436 सलेहर, सलोहर (रम॰ 19:139.9)
10437 सलोक (= श्लोक) (नसध॰ 6:24.31)
10438 सलोनी, सलौनी (अआवि॰ 69:5)
10439 सलौनो (अआवि॰ 80:27)
10440 सल्तन्त (बअछो॰ 3:19.9)
10441 सल्ले-सल्ले (गो॰ 10:45.23)
10442 सवँरकी (~ दीदी) (नसध॰ 42:184.21, 186.9)
10443 सवदगर (नसध॰ 31:135.2)
10444 सवदगर (= स्वादिष्ट) (अमा॰12:6:1.11; 166:9:1.33)
10445 सवदगर (= स्वादिष्ट) (पकल बम्बइया आम सुमितरी के मुँह में सटावइत अलगंठवा कहलक हल -"लऽ, हवक के मारऽ चोभा ।  तोहरे जइसन गुदगर आउर रसगर आउर सवदगर हो ।"; खिचड़ी, खीर आउर गोस्त ठंढा होवे पर ही सवदगर लगऽ हे ।) (अल॰29:89.5; 42:131.25; 44:156.19)
10446 सवनी-कजरी (नसध॰ 24:100.23)
10447 सवांग (बअछो॰ 15:68.26, 28)
10448 सवांग (कोई ओकरा से तो पूछे जेकर ~ दवाई के अभाव में दम तोड़ रहल हे) (अमा॰8:7:2.15)
10449 सवांग (रमेसर, तू तो हमर सवांग नियन हो गेले हें, तोरा से हमरा का दुख छिपाव हे) (नसध॰ 39:168.31)
10450 सवाद (= स्वाद) (नसध॰ 45:198.3)
10451 सवाद (= स्वाद) (असली घीउ के पूरी, चटनी, तीन तरह के रसदार आउ सुक्खल सब्जी, दही, मिठाई, सब एक से बढ़ के एक सवादवला) (अमा॰2:15:2.3; 12:5:2.9; 27:13:1.13)
10452 सवार (नसध॰ 35:152.8)
10453 सवारथ (मसक॰ 11:14)
10454 सवासिन (चुभसे॰ 4:14.26; मसक॰ 155:3)
10455 सवासिन (माय हलथिन बिहार शरीफ के इमादपुर महल्ला के ~ आउ माय के ननिहाल हलइन बाढ़ भिर अगमानपुर) (अमा॰169:17:1.6)
10456 ससपिन (= सस्पेंड) (नसध॰ 28:123.2)
10457 ससरना (चूँटी ससरे के इया तिल रखे के भी जगह न रहे) (अमा॰22:13:2.25)
10458 ससारना (पीठ ~) (कउनो उनखर पीठ कड़ुआ तेल गरम करके तनि ससार देत हल) (अमा॰13:8:1.17, 10:2.5)
10459 ससुर (अआवि॰ 62:2)
10460 ससुर (कहत मोरा लाज लगे, सुनत परे गारी । सास के पुतोह लगे, ससुर के मतारी ॥) (अमा॰25:18:1.27)
10461 ससुरार (अमा॰7:15:1.10; 12:9:1.1; अआवि॰ 58:9; 62:1)
10462 ससुरी (जेहो दू-चार मन के असरा हे, उहो ~ मैना-मैनी खाइए जइतो) (अमा॰173:16:2.14)
10463 ससुरैतिन (~ बेटी) (ताज्जुब तब होल जब माय भी हमरा ससुरैतिन बेटी समझ के दोसर समझे लगल) (मकस॰ 52:13)
10464 सस्ता-सुबिस्ता (काका रंगुआ से कहलन, 'कहीं ~ लइका हे त बताव') (अमा॰13:5:2.4-5)
10465 सस्पेंड (अनसन करके मंत्री के बोला के हमरा ~ करावे से अपने के का मिलत ?) (नसध॰ 36:154.25)
10466 सहक जाना (मसक॰ 171:19)
10467 सहकना (मन ~) (नसध॰ 4:15.18)
10468 सहकल (रम॰ 15:119.6)
10469 सहकाना (गो॰ 7:34.15)
10470 सहकाना (छोटका बेटा भुनेसर अइसन कि बात-बात में गारी बात करे लगऽ हल आउ माय के सहकयला पर मारे-पीटेला भी तइयार हो जा हल) (अमा॰171:7:2.18)
10471 सहज (सहजे में) (नसध॰ 6:23.29)
10472 सहजाना (रम॰ 11:84.23; 14:110.13)
10473 सहजीरवा (अगहनी धान टाल-बधार में लथरल-पथरल हल । कारीवांक, रमुनिया आउर सहजीरवा धान के गंध से सउंसे खन्धा धमधमा रहल हल ।) (अल॰7:20.26)
10474 सहन (पछियारी आउर दखिनवारी घर के दीवार भी दरक गेल हल आउर उत्तरवारी घर तऽ सहन ही हो गेल हल । गाँव में कइ लोगन के घर भरभरा के सहन हो गेल हल ।) (अल॰44:152.13, 14)
10475 सहना (नतीजा ~) (नसध॰ 38:162.14, 15)
10476 सहबान (स्कूल के ~ में) (नसध॰ 15:66.2; 37:159.16; 45:197.22)
10477 सहमत (नसध॰ 38:162.12)
10478 सहमना (डोमन सहमते बोलल; भीतरे से दरोगा सहमल हल) (नसध॰ 21:86.1; 46:203.7)
10479 सहमिल्लू, सहमिल्लु (मसक॰ 128:22, 171:12)
10480 सहर-तहर (~ में जाय के जरुरत न हो) (नसध॰ 14:63.2)
10481 सहरपतिया के (फूब॰ 7:25.23)
10482 सहल (उहाँ दोस्ती के बदलाव सहज आउ ~ हे) (अआवि॰ 48:23)
10483 सहारा (नसध॰ 29:129.13)
10484 सहियेसाँझ (नसध॰ 26:113.1, 7)
10485 सहिये-सांझ (मसक॰ 114:22)
10486 सही (ऊ ~ रूप में नर्स सबद के ~ अर्थ अपन जीवन में उतार लेलक हे) (नसध॰ 35:152.12)
10487 सहे (= "सहिये", सही ही) (फूब॰ मुखबंध:1.12)
10488 सहेबिनी (गो॰ 5:25.24; 6:31.2)
10489 साँच (~ के आँच का ?) (नसध॰ 14:61.4)
10490 साँझ (नसध॰ 29:128.5)
10491 साँझखनी (नसध॰ 3:11.12)
10492 साँझबत्ती (गो॰ 3:18.14)
10493 साँझ-बत्ती (मरुआल चेहरा लेले जब दरोगी जी घरे पहुँचलन त साँझ-बत्ती के टैम हो रहल हल ।) (अमा॰29:12:2.4)
10494 साँझबाती, साँझवाती (अमा॰30:13:2.30)
10495 साँझा (सुख-दुख में ~ रहना) (नसध॰ 35:150.12)
10496 साँझे (नसध॰ 3:9.21)
10497 साँझे-साँझ (~ लुगा समेट के मोटरी बाँधले तीनों घरे लउटलन) (अमा॰173:1:1.20)
10498 साँधी (गो॰ 5:24.8)
10499 साँप-छछुन्दर के फेरा होना (मसक॰ 54:6)
10500 साँपिन (ई साँपिन जइसन फउँकऽ हथ, फिन तुरते नेउर बन जा हथ; ओकरा बाघिन, साँपिन, पैनी-छुरी, विष के बेली आदि विशेषण देके निन्दा के भागी भी बना देलक) (अमा॰15:20:1.11; 29:7:2.18)
10501 साँय-साँय (नसध॰ 2:7.2)
10502 साँवर (हाथ-गोड़ कसल आउ रंग तनी साँवर-साँवर) (नसध॰ 17:72.17)
10503 साँस (अपन कथा-व्यथा एके साँस में सुना देलक) (नसध॰ 28:124.3)
10504 सांझे बिहने (बअछो॰ 12:56.18)
10505 सांत (= शांत) (नसध॰ 29:127.3)
10506 सांप-बिच्छा (सांप-बिच्छा नजर-गुजर झारे के अलावे जिन्दा सांप पकड़े के मंतर इयानी गुन से आन्हर अलगंठवा के बाबू ।) (अल॰1:1.16)
10507 सांसत (सब जोर देवे लगल गीत गावे ला । अलगंठवा सांसत में पड़ गेल हल । उ टाले के बड़ कोसिस कइलक हल । मुदा ओकरा गीत गावे के अलावा कोई चारा न हल ।) (अल॰19:62.24)
10508 साइत (चुभसे॰ 3:11.22; गो॰ 1:7.13; 2:13.22, 14.23, 25; 7:34.10)
10509 साइत (= शायद) (नसध॰ 38:162.20, 163.1)
10510 साइत (साइत सबसे पहिले 'पालि' सबद के इस्तेमाल कइलन आचार्य बुद्ध घोष) (अमा॰23:9:1.9; 25:15:2.9)
10511 साका (?) (अआवि॰ 95:13)
10512 साक्षात् (ऊ अउरत न, ~ देवी हे) (नसध॰ 35:152.10)
10513 साक्षात्कार (नसध॰ 35:151.12)
10514 साक्षी (नसध॰ 49:212.22)
10515 साग-सबजी, साग-सब्जी (नसध॰ 25:108.9; 26:116.22)
10516 साज-समान (अमा॰12:12:1.13)
10517 साज-सुज आउ जात-जुत के परसना (नसध॰ 45:196.30)
10518 साजिस (= साजिश) (अमा॰29:4:1.30, 32)
10519 साझा (नसध॰ 35:150.23)
10520 साझीदारी (नसध॰ 35:150.22)
10521 साझेदारी (नसध॰ 35:150.15)
10522 साटन (दसहरा आउ होली में कुटनी दादी के लुगा-झुला आउ साटन जरूरे मिलत) (अमा॰5:16:1.10)
10523 साटी (= साँटी) (~ पड़ना) (नसध॰ 43:191.18)
10524 सात (~ घाट के पानी पीना) (नसध॰ 34:147.25)
10525 साथ (~ देना) (नसध॰ 38:162.20)
10526 साथी (नसध॰ 37:157.9)
10527 साथी-संघाती (मकस॰ 24:21)
10528 साथे (नसध॰ 8:33.3)
10529 साथे-साथ (अआवि॰ 51:1; 100:13; 101:28)
10530 साथे-साथे (अआवि॰ 93:5)
10531 सादी (कब॰ 1:6; नसध॰ 7:30.21)
10532 सादी (= शादी) (अलगंठवा अभी काँचे-कुँआरे हल । ओकरा से विआह करे खातिर बहुत कुटुम आ-जा रहल हल । दहेज के भी बड़गो-बड़गो परलोभन देल जा रहल हल । मुदा अलगंठवा सादी करे ला अवलदार न होबऽ हल ।) (अल॰16.46.9)
10533 सादी-बिआह (बेटा-बेटी के जलम दिन, सतइसा, मुड़ना, सादी-बिआह, परब-तेओहार जइसन अनेको मौका पाके उपहार जुटावे के जोगाड़ में लोग लग जा हथ) (अमा॰174:8:1.18)
10534 साधन (रोजगार के ~ जुटाना) (नसध॰ 37:157.4)
10535 साधना (~ तो माटी के होयके चाही । अकास-फूल तो पेट न भर देत ।) (नसध॰ 35:151.26)
10536 साधना (दम साध के अइसन फूँक मारलन कि आग भभक गेल) (नसध॰ 27:119.1)
10537 साधरणीकृत (नसध॰ 35:151.2)
10538 साधु (नसध॰ 33:143.29)
10539 सान (तनी ~) (नसध॰ 7:28.29; 16:70.1; 29:127.18; 39:169.8)
10540 सानी (गइया के कुट्टी सानी आउ पानी दे) (अमा॰6:17:1.3)
10541 सानी (जब पिछुआनी में फन्नू मियाँ के पलानी में मुरगा बांक दे हल आउर जयतीपुर मसजिद में भोरउआ नमाज पढ़े के अजान के अवाज सुनते ही अलगंठवा के चचा उठ के गाय-बैल के सानी देवे लगऽ हलन आउर अलगंठवा के जगा के लालटेन जला के पढ़े ला बैठा दे हलन ।) (अल॰2:4.25; 15:44.10)
10542 सानी-पानी (मसक॰ 85:12, 15)
10543 सानी-पानी (हम भी जा ही मालिक ! बैलन के सानी-पानी भी नऽ देली हे आज !) (अमा॰28:10:2.13)
10544 सान्ही (~ में खोजे लगल तो लाठी मिलिए न रहल हल) (नसध॰ 45:199.19)
10545 सान्ही (= सानी) (सान्ही-मट्ठा) (नसध॰ 26:115.26; 37:159.11)
10546 सान्ही (कोना-सान्ही) (कोना-सान्ही में रह-रह के जे मुरझाएल हल, घर से निकस के जे छप्पर-छानी पर बइठ के छेरियाएल हल) (अमा॰21:9:1.6)
10547 साफ-साफ (~ कहना) (नसध॰ 37:160.5)
10548 साफी ("नया चिलिम, येकरंगा नया साफी नरिअर के गुल लइलियो हे ।" जमुना राम तलहथी पर बालूचर गांजा लट्टिअइते कहलक हल -"बस गुल जलावऽ, साफी भिंजावऽ, अब हिजे करे के जरूरत न हो ।..") (अल॰43:138.11, 13)
10549 सामत (= शामत) (ई मगही साहित्य के वास्ते सामत ही तो हथ) (अमा॰25:21:2.16)
10550 सामता (~ रंग) (कभी पइसा आड़े आवे हे, त कभी हम्मर सामता रंग) (मकस॰ 51:20)
10551 सामन (अआवि॰ 82:24; गो॰ 1:4.25; 3:19.14; रम॰ 10:74.1)
10552 सामन (= सावन) (अल॰42:136.24)
10553 सामन के मेघ आउर साँझ के पहुना बिन बरसले थोड़े जाहे (गो॰ 3:19.14)
10554 सामन-भादो (= सावन-भादो) (सामन-भादो के अंधरिया रात । ठेठा-ठेठा के पानी बरस रहल हल ।) (अल॰41:126.12; 44:153.17)
10555 सामन-भादों (गो॰ 1:8.21)
10556 सामर (= साँवला, श्यामल) (सामर वरन, छरहरा बदन, तुका जइसन खड़ा नाक, कमल लेखा आँख, लमहर-लमहर पुस्ट बाँह, सटकल पेट, चाक निअर छाती, बड़गो-बड़गो कान, उच्चगर लिलार, उज्जर सफेद सघन दांत, पातर ओठ से उरेहल हल अलगंठवा ।) (अल॰1:1.20)
10557 सामाजिक (~ अव्यवस्था) (नसध॰ 37:160.20)
10558 सामान्य (~ लोग ओकरा न समझ सकऽ हथ) (नसध॰ 37:160.22)
10559 सामिल (नसध॰ 9:42.21)
10560 सामिल (= शामिल) (अमा॰22:15:2.7)
10561 सामी (येक वेर के केहानी हे कि अलगंठवा के माय पुनिया के सतनाराइन सामी के पूजा खातिर परसादी लावे ला अलगंठवा के रुपया देलन हल ।) (अल॰4:10.30)
10562 सामुन (= साबुन) (गो॰ 1:2.2)
10563 सायद (फूब॰ मुखबंध:1.16)
10564 सायर (चुभसे॰ 3:8.18)
10565 सार (= साला) (गो॰ 1:8.22)
10566 सार (मारलें न ~ के दू घूस्सा) (नसध॰ 12:55.6; 33:142.11)
10567 सार, साला (फूब॰ 4:15.24, 25, 16.13)
10568 सारथक (सावित्री अप्पन बउसाव से मरद के सराब के लत छोड़ा देहे आउ अप्पन नाम सारथक करऽ हे) (अमा॰17:7:2.3)
10569 सारा (= साला) (गो॰ 5:25.8)
10570 सारी (= साली) (अमा॰1:14:1.6)
10571 सारी (=साली) (गो॰ 4:22.16)
10572 सालन ("वाह बेटी, ओल के तरकारी खाय ला बड़ी दिन से मन ललचा रहल हल ।"  तरकारी मुँह में लेइत बटेसर कहलक हल - "अरे, इ तऽ एकदम सालन के कान काटऽ हइ । ओल के तरकारी मांस से कम न होबऽ हे ।") (अल॰9:27.1; 43:140.6)
10573 सालन (आज फिनो ~ बनौलन आउ खदेरन के साथे खायला बोलौलन) (नसध॰ 14:60.3; 16:70.2)
10574 साल-माथ (गो॰ 4:21.14)
10575 साला (अआवि॰ 62:4)
10576 साला (ऊ साला गुंडा के फेर में पड़ गेलें) (नसध॰ 42:186.4)
10577 साली (अआवि॰ 62:4)
10578 साली-सरहज (अमा॰13:6:2.13)
10579 साले-साल (गो॰ 3:19.17; नसध॰ 3:10.5)
10580 साव के मूर से सूद प्यारा होवऽ हे (गो॰ 3:17.12)
10581 सावन (अआवि॰ 80:27; नसध॰ 9:36.19; 26:116.8)
10582 सावा (= सवा) (उ जमाना में विनोबा जी गाँव-गाँव घूम के परवचन दे हलन कि पैखाना गाँव के बाहर फिरे तऽ सावा वित्ता जमीन खत के ओकरे में पैखाना करके मिट्टी से झांक देवे के चाही । जेकरा से गन्दगी भी न होयत आउर पैखाना खाद के काम आवत ।) (अल॰2:5.9)
10583 सास (कहत मोरा लाज लगे, सुनत परे गारी । सास के पुतोह लगे, ससुर के मतारी ॥) (अमा॰25:18:1.27)
10584 सासन (= शासन) (नसध॰ 36:153.19)
10585 सास-ससुर (अआवि॰ 63:9; 108:32)
10586 सास्तर (= शास्त्र) (नसध॰ 6:25.3)
10587 सास्तर (= शास्त्र) (सब सास्तर के धरम-करम के तूँ लोग महका के, घिना के रख देलऽ ।) (अल॰43:142.30)
10588 साहगिर्द (नसध॰ 9:39.25)
10589 साहचर्य (नसध॰ 32:139.5)
10590 साहना (साहल सुहल खाना खाके चट सुते चल गेलऽ, खा पी के सब जुट्ठा बर्तन सब इहें रख गेलऽ ।) (अमा॰21:8:1.21)
10591 साहित (भासा आउ ~; शिष्ट ~, वैदिक ~) (अमा॰2:11:1.6; 4:5:1.20; 25:22:2.3; 30:8:1.2)
10592 साहित्त (अआवि॰ 80:10)
10593 साहित्त (= साहित्य) (अमा॰13:11:1.1, 7, 13:2.8, 9; मकस॰ 5.7)
10594 साहित्तकार (= साहित्यकार) (अमा॰13:11:1.5, 7)
10595 सिंगार-पटार (~ मत बन तिलेसरी ! जमाना मार देतउ । अइसन सिंगार-पटार बड़कन के बेटी करऽ हे । ओखनी एसनो-पाउडर, काजर-बीजर करऽ हे, त सोहऽ हे । तों करबे, तब लोग तोरा रंडी-पतुरिया कह देतउ ।) (अमा॰163:12:1.7; 168:9:2.1)
10596 सिंगार-पटोर (दरती माय के सिंगार करेवाला मजदूर हथ आउ किसान भाय सिंगार-पटोर जुटावेवाला हथ ।) (अल॰19:60.27)
10597 सिंघ (= सिंह) (फूब॰ 1:3.18)
10598 सिंघा (अमा॰171:5:1.17; मसक॰ 162:23)
10599 सिंघाड़ा (अमा॰21:7:1.3)
10600 सिंड़ना, सिड़ना (सीड़ = नमी, तरावट; सीलन, ठंढक) (गोइठवा घरवा तऽ एकदमे सेउदल हइ । जेकरा से गोइठवन गुमसाइल हइ । जब तक खुल के रउदा न उगतइ तब तक सिहरावन लगते रहतइ । रउदवा उगे पर ही घरवो बरइतइ । सगर तऽ सिंड़ल हइ । अब खखर के जाड़ा पड़तइ ।) (अल॰44:152.23)
10601 सिंहनी (तुलातुल समतुल हे, ता पर मेष प्रचण्ड । खड़ा सिंहनी अरज करत हे, कुम्भ छोड़ दे कंत ॥) (अमा॰25:18:1.29)
10602 सिअरसिंघी (नसध॰ 26:118.13)
10603 सिआना, सिआ जाना (जब कभी अकेले बतिआय के मोका मिलऽ हे तो लगऽ हे कि एहनी के मुँह सिआ जा हे) (नसध॰ 35:150.7)
10604 सिउ जी (गो॰ 2:13.12, 14, 19)
10605 सिकंदर (~ किसमत; किसमत के ~) (जेकर किसमत ~ हो, ऊ ई खेल से रातो रात सेठ बन जा हे) (नसध॰ 31:135.17, 30)
10606 सिकरी (तनी हमरा साथे चल । आज चोर सेन्हे पर पकड़ा गेलो हे । हम दूरा पर सिकरी लगा के अयलियो हे ।) (नसध॰ 45:199.4)
10607 सिकरेट (= सिगरेट) (बीड़ी-सिकरेट) (नसध॰ 20:81.30, 31, 82.1)
10608 सिकाइत (= शिकायत) (नसध॰ 30:132.4; 37:156.19)
10609 सिकाइत (= शिकायत) (माय-भाय आउर चचा सब अलगंठवा से अजीज । रोज-रोज बदमासी, रोज-रोज सिकाइत, रोज-रोज जूता के मार ।) (अल॰1:2.7)
10610 सिकायत (फूब॰ मुखबंध:1.27)
10611 सिकिन, सेकिन (= सेकंड) (फूब॰ 2:7.25, 29, 8.14, 15)
10612 सिकुड़ल (नसध॰ 13:56.7)
10613 सिक्छक (अमा॰17:6:1.8)
10614 सिक्छा (सिक्छा-नीति) (अमा॰17:5:1.26, 6:1.7)
10615 सिखावल (~ जाना; पाँच गो ~ लइकन के हाथ में माला लेके भेजलन) (नसध॰ 15:68.1; 29:129.17)
10616 सिखावल पढा़वल (संज्ञा रूप में) (बअछो॰ 7:35.22)
10617 सिच्छा (नसध॰ 29:128.10)
10618 सिझाना (दूध में सिझा के) (अमा॰166:5:2.13)
10619 सिटकीनी (केवाड़ी के ~) (नसध॰ 40:177.12)
10620 सिटकीली (सुमितरी सले-सले उठके बरेठा लगल दरवाजा धीरे-धीरे उसका के फिन भिड़का के बाहरी से सिटकीली चढ़ा के अप्पन घर से बाहर निकल के जमीन पर सले-सले गोड़ रोपइत अलगंठवा दने सोझिआ गेल हल ...।) (अल॰36:113.26)
10621 सिटपिटाना (सिटपिटाल) (फूब॰ 4:17.1)
10622 सिटपीन (जब माहटर आवऽ हलथिन त ऊ कुर्सी में ~ खोंस दे हल) (अमा॰12:17:1.12)
10623 सिटी-पिटी (~ गुम होना) (नसध॰ 14:63.15)
10624 सिटी-पिटी (राम लल्ला बाबू हीं लइका हे तो जरूर, बाकि माँगे एतना हे उनकर कि हम्मर तो सिटियर-पिटिये गुम हो गेल हे) (अमा॰23:17:1.30)
10625 सिट्टी-पिट्टी (~ गुम होना) (नसध॰ 4:15.22)
10626 सिट्टी-पिट्टी गुम होना (बअछो॰ 3:18.23-19.1; 10:49.19)
10627 सिड़ोकना (अलगंठवा एके छाक में लोटा के पानी सिड़ोक गेल हल ।) (अल॰42:134.17)
10628 सितला माय (अगे सुमितरी, तोर पीठ में ई काला-काला बाम कउची के हउ गे ? हाय रे बाप, तोरो सितला मइया देखाय दे रहलथुन ह का गे ?) (अल॰5:12.19)
10629 सितुहा (इनकर जीवन में भारतीय समाज, संस्कृति आउ लोक-जीवन के अनुभव के समुन्दर भरल हे, जेकरा में अनमोल मोती से लेके सितुहा-सेवार तक छिपल हे) (अमा॰25:9:1.25, 2:4)
10630 सितुहारी (कब॰ 9:16)
10631 सितुहा-सेवार (इनकर जीवन में भारतीय समाज, संस्कृति आउ लोक-जीवन के अनुभव के समुन्दर भरल हे, जेकरा में अनमोल मोती से लेके सितुहा-सेवार तक छिपल हे) (अमा॰25:9:1.25, 2:4)
10632 सिधमाइन (आजाद दोस्त के घर में चटनी-वरी-भात आउर मट्ठा परोस के खिलावे लगलन हल । बरी के सवाद से अलगंठवा बड़ खुस होल हल । आउर परसन ले ले के खैलक हल । बरी आउर तिसीअउरी के बड़ाई सुन के सिधमाइन मने-मन बड़ खुस होल हल ।) (अल॰41:128.9)
10633 सिधाना (जेकर पिया परदेस सिधैतइ, जियरा ओकर धधकैत रहतइ) (अमा॰24:1:1.6)
10634 सिधान्त (= सिद्धान्त) (अल॰35:112.5)
10635 सिन (गो॰ 10:45.9; मसक॰ 19:25)
10636 सिनरी (ओकर बाद नाना-नतनी इसलामपुर बजार में दुरगाथान जाके एगो हलुआइ के दुकान पर जाके सौगात में सिनरी के रूप में पाभर बतासा खरीदलक आउर सुमितरी ला गरम-गरम जीलेबी ।) (अल॰3:7.9)
10637 सिनूर (= सेनूर, सेनुर) (बाप रे बाप, उ छउड़ा अगिया बैताल हइ । कुंआरी लड़की के मांग में सिनूर दे दे हइ ।) (अल॰2:5.3)
10638 सिनेह (नसध॰ 5:21.20)
10639 सिन्धोरा (सरयू बाबू चुनमुनिया के माँग में सेनुर करके ~ रखलन भी न हल कि छोटू बाबू के गरजइत बादल के भाँति सुनाई देलक -) (अमा॰3:14:1.9)
10640 सिन्होरा (चुभसे॰ 4:15.20)
10641 सिपाही-दरोगा (गो॰ 7:35.8-9; 8:36.21)
10642 सिफारिश (अमा॰29:4:1.21)
10643 सिफारिस (= सिफारिश) (अमा॰29:4:2.12, 16, 18)
10644 सिमटम (गो॰ 4:23.1)
10645 सिमरिख (हाथ के नाड़ी में ~ रगड़े लगल) (नसध॰ 39:165.11)
10646 सिमला (फूब॰ 8:28.9)
10647 सिमाना (= सीमा) (अपने सब के देस के सिमाना के हिफाजत करे के हो, मुदा इ सरकार अपने सब के देस बर के गाँव-घर जिला-जेवार के ही सिमाना बना के देस के जनता के तवाह आउर बरबाद करके मुरदघट्टी बनावे पर अमादा हो भइया ।) (अल॰40:124.29, 125.2)
10648 सियर-भभकी (नसध॰ 11:50.20-21)
10649 सिया जाना (कजरी के ससुर डेओढ़ी में हारल जुआरी जइसन बइठल रह गेलन, जइसे सबके मुँह सिया गेल होवे) (अमा॰167:9:1.31)
10650 सियान (मसक॰ 26:6; 54:16)
10651 सियान (= सयाना) (सियान होइते जुगनू के माय-बाप से बेसी गाँव के लोग के ओकर बिआह के चिन्ता होवे लगल) (अमा॰24:7:1.10)
10652 सियार, सिआर (कपार मुड़ा के चूना के टीका कर के गदहा पऽ चढ़ा के नऽ बिदा कर देलिअई तऽ हमर नाम नारद नऽ, बिलार, कुत्ता इया सियार) (नसध॰ 14:62.14; 26:118.12)
10653 सियार-मकार (अमा॰173:16:2.8)
10654 सिरहना (फिन चमारी माली बोलल हल - "तऽ देखते का जा हऽ, चलऽ, जल्दी से देवीथान ले चलऽ ।" अलगंठवा गोड़ दने आउ कइ गो गाँव के लोग सिरहना दने पकड़ के सुमितरी के देवीथान ले जाके चबुतरा पर धर देलक हल ।) (अल॰18:55.20; 42:134.15)
10655 सिरहाना (माला के मूड़ी अप्पन गोदी में उठाके हम ~  में बइठ गेलूँ) (अमा॰13:7:2.1; 166:8:2.12, 9:2.23)
10656 सिरा घर (रम॰ 13:96.8)
10657 सिरा, सीरा (~ घर, ~ भीतर) (आज्झ सूरज पासवान सिरा घर के तेल पिआवल लाल लाठी लेके गाँव में चौकड़ी मार रहल हल । आउर झुम-झुम के दुसाधी गा रहल हल ।; दिलदार राम, रजेसर-रमेसर, फन्नू मियाँ, सुमितरी-हेमन्ती भी अलगंठवा के दलान पर जुम गेते गेलन हल । अलगंठवा के सिरा भीतर आउर दलान के कनेटा काना आउर हथिया नछतर में गिर गेल हल ।) (अल॰24:74.8; 44:152.11)
10658 सिरिफ (= सिर्फ) (अमा॰13:10:1.2; 163:9:1.28)
10659 सिरिष्टी (= सृष्टि) (नसध॰ 6:24.18)
10660 सिरिस (बटेसर अप्पन खेत के एक चास लगा के सिरिस के पेड़ तर सुस्ता रहलन हल ।) (अल॰7:21.8)
10661 सिरिस्ता (मोवक्किल अपने के सब फीस-फास पहिलहीं ~ में सबके सामने फरिया देलक हे) (अमा॰169:19:2.24)
10662 सिरी (= श्री) (अल॰43:142.21)
10663 सिरीफ (= सिरिफ, सिर्फ)  (ई आन्दोलन में न सिरीफ छात्र आउ बुद्धजीविए हलन, बलुक मजूर, किसान, कुली आउ भंगी सब कूद गेलन) (अमा॰26:6:1.7)
10664 सिरीमान (= श्रीमान्) (धुकधुक्की समा गेल हुनखर मन में । ओजा से हड़बड़ाल पहुँचलन हेडसर के औफिस में आउ हाथ जोड़ के पूछलन - 'हमरा ला कउन आदेश हे सिरीमान ?') (अमा॰29:10:2.3)
10665 सिरे (ऊ हमनीये ~ खैतन आउ महतो के गुन गैतन) (नसध॰ 28:124.8)
10666 सिरैतिन (गो॰ 3:18.29)
10667 सिरोकना (तड़तड़ाइत पसेना के हाथ से सिरोक के) (नसध॰ 39:164.1)
10668 सिलउटी (~ पर पीस के) (अमा॰11:11:2.24)
10669 सिलपट (~ बनाना) (अआवि॰ 18:9)
10670 सिलाई (नसध॰ 21:85.27)
10671 सिलाय (= सिलाई) (पूरे आठ बरिस कलकत्ता गली-गली में टउआय के बाद चटकल में बोरा के सिलाय में नौकरी के जुगाड़ बैठल हल) (अल॰1:1.11)
10672 सिलेट (सोनमतिया के भी सिलेट पर ककहरा लिखा के पढ़ाबऽ । तबे न ऊ ससुरार से दू गो अच्छर हमनी के लिखत ।) (अमा॰30:15:1.6, 2.17; 167:17:1.6)
10673 सिलेट-पिलसिन (सांझ के तूहूँ ~ लेके रात ओला इसकूल में पढ़े जा) (अमा॰165:18:2.19)
10674 सिलेमा (= सिनेमा) (नसध॰ 24:100.26; 25:106.25, 26)
10675 सिवाना (= सीमा) (मकस॰ 60:27)
10676 सिसकना (अमा॰12:9:1.21)
10677 सिसकी (अमा॰12:9:2.24)
10678 सिसुकना (= सिसकना) (नसध॰ 44:194.3)
10679 सिहकना (रम॰ 19:140.4)
10680 सिहरन (अमा॰5:4:2.3)
10681 सिहरामन (अलगंठवा के देखइत सले से सुमितरी कहलक हल -"सिहरामन लग रहल हे ।") (अल॰18:59.13)
10682 सिहरावन (= सिहरामन) (गोइठवा घरवा तऽ एकदमे सेउदल हइ । जेकरा से गोइठवन गुमसाइल हइ । जब तक खुल के रउदा न उगतइ तब तक सिहरावन लगते रहतइ । रउदवा उगे पर ही घरवो बरइतइ ।) (अल॰44:152.23)
10683 सिहरी (रम॰ 14:111.7)
10684 सिहरी (~ बरना) (भोर खनी ~ बरे जाड़ा बुझा करे-करे, हरि-हरि रसे-रसे जुलुम अंगावे रे हरी ।) (अमा॰169:18:2.10)
10685 सिहाना (सोनू आउ मोनू सिहा-सिहा अप्पन-अप्पन आम के हिस्सा खा गेल) (अमा॰17:8:2.11; 163:13:1.31)
10686 सिहुँकल (गो॰ 1:1.9)
10687 सिहुकना (सिहुकल) (मइया तो रोज थुराइत हे, काहे कि ओहू बुढ़ायल हे । सिहुकल रहे हे ऊ हरदम, जबसे ई डाइन आयल हे ।) (अमा॰15:20:1.14)
10688 सींकड़ (गो॰ 4:23.19)
10689 सींकी (अआवि॰ 63:24)
10690 सींघ (सींघ-पोछी) (नसध॰ 38:163.19)
10691 सीज (~ के काँटा) (नसध॰ 9:37.9)
10692 सीझना (चुल्हा भिर सीझे ओली पुतरी, बेटा-बेटी आउ मरदाना ला उपास करके देह गलावे ओली औरत -) (अमा॰24:12:2.27; 25:9:2.20)
10693 सीटना (मलमल के कुर्ता-धोती सीट कर के आउ आँख में सुरमा लगा के सुन्नर-सकलगर बन गेलन) (अमा॰16:13:1.2)
10694 सीत (= शीत)  (बहरी से जादे ठंढायल आवइत हऽ, ~ में सउँसे गोड़ बोथा हो गेलवऽ हे) (नसध॰ 27:119.6)
10695 सीत (ओकरा में का हइ, कल्हे सितिया बराय के बाद अँटिया लेवहू अउर का । हम दूनो माय-बेटी ढो लेवो ।) (अल॰9:28.5)
10696 सीत-लहरी (ऊ जवानी में आग के आग आउ पानी के पानी नऽ समझऽ हलन । गमछिये पर जाड़ा का, सीत-लहरी के बापो के देखऽ हलन ।) (अमा॰17:6:2.26)
10697 सीतला (~ माई) (नसध॰ 20:81.13)
10698 सीता (= एक प्रकार के धान) (बाँध के बोझवा हम लायम खलिहनमा । सीता मंसुरिया आउ टैचुन नगीनमा ॥) (अमा॰30:11:1.16)
10699 सीधई (कम-से-कम हमनी के किसान जइसन जान-परान लगाके मेहनत तो न न करे पड़ऽ हे । हमनी के गरीबी आउ सीधई से दोसर कोई नजाइज फैदा तो नहिये उठावऽ हे ।) (अमा॰27:9:1.16)
10700 सीधई (जादे ~ भी जीव के जंजाल हो जाहे) (नसध॰ 43:189.12)
10701 सीधमाइन (कहिनो ई छात्रावास के दाई बनल हल तो कहिनो केकरो भन्सा के सीधमाइन) (अमा॰19:13:2.27)
10702 सीधा (बाबू जी से ~ लेले नऽ उठतो) (नसध॰ 8:34.29)
10703 सीधे बाछी लुगा चिबावऽ हे (मसक॰ 127:25)
10704 सीमिट-गारा (गो॰ 4:21.8)
10705 सीरा घर (अमा॰169:12:1.2)
10706 सीरापिंडा (मसक॰ 163:8)
10707 सीरीं-फरहाद (नसध॰ 35:151.4)
10708 सीरीराम (= श्रीराम) (नसध॰ 6:24.27)
10709 सीसकी (नसध॰ 8:35.27)
10710 सी-सी (सुमितरी अभी दू कोर खइवे कइलक हल कि ओकर मुंह में आधा मिरचाई जे लिट्टी में सानल हल चल गेल हल । जेकरा से सुमितरी सी-सी करइत लिट्टी छोड़ देलक हल ।) (अल॰3:6.25)
10711 सुआ (पंडितजी एगो बड़का सुआ आउर मोटका सुतरी लेके अयलन) (अमा॰23:8:1.20)
10712 सुआ-सुतरी (अमा॰174:13:2.12)
10713 सुइया कढ़बइया (फूब॰ 4:17.24)
10714 सुकर (= शुक्र) (भोर के पहर हम तोहरा पास पाती लिख रहलियो हे । तीन डंड़िया एकदम माथा पर हो । आउर सुकर महराज भी पछिम रुखे अकास में चमचम कर रहलो हे ।) (अल॰9:28.26)
10715 सुकवार (मत छेड़ऽ सुकवार तार के ॥ नया साज, लय तोर पुराना, बजवइया तूँ ह अनजाना । अहह, कील अइसे मत अइंठऽ, का पइबऽ एकरा बिगाड़ के ॥) (अमा॰23:11:1.1)
10716 सुकवार (मत छेड़ऽ सुकवार तार के) (अमा॰23:11:1.1)
10717 सुकवार ('मिस हेलन ! तूँ एतना सुकवार हऽ । हमर गंवइ सभ्यता आउ गरम देस के आबहवा में कइसे मेल खयबऽ ? ..) (मकस॰ 34:3)
10718 सुकिरती (= स्वीकृति) (अलगंठवा अपन सुकिरती दे देलक हल । फिन दिन तारीख तय हो गेल हल ।) (अल॰30:91.21)
10719 सुक्खल (गो॰ 1:1.20; 2:15.18; 6:28.28)
10720 सुक्खल (~ नेवारी; असली घीउ के पूरी, चटनी, तीन तरह के रसदार आउ ~ सब्जी, दही, मिठाई, सब एक से बढ़ के एक सवादवला; अपने के खण्ड-काव्य 'सरहपाद' आउ महाकाव्य 'लोहा मरद' ~ कर्मवाद के प्रतिपादन करऽ हे) (अमा॰3:12:1.6; 25:5:2.4; 27:13:1.12; 165:7:1.9, 8:1.30)
10721 सुक्खा (गो॰ 6:27.19)
10722 सुख, सुखे (= के चलते) (रस्ता में अप्पन घर मिल गेला सुख सोचली कि अब कुछ खाहीं के जाम ।) (मसक॰ 79:11-12)
10723 सुख-चैन (~ छीन लेना) (अमा॰12:12:2.25)
10724 सुखदीरी (दसहरा के बाद ~ के तइयारी सुरुम भे गेल) (नसध॰ 41:179.20)
10725 सुखल-साखल (फूब॰ 2:8.2)
10726 सुखसमाद (मसक॰ 73:8)
10727 सुख-सुविधा (सुख-सुविधा के माहौल बनावे में पइसा के जबरदस्त भूमिका हे) (अमा॰28:6:2.25)
10728 सुखाड़ (अमा॰5:12:2.21)
10729 सुखार (= सुखाड़) (ई ~ में भी हमर गाँव हरियर हे) (नसध॰ 11:47.8)
10730 सुगबुगाना (अलगंठवा भी सुमितरी के हाथ पकड़ के अप्पन पीठ पर जूता के दोदर वाम दिखलइलक हल रात के बँसवेड़ी में । उ इयाद भी सुमितरी के सुगबुगा दे हल ।) (अल॰5:12.29)
10731 सुगबुगाना (मरल गाँव में जिनगी सुगबुगायल हे) (नसध॰ 35:149.17)
10732 सुगबुगाना (सुगबुगायल) (गो॰ 8:36.13)
10733 सुगबुगी (अमा॰8:6:2.6)
10734 सुगापंखी साड़ी (कब॰ 49:2, 3, 15; मसक॰ 42:2; 43:7)
10735 सुग्घड़ (= सुन्दर) (~ फूल) (अमा॰22:17:2.3)
10736 सुघड़ (अआवि॰ 58:2)
10737 सुघर (अमा॰173:19:1.21)
10738 सुघराई (अआवि॰ 60:20)
10739 सुघरिन (~ पुतहु) (अमा॰166:14:1.1)
10740 सुच्चा (= सच्चा) (नसध॰ 39:172.20)
10741 सुझाना (= सूझना) (अमा॰11:1:1.2)
10742 सुढ़ुर-सुढ़ुर (रम॰ 5:44.8)
10743 सुतना (मसक॰ 8:8; 18:1; 42:1, 3; 43:9; रम॰ 6:52.8; 10:75.13; 13:107.7; 14:108.14, 112.23; 15:120.12)
10744 सुतना (फिन चिट्ठी के अप्पन छाती तर दवा के कोनिया घर सुते ला चल गेल हल ।; इनकर सुते वाला घर के कनेटा दरकल-भरकल हइ ।) (अल॰9:28.19; 18:59.15; 44:153.17)
10745 सुतना (सुत रहना) (फूब॰ 5:18.10)
10746 सुतना (सुतइत-जागइत) (कब॰ 1:4)
10747 सुतना, सुत जाना (नसध॰ 2:7.29; 4:16.5)
10748 सुतना, सुत जाना (दस बजे तक सुत जाहे; सुतिहऽ) (अमा॰13:7:2.16; 173:15:1.31)
10749 सुतना, सूतना (बअछो॰ 4:20.12; चुभसे॰ 3:10.16)
10750 सुतना, सूतना (सुत्तऽ हल, सूतऽ हे) (गो॰ 1:3.13; 2:13.11)
10751 सुतरी (नसध॰ 3:9.2)
10752 सुतरी (पंडितजी एगो बड़का सुआ आउर मोटका सुतरी लेके अयलन) (अमा॰23:8:1.20)
10753 सुतल (अमा॰16:1:1.4; नसध॰ 1:5.12; 27:120.30)
10754 सुतले-सुतले (अमा॰3:4:2.3)
10755 सुताना (अआवि॰ 82:29; मसक॰ 147:9)
10756 सुताना (काँटा पऽ सुता के) (नसध॰ 6:24.24)
10757 सुतार (बअछो॰ 4:20.1)
10758 सुतार (इन साल धनवाँ के पैदा ~ भेल) (अमा॰174:12:1.24)
10759 सुत्तल (गो॰ 1:1.14, 9.18)
10760 सुत्थर (अमा॰1:18:2.3; 15:12:2.13; 166:5:2.17; अआवि॰ 58:2; गो॰ 1:9.26; 3:20.9; कब॰ 2:9)
10761 सुथर (= सुत्थर) (तोहरा जइसन सुथर-सुभवगर पढ़ाकू लइका तऽ आज्झ तलक हम देखवे न कइली हे । केता लूर से चिट्ठी लिखलऽ हे ।) (अल॰6:20.5)
10762 सुद्धा (गो॰ 1:10.26)
10763 सुध (= शुद्ध) (नागा अलगंठवा के मुताबिक खिचड़ी आउ भरता बनवा के सब के सुध घी के साथ पापड़ भी परस के खिलइलक हल ।) (अल॰31:102.11)
10764 सुधगर (ई जुग में बाल-बुतरू ला एकाध तौली करुआ तेल आउ भर सितुआ सुधगर दूधो मोहाल हे) (मसक॰ 99:11)
10765 सुध-बुध (नसध॰ 1:2.7)
10766 सुधरना, सुधर जाना (नसध॰ 25:106.3)
10767 सुधार (~ करना) (नसध॰ 25:106.1)
10768 सुन (तनी ~ से) (नसध॰ 1:5.11)
10769 सुनताहर (अमा॰166:14:1.12; नसध॰ 1:1.20; 5:20.4)
10770 सुनताहर (जखनी रमाइन रेघा के पढ़ऽ हइ तखनी सुनताहर के हम्मर घर में भीड़ हो जा हइ ।; देखताहर आउर सुनताहर के भीड़ उमड़ल हल ।) (अल॰10.32.3; 44:154.5)
10771 सुनर (रम॰ 16:123.16)
10772 सुनरता (रम॰ 13:95.15)
10773 सुनवाई (नसध॰ 13:59.11)
10774 सुनसुनाना (जब घर में चाउर-दाल आ जाय तऽ अलगंठवा के भोजाय गोइठा-अमारी से चूल्हा फूंक-फूंक के सुलगावऽ हलन । बड़ी देर में मेहुदल गोइठा सुलगऽ हल तऽ कहीं जाके अदहन सुनसुना हल ।) (अल॰12.36.30)
10775 सुन्नर (अआवि॰ 81:20; चुभसे॰ 1:1.25; गो॰ 1:7.31, 9.15; 2:15.18; 10:44.21; कब॰ 2:8; मसक॰ 25:3; 36:12; नसध॰ 5:21.13)
10776 सुन्नर (= सुन्दर) (अमा॰1:11:2.13; 14:6:2:26; 25:23:3.8; 165:22:1.26)
10777 सुन्नर (= सुन्दर) (सुमितरी के चिट्ठी पढ़ के हमरा बुझा हो कि ओकरा पढ़े के जेहन हो । केता सुन्नर अच्छर में चिट्ठी लिखलको हो । जरुर उ पढ़तो ।) (अल॰10.31.30; 13:39.20)
10778 सुन्नरता (अमा॰16:17:2.27; चुभसे॰ 1:3.2)
10779 सुन्नरता (देखऽ सुमितरी, इ अमरूद के भीतर छिपल सुन्नरता अप्पन दाँत से उसका-उसका के निखार देलक हे) (अल॰13.39.14; 16:50.19)
10780 सुन्नर-सकलगर (मलमल के कुर्ता-धोती सीट कर के आउ आँख में सुरमा लगा के सुन्नर-सकलगर बन गेलन) (अमा॰16:13:1.3)
10781 सुन्ना (अमा॰7:9:2.32; चुभसे॰ 4:15.21)
10782 सुपती (रम॰ 4:38.7)
10783 सुपती (फिन सुमितरी झिटकी से सुपती के मैल छुड़ा-छुड़ा के नेहाय लगल हल ।) (अल॰5:12.23)
10784 सुपती (बिना कोई प्रतिरोध के माला एकटक से हमरा देन्ने ताकते रहल आउ हम ओकर ~ के सहलावित रहलूँ हल) (अमा॰166:8:2.7)
10785 सुपरसिद्ध (= सुप्रसिद्ध) (अमा॰30:7:2.8)
10786 सुपली (अआवि॰ 82:8)
10787 सुपसुपाना (माँड़-भात ~) (अमा॰7:6:2.28)
10788 सुबकना (नसध॰ 42:186.18)
10789 सुबुकना (अलगंठवा के भोजाय आउर बगल में सटल सुमितरी सुबुक-सुबुक के रोवे  लगल हल ।) (अल॰26:78.20)
10790 सुबुधी (= सुबुद्धि) (नसध॰ 30:133.19)
10791 सुभ (= शुभ) (बिआह के सुभ लगन टल रहल हल । ऊ घड़ी आरजू-मिन्नत आउ बहस करे के कउनो गुंजाइस न हल ।) (अमा॰28:5:1.7)
10792 सुभचिंतक (~ मित्र) (नसध॰ 35:151.7)
10793 सुभवगर (तोहरा जइसन सुथर-सुभवगर पढ़ाकू लइका तऽ आज्झ तलक हम देखवे न कइली हे । केता लूर से चिट्ठी लिखलऽ हे ।) (अल॰6:20.5)
10794 सुभाविक (= स्वाभाविक) (जीमन में बिघन-बाधा तऽ आना सुभाविक हे ।) (अल॰6:19.20)
10795 सुर (~ लय, ~ मिलाना) (नसध॰ 26:116.9)
10796 सुरकी (पहिले हमनी के येक दम गांजा पीए दऽ । जरा सुरकी चढ़े पर खाए में रूचिगर लगतई आउर कामो करे में ।) (अल॰43:138.9)
10797 सुरच्छा (= सुरक्षा) (अमा॰28:5:1.27)
10798 सुरत, सुरता (= स्मृति; सुध, याद) (अप्पन मरद के बात सुन के सुमितरी के माय अकचका के बोलल हल -"हाय राम, हमरो कोय बात के इयादे न रहऽ हे, तुरते सुरते से भूला जाही ।") (अल॰9:27.14)
10799 सुरता (= सुध, याद, ध्यान, सुधबुध, चेत) (चाय पीके ऊ अप्पन 'मलाल' कविता के एक टुकड़ा सुनौलन - 'सुरता के पनसोखा बिना नागा के उगऽ हे, बाकि उपेल न कर, उल्टे झपास लगावऽ हे । ..') (अमा॰28:16:2.9)
10800 सुरती (नारद जी ~ के पक्का भगत हलन । खदेरन खैनी आउ चुनौटी हरमेसे अपन धोती में खोसले रहऽ हल ।) (नसध॰ 14:60.17)
10801 सुरसुर (गो॰ 5:27.3)
10802 सुरसुरी (सुमितरी जब अलगंठवा के कुरसी पर बैठल देखलक तऽ ओकर देह में अजबो ढंग के खुसी के सुरसुरी समा गेल ।) (अल॰34:109.7)
10803 सुराज (नसध॰ 15:68.13)
10804 सुराजी (रम॰ 13:96.5)
10805 सुरुज (नसध॰ 5:22.21)
10806 सुरुम, सुरूम (नसध॰ 1:6.8; 8:35.18; 19:77.3, 4, 7; 40:176.28, 177.8; 48:207.14)
10807 सुरू (= शुरू) (बिआह के मुश्किल से दू महीना बीतल होत कि सुगिया पर ओकर ससुराल के ताना बरसना सुरू हो गेल ।) (अमा॰29:13:1.2)
10808 सुरूआती (वैदिक रचना के बहुत सुरूआती समय में सप्तसिन्धु छेत्र में एक तरह के बोली बोलल जा हल, तब आबादी के दोसरका छोर पर मगध में ओकरा से कुछ-कुछ भिन्न बोली बोलल जा हल) (अमा॰30:8:2.8, 28)
10809 सुलगाना (धोकड़ी से सलाई निकाल के अपने सुलगौलक) (नसध॰ 25:107.21)
10810 सुविधा (नसध॰ 34:146.7)
10811 सुसताना, सुस्ताना (नाना, तनी छहुरवा में सुस्ता ल, बड़ी गरमी लग रहल हे आउ गोड़ भी जर रहल हे ।) (अल॰3:7.19; 7:21.8; 43:140.27)
10812 सुसैटी (=सोसायटी) (फूब॰ 4:14.18, 19)
10813 सुसोभित (नसध॰ 29:128.12)
10814 सुस्ताना (अमा॰173:1:1.2)
10815 सुस्ताना, सुस्ताय लगना (नसध॰ 39:171.2, 6, 25, 28, 172.19)
10816 सूअर (ई सब देवतन के अलग-अलग तरह के भोजन हे । माँ काली ला भईंसा, देवी जी ला पठिया, सरस्वती ला फल-फूल आउ मिष्टान्न, गोरइया आउ डाक ला खस्सी-भेंड़ा, सूअर, मुर्गा, कबूतर, टिपउर ला खस्सी-भेंड़ा आउ डाक गोरइया के तो खूनो पीए से जब तरास न जाय त अलगे से तपावन (दारू) देल जाहे, तब जाके उनकर पियास बुझऽ हे ।) (अमा॰22:13:1.14)
10817 सूई-डोरा (नसध॰ 21:84.20)
10818 सूखना (सूखल हड्डी) (नसध॰ 6:27.29)
10819 सूखल (अआवि॰ 62:11)
10820 सूखा-अकाल (नसध॰ 9:39.14)
10821 सूच्चा (नसध॰ 2:8.8; 33:144.15)
10822 सूटकेस (नसध॰ 26:115.17)
10823 सूट-बूट (अमा॰17:8:1.15-16)
10824 सूटर (= स्वेटर) (मकस॰ 8.8)
10825 सूटर (= स्वेटर) (बउआ खाली गाँती बाँधे, न हइ टोपी-सूटर) (अमा॰172:20:1.17)
10826 सूतना (अआवि॰ 20:26)
10827 सूता (देस के एक सूता में बाँधना) (अमा॰1:5:2.7)
10828 सूते बखत (गो॰ 9:40.14)
10829 सूद-मूर (गो॰ 6:32.29)
10830 सूप (एगो दलान पर आठ-दस गो अदमी ~ में सुक्खा लेले केन के पतई से बीड़ी बना रहलन हल) (नसध॰ 21:85.26)
10831 सूरदास (नसध॰ 38:161.18)
10832 सूरसेनी (= शौरसेनी) (अमा॰30:10:1.7)
10833 सूरूम (= शुरू) (नसध॰ 12:53.23)
10834 सूर्ज (फूब॰ मुखबंध:2.33)
10835 सृष्टि (नसध॰ 35:150.32)
10836 से (= इसलिए) (बअछो॰ 2:16.4; नसध॰ 1:1.14, 19; 3:12.11; 4:15.1; 5:22.21; 6:23.26)
10837 से (= सो) (नसध॰ 5:17.31)
10838 से से (बअछो॰ 5:27.9)
10839 सेंगरन (अमा॰16:16:2.26; 169:17:2.12)
10840 सेंगरना (चुभसे॰ 1:5.28)
10841 सेआन ("तोहर सुमितरी भी तऽ सेआन हो गेलथुन होयत" - अलगंठवा के माय पूछलक हल । "हाँ भउजी, लड़की के बाढ़ भी खिंचऽ हे न, उ तऽ मिडिल पास करके घर के काम-काज भी करे लगलो हे ।") (अल॰6:16.29)
10842 सेआना (मुदा हाँ बेटी, फिन अइसन काम कभी मत करिहऽ । अब तूँ सेआन होते जा रहलऽ ह ।) (अल॰3:7.30)
10843 सेउदना (चुल्हा-चाकी सेउदल हकइ, मेहुदल हइ सब गोइठा) (अमा॰3:19:1.27)
10844 सेउदना (सब के चाय देइत हेमन्ती आउर सुमितरी कहलक हल कि चुल्हवो सेउदल हलइ आउ गोइठवो मेहुदायल हइ । .... गोइठवा घरवा तऽ एकदमे सेउदल हइ ।) (अल॰44:152.19, 21)
10845 सेउदल (चुल्हा-चाकी सेउदल हकइ, मेहुदल हइ सब गोइठा) (अमा॰3:19:1.27)
10846 सेकना (रोझनी बोरसी लान के उनकर सउँसे देह सेके लगल) (नसध॰ 27:120.26)
10847 सेकरा (नसध॰ 9:42.24)
10848 सेकरो (फूब॰ 3:10.6)
10849 सेकेंड के सूई नियर तेज होना (गो॰ 8:37.29)
10850 सेजिया (घरवा सजा के सेजियो सजा लऽ, आवइत परदेसिया से झुमका मँगा लऽ) (अमा॰28:19:2.23)
10851 सेत (= सेंत) (सेतिहे में) (सेतिहे में घर हो जतई तऽ ओहनी का नऽ लेथिन) (नसध॰ 14:64.21; 37:157.16)
10852 सेनगुप्ता धोती (कब॰ 7:3; 21:3; 61:10)
10853 सेना (नसध॰ 30:130.32, 33; 33:144.31)
10854 सेनुर (अमा॰15:17:2.2; 165:12:1.3; चुभसे॰ 4:15.20; गो॰ 4:23.16; कब॰ 2:3; नसध॰ 5:22.19)
10855 सेनुर (= सेनूर, सिनूर) (कुंआरी सुमितरी के मांग में सेनुर देवे के हउड़ा सगर मचल हल) (अल॰1:3.18)
10856 सेनुर-टिकुली (मसक॰ 157:10; नसध॰ 1:6.8)
10857 सेनुरदान (मसक॰ 26:22, 23; नसध॰ 2:7.18)
10858 सेनूर (= सेनुर, सिनूर) (येकर अलावे अगिया बैताल हल अलगंठवा, लड़का-लड़की के साथ लुका-छिपी आउर विआह-विआह खेले में अप्पन माय के किया से सेनूर चोरा के कोय लड़की के माँग में घिस देवे में बदनाम अलगंठवा।) (अल॰1:2.3; 40:124.20)
10859 सेन्दूर (अमा॰13:6:1.26)
10860 सेन्नुर (अआवि॰ 69:11)
10861 सेन्ह (= सेंध) (तनी हमरा साथे चल । आज चोर सेन्हे पर पकड़ा गेलो हे । हम दूरा पर सिकरी लगा के अयलियो हे ।) (नसध॰ 45:199.3)
10862 सेमर (= सिम्मर, सेमल) (अमा॰29:16:1.3)
10863 सेमाना (गो॰ 1:6.27; 4:21.1)
10864 सेयान (मसक॰ 172:9; नसध॰ 6:28.6)
10865 सेयान (= सयाना) (करीमना तो बेटा हे, ऊ सेयान हो के कइसहूँ जी लेत । बाकि ई ?) (अमा॰16:7:1.14; 23:16:2.25)
10866 सेर (आज सनिचर के दिन हल, गुरुजी के सनिचरा देवे ला माय आधा सेर गेहूँ दे देलक हल ।) (अल॰4:8.35)
10867 सेराना (सुमितरी इन्हकर मनपसन्द भोजन खिचड़ी आउर आलू के चोखा बना के रखले होथिन । अब तक तऽ सेरा के वरफ हइसन ठंढा हो गेले होत ।; हाय, खिचड़िया भी सेरा के पनिया गेलइ होत ।) (अल॰42:131.23, 132.21)
10868 सेराना (सेरायल) (अमा॰167:8:2.4)
10869 सेवइ, सेवई (सेवइ, पापड़, तिलौरी, दनौरी, कोहड़ौरी आउ बहुत काम हे जे बइठला में कैल जा सकऽ हे; ~ पारना) (नसध॰ 39:173.10; 41:183.14, 184.5; 48:209.12)
10870 सेवदना (आँख में आठो पहर नाचइत बरसात सेवदल अँचरा -- अँचरा में नइहर के रसल-बसल सुख सिसक उठऽ हे ।) (अमा॰24:11:2.21)
10871 सेवा-उवा (नसध॰ 21:87.5)
10872 सेवा-टहल (हुनखा इयाद हे गुरुजी के ~ करते पढ़े वला ऊ समय) (अमा॰29:11:1.28)
10873 सेवा-परायनता (नसध॰ 35:150.20)
10874 सेवा-बरदास (गो॰ 1:2.7; 2:12.32)
10875 सेवा-बर्दास, सेवा-बरदास, सेवा-बरदास्त (नसध॰ 19:78.25; 21:86.22; 23:96.25; 39:167.8)
10876 सेवार (इनकर जीवन में भारतीय समाज, संस्कृति आउ लोक-जीवन के अनुभव के समुन्दर भरल हे, जेकरा में अनमोल मोती से लेके सितुहा-सेवार तक छिपल हे) (अमा॰25:9:1.25, 2:4)
10877 सेवार (लड़े ओला जाल ~ से अझुरा जा हे आउ कभी-कभी ओकरे से घुरमुड़िया के मर जा हे) (नसध॰ 12:52.12)
10878 सेवा-सुरसा (= सेवा-शुश्रूषा) (सुमितरी पढ़वो करतो आउर तोहनी दूनो परानी के सेवा-सुरसा भी करतो ।) (अल॰10.31.21)
10879 सेसर (कब॰ 1:17)
10880 सेहत (भूखे रह के ~ बिगाड़ना) (नसध॰ 36:154.9)
10881 सेहरी (= सहरगही) (अमा॰171:3:1.15)
10882 सोंटना (सोंटल शरीर) (अमा॰173:5:1.2)
10883 सोंटना, सोंट जाना (अरे, हमनि दूनो तऽ राम मिलावल जोड़ी, येक अंधा येक कोढ़ी हइए हऽ । हम ताड़ी के चलते अट्ठारह विघा फुक देली तऽ तूँ गांजा के चलते नौ विघा । गांजा के चिलिम पर गुल बना के सोंट गेलऽ ।) (अल॰8:24.14)
10884 सोंटा (मइया प्यार से कहलन सुन-सुन बेटा, बेटा गुस्सा में उठके मारे लगल सोंटा) (अमा॰26:9:2.18)
10885 सोंध (= सोन्ह, सोन्हा) (माटी के ~ गंध) (अमा॰8:8:1.16; 18:13:1.18)
10886 सोंप-जीरा (जाड़ा के दिन में गुड़ के भेली सोंप-जीरा आउर न जानी कउन-कउन मसाला मिला के चचा जी कोलसार में भेली बना के घर के कंटर में रख दे हलन ।) (अल॰12.36.24)
10887 सोअरग (~ सिधार जाना) (अमा॰13:8:1.19)
10888 सोआती (= स्वाती) (गो॰ 5:25.27)
10889 सोआरथ (गो॰ 5:25.24)
10890 सोआरथ (= स्वार्थ) (~ साधना) (अमा॰172:11:2.22, 25)
10891 सोआहा (= स्वाहा) (~ हो जाना) (नसध॰ 27:121.23)
10892 सोखी (ओकर मन ~ हई) (नसध॰ 43:191.9)
10893 सोगाइले-सोगाल (मसक॰ 79:5)
10894 सोच (नसध॰ 38:163.19)
10895 सोचनई (नसध॰ 38:163.20)
10896 सोचनी (=सोच) (ऊ ~ में चदर तान के खटिया पऽ पर रहल) (नसध॰ 14:65.4)
10897 सोचनीय (= शोचनीय) (नसध॰ 28:123.4)
10898 सोचन्त (दूनों के बात काटइत देउकी पांडे बोल पड़न हल - छोड़ऽ उ सब बात, गतन्त के सोचन्त का । गंजवा जल्दी निकालऽ ।) (अल॰8:24.18)
10899 सोझ (~ होना) (मसक॰ 113:13)
10900 सोझ (~ होना) (ओझा महराज सब पकवान के बान्ह के ~ भे गेलन) (नसध॰ 19:77.28)
10901 सोझ (~ होना; ऊ सब के ऊचारन आउ व्याकरनिक परयोग में साफ-साफ आउ ~ अन्तर देखाई पड़े लगल) (अमा॰11:9:1.6; 30:9:2.28)
10902 सोझ-समाठ (ओकर मरद बोधू ~, दुखवा केकरा से कहे।) (अमा॰173:1:1.3)
10903 सोझ-साझ (मसक॰ 71:3)
10904 सोझिआना (= सोझा करना, की ओर निर्दिष्ट करना) (अपने सब से अरज हे कि अइसन भ्रष्ट सरकार के लेल हमनि सब के बेवा-राँड़, मसोमात मत बनावऽ । बल्कि बन्दूक के टोंटा जे हमनि ओर सोझिअइले हो, ओकरा उलट के सरकार के ओर घूमा दऽ ।) (अल॰40:125.6)
10905 सोझिआना, सोझियाना (सोझिआ जाना - रम॰ 2:22.21; सोझिया जाना - रम॰ 3:29.17; 7:61.11; 10:82.10)
10906 सोझियाना, सोझिया जाना (कल होके अलगंठवा मखन आउ बासी रोटी खा के गंगा गुरु के गुरुपींडा पर झोला में बसता लेके सोझिया गेल हल ।; फिन तीनों गाँव से दखिन दिलदार राम के गाँव पचलोवा दने सोझिया गेते गेलन हल ।) (अल॰1:3.31; 3:8.4; 9:29.20; 21:66.21)
10907 सोझे (~ कहीं न बाबा कि हम्मर इच्छा पूरा न होयत) (अमा॰8:18:1.1)
10908 सोझौका (मसक॰ 74:23)
10909 सोटल-साटल (~ लड़का) (लड़का के बरतुहार भिर बोलावल गेल । देखते के साथ बरतुहार रीझ गेलन । एतना घूमला पर भी ऐसन ~ लड़का मिलना दुरलभ हे ।) (अमा॰16:13:1.13)
10910 सोटवाना, सोटवा देना (हमर जमीदारी हल तो अइसन लोग के मोगली डंटा देके भूम्हरी में सुता के चुतर पर पैना से सोटवा दे हली) (नसध॰ 34:145.25)
10911 सोडा-सामुन (गो॰ 3:18.3)
10912 सोड्डा (साबुन-सोड्डा) (अमा॰7:18:2.5)
10913 सोता (राजगिरि में 'सरह' लगयले नरम गरम चलइत हे सोता) (अमा॰25:23:3.2)
10914 सोध (= शोध) (अमा॰18:13:1.1)
10915 सोनचिरई (हम्मर हे एही अभिलाषा कि अलका बहिनि सोनचिरइयाँ जइसन बनल रहे सब दिन) (अमा॰22:6:2.28)
10916 सोनहरा (गो॰ 6:31.18, 32.4)
10917 सोनहुली (घुप अन्हार रात गेल, सोनहुलिया प्रात भेल) (अमा॰17:15:1.10)
10918 सोना (सोना में सोहागा ई भेल कि श्रोता के प्रश्न के उत्तर भी देलन आउ फरमाइशी लोकगीत भी सुनयलन) (अमा॰26:15:2.5)
10919 सोना-चानी (पहुँचल सन्त महात्मा सोना-चानी के मट्टी के ढेला जरूर समझऽ हथ, मगर औसत आदमी पइसा के भूखल रहऽ हे) (अमा॰28:6:2.22; 173:13:1.14, 2.8)
10920 सोनार (बअछो॰ 5:24.3, 26.17)
10921 सोनार (चार चोट सोनार के आउ एक चोट लोहार के) (अमा॰25:17:2:18)
10922 सोन्हई (गो॰ 1:10.32)
10923 सोन्हा (जेठ-मास में पहिला फुहार, मट्टी के ~ महक आउ करकरावल जा रहल घीउ के महक जइसन) (अमा॰166:8:1.28)
10924 सोन्हाना (सोन्हायल) (गौर से जब देखली त थोथुन सुखायल हल । पेट हल पचउनी, एकदम सोन्हायल हल ।।) (अमा॰14:18:1.20)
10925 सोभाव (चुभसे॰ 1:3.1, 7.13; मसक॰ 16:24; 36:24)
10926 सोभाव (= स्वभाव) (अमा॰1:7:2.2; 163:14:2.7)
10927 सोभाव (सोभाव से बड़ी सीधा-सादा हलन । गाँजा-भाँग इया बीड़ी-खइनी कुछो न खा-पीयऽ हलन) (मकस॰ 56:4)
10928 सोभाविक (चुभसे॰ 3:9.11; मसक॰ 4:10; 38:11)
10929 सोभाविक (अइसन साहित्य साधक के बारे में अपने लोग के विशेष जाने के इच्छा सोभाविक रूप से होयत) (अमा॰25:9:2:24)
10930 सोमार (अआवि॰ 68:9; गो॰ 4:23.11)
10931 सोमार (= सोमवार) (अमा॰5:5:2.3)
10932 सोमारी (अमा॰166:11:2.2)
10933 सोमारी (~ पुनिया) (अल॰16.47.1, 49.20)
10934 सोमारी (~ मेला) (कब॰ 42:1)
10935 सोमारी मेला (गो॰ 4:23.7; 8:36.14)
10936 सोर (= जड़) (मगही के सोर पताल में हे) (अमा॰3:5:2.7)
10937 सोर (ई सब हाली हटतई बेटी ! एकर ~ पताल में खिलल हे) (नसध॰ 37:158.30)
10938 सोरही (अमा॰6:7:1.20, 2.3)
10939 सोरही (ऊ सात बार ~ के कउड़ी फेंकलक आउ सातो बार बस नौ ही मिलल) (अमा॰7:18:1.12)
10940 सोरही (एक जगुन कौड़ी से ~ जमल हल) (नसध॰ 26:117.13)
10941 सोरा (अइसन मलमली आउ कनकन ~ हावा हमरा इयाद से न बहल हल) (नसध॰ 27:118.17)
10942 सोरा (कनकन सोरा) (सीतलहरी के कनकनी से रात भी न कटऽ हे आउ बिहने सउँसे देह कनकन सोरा हो जाहे) (अमा॰6:8:2.4)
10943 सोरिआना (एक ही जाति के चपरासी से सिच्छक गन तक विराजमान हलन । जे दिन-रात कुराफात करइत रहऽ हलन । ई सबके जड़ सोरिआवे में अपन लोगन के कम हाथ न हल ।) (अल॰30:94.6)
10944 सोलह (= सुलह) (नसध॰ 13:58.28)
10945 सोलहो आना सत्त होना (अआवि॰ 38:6)
10946 सोवरनडंट (फूब॰ 3:11.6)
10947 सोहदा (गो॰ 6:31.5; 7:34.21; 11:48.16)
10948 सोहना (= निरौनी या निकौनी करना) (मालिक, आज साँझ तक एक बीघा धान सोहा जाय के चाही । नानी टोला के मजूर हड़ताल कैले हथ तो करे दिहीं । हम अकेले दस कट्ठा सोह देम ।) (नसध॰ 39:168.29, 30, 169.3, 7, 170.31, 171.3, 14, 28, 30)
10949 सोहनी (रमेसर जल्दी-जल्दी धान में ~ कर रहलन हल) (नसध॰ 39:172.27)
10950 सोहनी-मेहीवाल (नसध॰ 35:151.4)
10951 सोहनी-रोपनी (एक समय हल कि रामधनी भइया के औरत दूसर के खेत में ~ करऽ हलन । जहिना न तो अपना खेत हलइन, न पुलिस के जादे महिन्ने मिल्लऽ हलइ ।) (अमा॰171:7:1.28)
10952 सोहबत (अमा॰16:16:1.19; नसध॰ 30:131.1)
10953 सोहर (अआवि॰ 80:20)
10954 सोहरत (अमा॰16:16:2.2)
10955 सोहराइ, सोहराय (रम॰ 16:122.22)
10956 सोहराय (आज सोहराय के दिन हे । लड़कन सब सबेरगरहीं से छुरछुरी, पटाका छोड़ रहलन हे ।) (अमा॰13:7:1.1)
10957 सोहल (= सोहनी, निकौनी) ("मालिक, तनी कस के हाथ चलावऽ तो दिन अछते सोहल खतम हो जयतो ।" "अरे आज न सोहायत, कल सोहायत, एकरा में हड़बड़ाय के का जरुरत हे ।") (नसध॰ 39:170.28)
10958 सोहाना (= अच्छा लगना) (अलगंठवा के दूध कहियो न सोहा हल ।) (अल॰12.36.20)
10959 सोहाना (= सोहनी का काम होना) ("मालिक, तनी कस के हाथ चलावऽ तो दिन अछते सोहल खतम हो जयतो ।" "अरे आज न सोहायत, कल सोहायत, एकरा में हड़बड़ाय के का जरुरत हे ।") (नसध॰ 39:170.29)
10960 सोहाना (ओकरा अइसहूँ बूढ़ लोग न सोहा हलन) (नसध॰ 30:133.7)
10961 सोहाना (छोटा उमर में तो उपदेश आउ न सोहाय; देखऽ जी ! हमरा मजाक न सोहाय ।) (अमा॰12:17:2.7; 27:8:2.3)
10962 सोहामन (गो॰ 3:15.30)
10963 सोहामन (पूस के कनकन्नी आउ माघ के झिनझिन्नी खतम होवे पर वसंत रितु सोहामन लगऽ हे । न हिरदा हिलावे वला जाड़ा न देह जरावे वला गरमी ।) (अमा॰8:5:1.3)
10964 सौ (~ आउ पचास के नोट) (नसध॰ 31:135.24; 37:157.19)
10965 सौंसे (अआवि॰ 38:9; 45:1; 53:21; 85:4; 91:1; 92:19; 107:8)
10966 सौख (मसक॰ 34:3)
10967 सौख (= शौक) (अमा॰173:19:1.6; नसध॰ 20:81.30)
10968 सौख (= शौक) (येकर अलावे बकरी चरावे के सौख, दिन-रात रो-कन के चचा से येगो चितकबरी पाठी किना के पतिया-लछमिनिया, गौरी, रधिया, बुधनी, सुमिरखी, तेतर तिवारी, कंधाई साव, तुलसी भाई के साथ टाल-बधार में बकरी चरावे में मसगुल हल अलगंठवा ।) (अल॰1:2.15)
10969 सौख-मौज (~ के बेरा में लइका के का जरूरत हे ?) (नसध॰ 25:106.18)
10970 सौख-सरधा (चन्दर चुप रहल । सुगिया के फिन छेड़ला पर बड़ा तैश में बोललक -"तोहर मैका से हम्मर कोई सौख सरधा न मिटल । तोहर बाबूजी एगो बढ़िया टी॰वी॰, स्कूटर भी न देलथू ।") (अमा॰29:13:1.16)
10971 सौखिन (= शौकीन) (अलगंठवा के चचा जी आम-नेमु-कटहर के अचार बोजे के आउ रंग-विरंग चिड़िया इयानी मैना-तोता, हारिल-कबूतर आउ किसिम-किसिम के पंछी पाले के बड़ सौखिन हलन ।) (अल॰12.37.7)
10972 सौखीन (= शौकीन) (अमा॰7:14:1.4)
10973 सौगात (अमा॰22:20:1.17; 174:7:1.18)
10974 सौत (अइसन लगो हल जइसे ऊ सौत के बेटी हे) (अमा॰17:8:1.26)
10975 सौदा (नसध॰ 30:130.16)
10976 सौदा-दोकानी (अमा॰174:12:1.14)
10977 सौदा-बारी (गो॰ 8:36.13)
10978 सौदा-सुलुफ (मकस॰ 62:11)
10979 सौदेबाजी (अमा॰165:16:1.9)
10980 सौभाग (गो॰ 2:12.9)
10981 सौरियल (येगो बड़ सौरियल हल गांजा के पिवइया । उ घर से परदेस चल गेल हल । तऽ उ अप्पन अउरत के पास एगो पाती लिखलन - "जल थम वैराग रस, पथक वाहन सोय । ओही चीज हमरा भेज देऽ, जे नया साल के होय ॥) (अल॰8:25.18)
10982 स्पर्स (= स्पर्श) (नसध॰ 32:139.32)
10983 स्वभावतः (नसध॰ 35:150.32)
10984 स्साला (मरे द सबके, ~ सब के सब एक्के तुरी मर जाइत हल, त अच्छा हलई) (अमा॰173:16:2.11)